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Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य और लोक नाट्य: घूमर, कालबेलिया, गवरी, ख्याल और तमाशा

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य और लोक नाट्य: घूमर, कालबेलिया, गवरी, ख्याल और तमाशा - लोक कला (नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य (Rajasthan Ke Lok Nritya) तीन तरह के हैं: क्षेत्रीय (घूमर, गींदड़, गैर, ढोल, बम, अग्नि), जन...
Quick Answer: Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य (Rajasthan Ke Lok Nritya) तीन तरह के हैं: क्षेत्रीय (घूमर, गींदड़, गैर, ढोल, बम, अग्नि), जनजातीय-जातीय (कालबेलिया, गवरी, वालर, शिकारी, चरी, चकरी) और व्यावसायिक (भवाई, तेरहताली, कच्छी घोड़ी)। घूमर को राज्य नृत्य माना जाता है। कालबेलिया के लोक गीत और नृत्य 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में आए। लोक नाट्य में ख्याल, तमाशा, रम्मत, नौटंकी और गवरी मुख्य हैं।

राजस्थान के लोक नृत्य: वर्गीकरण

राजस्थान में नृत्य ऋतु, खेती, शादी-ब्याह और लोक देवताओं की पूजा से जुड़े हैं। यह note RAS Pre के लिए गहराई वाला note है। छोटा overview राजस्थान की लोक कलाएँ में है, और जनजातियों का समाज-जीवन राजस्थान की जनजातियाँ में पढ़ें।

  • क्षेत्रीय लोक नृत्य: किसी खास अंचल की पहचान, जैसे शेखावाटी का गींदड़, जालोर का ढोल, मेवात का बम और बीकानेर का अग्नि नृत्य।
  • जनजातीय और जातीय नृत्य: भील, गरासिया, सहरिया, कथौड़ी, कालबेलिया, गुर्जर और कंजर समाज के नृत्य।
  • व्यावसायिक नृत्य: हुनर और संतुलन वाले नृत्य, जिनसे कलाकार रोजी कमाते हैं, जैसे भवाई, तेरहताली और कच्छी घोड़ी।

PYQ: RAS Pre 2016 में शंकरिया नृत्य किस जाति का है, इस पर सवाल आया (जवाब: कालबेलिया)। उसी paper में अलीबख्शी ख्याल के क्षेत्र पर भी सवाल था (जवाब: अलवर)।

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प्रमुख क्षेत्रीय लोक नृत्य: मारवाड़, मेवाड़, मेवात और शेखावाटी

1. घूमर (Ghoomar)

घूमर को राज्य नृत्य और 'नृत्यों का सिरमौर' कहा जाता है। शादी, गणगौर और तीज पर महिलाएं घेरा बनाकर घूमती हुई नाचती हैं। नाम लहंगे के घेर (घूम) से पड़ा। इसकी खास चाल 'सवाई' कहलाती है (किताबों में इसे 8 मात्रा के कहरवा की चाल बताया गया है)। ढोल, नगाड़ा और शहनाई मुख्य वाद्य हैं।

2. गींदड़ और चंग (शेखावाटी)

शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं अंचल) में होली से पहले पुरुष गींदड़ नाचते हैं। नगाड़े की ताल पर हाथ के छोटे डंडे टकराए जाते हैं। स्त्री का वेश धरने वाले पुरुष 'मेहरी' कहलाते हैं। चंग नृत्य में पुरुष होली पर चंग बजाते हुए घेरे में नाचते और धमाल गाते हैं।

3. गैर नृत्य (Gair)

मेवाड़ और बाड़मेर में होली के अगले दिन से पुरुष घेरे में गैर नाचते हैं। नर्तक 'गैरिये' और हाथ के डंडे 'खांडे' कहलाते हैं। बाड़मेर का कनाणा गांव गैर के लिए मशहूर है, जहां नर्तक सफेद लंबी आंगी पहनते हैं।

4. ढोल नृत्य (जालोर)

जालोर में शादी पर ढोली, भील, माली और सरगड़ा पुरुष यह नृत्य करते हैं। एक साथ 4-5 ढोल बजते हैं और शुरुआत 'थाकना शैली' से होती है। पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास ने इसे पहचान दिलाई।

5. बम नृत्य (मेवात)

अलवर, भरतपुर और धौलपुर में फागुन (होली) और नई फसल पर पुरुष बड़े नगाड़े (बम) की ताल पर रसिया गाते हुए नाचते हैं। इसे बम रसिया भी कहते हैं।

6. अग्नि नृत्य (कतरियासर, बीकानेर)

कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सिद्ध रात में अंगारों के ढेर (धूणा) पर 'फतै-फतै' बोलते हुए नाचते हैं। अंगारों पर चलना और मतीरा फोड़ना इसके करतब हैं।

7. कच्छी घोड़ी (शेखावाटी, नागौर-कुचामन)

पुरुष कमर पर काठ की नकली घोड़ी बांधकर, हाथ में तलवार लेकर नाचते हैं। नर्तक चार-चार की line में आगे-पीछे होकर pattern बनाते हैं। शादियों पर यह व्यावसायिक नृत्य होता है।

8. नाहर और डांग नृत्य

नाहर नृत्य भीलवाड़ा जिले के मांडल कस्बे में रंग तेरस (चैत्र कृष्ण त्रयोदशी, होली के 13 दिन बाद) पर होता है। पुरुष शरीर पर रुई लपेटकर शेर (नाहर) का स्वांग धरते हैं। ध्यान रखें: यह मांडल है, मांडलगढ़ नहीं। डांग नृत्य नाथद्‌वारा (राजसमंद) में होली पर स्त्री-पुरुष दोनों करते हैं।

Table 1: राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रीय लोक नृत्य

नृत्य प्रमुख क्षेत्र अवसर / कौन करता है याद रखने वाली बात
घूमर पूरे राजस्थान में शादी, गणगौर, तीज; महिलाएं राज्य नृत्य, चाल 'सवाई'
गींदड़ शेखावाटी होली से पहले; पुरुष डंडे टकराना, स्त्री वेश वाला 'मेहरी'
चंग शेखावाटी होली; पुरुष चंग बजाते हुए धमाल
गैर मेवाड़, बाड़मेर होली के बाद; पुरुष गैरिये, खांडे, कनाणा (बाड़मेर)
ढोल नृत्य जालोर शादी; पुरुष थाकना शैली, जयनारायण व्यास
बम नृत्य अलवर, भरतपुर, धौलपुर फागुन, नई फसल; पुरुष बड़ा नगाड़ा (बम), रसिया
अग्नि नृत्य कतरियासर (बीकानेर) रात में; जसनाथी सिद्ध धूणा, 'फतै-फतै'
कच्छी घोड़ी शेखावाटी, नागौर-कुचामन शादी; व्यावसायिक पुरुष काठ की घोड़ी, चार-चार की line
नाहर नृत्य मांडल (भीलवाड़ा) रंग तेरस; पुरुष रुई लपेटकर शेर का स्वांग
डांग नृत्य नाथद्‌वारा (राजसमंद) होली; स्त्री-पुरुष श्रीनाथजी, वल्लभ संप्रदाय

जनजातीय और जातीय लोक नृत्य: भील, गरासिया, कालबेलिया और सहरिया

1. कालबेलिया नृत्य (Kalbelia)

2010 में UNESCO ने "कालबेलिया लोक गीत और नृत्य" को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की representative list में जोड़ा। यह World Heritage Site वाली सूची नहीं है। गुलाबो सपेरा ने इसे दुनिया भर में पहचान दिलाई (पद्मश्री 2016)। काले घेरदार घाघरे में सांप जैसी लचीली चाल इसकी पहचान है। पूंगी, खंजरी और मोरचंग साथ बजते हैं। कालबेलिया के नृत्य हैं: इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया और शंकरिया। शंकरिया प्रेम कहानी पर आधारित युगल नृत्य है (RAS Pre 2016)।

2. भील जनजाति के लोक नृत्य

  • गवरी (राई): मेवाड़ के भीलों का धार्मिक नृत्य-नाट्य, शिव-भस्मासुर की कथा पर। रक्षाबंधन के अगले दिन (भाद्रपद कृष्ण एकम) से करीब 40 दिन चलता है (कुछ किताबें 45 दिन लिखती हैं)। सभी पात्र पुरुष होते हैं। इसे राजस्थान का सबसे पुराना लोक नाट्य माना जाता है।
  • नेजा: होली के आसपास खंभे पर नारियल बांधा जाता है। महिलाएं डंडे लेकर उसे बचाती हैं और पुरुष उसे उतारने की कोशिश करते हैं।
  • हाथीमना: शादी पर पुरुष घुटनों के बल बैठकर तलवार घुमाते हुए नाचते हैं।
  • द्विचकरी: दो घेरे, अंदर महिलाएं और बाहर पुरुष, जो उल्टी दिशा में घूमते हैं।
  • घूमरा: भील महिलाओं का अर्धवृत्त वाला नृत्य (डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़)।

3. गरासिया जनजाति के लोक नृत्य

  • वालर: 'गरासियों का घूमर'। आमतौर पर बिना वाद्य के धीमी चाल में होता है। स्त्री-पुरुष दो अर्धवृत्त बनाते हैं, बाहर पुरुष और अंदर महिलाएं। अगुआ के हाथ में छाता या तलवार होती है। सिरोही, आबू, पाली और जालोर में प्रचलित।
  • मांदल: गरासिया महिलाएं मांदल और थाली की ताल पर घेरे में नाचती हैं।
  • लूर: मेले और शादी पर गरासिया महिलाओं का नृत्य, जिसमें वर पक्ष और वधू पक्ष की दो टोलियां बनती हैं।
  • कूद: बिना वाद्य, सिर्फ तालियों पर स्त्री-पुरुष का नृत्य।
  • मोरिया: शादी में गणपति स्थापना के बाद रात में पुरुषों का नृत्य।

4. सहरिया, गुर्जर, कंजर और कथौड़ी नृत्य

  • शिकारी नृत्य (सहरिया): बारां जिले (किशनगंज, शाहाबाद) के सहरिया पुरुष शिकार का अभिनय करते हैं।
  • चरी नृत्य (गुर्जर): किशनगढ़ (अजमेर) की गुर्जर महिलाएं सिर पर पीतल की चरी रखकर नाचती हैं, जिसमें कपास के बीज (काकड़े) जलते रहते हैं। फलकू बाई इसकी प्रसिद्ध नर्तकी रही हैं।
  • चकरी (कंजर): हाड़ौती (किशनगंज-बारां, छबड़ा) की कंजर लड़कियां घेरदार घाघरे में तेज चक्कर लगाती हैं।
  • धाकड़ (कंजर): पुरुषों का युद्ध-अभिनय वाला नृत्य।
  • मावलिया (कथौड़ी): नवरात्र में कथौड़ी पुरुष 9 दिन यह नृत्य करते हैं। कथौड़ी मुख्य रूप से उदयपुर जिले (कोटड़ा, झाड़ोल) में रहते हैं।

व्यावसायिक लोक नृत्य: भवाई और तेरहताली

1. भवाई नृत्य (Bhavai)

भवाई मूल रूप से गुजरात से जुड़ा माना जाता है, पर राजस्थान में मेवाड़ अंचल में खूब प्रचलित है। किताबों में इसके प्रवर्तक बाघाजी जाट (केकड़ी, अजमेर) बताए जाते हैं, कुछ किताबें नाम नागोजी लिखती हैं। सिर पर कई मटके रखकर तलवार की धार, कांच के टुकड़ों और थाली के किनारे पर नाचना इसकी पहचान है। अस्मिता काला (जयपुर) जानी-मानी भवाई नृत्यांगना हैं।

2. तेरहताली नृत्य (Terah Taali)

कामड़ (कामड़िया पंथ) की महिलाएं बाबा रामदेव की आराधना में बैठकर यह नृत्य करती हैं। इसका उद्गम पाली जिले का पादरला गांव माना जाता है। शरीर पर 13 मंजीरे बांधे जाते हैं: 9 दाएं पैर पर, 2 कोहनी के ऊपर और 2 हाथों में। साथ में पुरुष तंदूरा (चौतारा) बजाते हैं। मांगी बाई को इसके लिए 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। लोक देवताओं के बारे में राजस्थान के लोक देवता में पढ़ें।

Table 2: जनजातीय और जातीय लोक नृत्य

समुदाय प्रमुख लोक नृत्य पहचान प्रमुख क्षेत्र / कलाकार
कालबेलिया इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया, शंकरिया सांप जैसी चाल; 2010 UNESCO ICH गुलाबो सपेरा
भील गवरी, नेजा, हाथीमना, द्विचकरी, घूमरा गवरी करीब 40 दिन का शिव-भस्मासुर नाट्य मेवाड़, वागड़
गरासिया वालर, मांदल, लूर, कूद, मोरिया वालर और कूद आमतौर पर बिना वाद्य सिरोही, आबू, पाली
सहरिया शिकारी नृत्य शिकार का अभिनय; पुरुष किशनगंज, शाहाबाद (बारां)
गुर्जर चरी नृत्य सिर पर जलती चरी किशनगढ़ (अजमेर), फलकू बाई
कंजर चकरी, धाकड़ चकरी में तेज चक्कर; धाकड़ युद्ध-अभिनय हाड़ौती (बारां, कोटा)
कथौड़ी मावलिया नवरात्र में 9 दिन; पुरुष कोटड़ा (उदयपुर)
कामड़ तेरहताली बैठकर 13 मंजीरे; रामदेवजी पादरला (पाली), मांगी बाई

राजस्थान के लोक नाट्य: गवरी, ख्याल, तमाशा, रम्मत

लोक नाट्य में नाच, गाना और कहानी तीनों साथ चलते हैं। RAS में ख्याल के प्रकार और उनके क्षेत्र सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं।

गवरी के पात्र

गवरी का मुख्य पात्र बुढ़िया (राई बुढ़िया) है। पुरिया शिव का पात्र है और राई/राया पार्वती का रूप है। झामट्या लोकभाषा में कविता-कथा बोलता है और कुटकड़िया सूत्रधार है, जो हर दृश्य से पहले कहानी बताता है। गवरी के अलग-अलग प्रसंग 'खेल' कहलाते हैं।

ख्याल के प्रकार

ख्याल क्षेत्र प्रवर्तक / कलाकार / पहचान
कुचामनी ख्याल कुचामन (डीडवाना-कुचामन) प्रवर्तक लच्छीराम; opera जैसी शैली; कलाकार उगमराज
शेखावाटी (चिड़ावा) ख्याल चिड़ावा, सीकर, खंडेला नानूराम और उनके शिष्य दूलिया राणा
अलीबख्शी ख्याल अलवर (मुंडावर) मुंडावर के अलीबख्श (19वीं सदी) से नाम जुड़ा
तुर्रा-कलंगी चित्तौड़गढ़, घोसुंडा, निम्बाहेड़ा संत तुकनगीर (तुर्रा) और शाह अली (कलंगी)
हेला ख्याल दौसा, लालसोट, सवाई माधोपुर लंबी ऊंची टेर ('हेला देना')
कन्हैया ख्याल करौली, सवाई माधोपुर, धौलपुर मूल रूप से मीणा समाज में
जयपुरी ख्याल जयपुर स्त्री पात्रों की भूमिका महिलाएं खुद करती हैं
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दूसरे लोक नाट्य

  • तमाशा (जयपुर): महाराष्ट्र से आया। सवाई प्रतापसिंह ने बंशीधर भट्ट को अपने गुणीजनखाने में जगह दी। खुले मंच को 'अखाड़ा' कहते हैं।
  • रम्मत: बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी और पोकरण में। जैसलमेर के तेज कवि जैसलमेरी ने रम्मत को आगे बढ़ाया।
  • नौटंकी: भरतपुर, धौलपुर, करौली अंचल में। डीग के भूरीलाल को इसे फैलाने का श्रेय दिया जाता है। डीग (पहले भरतपुर जिला) के नौटंकी कलाकार रामदयाल शर्मा को 2022 में पद्मश्री मिला।
  • स्वांग: किसी पौराणिक या ऐतिहासिक पात्र का वेश धरना। इसके कलाकार बहरूपिया कहलाते हैं।
  • चारबैत: टोंक का कव्वाली जैसा लोक नाट्य, जिसमें गायक ढप बजाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • गींदड़ (शेखावाटी) होली से पहले; गैर होली के बाद (मेवाड़, बाड़मेर का कनाणा)।
  • अग्नि नृत्य: कतरियासर (बीकानेर), जसनाथी सिद्ध, धूणा, 'फतै-फतै'।
  • बम नृत्य: अलवर-भरतपुर-धौलपुर, बड़ा नगाड़ा, रसिया।
  • डांग नृत्य: नाथद्‌वारा, होली, स्त्री-पुरुष दोनों।
  • हाथीमना: भील पुरुष घुटनों के बल तलवार के साथ; द्विचकरी: दो उल्टे घूमते घेरे।
  • लूर, मांदल, मोरिया: गरासिया नृत्य।
  • शिकारी: सहरिया (बारां); मावलिया: कथौड़ी (नवरात्र, 9 दिन)।
  • चरी: गुर्जर महिलाएं, किशनगढ़, फलकू बाई; चकरी और धाकड़: कंजर।
  • भवाई: प्रवर्तक बाघाजी जाट (केकड़ी), मटके सिर पर, अस्मिता काला।
  • तमाशा: जयपुर, बंशीधर भट्ट, सवाई प्रतापसिंह; रम्मत: बीकानेर-जैसलमेर।

RAS Prelims MCQ

  1. प्रश्न: शंकरिया, पणिहारी और इंडोणी किस समुदाय के नृत्य हैं?
    A) भील B) सहरिया C) कालबेलिया D) गरासिया
    उत्तर: C | कारण: ये तीनों कालबेलिया के नृत्य हैं; शंकरिया प्रेम कहानी पर आधारित युगल नृत्य है।
  2. प्रश्न: राजस्थान का कौन सा नृत्य आमतौर पर बिना वाद्य के, धीमी चाल में दो अर्धवृत्त बनाकर किया जाता है?
    A) गींदड़ B) गैर C) वालर D) बम
    उत्तर: C | कारण: गरासिया जनजाति का वालर आमतौर पर बिना वाद्य के होता है; बाकी तीनों में नगाड़ा या ढोल बजता है।
  3. प्रश्न: जालोर के ढोल नृत्य को पहचान दिलाने का श्रेय किस पूर्व मुख्यमंत्री को जाता है?
    A) मोहनलाल सुखाड़िया B) जयनारायण व्यास C) भैरोंसिंह शेखावत D) शिवचरण माथुर
    उत्तर: B | कारण: जयनारायण व्यास ने थाकना शैली वाले इस नृत्य को आगे बढ़ाया।
  4. प्रश्न: मेवात अंचल में फागुन और नई फसल पर बड़े नगाड़े की ताल पर कौन सा नृत्य होता है?
    A) डांग B) बम नृत्य C) नाहर D) चंग
    उत्तर: B | कारण: अलवर-भरतपुर में बम (बड़े नगाड़े) के साथ रसिया गाते हुए बम नृत्य होता है।
  5. प्रश्न: तेरहताली नृत्य के बारे में कौन सा कथन सही नहीं है?
    A) इसे कामड़ महिलाएं बैठकर करती हैं।
    B) इसका उद्गम पाली जिले का पादरला गांव माना जाता है।
    C) इसमें कुल 16 मंजीरे बांधे जाते हैं।
    D) मांगी बाई इसकी प्रसिद्ध कलाकार हैं।
    उत्तर: C | कारण: तेरहताली में 13 मंजीरे होते हैं: 9 दाएं पैर पर, 2 कोहनी के ऊपर, 2 हाथों में।
  6. प्रश्न: रंग तेरस पर होने वाला प्रसिद्ध नाहर नृत्य भीलवाड़ा जिले में कहां होता है?
    A) मांडलगढ़ B) मांडल C) शाहपुरा D) आसींद
    उत्तर: B | कारण: नाहर नृत्य मांडल कस्बे में होता है; मांडलगढ़ इसका आम भ्रम है।
  7. प्रश्न: गवरी लोक नाट्य में सूत्रधार की भूमिका कौन निभाता है?
    A) पुरिया B) राई C) कुटकड़िया D) बुढ़िया
    उत्तर: C | कारण: कुटकड़िया हर दृश्य से पहले कहानी बताता है; पुरिया शिव, राई पार्वती और बुढ़िया मुख्य पात्र है।
  8. प्रश्न: किशनगढ़ (अजमेर) की फलकू बाई किस लोक नृत्य की प्रसिद्ध कलाकार रही हैं?
    A) चकरी B) चरी C) भवाई D) घूमर
    उत्तर: B | कारण: फलकू बाई गुर्जर महिलाओं के चरी नृत्य की प्रसिद्ध नर्तकी रही हैं।
  9. प्रश्न: शेखावाटी के गींदड़ नृत्य में स्त्री का वेश धरने वाले पुरुष को क्या कहते हैं?
    A) गैरिये B) पुरिया C) मेहरी D) झामट्या
    उत्तर: C | कारण: गींदड़ में स्त्री वेश वाला पुरुष 'मेहरी' कहलाता है; गैरिये गैर के नर्तक हैं।
  10. प्रश्न: ख्याल और उसके क्षेत्र का कौन सा जोड़ा सही नहीं है?
    A) अलीबख्शी ख्याल - अलवर B) हेला ख्याल - लालसोट C) तुर्रा-कलंगी - घोसुंडा D) कुचामनी ख्याल - चिड़ावा
    उत्तर: D | कारण: चिड़ावा शेखावाटी ख्याल (नानूराम) का केंद्र है; कुचामनी ख्याल कुचामन का है (लच्छीराम)।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: ढोल नृत्य की 'थाकना शैली' क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: जालोर के ढोल नृत्य में 4-5 ढोल एक साथ बजते हैं। शुरुआत में मुखिया ढोली थाकना शैली में ताल बांधता है, फिर नर्तक जोश में तलवार या डंडे लेकर नाचते हैं। जयनारायण व्यास ने इसे पहचान दिलाई।
  2. प्रश्न: गरासिया जनजाति के वालर नृत्य की दो खास बातें लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: (1) आमतौर पर कोई वाद्य नहीं बजता, धीमी चाल रहती है। (2) स्त्री-पुरुष दो अर्धवृत्त बनाते हैं; अगुआ के हाथ में छाता या तलवार होती है।
  3. प्रश्न: कालबेलिया नृत्य की वैश्विक पहचान पर टिप्पणी कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल। गुलाबो सपेरा (पद्मश्री 2016) ने इसे पहचान दिलाई। इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया, शंकरिया इसके रूप हैं।
  4. प्रश्न: गवरी के प्रमुख पात्र कौन हैं?
    उत्तर रूपरेखा: बुढ़िया (मुख्य पात्र), पुरिया (शिव), राई (पार्वती), झामट्या (कविता-कथा बोलने वाला), कुटकड़िया (सूत्रधार)। सभी भूमिकाएं पुरुष करते हैं।
  5. प्रश्न: तमाशा लोक नाट्य पर टिप्पणी लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: जयपुर का लोक नाट्य, महाराष्ट्र से आया। सवाई प्रतापसिंह ने बंशीधर भट्ट को गुणीजनखाने में जगह दी। खुले मंच 'अखाड़ा' पर होता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान के प्रमुख जनजातीय लोक नृत्यों का सामाजिक और धार्मिक महत्व बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: (1) भील: गवरी (करीब 40 दिन का शिव अनुष्ठान, पूरे गांव की भागीदारी), नेजा (होली का खेल), हाथीमना (शादी पर वीरता)। (2) गरासिया: वालर, लूर (शादी-मेले में वर-वधू पक्ष की टोलियां)। (3) सहरिया: शिकारी नृत्य (जंगल का जीवन)। (4) कथौड़ी: मावलिया (नवरात्र)। ये नृत्य समाज को जोड़ते हैं और मौखिक परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।
  2. प्रश्न: राजस्थान के ख्याल लोक नाट्य के प्रमुख प्रकारों का परिचय दीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: कुचामनी (लच्छीराम), शेखावाटी-चिड़ावा (नानूराम, दूलिया राणा), अलीबख्शी (अलवर, अलीबख्श), तुर्रा-कलंगी (तुकनगीर-शाह अली, चित्तौड़), हेला (लालसोट, दौसा), कन्हैया (करौली, मीणा समाज), जयपुरी (महिलाएं खुद भूमिका करती हैं)। विषय पौराणिक और वीर कथाएं; गायन ऊंचे सुर में।

FAQs

1. राजस्थान का राज्य नृत्य कौन सा है?

घूमर को राजस्थान का राज्य नृत्य माना जाता है। इसे 'नृत्यों का सिरमौर' भी कहते हैं, और इसकी खास चाल 'सवाई' कहलाती है।

2. कौन से लोक नृत्य बिना वाद्य के होते हैं?

गरासिया जनजाति का वालर और कूद आमतौर पर बिना वाद्य के, सिर्फ पदचाप और तालियों पर होते हैं।

3. क्या कालबेलिया 'विश्व धरोहर' है?

कालबेलिया लोक गीत और नृत्य 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में आए। यह किलों वाली World Heritage Site सूची से अलग सूची है।

4. तेरहताली में 13 मंजीरे कैसे बांधे जाते हैं?

9 मंजीरे दाएं पैर पर, 2 कोहनी के ऊपर और 2 हाथों में होते हैं। कामड़ महिलाएं बैठकर इन्हें बजाती हैं।

5. अलीबख्शी ख्याल किस क्षेत्र का है?

अलीबख्शी ख्याल अलवर क्षेत्र का है। इसका नाम मुंडावर के अलीबख्श से जुड़ा है। चिड़ावा वाला ख्याल शेखावाटी ख्याल है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • घूमर: राज्य नृत्य, नृत्यों का सिरमौर, खास चाल 'सवाई'।
  • कालबेलिया: 2010 में UNESCO ICH सूची; शंकरिया, इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया; गुलाबो सपेरा।
  • वालर और कूद: गरासिया के बिना वाद्य वाले नृत्य।
  • ढोल नृत्य: जालोर, थाकना शैली, जयनारायण व्यास।
  • नाहर नृत्य: मांडल (भीलवाड़ा), रंग तेरस; मांडलगढ़ नहीं।
  • तेरहताली: कामड़ महिलाएं, 13 मंजीरे, पादरला (पाली), मांगी बाई।
  • गवरी: भीलों का करीब 40 दिन का नाट्य; कुटकड़िया सूत्रधार, झामट्या कविता बोलता है।
  • ख्याल: कुचामनी-लच्छीराम, चिड़ावा-नानूराम, अलीबख्शी-अलवर, तुर्रा-कलंगी-चित्तौड़।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य (Rajasthan Ke Lok Nritya) तीन तरह के हैं: क्षेत्रीय (घूमर, गींदड़, गैर, ढोल, बम, अग्नि), जनजातीय-जातीय (कालबेलिया, गवरी, वालर, शिकारी, चरी, चकरी) और व्यावसायिक (भवाई, तेरहताली, कच्छी घोड़ी)।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य और लोक नाट्य: घूमर, कालबेलिया, गवरी, ख्याल और तमाशा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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In this Chapter

Rajasthan ke Lok Nritya: राजस्थान के लोक नृत्य और लोक नाट्य: घूमर, कालबेलिया, गवरी, ख्याल और तमाशा
राजस्थान की लोक कलाएँ
Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र, तत, सुषिर, अवनद्ध और घन वाद्य