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Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा वितरण, मावठ, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मृदा प्रकार

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा वितरण, मावठ, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मृदा प्रकार - भौतिक वातावरण (भू-आकृति और जलवायु)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां (Rajasthan Ki Jalvayu Aur Mitti) मुख्य रूप से अरावली की दिशा, समुद्र से दू...
Quick Answer: Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां (Rajasthan Ki Jalvayu Aur Mitti) मुख्य रूप से अरावली की दिशा, समुद्र से दूरी और मानसून से तय होती हैं। IMD के 1971-2020 के normal के अनुसार पूरे राज्य में मानसून (जून-सितंबर) की औसत वर्षा 435.6 mm (लगभग 43.6 सेमी) है: पश्चिमी राजस्थान में 283.6 mm और पूर्वी राजस्थान में 626.6 mm। वर्षा उत्तर-पश्चिम (जैसलमेर, श्रीगंगानगर) से दक्षिण-पूर्व (प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, झालावाड़) की ओर बढ़ती है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) से होने वाली हल्की वर्षा को मावठ कहते हैं। मिट्टियों के नए (USDA) वर्गीकरण में राजस्थान में 5 मृदा वर्ग (orders) मिलते हैं: Entisols (सबसे ज्यादा क्षेत्र), Aridisols, Alfisols, Inceptisols और Vertisols।
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राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: आधार क्या है

राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिम में है। कर्क रेखा (23°30' उत्तरी अक्षांश) डूंगरपुर की दक्षिणी सीमा को छूती हुई बांसवाड़ा जिले (कुशलगढ़ के पास) से गुजरती है। अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर फैली है, इसलिए अरब सागर की मानसूनी हवाएं इसके समानांतर निकल जाती हैं और पश्चिमी राजस्थान सूखा रह जाता है। भौतिक विभाग, ऋतु चक्र और कोपेन के प्रदेशों के लिए राजस्थान का भौतिक पर्यावरण (भू-आकृति और जलवायु) पढ़ें। यह note जिलेवार वर्षा, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मिट्टियों पर फोकस करता है।

किताबों में 50 सेमी की समवर्षा रेखा (isohyet) को राज्य की मुख्य विभाजक रेखा माना जाता है। यह मोटे तौर पर अरावली के साथ चलती है और पश्चिम के शुष्क-अर्धशुष्क भाग को पूर्व के उप-आर्द्र भाग से अलग करती है। 25 सेमी की समवर्षा रेखा थार मरुस्थल को पश्चिम के शुष्क रेतीले भाग (मरुस्थली) और पूर्व के अर्धशुष्क भाग (राजस्थान बांगर) में बांटती है। वन, मिट्टी और खनिज की सामान्य जानकारी के लिए प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज) देखें।

PYQ में क्या पूछा गया: RAS Pre 2013 में मावठ के कारण पर सवाल आया। RAS Pre 2016 में अरावली के वर्षा वितरण पर असर से जुड़ा कथन पूछा गया। RAS Pre 2024 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औसत वर्षा के हिसाब से जिलों का क्रम और जयपुर-दौसा-अलवर की प्रमुख मृदा (Alfisols) पूछी गई।

राजस्थान की जलवायु: तापमान और स्थानीय मौसमी घटनाएं

राजस्थान की जलवायु उपोष्ण, महाद्वीपीय और ज्यादातर शुष्क से अर्धशुष्क है। रेत जल्दी गर्म और जल्दी ठंडी होती है, इसलिए पश्चिमी मरुस्थल में दैनिक तापांतर सबसे ज्यादा रहता है।

तापमान के रिकॉर्ड

  • भारत का सबसे ऊंचा दर्ज तापमान: फलौदी में 19 मई 2016 को 51.0°C (IMD)। फलौदी अब अलग जिला है।
  • सबसे ठंडा स्थान: माउंट आबू (सिरोही)। दिसंबर-जनवरी में माउंट आबू, चूरू और फतेहपुर (सीकर) में तापमान 0°C या उससे नीचे जा सकता है और पाला पड़ता है।

स्थानीय मौसमी घटनाएं

  • लू: मई-जून में पश्चिम से चलने वाली गर्म, सूखी और धूल भरी हवा।
  • भभूल्या: गर्मी की दोपहर में जमीन के तेज गर्म होने से बनने वाला धूल का छोटा घूमता भंवर (whirlwind)।
  • पुरवाई (पुरवइया): बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा से आने वाली पूर्वी हवा, जो पूर्वी राजस्थान में वर्षा लाती है।
  • मावठ: सर्दियों (मुख्य रूप से दिसंबर-जनवरी) में होने वाली हल्की वर्षा। यह पश्चिमी विक्षोभों से होती है, जो भूमध्य सागर की ओर से पछुआ हवाओं के साथ आते हैं। मानसून से इसका कोई संबंध नहीं है। गेहूं, सरसों, चना जैसी रबी फसलों के लिए फायदेमंद होने से इसे 'सुनहरी बूंदें' (golden drops) कहते हैं।

राजस्थान में वर्षा का वितरण (IMD normal, जिलेवार)

सालाना वर्षा का लगभग 90% दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) से आता है। नीचे के आंकड़े IMD जयपुर की मानसून 2024 report (1971-2020 normal) से हैं, जो पुराने 33 जिलों के हिसाब से है; नए जिलों का data उनके मूल जिले में है। पुरानी किताबों का "औसत वार्षिक वर्षा 57-58 सेमी" IMD का मौजूदा normal नहीं है।

क्षेत्र / जिला (पुराना जिला) मानसून normal (mm, 1971-2020) टिप्पणी
पूरा राजस्थान435.6राज्य का औसत
पश्चिमी राजस्थान283.610 जिले (पुराने)
पूर्वी राजस्थान626.623 जिले (पुराने)
प्रतापगढ़914.2सबसे ज्यादा
बांसवाड़ा886.0दूसरा
झालावाड़884.3तीसरा
सिरोही873.0माउंट आबू इसी जिले में
जयपुर524.3मध्यम
जालोर417.8पश्चिमी राजस्थान में पाली (491.6) सबसे ऊपर
बीकानेर247.0कम
श्रीगंगानगर204.7दूसरा सबसे कम
जैसलमेर176.9सबसे कम

वर्षा के पैटर्न को कैसे याद रखें

  • वर्षा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है। क्रम वाले सवाल में देखें कि जिला पश्चिम, मध्य या दक्षिण-पूर्व (हाड़ौती, वागड़) में है।
  • सबसे कम वर्षा: जैसलमेर (IMD normal लगभग 17.7 सेमी; "10 सेमी से कम" वाला किताबी आंकड़ा IMD से मेल नहीं खाता)।
  • सबसे ज्यादा वर्षा वाला जिला किताबों में झालावाड़ है; IMD normal में प्रतापगढ़ सबसे ऊपर है और बांसवाड़ा, झालावाड़ लगभग बराबर। तीनों को एक समूह के रूप में याद रखें।
  • सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान माउंट आबू है (IMD के 1901-2000 के data पर औसत लगभग 155 सेमी)।
  • पश्चिम में वर्षा की परिवर्तनशीलता (variability) सबसे ज्यादा है; 2024 में जैसलमेर में normal की 248% वर्षा हुई (IMD)।

सूखे इलाके में पानी बचाने के पारंपरिक तरीके (खड़ीन, टांका, जोहड़) के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता पढ़ें।

कोपेन और थॉर्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण

कोपेन (संक्षेप में)

कोपेन की विश्व जलवायु योजना (वनस्पति, तापमान और वर्षा पर आधारित) लागू करने पर राजस्थान में 4 जलवायु प्रदेश बनते हैं: BWhw (उष्ण मरुस्थल, जैसे जैसलमेर, बीकानेर), BShw (अर्धशुष्क स्टेपी, जैसे जोधपुर, नागौर, पाली, जालोर), Cwg (उप-आर्द्र, जैसे जयपुर, अलवर, भरतपुर, टोंक) और Aw (उष्ण आर्द्र सवाना, जैसे बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़)। कोड में B = शुष्क, W = मरुस्थल, S = स्टेपी, h = गर्म, w = सर्दी शुष्क, g = गंगा जैसी तापमान व्यवस्था (सबसे गर्म महीना मानसून से पहले)। हर प्रदेश के जिले, वर्षा और वनस्पति की पूरी table ऊपर linked भौतिक पर्यावरण वाले note में है।

थॉर्नथ्वेट का वर्गीकरण

अमेरिकी जलवायु वैज्ञानिक सी. डब्ल्यू. थॉर्नथ्वेट (C. W. Thornthwaite) ने 1931 में अपनी योजना दी और बाद में इसे बदला। इसका आधार है वर्षण प्रभाविता (precipitation effectiveness, यानी वर्षा और वाष्पीकरण का संबंध) और तापीय दक्षता (thermal efficiency)। राजस्थान की किताबों में इसके 4 प्रदेश बताए जाते हैं:

कोड प्रकार मुख्य जिले
CA'wउप-आर्द्र, सर्दी में कम वर्षाबांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़, बारां, दक्षिणी कोटा
DA'wअर्धशुष्क, सर्दी में कम वर्षा (सबसे बड़ा प्रदेश)जयपुर, अजमेर, अलवर, टोंक, भीलवाड़ा, उदयपुर, पाली आदि (मध्य और पूर्वी राजस्थान का बड़ा भाग)
DB'wअर्धशुष्क, थोड़ा कम तापीय दक्षताश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू
EA'dशुष्क मरुस्थल, सभी ऋतुओं में वर्षा की कमीजैसलमेर, उत्तरी बाड़मेर, पश्चिमी बीकानेर, फलौदी का पश्चिमी भाग

कोड: पहला अक्षर नमी (C उप-आर्द्र, D अर्धशुष्क, E शुष्क), दूसरा तापमान (A' उष्ण, B' मध्यम), आखिरी अक्षर वर्षा की कमी कब (w सर्दी में, d पूरे साल)। जिलों की सूची किताबों में थोड़ी अलग मिलती है, इसलिए प्रतिनिधि जिले याद रखें: जैसलमेर = EA'd, बांसवाड़ा = CA'w।

राजस्थान की प्रमुख मिट्टियां: पारंपरिक और वैज्ञानिक (USDA) वर्गीकरण

1. पारंपरिक मृदा प्रकार (संक्षेप में)

पुराने वर्गीकरण में 5 मुख्य प्रकार हैं: रेतीली (पश्चिमी मरुस्थल), लाल-पीली (सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, टोंक), लाल-लोमी (डूंगरपुर, बांसवाड़ा), मध्यम काली (हाड़ौती, बेसाल्ट से बनी) और जलोढ़ (पूर्वी मैदान)। इनकी फसलों वाली table प्राकृतिक संसाधन वाले note में है। RAS में अब नया (USDA) वर्गीकरण ज्यादा पूछा जा रहा है।

2. वैज्ञानिक (USDA Soil Taxonomy) वर्गीकरण: 5 मृदा वर्ग

भारत में ICAR का NBSS&LUP (राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर) मिट्टियों को USDA Soil Taxonomy के हिसाब से वर्गीकृत करता है। इसमें मिट्टी को उसके संस्तरों (horizons) और गुणों से order में बांटा जाता है।

  • Entisols (एन्टीसोल्स): सबसे नई मिट्टी, संस्तर साफ नहीं बने। पश्चिमी राजस्थान के टिब्बों पर; great group Torripsamments (टोरिप्सामेंट्स) सबसे ज्यादा फैला है।
  • Aridisols (एरिडीसोल्स): शुष्क जलवायु की मिट्टी, जैविक पदार्थ कम, नीचे चूने (कैल्शियम कार्बोनेट) या जिप्सम की परत।
  • Alfisols (अल्फीसोल्स): विकसित मिट्टी, निचली परत में clay जमा, base saturation 35% या ज्यादा। पूर्वी मैदान की जलोढ़ से बनी (RAS Pre 2024 में पूछी गई)।
  • Inceptisols (इनसेप्टीसोल्स): अल्प-विकसित मिट्टी, अरावली के ढलानों पर (चित्तौड़गढ़ तक)।
  • Vertisols (वर्टीसोल्स): काली चिकनी मिट्टी, 30% या ज्यादा clay, खनिज मोंटमोरिलोनाइट। भीगने पर फूलती, सूखने पर गहरी दरारें; ऊपर की मिट्टी दरारों में गिरकर उलटती-पलटती है, इसलिए 'अपने आप जुताई वाली मिट्टी' (self-ploughing soil) कहलाती है।

क्षेत्रफल: ICAR के शोध (Dhir और साथी, 2016) के अनुसार राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में Entisols लगभग 51.84% और Aridisols लगभग 41.05% क्षेत्र पर हैं। पूरे राज्य में भी सबसे ज्यादा क्षेत्र Entisols का है, और Alfisols व Vertisols कम क्षेत्र पर हैं। ध्यान दें: 51.84% वाला आंकड़ा सिर्फ शुष्क क्षेत्र का है, पूरे राज्य का नहीं।

वैज्ञानिक मृदा वर्गीकरण तालिका

मृदा वर्ग प्रमुख लक्षण मुख्य जिले मुख्य फसलें
Entisols नई, संस्तर-रहित, रेतीली; Torripsamments सबसे ज्यादा जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर बाजरा, मोठ, ग्वार
Aridisols शुष्क, जैविक पदार्थ कम, चूना/जिप्सम परत चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, जोधपुर बाजरा, ग्वार, मोठ
Alfisols clay का जमाव, base saturation 35% या ज्यादा, उपजाऊ जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, टोंक गेहूं, सरसों, जौ
Inceptisols अल्प-विकसित, पहाड़ी ढलानों पर सिरोही, पाली, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा मक्का, दालें
Vertisols काली चिकनी, मोंटमोरिलोनाइट, फूलना-सिकुड़ना, दरारें कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ सोयाबीन, कपास, संतरा

मृदा समस्याएं: लवणीयता, सेम और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

1. लवणीयता और क्षारीयता (रेह, ऊसर, कल्लर)

तेज वाष्पीकरण और ज्यादा सिंचाई से नमक सतह पर जम जाता है। क्षारीय (सोडियम वाली) मिट्टी में जिप्सम (कैल्शियम सल्फेट) डालते हैं, जो सोडियम हटाता है; अम्लीय मिट्टी में चूना।

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2. सेम की समस्या (Waterlogging)

इंदिरा गांधी नहर (IGNP) क्षेत्र में नहर से पानी रिसता है। नीचे जिप्सम की सख्त परत होने से पानी नीचे नहीं जा पाता, भूजल ऊपर आ जाता है और जमीन दलदली हो जाती है। हनुमानगढ़ जिले का बड़ोपल गांव (पीलीबंगा क्षेत्र) इसका सबसे चर्चित उदाहरण है। इसके इलाज के लिए सफेदा (Eucalyptus) लगाकर जैविक जल निकासी (bio-drainage) और भूमिगत drainage अपनाए गए हैं।

3. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से यह योजना शुरू की। नारा था 'स्वस्थ धरा, खेत हरा'। मिट्टी के 12 पैमानों की जांच होती है: N, P, K, S (मुख्य पोषक तत्व), Zn, Fe, Cu, Mn, B (सूक्ष्म पोषक तत्व) और pH, EC, OC। PIB के अनुसार 2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के 'Soil Health & Fertility' हिस्से के रूप में चल रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • IMD (1971-2020): राजस्थान का मानसून normal 435.6 mm; पश्चिमी राजस्थान 283.6 mm, पूर्वी राजस्थान 626.6 mm।
  • वर्षा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है; सबसे कम जैसलमेर (176.9 mm normal)।
  • IMD normal में सबसे ज्यादा वर्षा: प्रतापगढ़ (914.2 mm), फिर बांसवाड़ा और झालावाड़; किताबों में झालावाड़ लिखा मिलता है।
  • सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान माउंट आबू (लगभग 155 सेमी)।
  • भारत का सबसे ऊंचा दर्ज तापमान: फलौदी, 51.0°C, 19 मई 2016।
  • 50 सेमी समवर्षा रेखा मोटे तौर पर अरावली के साथ चलती है; 25 सेमी रेखा मरुस्थली और बांगर को अलग करती है।
  • थॉर्नथ्वेट: EA'd = जैसलमेर, DA'w सबसे बड़ा प्रदेश।
  • सेम से सबसे चर्चित प्रभावित गांव बड़ोपल (हनुमानगढ़)।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • मावठ = सर्दियों की वर्षा, कारण पश्चिमी विक्षोभ (RAS Pre 2013 का विषय)।
  • अरावली मानसूनी हवाओं के समानांतर है, इसलिए पश्चिम में कम वर्षा होती है।
  • जयपुर, दौसा, अलवर की प्रमुख मृदा: Alfisols (RAS Pre 2024 का विषय)।
  • USDA के 5 वर्ग: Entisols, Aridisols, Alfisols, Inceptisols, Vertisols।
  • क्षारीय मिट्टी के सुधार के लिए जिप्सम, अम्लीय के लिए चूना।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर), 12 पैमाने।

RAS Prelims MCQ

  1. प्रश्न: राजस्थान में सर्दियों में होने वाली मावठ वर्षा का मुख्य कारण क्या है?

    A) अरब सागर का मानसून
    B) बंगाल की खाड़ी का चक्रवात
    C) पश्चिमी विक्षोभ
    D) लौटता मानसून

    उत्तर: C

    व्याख्या: मावठ भूमध्य सागर की ओर से पछुआ हवाओं के साथ आने वाले पश्चिमी विक्षोभों से होती है, मानसून से नहीं।

  2. प्रश्न: थॉर्नथ्वेट के वर्गीकरण में जैसलमेर किस जलवायु प्रदेश में आता है?

    A) CA'w
    B) DA'w
    C) DB'w
    D) EA'd

    उत्तर: D

    व्याख्या: EA'd शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश है, जिसमें जैसलमेर, उत्तरी बाड़मेर और पश्चिमी बीकानेर आते हैं।

  3. प्रश्न: USDA मृदा वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान के किस भाग में Alfisols प्रमुख हैं?

    A) पश्चिमी मरुस्थल
    B) हाड़ौती पठार
    C) पूर्वी मैदान (जयपुर, दौसा, अलवर)
    D) जैसलमेर-बाड़मेर के टिब्बे

    उत्तर: C

    व्याख्या: Alfisols पूर्वी मैदान की जलोढ़ से बनी विकसित मिट्टी है; हाड़ौती में Vertisols और पश्चिम में Entisols हैं।

  4. प्रश्न: IMD के 1971-2020 मानसून normal के आधार पर नीचे दिए जिलों का सही आरोही (कम से ज्यादा) क्रम कौन सा है?

    A) श्रीगंगानगर, पाली, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़
    B) पाली, श्रीगंगानगर, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा
    C) भीलवाड़ा, पाली, श्रीगंगानगर, प्रतापगढ़
    D) प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, पाली, श्रीगंगानगर

    उत्तर: A

    व्याख्या: श्रीगंगानगर 204.7, पाली 491.6, भीलवाड़ा 604.5 और प्रतापगढ़ 914.2 mm; वर्षा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है।

  5. प्रश्न: हाड़ौती की Vertisols मिट्टी में सूखने पर गहरी दरारें पड़ने का मुख्य कारण क्या है?

    A) रेत के कण
    B) मोंटमोरिलोनाइट clay खनिज
    C) चूने की कमी
    D) जैविक पदार्थ

    उत्तर: B

    व्याख्या: मोंटमोरिलोनाइट भीगने पर फूलता और सूखने पर सिकुड़ता है, इसलिए Vertisols में दरारें पड़ती हैं।

  6. प्रश्न: गर्मी की दोपहर में थार मरुस्थल में बनने वाले धूल के छोटे घूमते भंवर को स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं?

    A) लू
    B) भभूल्या
    C) पुरवाई
    D) मावठ

    उत्तर: B

    व्याख्या: जमीन के तेज गर्म होने से बनने वाला यह छोटा भंवर भभूल्या कहलाता है; लू गर्म हवा है और पुरवाई पूर्वी मानसूनी हवा।

  7. प्रश्न: राजस्थान में क्षारीय (सोडियम वाली) मिट्टी के सुधार के लिए मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?

    A) जिप्सम
    B) यूरिया
    C) चूना
    D) पोटाश

    उत्तर: A

    व्याख्या: जिप्सम (कैल्शियम सल्फेट) का कैल्शियम मिट्टी से सोडियम को हटाता है; चूना अम्लीय मिट्टी के लिए है।

  8. प्रश्न: राजस्थान में सबसे ज्यादा क्षेत्र पर किस वैज्ञानिक मृदा वर्ग का विस्तार है?

    A) Alfisols
    B) Vertisols
    C) Entisols
    D) Inceptisols

    उत्तर: C

    व्याख्या: ICAR के शोध के अनुसार शुष्क राजस्थान का लगभग 51.84% भाग Entisols का है; ये पश्चिमी आधे राज्य में फैली हैं।

  9. प्रश्न: IGNP क्षेत्र में सेम की समस्या से सबसे चर्चित प्रभावित बड़ोपल गांव किस जिले में है?

    A) श्रीगंगानगर
    B) हनुमानगढ़
    C) बीकानेर
    D) चूरू

    उत्तर: B

    व्याख्या: बड़ोपल हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा क्षेत्र में है, जहां नहर के रिसाव से जमीन दलदली हुई।

  10. प्रश्न: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के किस स्थान से शुरू हुई?

    A) सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर)
    B) दुर्गापुरा (जयपुर)
    C) मंडोर (जोधपुर)
    D) तबीजी (अजमेर)

    उत्तर: A

    व्याख्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरतगढ़ से 'स्वस्थ धरा, खेत हरा' नारे के साथ यह योजना शुरू की।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: थॉर्नथ्वेट के EA'd और CA'w प्रदेशों में अंतर बताइए। (20-30 शब्द)

    उत्तर: EA'd शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश है (जैसलमेर, उत्तरी बाड़मेर), जहां पूरे साल वर्षा की कमी रहती है। CA'w उप-आर्द्र प्रदेश है (बांसवाड़ा, झालावाड़), जहां सिर्फ सर्दी शुष्क रहती है।

  2. प्रश्न: राजस्थान में सेम समस्या के कारण और उपाय लिखिए। (20-30 शब्द)

    उत्तर: नहर से रिसाव और नीचे जिप्सम की सख्त परत के कारण भूजल ऊपर आ जाता है। उपाय: सफेदा लगाकर bio-drainage, भूमिगत drainage और नहरों की lining।

  3. प्रश्न: राजस्थान में वर्षा वितरण पर अरावली का क्या असर है? (20-30 शब्द)

    उत्तर: अरावली अरब सागर की मानसूनी हवाओं के समानांतर है, इसलिए हवाएं बिना रुके निकल जाती हैं। पश्चिम में कम और अरावली के पूर्व-दक्षिण में ज्यादा वर्षा होती है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान में वर्षा के स्थानिक वितरण का वर्णन कीजिए और इसके कारण बताइए। (100 शब्द, 10 अंक)

    उत्तर (outline): IMD normal (राज्य 435.6, पश्चिम 283.6, पूर्व 626.6 mm); जैसलमेर से प्रतापगढ़ की ओर बढ़ती वर्षा; कारण: अरावली की दिशा, समुद्र से दूरी, बंगाल की खाड़ी शाखा; 50 और 25 सेमी समवर्षा रेखाएं; पश्चिम में ज्यादा परिवर्तनशीलता।

  2. प्रश्न: राजस्थान की मिट्टियों के वैज्ञानिक (USDA) वर्गीकरण के 5 मृदा वर्गों का विवरण दीजिए। (100 शब्द, 10 अंक)

    उत्तर (outline): Entisols (पश्चिमी टिब्बे, सबसे ज्यादा क्षेत्र), Aridisols (चूना/जिप्सम परत, चूरू-नागौर), Alfisols (जयपुर-दौसा-अलवर), Inceptisols (अरावली ढलान), Vertisols (हाड़ौती, मोंटमोरिलोनाइट); अंत में लवणीयता, सेम और मृदा स्वास्थ्य कार्ड।

FAQs

  • Q1: राजस्थान में औसत वर्षा कितनी होती है?
    A: IMD के 1971-2020 normal के अनुसार मानसून (जून-सितंबर) में राज्य का औसत 435.6 mm है। यह जैसलमेर में करीब 177 mm से प्रतापगढ़ में करीब 914 mm तक बदलता है।
  • Q2: राजस्थान में सबसे ज्यादा वर्षा वाला जिला कौन सा है: झालावाड़ या प्रतापगढ़?
    A: किताबों में झालावाड़ लिखा जाता है। IMD के 1971-2020 normal में प्रतापगढ़ (914.2 mm) थोड़ा आगे है और बांसवाड़ा (886) व झालावाड़ (884.3) लगभग बराबर हैं। अगर option में इन तीनों में से सिर्फ एक जिला हो तो वही चुनें; झालावाड़ और प्रतापगढ़ दोनों हों तो देखें कि सवाल किताबी है या IMD data पर आधारित।
  • Q3: Entisols और Aridisols में क्या फर्क है?
    A: Entisols नई मिट्टी है जिसमें संस्तर बने ही नहीं (जैसे टिब्बों की रेत)। Aridisols में शुष्क जलवायु के कारण नीचे चूने या जिप्सम की परत बन चुकी होती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां (Rajasthan Ki Jalvayu Aur Mitti) मुख्य रूप से अरावली की दिशा, समुद्र से दूरी और मानसून से तय होती हैं।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा वितरण, मावठ, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मृदा प्रकार एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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In this Chapter

Rajasthan ki Jalvayu aur Mitti: राजस्थान की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा वितरण, मावठ, थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण और मृदा प्रकार
राजस्थान का भौतिक पर्यावरण
Rajasthan ki Nadiya: राजस्थान की नदियां और अपवाह तंत्र: आंतरिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी + प्रमुख झीलें