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Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र: आंतरिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी + प्रमुख झीलें

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र: आंतरिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी + प्रमुख झीलें - भौतिक वातावरण (भू-आकृति और जलवायु)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां (Rajasthan Ki Nadiya) और अपवाह तंत्र अरावली पर्वतमाला के हिसाब से तीन भागों में बंटे हैं: आंतरिक अ...
Quick Answer: Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां (Rajasthan Ki Nadiya) और अपवाह तंत्र अरावली पर्वतमाला के हिसाब से तीन भागों में बंटे हैं: आंतरिक अपवाह (करीब 60%), बंगाल की खाड़ी अपवाह (करीब 22-23%) और अरब सागर अपवाह (करीब 17%)। चंबल राज्य की बारहमासी नदी है, जो भैंसरोड़गढ़ के पास करीब 18 मीटर ऊंचा चूलिया जलप्रपात और कोटा-धौलपुर के बीच बीहड़ बनाती है। पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी बनास (करीब 512 किमी) है, जिसे 'वन की आशा' कहते हैं। लूनी नदी नाग पहाड़ (अजमेर) से निकलकर बालोतरा तक मीठी और आगे खारी हो जाती है। माही नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है और नवाटापरा (डूंगरपुर) में सोम, माही, जाखम का बेणेश्वर संगम बनाती है। सांभर भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील है (23 मार्च 1990 से रामसर स्थल), जबकि जयसमंद राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है।

RAS Pre में इस topic से हर बार सवाल आता है: Pre 2013 में "किस नदी का अपवाह क्षेत्र सबसे कम है" (साबरमती, माही, वाकल, पश्चिमी बनास में से; RPSC ने यह प्रश्न बाद में delete किया), Pre 2013 में सांभर झील में स्थित देवी मंदिर (शाकम्भरी) और जलाशय-जिला मिलान, Pre 2016 में रामसर सूची वाली झील (सांभर) और अरावली से सभी नदियों के निकलने वाला कथन, और Pre 2024 में जिला-नदी मिलान (उदयपुर: सोम-जाखम, बूंदी: कुराल, भरतपुर: गंभीरी-पार्वती, अलवर: साबी-रूपारेल)। जिलों का नया नक्शा राजस्थान के जिले में और पानी बचाने के तरीके पारंपरिक जल प्रबंधन व जल संरक्षण में देखें।

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राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र का वर्गीकरण

राजस्थान का अपवाह तंत्र अरावली पर्वतमाला से तय होता है। अरावली एक बड़ी जल विभाजक रेखा (watershed) है। इसके पूर्व का पानी चंबल-यमुना होकर बंगाल की खाड़ी में जाता है और पश्चिम का पानी अरब सागर में। रेतीले इलाके के कारण बहुत सी नदियां समुद्र तक नहीं पहुंचतीं और रेत या खारी झीलों में खो जाती हैं।

ध्यान दें: राजस्थान की सभी नदियां अरावली से नहीं निकलतीं। चंबल (जानापाव, मध्य प्रदेश), माही (मेहद झील, मध्य प्रदेश) और घग्घर (शिवालिक) राज्य के बाहर से आती हैं। RAS Pre 2016 में "सभी नदियां अरावली से निकलती हैं" वाला कथन गलत माना गया था।

पानी कहां जाता है, इस आधार पर तीन भाग हैं:

  1. आंतरिक अपवाह (Inland Drainage): सबसे बड़ा भाग (करीब 60%)। नदियां: घग्घर, कांतली, साबी, रूपारेल, काकनी (काकनेय), मेंथा, रूपनगढ़।
  2. बंगाल की खाड़ी अपवाह (Bay of Bengal Drainage): करीब 22-23% भाग (किताबों में 22.4% भी मिलता है)। नदियां: चंबल, बनास, बाणगंगा, बेड़च, कोठारी, खारी, काली सिंध, पार्वती, गंभीरी।
  3. अरब सागर अपवाह (Arabian Sea Drainage): सबसे छोटा भाग (करीब 17%)। नदियां: लूनी, माही, साबरमती, पश्चिमी बनास।

नया जिला नक्शा (41 जिले, 7 संभाग): 28 दिसंबर 2024 को राज्य कैबिनेट ने 9 नए जिले (दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीम का थाना, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर) और 3 संभाग (बांसवाड़ा, पाली, सीकर) रद्द किए। बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, फलोदी, सलूंबर, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जिले बने हुए हैं। इसलिए नीचे नदियों और झीलों के जिले इसी नए नक्शे के हिसाब से लिखे हैं।

अरब सागर का अपवाह तंत्र: लूनी, माही, साबरमती और पश्चिमी बनास

इस तंत्र (करीब 17%) की नदियां दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हैं:

1. लूनी नदी (Luni River)

लूनी (लवणवती / मरुस्थल की गंगा) अजमेर के नाग पहाड़ से निकलती है। उद्गम पर इसे सागरमती कहते हैं और गोविंदगढ़ (अजमेर) में सरस्वती मिलने के बाद यह लूनी कहलाती है। नए नक्शे में यह अजमेर, ब्यावर, नागौर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर और जालोर से होकर कच्छ के रन में खत्म होती है। बालोतरा तक पानी मीठा रहता है, आगे खारा हो जाता है। बाईं ओर की सहायक नदियां (सूकड़ी, बांडी, जवाई, गुहिया, लीलड़ी, सागी, मीठड़ी) अरावली से आती हैं। जोजरी नागौर के पोंडलू गांव से निकलकर खेजड़ला खुर्द (जोधपुर) के पास लूनी में मिलती है। यह लूनी की अकेली दाईं ओर की सहायक नदी है और अरावली से नहीं निकलती। जवाई नदी पर पाली के सुमेरपुर के पास जवाई बांध बना है।

2. माही नदी (Mahi River)

माही ('वागड़ की गंगा' / 'कांठल की गंगा') मध्य प्रदेश के धार जिले की मेहद झील से निकलती है और खांदू (बांसवाड़ा) के पास राजस्थान में आती है। यह बांसवाड़ा और डूंगरपुर (प्रतापगढ़ की सीमा) में उल्टे 'U' आकार में बहकर गुजरात होते हुए खंभात की खाड़ी में गिरती है। यह कर्क रेखा को दो बार काटती है। नवाटापरा (डूंगरपुर) में बेणेश्वर धाम पर सोम, माही और जाखम का त्रिवेणी संगम है। सहायक नदियां: सोम, जाखम, अनास, चाप, मोरेन। बोरखेड़ा (बांसवाड़ा) में माही बजाज सागर बांध बना है। प्रतापगढ़ के अनूपपुरा में जाखम नदी पर जाखम बांध है।

3. साबरमती और पश्चिमी बनास

साबरमती उदयपुर की कोटड़ा तहसील की पदराड़ा पहाड़ियों से निकलती है। इसकी कुल लंबाई करीब 416 किमी है, जिसमें राजस्थान में सिर्फ करीब 45 किमी है। यह गुजरात होकर खंभात की खाड़ी में गिरती है (सहायक: वाकल, सेई, हथमती)। पश्चिमी बनास सिरोही के नया सानवाड़ा की पहाड़ियों से निकलकर गुजरात होते हुए कच्छ के छोटे रन में खो जाती है (गुजरात का डीसा शहर इसके किनारे है)।

बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र: चंबल, बनास, बाणगंगा और गंभीरी

इस तंत्र की नदियां अपना पानी यमुना और गंगा के रास्ते बंगाल की खाड़ी में ले जाती हैं:

1. चंबल नदी (Chambal River)

चंबल (चर्मण्वती / कामधेनु) मध्य प्रदेश में महू के पास जानापाव पहाड़ी से निकलती है और चौरासीगढ़ (चित्तौड़गढ़) के पास राजस्थान में आती है। यह चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर से होकर उत्तर प्रदेश में इटावा के पास यमुना में मिलती है। सवाई माधोपुर से धौलपुर तक यह राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा बनाती है। भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के पास यह करीब 18 मीटर ऊंचा चूलिया जलप्रपात बनाती है। अवनालिका (gully) कटाव से कोटा से धौलपुर तक गहरे बीहड़ (Badland) बने हैं। इस पर चार बांध हैं: गांधी सागर (मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा), जवाहर सागर और कोटा बैराज। सहायक नदियां: बनास, काली सिंध, पार्वती, मेज, बामनी, आहू, परवन। झालावाड़ का गागरोन दुर्ग आहू और काली सिंध के संगम पर है। मेज की सहायक कुराल नदी बूंदी में बहती है (RAS Pre 2024 में बूंदी-कुराल मिलान)।

2. बनास नदी (Banas River)

बनास ('वन की आशा' / वर्णाशा) राजसमंद में कुंभलगढ़ के पास खमनोर की पहाड़ियों से निकलती है। यह राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और सवाई माधोपुर से होकर रामेश्वर घाट पर चंबल में मिलती है। पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली यह सबसे लंबी नदी है (करीब 512 किमी; कुछ किताबों में 480 किमी)। सहायक नदियां: बेड़च (आयड़), कोठारी, खारी, मेनाल, मोरेल, डाई, ढील। तीन त्रिवेणी संगम: 1. बीगोद (भीलवाड़ा): बनास-बेड़च-मेनाल, 2. राजमहल (टोंक): बनास-खारी-डाई, 3. रामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर): बनास-चंबल-सीप। टोंक में बीसलपुर और सवाई माधोपुर-टोंक सीमा पर ईसरदा बांध हैं।

3. बाणगंगा नदी (Banganga River)

इसे अर्जुन की गंगा और ताला नदी कहते हैं। यह बैराठ (विराटनगर, अब कोटपूतली-बहरोड़ जिला) की पहाड़ियों से निकलती है और जयपुर (जमवा रामगढ़ बांध), दौसा और भरतपुर से होकर बहती है। पहले यह यमुना तक जाती थी, पर अब ज्यादातर भरतपुर के मैदान में ही खो जाती है, इसलिए इसे 'रुंडित नदी' कहते हैं। भरतपुर में इस पर बने अजान बांध से केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को पानी मिलता रहा है।

4. गंभीरी और पूर्वी पार्वती (भरतपुर क्षेत्र)

पूर्वी राजस्थान की गंभीरी (गंभीर / उटंगन) नदी करौली की पहाड़ियों से निकलकर करौली, भरतपुर और धौलपुर क्षेत्र में बहती है। करौली की छावर पहाड़ियों से निकलने वाली पार्वती धौलपुर में इसमें मिलती है। यह पार्वती चंबल की सहायक पार्वती (मध्य प्रदेश से आकर बारां-कोटा में बहने वाली) से अलग नदी है। RAS Pre 2024 में भरतपुर को गंभीरी-पार्वती से मिलाया गया था।

आंतरिक अपवाह तंत्र: घग्घर, कांतली, साबी, रूपारेल और काकनी

आंतरिक प्रवाह राज्य का सबसे बड़ा अपवाह क्षेत्र (करीब 60%) है। इसकी नदियां समुद्र तक नहीं पहुंचतीं। प्रमुख नदियां:

  • घग्घर नदी: 'मृत नदी', सोतर और प्राचीन सरस्वती की धारा मानी जाती है। यह शिवालिक में कालका के पास से निकलकर हनुमानगढ़ की टिब्बी तहसील के तलवाड़ा गांव से राजस्थान में आती है। इसके पाट को 'नाली' कहते हैं। तेज बाढ़ में पानी पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास तक पहुंचता है। कालीबंगा सभ्यता इसके किनारे है। यह हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में बहती है।
  • कांतली नदी: सीकर की खंडेला पहाड़ियों से निकलकर सीकर और झुंझुनूं में करीब 100 किमी बहती है और चूरू की सीमा पर खत्म होती है। इसका बहाव क्षेत्र 'तोरावाटी' कहलाता है। पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली यह आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है। गणेश्वर सभ्यता (नीम का थाना क्षेत्र, सीकर) इसके किनारे है।
  • साबी (साहिबी) नदी: जयपुर की सेवर पहाड़ियों से निकलकर अलवर क्षेत्र से होती हुई हरियाणा में जाती है और नजफगढ़ झील तक पहुंचती है। जोधपुरा सभ्यता इसके किनारे है।
  • रूपारेल (वराह नदी): अलवर के थानागाजी में उदयनाथ पहाड़ी से निकलकर अलवर, डीग और भरतपुर में बहती है। भरतपुर की मोती झील को इससे पानी मिलता है।
  • काकनी / काकनेय (मसूरदी): जैसलमेर के कोटड़ी गांव से निकलकर करीब 17 किमी बहती है और बुझ झील बनाती है। यह आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी मानी जाती है।
  • सांभर झील की नदियां: मेंथा, रूपनगढ़ (सलेमाबाद के पास से), खारी और खंडेल नदियां सांभर में गिरती हैं।

राजस्थान की प्रमुख मीठे और खारे पानी की झीलें

राजस्थान की झीलें दो तरह की हैं: खारे पानी की (ज्यादातर पश्चिम और उत्तर-पूर्व में) और मीठे पानी की (ज्यादातर दक्षिण में, अरावली के पास)।

1. प्रमुख खारे पानी की झीलें (Saline Lakes)

  • सांभर झील: जयपुर, डीडवाना-कुचामन (पहले नागौर) और अजमेर की सीमा पर, भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील। बिजोलिया अभिलेख के अनुसार चौहान शासक वासुदेव से इसका संबंध जोड़ा जाता है। 23 मार्च 1990 को इसे रामसर स्थल घोषित किया गया। देश के नमक का बड़ा हिस्सा (स्रोतों में करीब 8-9%) यहां बनता है। नमक सांभर साल्ट्स लिमिटेड बनाती है, जिसमें हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (केंद्र) का 60% और राजस्थान सरकार का 40% हिस्सा है। झील के किनारे शाकम्भरी माता का मंदिर है (RAS Pre 2013)।
  • पचपदरा झील: बालोतरा जिला (पहले बाड़मेर)। यहां के नमक में करीब 98% सोडियम क्लोराइड होता है। खारवाल जाति मोरली झाड़ी की टहनियों से नमक के क्रिस्टल बनाती है।
  • डीडवाना झील: डीडवाना-कुचामन जिला (पहले नागौर)। इसके पानी में सोडियम सल्फेट ज्यादा है, इसलिए नमक खाने लायक नहीं, उद्योग के काम का है (राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स)।
  • अन्य खारे पानी की झीलें: लूणकरणसर (बीकानेर), फलोदी (फलोदी जिला), कावोद (जैसलमेर), रेवासा (सीकर), नावां और कुचामन (डीडवाना-कुचामन), तालछापर (चूरू)।

2. प्रमुख मीठे पानी की झीलें (Freshwater Lakes)

  • जयसमंद झील (ढेबर): गोमती नदी पर महाराणा जयसिंह ने 1685-1691 में बनवाई। यह राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है। इसमें 7 टापू हैं (सबसे बड़ा 'बाबा का भांगड़ा', सबसे छोटा 'प्यारी')। इससे श्यामपुरा और भाटपुरा नहरें निकलती हैं। जिला: सलूंबर (पहले उदयपुर)।
  • राजसमंद झील: महाराणा राजसिंह ने 1662-1676 में गोमती नदी पर बनवाई। इसकी नौचौकी पाल पर 25 शिलाओं पर रणछोड़ भट्ट तैलंग की लिखी संस्कृत 'राज प्रशस्ति' खुदी है।
  • पिछोला झील: उदयपुर। 14वीं सदी के अंत में राणा लाखा के समय एक बंजारे ने इसे बनवाया। इसमें जग मंदिर और जग निवास टापू हैं। नटनी का चबूतरा इसके किनारे है।
  • फतेह सागर झील: उदयपुर। पहले महाराणा जयसिंह ने यहां देवाली तालाब (1678 के आसपास) बनवाया। 1888-89 में महाराणा फतेहसिंह ने इसका फिर से निर्माण कराया (कनॉट बांध)। इसमें नेहरू पार्क और सौर वेधशाला (Solar Observatory) वाले टापू हैं।
  • नक्की झील: माउंट आबू (सिरोही), करीब 1200 मीटर ऊंचाई पर राज्य की सबसे ऊंची झील। लोककथा में इसे देवताओं ने नाखूनों से खोदा था। सर्दियों में इसकी ऊपरी सतह कभी-कभी जम जाती है। टॉड रॉक इसके पास है।
  • आना सागर झील: अजमेर। चौहान शासक अर्णोराज ने 12वीं सदी (करीब 1135-1137) में बनवाई। जहांगीर ने यहां दौलत बाग और शाहजहां ने बारादरी बनवाई।
  • पुष्कर झील: अजमेर की पवित्र प्राकृतिक झील, 52 घाट। ब्रह्मा मंदिर और कार्तिक पूर्णिमा का मेला प्रसिद्ध हैं।
  • अन्य जलाशय (RAS Pre 2013 में मिलान): कायलाना (जोधपुर), गड़सीसर (जैसलमेर, बीकानेर नहीं), गैप सागर (डूंगरपुर), चांद बावड़ी (आभानेरी, दौसा), सिलीसेढ़ (अलवर, महाराजा विनय सिंह)।
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राजस्थान की प्रमुख नदियों का तुलनात्मक विवरण

नदी अपवाह तंत्र उद्गम स्थल संगम / समाप्ति सहायक नदियां मुख्य बातें
चंबल बंगाल की खाड़ी जानापाव (महू, मध्य प्रदेश) यमुना (इटावा, उत्तर प्रदेश) बनास, काली सिंध, पार्वती, मेज करीब 18 मी. चूलिया प्रपात, बीहड़, 4 बांध
बनास बंगाल की खाड़ी खमनोर (राजसमंद) चंबल (रामेश्वर घाट) बेड़च, कोठारी, खारी, मेनाल पूरी तरह राज्य में सबसे लंबी (करीब 512 किमी), बीसलपुर बांध
लूनी अरब सागर नाग पहाड़ (अजमेर) कच्छ का रन (गुजरात) सूकड़ी, बांडी, जवाई, जोजरी बालोतरा तक मीठी फिर खारी, जोजरी अकेली दाईं सहायक
माही अरब सागर मेहद झील (धार, मध्य प्रदेश) खंभात की खाड़ी सोम, जाखम, अनास कर्क रेखा दो बार काटती है, बेणेश्वर संगम
घग्घर आंतरिक प्रवाह शिवालिक (कालका के पास) फोर्ट अब्बास (पाकिस्तान, बाढ़ में) बरसाती नाले मृत नदी, पाट 'नाली', कालीबंगा
कांतली आंतरिक प्रवाह खंडेला (सीकर) चूरू सीमा पर रेत में बरसाती नाले पूरी तरह राज्य में आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी (करीब 100 किमी)

राजस्थान की प्रमुख झीलों का तुलनात्मक विवरण

झील प्रकार जिला (41 जिलों वाले नक्शे से) निर्माता / काल प्रमुख तथ्य
सांभर खारे पानी जयपुर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर प्राकृतिक (चौहान काल से जुड़ी) 23 मार्च 1990 से रामसर स्थल, शाकम्भरी मंदिर
पचपदरा खारे पानी बालोतरा प्राकृतिक करीब 98% NaCl, मोरली झाड़ी से नमक
डीडवाना खारे पानी डीडवाना-कुचामन प्राकृतिक सोडियम सल्फेट, उद्योग वाला नमक
जयसमंद मीठे पानी सलूंबर महाराणा जयसिंह (1685-1691) गोमती पर सबसे बड़ी कृत्रिम मीठी झील, 7 टापू
राजसमंद मीठे पानी राजसमंद महाराणा राजसिंह (1662-1676) नौचौकी पाल, 25 शिलाओं पर राज प्रशस्ति
पिछोला मीठे पानी उदयपुर बंजारा (राणा लाखा का समय) जग मंदिर, जग निवास, नटनी का चबूतरा
फतेह सागर मीठे पानी उदयपुर महाराणा फतेहसिंह (1888-89, पुनर्निर्माण) कनॉट बांध, नेहरू पार्क, सौर वेधशाला
नक्की मीठे पानी सिरोही (माउंट आबू) प्राकृतिक सबसे ऊंची झील (करीब 1200 मी.)
आना सागर मीठे पानी अजमेर अर्णोराज चौहान (12वीं सदी) जहांगीर का दौलत बाग, शाहजहां की बारादरी

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

परीक्षा के लिए याद रखें

  • अपवाह तंत्र: आंतरिक करीब 60%, बंगाल की खाड़ी करीब 22-23%, अरब सागर करीब 17% (सबसे छोटा)।
  • सभी नदियां अरावली से नहीं निकलतीं: चंबल और माही मध्य प्रदेश से, घग्घर शिवालिक से आती हैं।
  • बनास पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी (करीब 512 किमी) है ('वन की आशा')।
  • लूनी बालोतरा तक मीठी, आगे खारी; जोजरी उसकी अकेली दाईं सहायक नदी है।
  • माही कर्क रेखा को दो बार काटती है; बेणेश्वर (नवाटापरा, डूंगरपुर) में सोम-माही-जाखम संगम।
  • सांभर भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारी झील, 23 मार्च 1990 से रामसर स्थल (RAS Pre 2016)।
  • जिला-नदी (RAS Pre 2024): उदयपुर-सोम/जाखम, बूंदी-कुराल, भरतपुर-गंभीरी/पार्वती, अलवर-साबी/रूपारेल।
  • जयसमंद (सलूंबर जिला) सबसे बड़ी कृत्रिम मीठी झील; राजसमंद की नौचौकी पर 25 शिलाओं वाली राज प्रशस्ति।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान में सबसे कम क्षेत्रफल किस अपवाह तंत्र का है?
    A) आंतरिक B) बंगाल की खाड़ी C) अरब सागर D) तीनों बराबर
    उत्तर: C (अरब सागर तंत्र करीब 17%, आंतरिक करीब 60% और बंगाल की खाड़ी करीब 22-23%)
  2. राजस्थान की कौन सी झील रामसर सूची में है?
    A) जयसमंद B) आना सागर C) राजसमंद D) सांभर
    उत्तर: D (सांभर 23 मार्च 1990 को रामसर स्थल बनी; RAS Pre 2016 में इसी तरह का सवाल)
  3. लूनी की अकेली दाईं ओर से मिलने वाली सहायक नदी कौन सी है?
    A) सूकड़ी B) बांडी C) जवाई D) जोजरी
    उत्तर: D (जोजरी नागौर के पोंडलू से निकलती है; बाकी सभी बाईं ओर से अरावली से आती हैं)
  4. पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी कौन सी है?
    A) चंबल B) बनास C) माही D) लूनी
    उत्तर: B (बनास करीब 512 किमी; चंबल और माही मध्य प्रदेश से आती हैं, लूनी गुजरात जाती है)
  5. बेणेश्वर धाम (नवाटापरा) में त्रिवेणी संगम किन नदियों का है?
    A) बनास-बेड़च-मेनाल B) सोम-माही-जाखम C) बनास-खारी-डाई D) चंबल-बनास-सीप
    उत्तर: B (बाकी तीन संगम बीगोद, राजमहल और रामेश्वर घाट के हैं)
  6. किस झील के नमक में सोडियम क्लोराइड करीब 98% होता है?
    A) सांभर B) डीडवाना C) पचपदरा D) लूणकरणसर
    उत्तर: C (पचपदरा, बालोतरा जिला; डीडवाना में सोडियम सल्फेट ज्यादा है)
  7. सही जोड़ा चुनिए (जिला - नदी):
    A) बूंदी - साबी B) अलवर - सोम C) भरतपुर - गंभीरी D) उदयपुर - कुराल
    उत्तर: C (सही मिलान: बूंदी-कुराल, अलवर-साबी/रूपारेल, उदयपुर-सोम/जाखम, भरतपुर-गंभीरी/पार्वती)
  8. भैंसरोड़गढ़ के पास चूलिया जलप्रपात कौन सी नदी बनाती है?
    A) बनास B) चंबल C) बेड़च D) मेज
    उत्तर: B (चंबल, चित्तौड़गढ़ जिले में रावतभाटा क्षेत्र)
  9. बुझ झील बनाने वाली आंतरिक प्रवाह की नदी कौन सी है?
    A) कांतली B) साबी C) काकनी D) रूपारेल
    उत्तर: C (काकनी/काकनेय जैसलमेर के कोटड़ी से निकलकर करीब 17 किमी बहती है)
  10. जयसमंद झील अब किस जिले में है?
    A) उदयपुर B) राजसमंद C) सलूंबर D) डूंगरपुर
    उत्तर: C (2023 में बना सलूंबर जिला 28 दिसंबर 2024 के फैसले के बाद भी बना हुआ है, और जयसमंद इसी में है)

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. राजस्थान के तीन अपवाह तंत्र और उनका हिस्सा लिखिए।
    उत्तर: आंतरिक अपवाह करीब 60%, बंगाल की खाड़ी तंत्र करीब 22-23% और अरब सागर तंत्र करीब 17%। अरावली इन्हें बांटने वाली जल विभाजक है।
  2. लूनी नदी को 'आधी मीठी, आधी खारी' क्यों कहते हैं?
    उत्तर: बालोतरा तक इसका पानी मीठा रहता है। आगे रेगिस्तानी मिट्टी के नमक घुलने से पानी खारा हो जाता है।
  3. बनास बेसिन के तीन त्रिवेणी संगम लिखिए।
    उत्तर: बीगोद (भीलवाड़ा): बनास-बेड़च-मेनाल; राजमहल (टोंक): बनास-खारी-डाई; रामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर): बनास-चंबल-सीप।
  4. सांभर झील के दो महत्व बताइए।
    उत्तर: देश के नमक का बड़ा हिस्सा (करीब 8-9%) यहां बनता है और 1990 से यह रामसर आर्द्रभूमि (wetland) है, जहां सर्दियों में फ्लेमिंगो आते हैं।
  5. "राजस्थान की सभी नदियां अरावली से निकलती हैं" - यह कथन सही है या गलत?
    उत्तर: गलत। चंबल और माही मध्य प्रदेश से और घग्घर शिवालिक से निकलती है। बनास, लूनी, साबी, कांतली जैसी नदियां अरावली से निकलती हैं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. चंबल नदी के उद्गम, बहाव क्षेत्र, जलप्रपात, बीहड़ और बांधों का वर्णन कीजिए।
    उत्तर: चंबल जानापाव (मध्य प्रदेश) से निकलकर चौरासीगढ़ से राजस्थान में आती है। यह चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर होकर इटावा के पास यमुना में मिलती है। भैंसरोड़गढ़ के पास यह करीब 18 मीटर ऊंचा चूलिया प्रपात बनाती है। अवनालिका कटाव से गहरे बीहड़ (Badland) बने हैं, जिससे खेती की जमीन घटती है। चार बांध: गांधी सागर (मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज।
  2. राजस्थान के आंतरिक अपवाह तंत्र की प्रमुख नदियों और उनके महत्व को बताइए।
    उत्तर: राज्य का करीब 60% भाग आंतरिक अपवाह का है। घग्घर (प्राचीन सरस्वती) हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर में बहती है (कालीबंगा)। कांतली खंडेला से निकलकर तोरावाटी में बहती है (गणेश्वर)। साबी सेवर से निकलकर हरियाणा जाती है (जोधपुरा)। रूपारेल भरतपुर की मोती झील को पानी देती है। काकनी बुझ झील बनाती है और मेंथा-रूपनगढ़ सांभर झील में गिरती हैं। इन नदियों के किनारे प्राचीन सभ्यताएं बसीं और आज ये भूजल recharge का बड़ा साधन हैं।

FAQs

प्रश्न: पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी कौन सी है?
उत्तर: बनास नदी (करीब 512 किमी)।

प्रश्न: कर्क रेखा को दो बार पार करने वाली नदी कौन सी है?
उत्तर: माही नदी (बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में उल्टे 'U' आकार में बहती है)।

प्रश्न: राजस्थान की सबसे ऊंची झील कौन सी है?
उत्तर: नक्की झील (माउंट आबू, सिरोही, करीब 1200 मीटर ऊंचाई)।

प्रश्न: सांभर झील में कौन सी नदियां गिरती हैं?
उत्तर: मेंथा, रूपनगढ़, खारी और खंडेल नदियां।

प्रश्न: पचपदरा और जयसमंद झील अब किस जिले में हैं?
उत्तर: पचपदरा बालोतरा जिले में और जयसमंद सलूंबर जिले में। ये दोनों जिले 28 दिसंबर 2024 के फैसले के बाद भी बने हुए हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां (Rajasthan Ki Nadiya) और अपवाह तंत्र अरावली पर्वतमाला के हिसाब से तीन भागों में बंटे हैं: आंतरिक अपवाह (करीब 60%), बंगाल की खाड़ी अपवाह (करीब 22-23%) और अरब सागर अपवाह (करीब 17%)।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र: आंतरिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी + प्रमुख झीलें एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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In this Chapter

Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र: आंतरिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी + प्रमुख झीलें
राजस्थान का भौतिक पर्यावरण
Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा वितरण, मावठ, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मृदा प्रकार