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प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज)

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज) - प्राकृतिक संसाधन (वन, मिट्टी, खनिज)
  • • अवलोकन: वन संसाधन (Van Sampada) राजस्थान में कुल वन क्षेत्र लगभग 32,701 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.55% है (राष्ट्रीय लक्ष्य 33% है)। सर्वाधिक ...

वन संसाधन (Van Sampada)

राजस्थान में कुल वन क्षेत्र लगभग 32,701 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.55% है (राष्ट्रीय लक्ष्य 33% है)।

  • सर्वाधिक वन क्षेत्र: उदयपुर जिला।
  • न्यूनतम वन क्षेत्र: चूरू जिला।
  • वर्गीकरण: आरक्षित (Reserved), सुरक्षित (Protected), और अवर्गीकृत (Unclassified)।

वनों के प्रकार

प्रकारक्षेत्रवनस्पति
उष्ण कटिबंधीय कंटीले वनपश्चिमी मरुस्थलखेजड़ी (राज्य वृक्ष), रोहिड़ा, बेर, बबूल, कैर।
उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वनअरावली, दक्षिण और पूर्वी भागधोकड़ा, सालर, तेंदू, बांस, आंवला।
उपोष्ण पर्वतीय वनमाउंट आबू (सिरोही)सदाबहार वनस्पति।

वन्यजीव एवं संरक्षण

राजस्थान अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

  • रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर): बाघ (Tiger) परियोजना के लिए प्रसिद्ध।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर): "पक्षियों का स्वर्ग"। प्रवासी पक्षी साइबेरियन क्रेन के लिए विख्यात।
  • राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर/बाड़मेर): गोडावण (राज्य पक्षी) और चिंकारा (राज्य पशु) का आश्रय स्थल। यहाँ आकल वुड फॉसिल पार्क स्थित है।
  • सरिस्का (अलवर): बाघ परियोजना क्षेत्र।
  • मुकंदरा हिल्स (कोटा): राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त।
  • तालछापर (चूरू): काले हिरण (कृष्ण मृग) के लिए प्रसिद्ध।

मृदा संसाधन (Soil)

मृदा का प्रकारक्षेत्रउपयुक्त फसलें
रेतीली मृदापश्चिमी राजस्थानबाजरा, मोठ, ग्वार।
जलोढ़ मृदापूर्वी मैदान (नदी बेसिन)गेहूँ, सरसों (सर्वाधिक उपजाऊ)।
मध्यम काली मृदाहाड़ौती (कोटा, बूँदी)कपास, मसाले।
लाल-लोमी मृदादक्षिण (डूंगरपुर, बांसवाड़ा)मक्का।
लाल-पीली मृदासवाई माधोपुर, भीलवाड़ामूंगफली, दालें।

संरक्षण: फसल चक्र, पट्टीदार कृषि, फव्वारा और बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति।


जल संसाधन एवं संरक्षण

  • सतही जल: चम्बल (बारहमासी), बनास, लूणी, माही नदियाँ। झीलें: जयसमन्द, पिछोला, पुष्कर।
  • परंपरागत संरक्षण विधियाँ:
    • नाडी/तालाब: वर्षा जल संग्रहण।
    • बावड़ी: सीढ़ीदार कुएँ।
    • खड़ीन: जैसलमेर में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा कृषि हेतु जल संचयन।
    • टांका: मरुस्थल में भूमिगत जल कुंड।
    • जोहड़: शेखावाटी में कच्चे बांध।

खनिज संसाधन

राजस्थान को "खनिजों का अजायबघर" कहा जाता है। जास्पर, गार्नेट (तामड़ा) और वोलेस्टोनाइट में राज्य का एकाधिकार है।

धात्विक खनिज

  • सीसा-जस्ता (Lead-Zinc): जुड़वा खनिज। खानें: जावर (उदयपुर), राजपुरा-दरीबा (राजसमन्द), रामपुरा-आगुचा (भीलवाड़ा)।
  • तांबा (Copper): खेतड़ी-सिंघाना (झुंझुनूं), खो-दरीबा (अलवर)।
  • टंगस्टन: डेगाना (नागौर) - भारत की एकमात्र सक्रिय खान।
  • चांदी: सीसा-जस्ता के साथ उप-उत्पाद।

अधात्विक खनिज

  • रॉक फॉस्फेट: झामरकोटड़ा (उदयपुर)। उर्वरक उद्योग में उपयोगी।
  • जिप्सम: बीकानेर (जामसर), नागौर, बाड़मेर। सीमेंट और सेम समस्या निवारण में उपयोगी।
  • संगमरमर (Marble): मकराना (नागौर) का सफेद मार्बल विश्व प्रसिद्ध है। मंडी: किशनगढ़।
  • पन्ना (Emerald): कालागुमान (राजसमन्द) - ग्रीन फायर बेल्ट।
  • तामड़ा (Garnet): टोंक (राजमहल), अजमेर (सरवाड़)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

वन संसाधन (Van Sampada) राजस्थान में कुल वन क्षेत्र लगभग 32,701 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 9.55% है (राष्ट्रीय लक्ष्य 33% है)।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज) एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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