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Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र, तत, सुषिर, अवनद्ध और घन वाद्य

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र, तत, सुषिर, अवनद्ध और घन वाद्य - लोक कला (नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र (Rajasthan Ke Lok Vadya Yantra) भरत मुनि के नाट्यशास्त्र वाले चार वर्गों में बा...
Quick Answer: Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र (Rajasthan Ke Lok Vadya Yantra) भरत मुनि के नाट्यशास्त्र वाले चार वर्गों में बांटे जाते हैं: तत (तार वाले: रावणहत्था, कामायचा, सारंगी, भपंग, जंतर, चौतारा), सुषिर (फूंक वाले: अलगोजा, शहनाई, पूंगी, मशक, नागफणी), अवनद्ध (खाल मढ़े: पखावज, ढोल, चंग, मांदल, नगाड़ा) और घन (ठोस: मंजीरा, खड़ताल, झांझ)। मांगणियार, लंगा, भोपा, कामड़ और कालबेलिया इनके पारंपरिक वादक हैं।

RAS Pre में वाद्य की श्रेणी, तारों की संख्या, वादक जाति और जुड़ा हुआ नृत्य या लोक देवता पूछे जाते हैं। RAS Pre 2013 में सुषिर वाद्य पहचानने पर सवाल आया (कामायचा सुषिर नहीं, तत वाद्य है)। RAS Pre 2024 में चौतारा के तार और उपयोग पर सवाल आया। छोटा overview राजस्थान की लोक कलाएँ में है।

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राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र (Rajasthan Ke Lok Vadya Yantra): चार प्रमुख श्रेणियां

  1. तत वाद्य (Chordophones): तार के कंपन से बजते हैं। गज (bow) से घिसकर या उंगली/मिजराब से छेड़कर।
  2. सुषिर वाद्य (Aerophones): फूंक या हवा से बजते हैं।
  3. अवनद्ध वाद्य (Membranophones): खोल पर चमड़ा मढ़ा होता है, थाप या डंडी से बजते हैं।
  4. घन वाद्य (Idiophones): धातु या लकड़ी के ठोस टुकड़े आपस में टकराकर बजते हैं।
श्रेणी आवाज कैसे बनती है प्रमुख उदाहरण पारंपरिक वादक
तत तार का कंपन रावणहत्था, कामायचा, सारंगी, भपंग, जंतर, चौतारा, इकतारा भोपा, मांगणियार, लंगा, जोगी, कामड़
सुषिर फूंक / हवा अलगोजा, शहनाई, पूंगी, सतारा, मशक, करणा, भूंगल, नागफणी कालबेलिया, मेव, भील, भोपा
अवनद्ध मढ़े चमड़े पर चोट पखावज, ढोल, चंग, मांदल, नगाड़ा, खंजरी, डेरू ढोली, राणा, भील, गरासिया
घन ठोस टुकड़ों की टक्कर मंजीरा, खड़ताल, झांझ, झालर, भरणी, लेजिम, थाली कामड़, मांगणियार, साधु-संत

तत वाद्य यंत्र (String Instruments)

1. रावणहत्था

आधे नारियल की कटोरी पर बकरे की खाल मढ़कर, उसमें बांस की डंडी लगाकर बनता है। किताबों में इसके 9 तार बताए जाते हैं। घुंघरू लगे गज से बजता है। भोपे पाबूजी की फड़ बांचते समय और रामदेवजी के गीतों में इसे बजाते हैं। इसे वायलिन का पुराना रूप भी कहा जाता है।

2. कामायचा

जैसलमेर-बाड़मेर के मांगणियार समाज का गज से बजने वाला वाद्य। गोल पेट शीशम की लकड़ी का होता है। इसमें 3 मुख्य तार और कई सहायक (sympathetic) तार होते हैं; कुल तारों की संख्या किताबों में अलग-अलग (16 या 27 तक) मिलती है। हमीरा (जैसलमेर) के साकार खां मांगणियार इसके सबसे बड़े कलाकार माने जाते हैं (पद्मश्री 2012, निधन 2013)।

3. सारंगी

तत वाद्यों में सबसे अच्छा माना जाने वाला वाद्य, गज से बजता है। सिंधी सारंगी (करीब 27 तार) पश्चिमी राजस्थान के लंगा बजाते हैं। गुजरातन सारंगी में 7 तार होते हैं। जोगिया सारंगी अलवर-भरतपुर के भर्तृहरि वाले जोगी बजाते हैं। सीकर में जन्मे उस्ताद सुल्तान खान प्रसिद्ध सारंगी वादक थे।

4. भपंग

मेवात (अलवर) के जोगियों का एक तार वाला वाद्य। तूंबे के नीचे खाल मढ़ी होती है और तार को कांख में दबाकर खींचने-ढीला करने से सुर बदलता है। जहूर खां मेवाती इसके जाने-माने वादक रहे। अलवर के गफरुद्दीन मेवाती जोगी को 2026 में पद्मश्री मिला (घोषणा जनवरी 2026)।

5. जंतर और चौतारा

जंतर को वीणा का लोक रूप माना जाता है। बांस की डांड पर दो तूंबे लगे होते हैं, डांड पर 22 परदे मोम से चिपके रहते हैं और 5-6 तार होते हैं। गुर्जर भोपे देवनारायणजी की फड़ बांचते समय इसे गले में लटकाकर खड़े होकर बजाते हैं।

चौतारा (तंदूरा) में 4 तार होते हैं, इसलिए नाम 'चौ-तारा'। कामड़ जाति के लोग रामदेवजी के भजन गाते समय इसे बजाते हैं; तेरहताली नृत्य में भी यही साथ बजता है (RAS Pre 2024)।

6. दूसरे तत वाद्य

  • इकतारा: एक तार; एक हाथ से बजाते हैं, दूसरे हाथ में करताल रहती है। साधु-संत भजन में बजाते हैं।
  • गुजरी: 5 तार, कामायचा जैसा।
  • चिकारा: 3 तार; गरासिया (सिरोही) और मेव (अलवर) बजाते हैं।
  • रवाज (रबाब): सारंगी जैसा, पर गज से नहीं, नाखून या मिजराब से बजता है; भाट और रावल बजाते हैं।

सुषिर वाद्य यंत्र (Wind Instruments)

1. अलगोजा

बांस की दो बांसुरियों का जोड़ा, जिसे एक साथ मुंह में रखकर बजाते हैं; हर बांसुरी में 5 छेद होते हैं। कई किताबें इसे राजस्थान का 'राज्य वाद्य' लिखती हैं, पर इसकी कोई सरकारी अधिसूचना नहीं मिली। मेव, भील और कालबेलिया इसे बजाते हैं, और तेजाजी की कथा में यह खास है। जैसलमेर के अलगोजा वादक तगाराम भील को 2026 में पद्मश्री मिला। किताबों में रामनाथ चौधरी (जयपुर) का नाम नाक से अलगोजा बजाने के लिए आता है।

2. शहनाई, पूंगी और सतारा

शहनाई शादी जैसे शुभ मौकों पर नगाड़े के साथ बजती है। पूंगी (बीन) तूंबे में दो नलियां लगाकर बनती है; कालबेलिया और सपेरे इसे बजाते हैं। सतारा बांसुरी, अलगोजा और शहनाई का मिला-जुला रूप है, जिसे बाड़मेर-जैसलमेर के चरवाहे बजाते हैं।

3. मशक, बांकिया और मोरचंग

मशक बकरे की खाल की थैली वाला देसी bagpipe है; भैरूंजी के भोपे बजाते हैं। बांकिया धातु का बड़ा बिगुल जैसा वाद्य है, जो जुलूस और शुभ मौकों पर बजता है। मोरचंग होंठों और दांतों के बीच दबाकर बजने वाला छोटा लोहे का वाद्य है; लंगा-मांगणियार बजाते हैं। राजस्थान की किताबें इसे सुषिर में रखती हैं, पर वाद्य-वर्गीकरण के हिसाब से यह jaw harp यानी घन वाद्य है (कुछ सरकारी सूचियां भी इसे घन में रखती हैं)।

4. करणा, भूंगल और नागफणी

  • करणा: पीतल का बहुत लंबा वाद्य (राजस्थान का सबसे लंबा वाद्य कहा जाता है), युद्ध और राज दरबार में बजता था।
  • भूंगल: धातु की लंबी तुरही; युद्ध में बजने से इसे 'रणभेरी' कहते हैं। भवाई जाति के कलाकार इसे बजाते हैं।
  • नागफणी: पीतल की घुमावदार नली, जिसका मुंह सांप के फन जैसा होता है।

अवनद्ध वाद्य यंत्र (Percussion Instruments)

1. पखावज (मृदंग)

लकड़ी का दोमुंहा ढोल, जिसके बाएं मुंह पर गीला आटा लगाने से गहरी आवाज आती है। ध्रुपद-धमार गायन और नाथद्‌वारा (राजसमंद) के श्रीनाथजी मंदिर की हवेली संगीत परंपरा में इसका खास स्थान है। नाथद्‌वारा घराने के पंडित पुरुषोत्तम दास को 1984 में पद्मश्री मिला।

2. ढोल और चंग

ढोल शादी और नृत्य का मुख्य ताल वाद्य है; जालोर के ढोल नृत्य में 4-5 ढोल थाकना शैली में बजते हैं। चंग लकड़ी के गोल घेरे पर खाल मढ़कर बनता है; शेखावाटी में होली पर इसे बजाते हुए धमाल गाई जाती है।

3. मांदल और नगाड़ा

मांदल पकी मिट्टी के खोल पर खाल मढ़कर बना ढोल है। भील गवरी में और गरासिया महिलाएं मांदल नृत्य में इसे बजाती हैं। इसे शिव-पार्वती का वाद्य माना जाता है। नगाड़ा सबसे बड़ा अवनद्ध वाद्य माना जाता है; राणा और ढोली जाति के लोग बजाते हैं। पुष्कर (अजमेर) के रामकिशन सोलंकी प्रसिद्ध नगाड़ा वादक हैं।

4. दूसरे अवनद्ध वाद्य

  • खंजरी: लकड़ी के घेरे पर पतली खाल; बाएं हाथ में पकड़कर दाएं हाथ से बजाते हैं। कालबेलिया और निर्गुण संत बजाते हैं।
  • दमामा (टामक): लोहे की कड़ाही जैसे खोल पर चमड़ा मढ़ा युद्ध वाद्य।
  • ताशा: धातु की उथली परात पर खाल; मुहर्रम के ताजिए के जुलूस में बजता है।
  • डेरू: डमरू का बड़ा रूप; गोगाजी के भोपे बजाते हैं।

घन वाद्य यंत्र (Idiophones)

1. मंजीरा और खड़ताल

मंजीरा पीतल-कांसे की दो छोटी कटोरियां हैं; तेरहताली नृत्य में कामड़ महिलाएं 13 मंजीरे बांधती हैं। खड़ताल लकड़ी (कैर, शीशम) की पट्टियों से बनती है और एक हाथ में दो पट्टियां लेकर बजाई जाती है। बाड़मेर के सिद्दीक खां मांगणियार इसके प्रसिद्ध कलाकार रहे।

2. दूसरे घन वाद्य

  • झांझ: मंजीरे का बड़ा रूप; कच्छी घोड़ी नृत्य और आरती में बजता है।
  • झालर: धातु की गोल प्लेट, मंदिर में आरती के समय बजती है।
  • भरणी: मिट्टी के मटके के मुंह पर कांसे की प्लेट रखकर दो डंडियों से बजाते हैं; पूर्वी राजस्थान में सांप काटने के इलाज वाली रस्म में।
  • लेजिम: लकड़ी की छड़ में लोहे की जंजीर और पीतल की पत्तियां; गरासिया वाद्य।
  • रमझोल: चमड़े की पट्टी पर सिले घुंघरू, जिन्हें नर्तक पैरों में बांधते हैं (गैर नृत्य)।
  • थाली: कांसे की थाली, डंडी से बजाते हैं; चरी, गैर और गवरी में।

लोक वाद्य यंत्र, जुड़े नृत्य और प्रमुख कलाकार

वाद्य यंत्र श्रेणी किससे जुड़ा प्रमुख कलाकार / क्षेत्र
रावणहत्था तत पाबूजी की फड़ भोपा (मारवाड़)
जंतर तत देवनारायणजी की फड़ गुर्जर भोपे
चौतारा (तंदूरा) तत (4 तार) रामदेवजी के भजन, तेरहताली कामड़ जाति
कामायचा तत मांगणियार गायन साकार खां (हमीरा, जैसलमेर)
सारंगी तत लंगा गायन सुल्तान खान (सीकर)
भपंग तत (1 तार) मेवाती जोगी जहूर खां, गफरुद्दीन मेवाती जोगी (अलवर)
अलगोजा सुषिर तेजाजी कथा, ढोला-मारू तगाराम भील (जैसलमेर)
पखावज अवनद्ध हवेली संगीत, ध्रुपद पं. पुरुषोत्तम दास (नाथद्‌वारा)
मांदल अवनद्ध (मिट्टी का) गवरी, गरासिया मांदल नृत्य भील, गरासिया
नगाड़ा अवनद्ध शहनाई के साथ, मेले रामकिशन सोलंकी (पुष्कर)
खड़ताल घन मांगणियार संगीत सिद्दीक खां (बाड़मेर)
मंजीरा घन तेरहताली मांगी बाई, कामड़ महिलाएं

फड़ और लोक देवताओं के बारे में राजस्थान के लोक देवता में पढ़ें।

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महत्वपूर्ण तथ्य: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र और उनके प्रसिद्ध कलाकार

  • चार वर्ग नाट्यशास्त्र से: तत, सुषिर, अवनद्ध, घन।
  • कामायचा तत वाद्य है, सुषिर नहीं; सुरनाई, अलगोजा, नागफणी सुषिर हैं।
  • चौतारा (तंदूरा): 4 तार, कामड़, रामदेवजी के भजन।
  • जंतर: दो तूंबे, 22 परदे, देवनारायणजी की फड़।
  • रावणहत्था: नारियल की कटोरी, पाबूजी की फड़।
  • भपंग: एक तार, कांख में दबाकर; गफरुद्दीन मेवाती जोगी पद्मश्री 2026।
  • अलगोजा: दो बांसुरी; तगाराम भील (जैसलमेर) पद्मश्री 2026।
  • पखावज: पं. पुरुषोत्तम दास, नाथद्‌वारा, पद्मश्री 1984।
  • मोरचंग: राजस्थान की किताबों में सुषिर, वाद्य-वर्गीकरण में घन (jaw harp)।
  • करणा: सबसे लंबा वाद्य; नगाड़ा: सबसे बड़ा अवनद्ध वाद्य।

RAS Prelims MCQ

  1. प्रश्न: लोक वाद्य 'चौतारा' के बारे में कौन सा कथन सही है?
    A) इसमें 3 तार होते हैं B) यह सुषिर वाद्य है C) कामड़ इसे रामदेवजी के भजनों में बजाते हैं D) यह मिट्टी का ढोल है
    उत्तर: C | कारण: चौतारा (तंदूरा) 4 तार वाला तत वाद्य है, जिसे कामड़ रामदेवजी के भजनों में बजाते हैं।
  2. प्रश्न: पाबूजी की फड़ बांचते समय भोपे किस तत वाद्य का प्रयोग करते हैं?
    A) जंतर B) कामायचा C) रावणहत्था D) चौतारा
    उत्तर: C | कारण: पाबूजी की फड़ के साथ रावणहत्था बजता है; जंतर देवनारायणजी की फड़ में बजता है।
  3. प्रश्न: पद्मश्री साकार खां मांगणियार किस वाद्य के कलाकार थे?
    A) कामायचा B) भपंग C) खड़ताल D) पखावज
    उत्तर: A | कारण: हमीरा (जैसलमेर) के साकार खां कामायचा के सबसे बड़े कलाकार माने जाते हैं (पद्मश्री 2012)।
  4. प्रश्न: 2026 में पद्मश्री पाने वाले अलवर के गफरुद्दीन मेवाती जोगी किस वाद्य के वादक हैं?
    A) जंतर B) भपंग C) अलगोजा D) रवाज
    उत्तर: B | कारण: गफरुद्दीन मेवाती जोगी मेवात के एक तार वाले वाद्य भपंग के वादक हैं।
  5. प्रश्न: देवनारायणजी की फड़ के साथ बजने वाले जंतर में डांड पर कितने परदे होते हैं?
    A) 9 B) 13 C) 14 D) 22
    उत्तर: D | कारण: जंतर की बांस की डांड पर 22 परदे मोम से चिपकाए जाते हैं; 9 तार रावणहत्था के बताए जाते हैं।
  6. प्रश्न: तेरहताली नृत्य में मुख्य रूप से कौन सा घन वाद्य बजता है?
    A) खड़ताल B) मंजीरा C) झालर D) भरणी
    उत्तर: B | कारण: तेरहताली में कामड़ महिलाएं शरीर पर 13 मंजीरे बांधकर बैठकर बजाती हैं।
  7. प्रश्न: वाद्य और उसकी श्रेणी का कौन सा जोड़ा सही नहीं है?
    A) रावणहत्था - तत B) नागफणी - सुषिर C) मांदल - घन D) नगाड़ा - अवनद्ध
    उत्तर: C | कारण: मांदल मिट्टी के खोल पर खाल मढ़कर बनता है, इसलिए यह अवनद्ध वाद्य है।
  8. प्रश्न: नाथद्‌वारा की हवेली संगीत परंपरा से जुड़े पंडित पुरुषोत्तम दास किस वाद्य के कलाकार थे?
    A) तबला B) पखावज C) ढोलक D) नगाड़ा
    उत्तर: B | कारण: पं. पुरुषोत्तम दास नाथद्‌वारा घराने के पखावज वादक थे (पद्मश्री 1984)।
  9. प्रश्न: सिंधी सारंगी और गुजरातन सारंगी में तारों की संख्या का सही जोड़ा कौन सा है?
    A) 27 और 7 B) 7 और 27 C) 16 और 4 D) 9 और 5
    उत्तर: A | कारण: सिंधी सारंगी में करीब 27 तार और गुजरातन सारंगी में 7 तार होते हैं।
  10. प्रश्न: इनमें से कौन सा वाद्य सुषिर नहीं है?
    A) करणा B) भूंगल C) सतारा D) रवाज
    उत्तर: D | कारण: रवाज तार वाला (तत) वाद्य है; करणा, भूंगल और सतारा फूंक से बजते हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: लोक वाद्यों की चार श्रेणियां उदाहरण के साथ लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: नाट्यशास्त्र के अनुसार: तत (रावणहत्था, चौतारा), सुषिर (अलगोजा, नागफणी), अवनद्ध (पखावज, मांदल), घन (मंजीरा, खड़ताल)।
  2. प्रश्न: रावणहत्था की बनावट और उपयोग बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: आधे नारियल की कटोरी पर खाल, बांस की डंडी, किताबों में 9 तार, घुंघरू लगा गज। भोपे पाबूजी की फड़ और रामदेवजी के गीतों में बजाते हैं।
  3. प्रश्न: चौतारा और जंतर में अंतर लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: चौतारा: 4 तार, कामड़, रामदेवजी के भजन। जंतर: दो तूंबे, 22 परदे, 5-6 तार, गुर्जर भोपे, देवनारायणजी की फड़।
  4. प्रश्न: कामायचा पर टिप्पणी कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: मांगणियार का गज वाला तत वाद्य, शीशम का गोल पेट, 3 मुख्य और कई सहायक तार। साकार खां (हमीरा) इसके सबसे बड़े कलाकार, पद्मश्री 2012।
  5. प्रश्न: मांदल का जनजातीय जीवन में क्या महत्व है?
    उत्तर रूपरेखा: मिट्टी के खोल वाला अवनद्ध वाद्य, शिव-पार्वती से जुड़ा माना जाता है। भील गवरी में और गरासिया महिलाएं मांदल नृत्य में बजाती हैं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान के तत वाद्यों और उनसे जुड़ी फड़ और भजन परंपरा का वर्णन कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: (1) रावणहत्था: पाबूजी की फड़। (2) जंतर: देवनारायणजी की फड़। (3) चौतारा: कामड़, रामदेवजी के भजन, तेरहताली। (4) कामायचा और सारंगी: मांगणियार और लंगा का दरबारी-लोक संगीत। (5) भपंग: मेवाती जोगी। ये वाद्य लोक देवताओं की गाथाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे ले जाते हैं।
  2. प्रश्न: पारंपरिक वादक जातियों की भूमिका और लोक वाद्यों के संरक्षण की चुनौतियां बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: (1) जातियां: मांगणियार (कामायचा, खड़ताल), लंगा (सिंधी सारंगी), मेवाती जोगी (भपंग), कामड़ (चौतारा, मंजीरा), भोपा (रावणहत्था, जंतर), ढोली-राणा (ढोल, नगाड़ा)। (2) चुनौतियां: नई पीढ़ी की कम रुचि, रोजी का संकट, वाद्य बनाने वाले कारीगर कम। (3) संरक्षण: रूपायन संस्थान (बोरुंदा, कोमल कोठारी), पद्म सम्मान (2026 में भपंग और अलगोजा वादक), पर्यटन और मंच से जोड़ना।

FAQs

1. क्या अलगोजा राजस्थान का राज्य वाद्य है?

कई किताबें अलगोजा को 'राज्य वाद्य' लिखती हैं, पर राज्य सरकार की कोई अधिसूचना नहीं मिली। Exam में यह विकल्प आए तो किताबों वाला जवाब अलगोजा ही है।

2. रावणहत्था और कामायचा में क्या अंतर है?

रावणहत्था नारियल की कटोरी और बांस से बनता है और भोपे फड़ में बजाते हैं। कामायचा शीशम का होता है, इसमें कई सहायक तार होते हैं और मांगणियार बजाते हैं।

3. देवनारायणजी की फड़ के साथ कौन सा वाद्य बजता है?

जंतर। इसमें दो तूंबे और 22 परदे होते हैं, और गुर्जर भोपे इसे खड़े होकर बजाते हैं।

4. कामायचा सुषिर वाद्य क्यों नहीं है?

कामायचा गज से तार घिसकर बजता है, इसलिए यह तत वाद्य है। सुषिर वाद्य फूंक से बजते हैं, जैसे सुरनाई, अलगोजा और नागफणी।

5. मिट्टी से बना कौन सा ताल वाद्य मशहूर है?

मांदल। यह पकी मिट्टी के खोल पर खाल मढ़कर बनता है और गवरी व गरासिया मांदल नृत्य में बजता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • चार वर्ग: तत (तार), सुषिर (फूंक), अवनद्ध (खाल), घन (ठोस)।
  • कामायचा तत वाद्य है; सुरनाई, अलगोजा, नागफणी सुषिर (RAS Pre 2013)।
  • चौतारा: 4 तार, कामड़, रामदेवजी के भजन (RAS Pre 2024)।
  • फड़: पाबूजी में रावणहत्था, देवनारायणजी में जंतर (22 परदे)।
  • कलाकार: साकार खां (कामायचा, पद्मश्री 2012), पुरुषोत्तम दास (पखावज, पद्मश्री 1984), सिद्दीक खां (खड़ताल)।
  • पद्मश्री 2026: गफरुद्दीन मेवाती जोगी (भपंग, अलवर), तगाराम भील (अलगोजा, जैसलमेर)।
  • सारंगी: सिंधी करीब 27 तार, गुजरातन 7 तार।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र (Rajasthan Ke Lok Vadya Yantra) भरत।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ke Lok Vadya Yantra: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र, तत, सुषिर, अवनद्ध और घन वाद्य एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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