RAS (आरपीएससी) 5 min read

Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता: पंचपीर, तेजाजी, देवनारायणजी व प्रमुख मेले

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता: पंचपीर, तेजाजी, देवनारायणजी व प्रमुख मेले - सांस्कृतिक राजस्थान (त्यौहार, आभूषण)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता (Rajasthan Ke Lok Devta): राजस्थान में लोक कल्याण, गौ रक्षा और सामाजिक समरसता के लिए प्राण द...
Quick Answer: Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता (Rajasthan Ke Lok Devta): राजस्थान में लोक कल्याण, गौ रक्षा और सामाजिक समरसता के लिए प्राण देने वाले महापुरुष लोक देवता कहलाते हैं। इनमें पांच प्रमुख देवता 'पंचपीर' हैं—पाबूजी (कोलूमण्ड, फलौदी), हड़बूजी (बेंगटी, फलौदी), रामदेवजी (रुणेचा, जैसलमेर), मेहाजी मांगलिया (बापिणी, फलौदी) और गोगाजी (ददरेवा, चूरू व गोगामेड़ी, हनुमानगढ़)। इनके अलावा वीर तेजाजी (खड़नाल, नागौर), भगवान देवनारायणजी (आसींद, भीलवाड़ा), राव मल्लीनाथजी (तिलवाड़ा, बालोतरा) और वीर कल्लाजी राठौड़ (चार हाथों वाले देवता) प्रमुख हैं। परबतसर का तेजाजी पशु मेला, तिलवाड़ा का मल्लीनाथ पशु मेला और रुणेचा मेला बड़े धार्मिक केंद्र हैं।

राजस्थान में लोक देवताओं का इतिहास गौ सेवा, शरणागत रक्षा और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। RPSC RAS में लोक देवताओं, उनकी फड़, प्रतीक और मेलों पर सवाल पूछे जाते हैं। कला-संस्कृति के लिए राजस्थान के किले, मंदिर और मेले व प्रदर्शन कलाओं के लिए राजस्थान के लोक नृत्य, नाट्य और वाद्य यंत्र पढ़ें। गोगा नवमी, तेजा दशमी जैसे त्योहारों की तिथियां राजस्थान के त्योहार और आभूषण में भी हैं। 28 दिसंबर 2024 से राजस्थान में 41 जिले और 7 संभाग हैं। कोलूमण्ड (कोलू), देचू, बेंगटी व बापिणी फलौदी जिले में हैं; परबतसर डीडवाना-कुचामन में है; तिलवाड़ा बालोतरा में है; आसींद भीलवाड़ा में है और देवमाली ब्यावर में स्थित है।

Advertisement

राजस्थान के लोक देवता (Rajasthan Ke Lok Devta): पंचपीर परंपरा

मारवाड़ में हिंदू और मुस्लिम दोनों संप्रदायों में पूजे जाने वाले पांच देव 'पंचपीर' कहलाते हैं:

"पाबू, हड़बू, रामदे, गोगा, मेहा जी।
पांचूं पीर पधारजो, गोगाजी जेहा जी।"

पंचपीरों में पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, गोगाजी और मेहाजी मांगलिया आते हैं। वीर तेजाजी और देवनारायणजी पंचपीर में शामिल नहीं हैं।

1. पाबूजी राठौड़ (Pabuji)

पाबूजी का जन्म कोलूमण्ड (फलौदी) में धांधलजी राठौड़ के घर हुआ। ये लक्ष्मण के अवतार, ऊंटों के देवता और प्लेग रक्षक माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार मारवाड़ में ऊंट लाने का श्रेय इन्हें है; राइका (रेबारी) जाति इन्हें पूजती है। देवल चारणी की घोड़ी 'केसर कालमी' लेकर विवाह करने गए। जायल के जींदराव खींची से देवल की गायें बचाते हुए 1276 ईस्वी में वीरगति पाई; परंपरा के अनुसार यह युद्ध देचू (फलौदी) में हुआ। चांदा, डेमा और हरमल इनके साथी थे। इनकी फड़ सबसे लोकप्रिय है, जिसे नायक भोपे 'रावणहत्था' वाद्य से बांचते हैं। पवाड़े 'माट' वाद्य पर गाते हैं। आशिया मोड़जी ने 'पाबू प्रकाश' लिखा। चैत्र अमावस्या को कोलूमण्ड में मेला लगता है।

2. बाबा रामदेवजी (Baba Ramdevji)

रामदेवजी का जन्म उंडूकाश्मीर (शिव, बाड़मेर) में अजमलजी तंवर और मैणादे के घर हुआ। ये कृष्ण/विष्णु अवतार माने जाते हैं। इन्होंने भैरव राक्षस का दमन कर रुणेचा (रामदेवरा, जैसलमेर) बसाया और 1458 ईस्वी में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को जीवित समाधि ली। एक दिन पहले धर्म-बहन डाली बाई (मेघवाल) ने समाधि ली थी। रामदेवजी कवि थे; इनका ग्रंथ 'चौबीस वाणियां' है। इन्होंने कामड़िया पंथ चलाया, जिसकी महिलाएं 'तेरहताली नृत्य' करती हैं। इनके भक्त 'रिखिया', जागरण 'जम्मा', पचरंगी ध्वज 'नेजा' और चरण चिह्न 'पगलिए' कहलाते हैं। भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक रुणेचा में मेला भरता है। मुस्लिम इन्हें 'रामा पीर' मानकर पूजते हैं। कामड़ लोग इनके भजन चार तार वाले चौतारा (तंदूरा) पर गाते हैं।

3. गोगाजी चौहान (Gogaji)

गोगाजी का जन्म ददरेवा (चूरू) में जेवर सिंह और बाछल के घर हुआ। गुरु गोरखनाथ और घोड़ी 'नीली घोड़ी' थी। महमूद गजनवी से गायों की रक्षा में लड़े; परंपरा के अनुसार गजनवी ने इन्हें 'जाहरपीर' कहा। ददरेवा में 'शीर्ष मेड़ी' और नोहर (हनुमानगढ़) में 'धुर मेड़ी' (गोगामेड़ी) है। सांचौर (जालौर) में 'गोगाजी की ओल्डी' है। गोगामेड़ी मंदिर मकबरेनुमा है जिस पर 'बिस्मिल्लाह' लिखा है; आधुनिक रूप गंगासिंह ने दिया। परंपरा के अनुसार भाद्रपद में हिंदू और बाकी 11 माह 'चायल' (मुस्लिम) पुजारी सेवा करते हैं। किसान बुवाई पर 9 गांठों की 'गोगा राखड़ी' बांधते हैं। भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) को गोगामेड़ी में मेला भरता है। RAS Pre 2013 में गोगा नवमी की तिथि पर सवाल आया था।

4. हड़बूजी सांख्ला (Harbhooji)

हड़बूजी भुंडेल (नागौर) के सांख्ला राजपूत, रामदेवजी के मौसेरे भाई और गुरु बालीनाथ के शिष्य थे। ये 'शकुन शास्त्र के ज्ञाता' माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार इन्होंने राव जोधा को कटार देकर मंडोर विजय का आशीर्वाद दिया। जोधा ने इन्हें बेंगटी (फलौदी) गांव सौंपा। हड़बूजी बैलगाड़ी से असहाय गायों के लिए घास लाते थे। बेंगटी मंदिर में इनकी छकड़ा गाड़ी पूजी जाती है। परंपरा में इनका वाहन सियार बताया जाता है।

5. मेहाजी मांगलिया (Mehaji Mangaliya)

मेहाजी का पालन ननिहाल के मांगलिया गोत्र में हुआ, इसलिए ये 'मांगलिया' कहलाए। मुख्य धाम फलौदी के बापिणी गांव में है। घोड़ा 'किरण काबरा' था। जैसलमेर के राव राणंगदेव भाटी से गायें बचाते हुए वीरगति पाई। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (जन्माष्टमी) को बापिणी में मेला भरता है। परंपरा के अनुसार मंदिर के भोपे की वंश वृद्धि नहीं होती, वे गोद लेकर वंश चलाते हैं।

राजस्थान के अन्य प्रमुख लोक देवता

1. वीर तेजाजी (Veer Tejaji)

परंपरा के अनुसार तेजाजी का जन्म माघ शुक्ल चतुर्दशी, 1074 ईस्वी (कुछ स्रोत 1073) को खड़नाल (नागौर) में धौल्या गोत्र के जाट परिवार में हुआ। पत्नी पेमल और घोड़ी 'लीलण' थी। लाछा गूजरी की गायें बचाते हुए घायल हुए और नाग को दिया वचन निभाने लौटे। सर्पदंश के बाद सुरसुरा (किशनगढ़, अजमेर) में भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) को निर्वाण हुआ। ये गायों के रक्षक, कृषि उपकारक और 'काला-बाला के देवता' कहलाते हैं। किसान 'तेजा टेर' गाते हैं। परबतसर (अब डीडवाना-कुचामन जिला) में श्रावण-भाद्रपद में राज्य स्तरीय वीर तेजाजी पशु मेला भरता है, जो नागौरी बैलों का बड़ा केंद्र है। RAS Pre 2013 में तेजाजी मेले का स्थान (परबतसर) पूछा गया था। मुख्य थान खड़नाल, सुरसुरा, सैंदरिया और ब्यावर हैं।

2. भगवान देवनारायणजी (Devnarayanji)

गुर्जर समाज के आराध्य देवनारायणजी विष्णु के अवतार माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार ये बगड़ावत सवाई भोज के पुत्र थे और मालासेरी डूंगरी (आसींद, भीलवाड़ा) में प्रकट हुए। 28 जनवरी 2023 को प्रधानमंत्री मालासेरी में इनके 1111वें अवतरण महोत्सव में आए थे। घोड़ा 'लीलागर' था। मंदिर में ईंटों की पूजा होती है; नीम की पत्तियां और छाछ-राबड़ी चढ़ाई जाती है। ये आयुर्वेद के ज्ञाता थे। इनकी फड़ सबसे लंबी फड़ है, जिसे गुर्जर भोपे 'जंतर' वाद्य से बांचते हैं। 2 सितंबर 1992 को इस फड़ पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी हुआ। सवाई भोज मंदिर (आसींद, भीलवाड़ा) और देवमाली (ब्यावर) मुख्य धाम हैं। देवमाली को 2024 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने 'सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव' चुना। आसींद में भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को मेला भरता है; जयंती माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है।

3. वीर कल्लाजी राठौड़ (Kallaji Rathore)

मेड़ता में जन्मे कल्लाजी राव जयमल और मीराबाई के भतीजे थे। गुरु भैरवनाथ थे। चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके (1567-68 ईस्वी) में अकबर के विरुद्ध घायल ताऊ जयमल को कंधों पर बिठाकर चार तलवारों से लड़े, जिससे ये 'चार हाथों वाले लोक देवता' कहलाए। चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भैरव पोल पर इनकी छतरी है। रुंडेला में इनकी मुख्य पीठ है। इन्हें शेषनाग का अवतार भी माना जाता है।

4. राव मल्लीनाथजी व रानी रूपादे

महेवा (बालोतरा) के राठौड़ शासक मल्लीनाथजी ने 1389 ईस्वी में उगमसी भाटी से योग दीक्षा ली; ये और रानी रूपादे 'कुंडा पंथ' से जुड़े माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार 1399 ईस्वी में इनका देहांत हुआ। रानी रूपादे का मंदिर तिलवाड़ा के पास है। तिलवाड़ा (बालोतरा) में लूणी नदी तट पर चैत्र कृष्ण एकादशी से शुक्ल एकादशी तक मल्लीनाथ पशु मेला भरता है। इसे राज्य का सबसे पुराना पशु मेला माना जाता है; यहां मालाणी घोड़े, ऊंट और गोवंश (थारपारकर, कांकरेज) बिकते हैं।

5. अन्य क्षेत्रीय लोक देवता

  • तल्लीनाथजी: शेरगढ़ के राव गांगदेव राठौड़। पांचोटा (जालौर) में थान है। इन्हें 'ओरण के देवता' (प्रकृति रक्षक) कहते हैं।
  • भूरिया बाबा (गौतम ऋषि): मीणा समाज के इष्टदेव। सिरोही में शिवगंज के पास सूकड़ी नदी किनारे हर साल अप्रैल (करीब 13 अप्रैल) में गौतम जी का मेला भरता है। परंपरा के अनुसार मीणा समाज इनकी झूठी कसम नहीं खाता।
  • मामादेव: बरसात के देवता। मंदिर नहीं होता; गांव के बाहर लकड़ी का तोरण होता है। भैंसे की भेंट की परंपरा रही।
  • डूंगजी-जवाहरजी: बठोट-पाटोदा (सीकर) के शेखावत वीर, जो 1857 की क्रांति से पहले अंग्रेजों से लड़े। लोकगीतों के अनुसार इन्होंने नसीराबाद छावनी लूटकर धन गरीबों में बांटा।
  • देवबाबा: नगला जहाज (भरतपुर), ग्वालों और पशुपालकों के आराध्य।
  • आलमजी: धोरीमन्ना (बाड़मेर) का ढांगी टीला, जिसे 'घोड़ों का तीर्थ' कहते हैं।
  • क्षेत्रपाल (खेतलाजी) और भोमियाजी: क्षेत्रपाल गांव या क्षेत्र के रक्षक ग्राम देवता हैं, जिन्हें भैरव का रूप मानते हैं; सोनाणा (पाली) का खेतलाजी मंदिर प्रसिद्ध है। भोमियाजी भूमि और गांव के रक्षक देवता हैं, जिनके थान लगभग हर गांव में मिलते हैं। RAS Pre 2013 में क्षेत्रपाल की पहचान (ग्राम देवता) पर सवाल आया था।

Table 1: राजस्थान के पंचपीर: प्रमुख तथ्य, धाम और विशेषताएं

पंचपीर जन्म स्थल प्रमुख धाम व समाधि वाहन / घोड़ा मुख्य मेला व तिथि खास पहचान व उपाधियां
पाबूजी राठौड़ कोलूमण्ड (फलौदी) कोलूमण्ड, देचू (फलौदी) केसर कालमी (घोड़ी) चैत्र अमावस्या ऊंटों के देवता, प्लेग रक्षक, रावणहत्था फड़, पाबू प्रकाश ग्रंथ
बाबा रामदेवजी उंडूकाश्मीर (बाड़मेर) रुणेचा (जैसलमेर) लीला घोड़ा भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी कामड़िया पंथ, तेरहताली नृत्य, चौबीस वाणियां, रिखिया, जम्मा
गोगाजी चौहान ददरेवा (चूरू) गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) नीली घोड़ी भाद्रपद कृष्ण नवमी जाहरपीर, सांपों के देवता, मकबरेनुमा मंदिर, गोगा राखड़ी
हड़बूजी सांख्ला भुंडेल (नागौर) बेंगटी (फलौदी) सियार (परंपरा), छकड़ा गाड़ी की पूजा बेंगटी में स्थानीय मेला शकुन शास्त्र के ज्ञाता, गायों की सेवा वाली गाड़ी की पूजा
मेहाजी मांगलिया मारवाड़ (ननिहाल मांगलिया गोत्र) बापिणी (फलौदी) किरण काबरा (घोड़ा) भाद्रपद कृष्ण अष्टमी गौ रक्षा में वीरगति, भोपे की वंश वृद्धि नहीं होना (परंपरा)
Advertisement

Table 2: अन्य प्रमुख लोक देवता, मेले और वर्तमान जिले

लोक देवता प्रमुख केंद्र (वर्तमान 41 जिले) मुख्य मेला / तिथि वाद्य यंत्र / प्रतीक परीक्षा उपयोगी तथ्य
वीर तेजाजी खड़नाल (नागौर), परबतसर (डीडवाना-कुचामन) तेजा दशमी: भाद्रपद शुक्ल दशमी; परबतसर पशु मेला श्रावण-भाद्रपद घोड़ी लीलण, तलवार व सर्प काला-बाला के देवता, परबतसर में प्रसिद्ध पशु मेला
भगवान देवनारायणजी आसींद, मालासेरी (भीलवाड़ा), देवमाली (ब्यावर) भाद्रपद शुक्ल सप्तमी (आसींद) जंतर वाद्य, लीलागर घोड़ा विष्णु अवतार, सबसे लंबी फड़, ईंट व नीम पत्ती पूजा
वीर कल्लाजी राठौड़ चित्तौड़गढ़ दुर्ग (छतरी), रुंडेला (पीठ) स्थानीय पूजा चार तलवारें, शेषनाग अवतार चार हाथों वाले देवता, 1567-68 चित्तौड़ साका
राव मल्लीनाथजी तिलवाड़ा (बालोतरा), महेवा चैत्र कृष्ण एकादशी से शुक्ल एकादशी कुंडा पंथ, 1389 में उगमसी भाटी से दीक्षा सबसे पुराना माना जाने वाला पशु मेला, लूणी नदी, मालाणी घोड़े
तल्लीनाथजी पांचोटा (जालौर) साल भर पूजा पंचमुखी पहाड़ी थान ओरण के देवता, प्रकृति रक्षक
भूरिया बाबा शिवगंज के पास, सूकड़ी नदी (सिरोही) अप्रैल (करीब 13 अप्रैल) गौतम ऋषि मीणा समाज के इष्टदेव, झूठी कसम नहीं खाना
मामादेव गांव का मुख्य द्वार वर्षा काल काष्ठ का कलात्मक तोरण बरसात के लोक देवता, भैंसे की भेंट परंपरा
डूंगजी-जवाहरजी बठोट-पाटोदा (सीकर) स्थानीय शेखावाटी के लोकगीत नसीराबाद छावनी लूट (लोकगीत), अंग्रेज विरोधी वीर
क्षेत्रपाल (खेतलाजी) हर गांव; सोनाणा (पाली) स्थानीय भैरव रूप ग्राम देवता (RAS Pre 2013)

महत्वपूर्ण तथ्य: लोक देवता, उनके वाहन और प्रतीक

Exam के लिए प्रमुख लोक देवताओं के घोड़े, वाद्य यंत्र और पंथ एक नजर में:

  • प्रमुख वाहन और घोड़े: पाबूजी: केसर कालमी; तेजाजी: लीलण; रामदेवजी: लीला घोड़ा; देवनारायणजी: लीलागर; गोगाजी: नीली घोड़ी; मेहाजी: किरण काबरा; हड़बूजी: सियार (छकड़ा गाड़ी)।
  • प्रमुख लोक वाद्य यंत्र: पाबूजी की फड़: रावणहत्था; देवनारायणजी की फड़: जंतर; गोगाजी: डेरू व मांदल; रामदेवजी के भजन: चौतारा (तंदूरा) व मंजीरा (RAS Pre 2024 में चौतारा पर सवाल); पाबूजी पवाड़े: माट।
  • प्रमुख पंथ व रीतियां: कामड़िया पंथ: रामदेवजी; कुंडा पंथ: मल्लीनाथजी; ओरण व्यवस्था: तल्लीनाथजी; गोगा राखड़ी: 9 गांठों की डोरी; छकड़ा गाड़ी पूजा: हड़बूजी बेंगटी।

RAS Prelims MCQ

  1. प्रश्न: राजस्थान के 'पंचपीर' में कौन सा लोक देवता शामिल नहीं है?
    A) पाबूजी B) गोगाजी C) तेजाजी D) हड़बूजी
    उत्तर: C | कारण: तेजाजी पंचपीरों में शामिल नहीं हैं।
  2. प्रश्न: ऊंटों के बीमार होने पर किस लोक देवता की फड़ रावणहत्था वाद्य से बांचते हैं?
    A) देवनारायणजी B) पाबूजी C) गोगाजी D) तेजाजी
    उत्तर: B | कारण: पाबूजी की फड़ नायक भोपे रावणहत्था से बांचते हैं।
  3. प्रश्न: 'चौबीस वाणियां' ग्रंथ की रचना किस कवि लोक देवता ने की?
    A) बाबा रामदेवजी B) वीर तेजाजी C) देवनारायणजी D) मेहाजी मांगलिया
    उत्तर: A | कारण: बाबा रामदेवजी कवि थे और इनकी रचना चौबीस वाणियां है।
  4. प्रश्न: 1567-68 में चित्तौड़गढ़ साके में किसे 'चार हाथों वाले लोक देवता' कहा गया?
    A) वीर फत्ताजी B) वीर कल्लाजी राठौड़ C) राव जयमल D) वीर जुंझारजी
    उत्तर: B | कारण: कल्लाजी घायल जयमल को कंधों पर बिठाकर लड़े थे।
  5. प्रश्न: पाबूजी का मुख्य धाम किस जिले में है?
    A) फलौदी B) नागौर C) बालोतरा D) बाड़मेर
    उत्तर: A | कारण: कोलूमण्ड वर्तमान में फलौदी जिले में स्थित है।
  6. प्रश्न: 1992 में किस लोक देवता की फड़ पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी हुआ?
    A) पाबूजी B) गोगाजी C) देवनारायणजी D) रामदेवजी
    उत्तर: C | कारण: देवनारायणजी की फड़ पर डाक टिकट जारी हुआ था।
  7. प्रश्न: मकबरेनुमा मंदिर और मुख्य द्वार पर 'बिस्मिल्लाह' किस लोक देवता के धाम पर है?
    A) रामदेवजी B) गोगाजी C) तेजाजी D) हड़बूजी
    उत्तर: B | कारण: गोगामेड़ी मंदिर मकबरेनुमा है जिस पर बिस्मिल्लाह लिखा है।
  8. प्रश्न: पांचोटा (जालौर) में किस लोक देवता का थान है, जिन्हें 'ओरण के देवता' कहते हैं?
    A) तल्लीनाथजी B) मल्लीनाथजी C) देवबाबा D) मामादेव
    उत्तर: A | कारण: तल्लीनाथजी को ओरण का देवता कहा जाता है।
  9. प्रश्न: राजस्थान में लकड़ी का तोरण बनाकर किस देवता की पूजा होती है?
    A) आलमजी B) मामादेव C) वीर बीग्गाजी D) भूरिया बाबा
    उत्तर: B | कारण: मामादेव बरसात के लोक देवता हैं।
  10. प्रश्न: तिलवाड़ा (बालोतरा) में लूणी नदी तट पर पशु मेला किसकी स्मृति में लगता है?
    A) मल्लीनाथजी B) तेजाजी C) गोगाजी D) रामदेवजी
    उत्तर: A | कारण: तिलवाड़ा में राव मल्लीनाथ पशु मेला भरता है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान के 'पंचपीर' किन्हें कहते हैं?
    उत्तर रूपरेखा: मारवाड़ में पूजे जाने वाले पांच लोक देवता: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, गोगाजी और मेहाजी मांगलिया।
  2. प्रश्न: पाबूजी की फड़ की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
    उत्तर रूपरेखा: सबसे लोकप्रिय फड़, नायक भोपे रावणहत्था वाद्य से बांचते हैं। ऊंट स्वस्थ होने की मनौती पर रात्रि में वाचन।
  3. प्रश्न: कामड़िया पंथ व तेरहताली नृत्य किससे जुड़ा है?
    उत्तर रूपरेखा: रामदेवजी ने सामाजिक समरसता के लिए पंथ बनाया; कामड़ महिलाएं 13 मंजीरों से तेरहताली नृत्य करती हैं।
  4. प्रश्न: कल्लाजी राठौड़ को 'चार हाथों वाले लोक देवता' क्यों कहते हैं?
    उत्तर रूपरेखा: 1567-68 चित्तौड़ साके में घायल ताऊ जयमल को कंधों पर बिठाकर चार तलवारों से मुगलों से लड़े।
  5. प्रश्न: हड़बूजी की गाड़ी बेंगटी में क्यों पूजी जाती है?
    उत्तर रूपरेखा: वे छकड़ा गाड़ी से पंगु गायों के लिए घास लाते थे, इसलिए बेंगटी (फलौदी) मंदिर में गाड़ी पूजी जाती है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: रामदेवजी के सामाजिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: 1. सामाजिक समरसता: जाति-पांत का विरोध, डाली बाई को धर्म-बहन बनाकर समानता की मिसाल दी। 2. कामड़िया पंथ: समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने के लिए पंथ की स्थापना की। 3. सांप्रदायिक सद्भाव: हिंदू इन्हें कृष्ण/विष्णु अवतार और मुस्लिम 'रामा पीर' मानते हैं। 4. साहित्य व कला: 'चौबीस वाणियां' काव्य रचना व तेरहताली नृत्य को संरक्षण दिया।
  2. प्रश्न: राजस्थान के पशु मेलों का लोक देवताओं से संबंध स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: 1. धार्मिक जुड़ाव: मल्लीनाथ मेला (तिलवाड़ा) व तेजाजी मेला (परबतसर) लोक देवताओं की स्मृति में लगते हैं। 2. नस्ल संवर्धन: नागोरी बैल, थारपारकर गोवंश, घोड़ों के क्रय-विक्रय से पशुपालकों को आय मिलती है। 3. ग्रामीण आजीविका: स्थानीय व्यापार, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिलता है।

FAQs

1. राजस्थान के पंचपीर कौन-कौन से हैं?

पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। तेजाजी और देवनारायणजी पंचपीर में नहीं आते हैं।

2. 'चार हाथों वाले लोक देवता' किसे कहा जाता है?

वीर कल्लाजी राठौड़ को, जिन्होंने 1567-68 चित्तौड़ साके में घायल जयमल को कंधों पर बिठाकर युद्ध लड़ा था।

3. देवनारायणजी की फड़ की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

यह राज्य की सबसे लंबी फड़ है, जिसे गुर्जर भोपे जंतर वाद्य से बांचते हैं। 1992 में इस पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी हुआ था।

4. वीर तेजाजी पशु मेला वर्तमान में किस जिले में लगता है?

डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर में। परबतसर पहले नागौर जिले में था; 2023 में बने डीडवाना-कुचामन जिले में आ गया, जो 28 दिसंबर 2024 के बाद भी बना हुआ है।

5. 'ओरण के देवता' किन्हें कहा जाता है?

तल्लीनाथजी को ओरण का देवता कहते हैं। इनका धाम पांचोटा (जालौर) में पंचमुखी पहाड़ी पर है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • पंचपीर: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया, गोगाजी (तेजाजी और देवनारायणजी पंचपीर में नहीं)।
  • पाबूजी: ऊंटों के देवता, कोलू (फलौदी), केसर कालमी घोड़ी, फड़ रावणहत्था से बांची जाती है।
  • रामदेवजी: रुणेचा (जैसलमेर), कामड़िया पंथ, तेरहताली नृत्य, भजन चौतारा (तंदूरा) पर।
  • गोगा नवमी = भाद्रपद कृष्ण नवमी; गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) में मेला, ददरेवा (चूरू) जन्म स्थान।
  • तेजाजी मेला: परबतसर (अब डीडवाना-कुचामन जिला); तेजा दशमी = भाद्रपद शुक्ल दशमी।
  • देवनारायणजी: मालासेरी-आसींद (भीलवाड़ा), सबसे लंबी फड़ (जंतर), 1992 में डाक टिकट।
  • मल्लीनाथ पशु मेला: तिलवाड़ा (बालोतरा), लूणी तट, चैत्र कृष्ण एकादशी से।
  • क्षेत्रपाल (खेतलाजी) = ग्राम देवता (भैरव रूप); कल्लाजी = चार हाथों वाले देवता।

RAS Pre का revision मोबाइल पर

NotesMedia app में यही RAS notes और 362 RAS flashcards हैं, जिनसे जल्दी revision कर सकते हैं।

Google Play से app लें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता (Rajasthan Ke Lok Devta): राजस्थान में लोक कल्याण, गौ रक्षा और सामाजिक समरसता के लिए प्राण देने वाले महापुरुष लोक देवता कहलाते हैं।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता: पंचपीर, तेजाजी, देवनारायणजी व प्रमुख मेले एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Rajasthan ke Lok Devta: राजस्थान के लोक देवता: पंचपीर, तेजाजी, देवनारायणजी व प्रमुख मेले के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
Advertisement