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Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां: करणी माता, जीण माता, कैला देवी और प्रमुख मंदिर

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां: करणी माता, जीण माता, कैला देवी और प्रमुख मंदिर - सांस्कृतिक राजस्थान (त्यौहार, आभूषण)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां (rajasthan ki lok deviyan) प्रदेश के धार्मिक जीवन और संस्कृति का मुख्य आधार हैं। करणी मा...
Quick Answer: Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां (rajasthan ki lok deviyan) प्रदेश के धार्मिक जीवन और संस्कृति का मुख्य आधार हैं। करणी माता (देशनोक, बीकानेर) चूहों वाली देवी हैं, जहां चूहे 'काबा' कहलाते हैं और सफेद काबा का दिखना शुभ माना जाता है। जीण माता (रेवासा, सीकर) का गीत राजस्थानी लोक साहित्य में सबसे लंबा माना जाता है। कैला देवी (करौली) के मेले में लांगुरिया गीत गाए जाते हैं। सांभर (जयपुर) में चौहानों की आदि कुलदेवी शाकंभरी माता का मंदिर है। शीला देवी (आमेर, जयपुर) कछवाहा वंश की इष्टदेवी हैं, जिनकी मूर्ति मानसिंह प्रथम जसोर से लाए थे। शीतला माता (चाकसू, जयपुर) की खंडित मूर्ति पूजी जाती है। आई माता (बिलाड़ा, जोधपुर) के दीपक से परंपरा के अनुसार केसर टपकती है, त्रिपुरा सुंदरी (तलवाड़ा, बांसवाड़ा) 18 भुजी शक्तिपीठ हैं और तनोट माता (जैसलमेर) थार की वैष्णो देवी हैं।
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1. राजस्थान की लोक देवियां: ऐतिहासिक परिचय और धार्मिक महत्व (Rajasthan Ki Lok Deviyan Overview)

राजस्थान में शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा रही है। लोक कल्याण, गौ-रक्षा और स्वाभिमान की रक्षा में जीवन लगाने वाली पूज्य नारियों को समाज ने लोक देवियों के रूप में स्वीकारा। राजस्थान की कला और संस्कृति में शक्ति आराधना के दो प्रमुख रूप मिलते हैं:

  • कुलदेवी (Family Deity): किसी विशेष वंश या गोत्र की पारंपरिक संरक्षिका देवी, जिनकी पूजा वंश परंपरा में अनिवार्य मानी जाती है। जैसे- मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया वंश की कुलदेवी बाण माता हैं, और राठौड़ वंश की मूल कुलदेवी नागणेची माता हैं।
  • इष्टदेवी या आराध्य देवी (Ishtadevi): किसी शासक या परिवार की व्यक्तिगत श्रद्धा से पूजी जाने वाली देवी। जैसे- आमेर के कछवाहा वंश की कुलदेवी जमुवाय माता हैं, जबकि इष्टदेवी शीला देवी हैं। बीकानेर के राठौड़ नागणेची माता को कुलदेवी और करणी माता को इष्टदेवी मानते हैं।

चारण कुल की देवियों ने समाज को नीति और गौ-सेवा की सीख दी। शीतला अष्टमी जैसे देवी-पर्वों की तिथियां राजस्थान के त्योहार और आभूषण में दी गई हैं। इन देवियों के मेले राजस्थान की लोक कलाएँ और लोक नृत्यों के मुख्य केंद्र हैं।

2. बीकानेर और शेखावाटी की प्रमुख देवियां: करणी माता और जीण माता

बीकानेर और शेखावाटी अंचल में करणी माता और जीण माता जन-आस्था का मुख्य केंद्र हैं।

करणी माता (Karni Mata - देशनोक, बीकानेर)

करणी माता को मां हिंगलाज का अवतार माना जाता है। परंपरा के अनुसार इनका जन्म सुवाप गांव (फलौदी तहसील, अब फलौदी जिला) में चारण कुल में हुआ और बचपन का नाम रिद्धू बाई था।

  • मुख्य मंदिर: बीकानेर के देशनोक में इनका मुख्य मंदिर (मठ) है, जिसका आधुनिक निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने कराया।
  • काबा (सफेद चूहे): मंदिर के चूहों को काबा कहते हैं। सफेद काबा और सफेद चील के दर्शन बहुत शुभ माने जाते हैं।
  • ऐतिहासिक संबंध: राव जोधा ने 1459 ई. में मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव रखी; परंपरा के अनुसार नींव करणी माता के हाथों रखवाई गई। इन्होंने राव बीका को बीकानेर राज्य स्थापित करने का आशीर्वाद दिया था।

जीण माता (Jeen Mata - रेवासा, सीकर)

सीकर में काजल शिखर की तलहटी रेवासा में जीण माता का मंदिर है। इनका जन्म चूरू के घांघू गांव में चौहान कुल में हुआ था।

  • हर्ष पर्वत: लोककथा में हर्ष इनके भाई हैं। पास के हर्ष पर्वत पर हर्षनाथ (शिव) मंदिर 956 ई. में शैव साधु अल्लट ने बनवाया; यहां का हर्ष शिलालेख 973 ई. (विग्रहराज द्वितीय के समय) का है।
  • भौंरों की देवी: परंपरा के अनुसार औरंगजेब की सेना पर भौंरों के हमले के बाद मुगल बादशाह ने छत्र चढ़ाया और अखंड दीप के लिए तेल भिजवाया।
  • सबसे लंबा गीत: राजस्थानी लोक साहित्य में जीण माता का गीत (चिरजा) सबसे लंबा माना जाता है, जिसे कनफटे जोगी गाते हैं। ये चौहानों की कुलदेवी मानी जाती हैं।

3. ढूंढाड़ और ब्रज क्षेत्र की देवियां: शीला देवी, कैला देवी और शीतला माता

जयपुर और करौली अंचल की देवियों का संबंध ऐतिहासिक विजयों और जनस्वास्थ्य से जुड़ा है।

शीला देवी (Shila Devi - आमेर, जयपुर)

आमेर दुर्ग के जलेब चौक में स्थित शीला देवी कछवाहा राजवंश की इष्टदेवी हैं। राजा मानसिंह प्रथम 1604 ई. में बंगाल अभियान के समय जसोर (अब बांग्लादेश) से यह महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा लाए थे; परंपरा के अनुसार यह जसोर के राजा केदार से मिली। देवी को ढाई प्याला मदिरा भोग लगाने की परंपरा रही है।

कैला देवी (Kaila Devi - त्रिकूट पर्वत, करौली)

कालीसिल नदी तट पर त्रिकूट पर्वत (करौली) पर कैला देवी का मंदिर है। यह जादौन (यादव) राजवंश की कुलदेवी हैं। चैत्र नवरात्र में (मुख्य दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी) लक्खी मेला भरता है, जहां लांगुरिया गीत गाए जाते हैं और लांगुरिया नृत्य होता है। मंदिर प्रांगण में बोहरा भगत की छतरी है।

शीतला माता (Sheetla Mata - चाकसू, जयपुर)

चाकसू की शील की डूंगरी पर स्थित मंदिर का निर्माण सवाई माधोसिंह प्रथम ने कराया। राजस्थान में शीतला माता की खंडित प्रतिमा पूजी जाती है। वाहन गधा और पुजारी कुम्हार होते हैं। चैत्र कृष्ण अष्टमी को बास्योड़ा पर्व पर ठंडा भोजन अर्पित करते हैं।

4. मारवाड़, वागड़, मेवाड़ और थार की लोक देवियां

राजस्थान के बाकी अंचलों की प्रमुख लोक देवियां:

आई माता (Aai Mata - बिलाड़ा, जोधपुर)

आई माता सीरवी समाज की कुलदेवी हैं और इन्होंने बाबा रामदेवजी से दीक्षा ली। बिलाड़ा स्थित मंदिर (बडेर) के अखंड दीपक की लौ से, मान्यता के अनुसार, केसर टपकती है। थान इनके अन्य पूजा स्थल हैं। इन्होंने 11 नियमों का 'आई पंथ' चलाया।

त्रिपुरा सुंदरी (तलवाड़ा, बांसवाड़ा) व तनोट माता (जैसलमेर)

तलवाड़ा (बांसवाड़ा) में त्रिपुरा सुंदरी (तुरताई माता) काले पाषाण की 18 भुजी शक्तिपीठ हैं और पांचाल समाज की कुलदेवी हैं। जैसलमेर सीमा पर स्थित तनोट माता को 'थार की वैष्णो देवी' व 'सैनिकों की देवी' कहते हैं; मंदिर प्रबंधन बीएसएफ संभालती है।

बाण माता, आवड़ माता और शाकंभरी माता

  • बाण माता: मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया वंश की कुलदेवी, चित्तौड़गढ़ दुर्ग में मुख्य मंदिर।
  • आवड़ माता (स्वांगिया माता): जैसलमेर के भाटी राजवंश की कुलदेवी; मुड़ा हुआ भाला (स्वांग) प्रतीक।
  • शाकंभरी माता (सांभर, जयपुर): चौहानों की आदि कुलदेवी; परंपरा के अनुसार अकाल में कंद-मूल और सब्जियां उगाकर लोगों को बचाया। 'सांभर' नाम भी शाकंभरी से जुड़ा माना जाता है। RAS Pre 2013 में पूछा गया था कि सांभर झील क्षेत्र में किस देवी का मंदिर है (शाकंभरी)।
  • सकराय माता (उदयपुरवाटी, झुंझुनूं): खंडेलवाल वैश्यों की कुलदेवी, शाकंभरी का ही स्वरूप मानी जाती हैं।

5. राजस्थान के प्रमुख राजवंश, उनकी कुलदेवियां और इष्टदेवियां

Exam में राजवंश और उनकी कुलदेवी के जोड़े अक्सर पूछे जाते हैं। नीचे की table में केवल वही इष्टदेवी लिखी है जो स्रोतों में साफ मिलती है:

राजवंश / रियासत कुलदेवी इष्टदेवी / आराध्य (जहां प्रसिद्ध) मुख्य मंदिर (वर्तमान जिला)
मेवाड़ (गुहिल व सिसोदिया) बाण माता - चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़)
मारवाड़ / जोधपुर (राठौड़) नागणेची माता चामुंडा माता (मेहरानगढ़) नागाणा (बालोतरा, पहले बाड़मेर)
बीकानेर (राठौड़) नागणेची माता करणी माता देशनोक (बीकानेर)
आमेर / जयपुर (कछवाहा) जमुवाय माता शीला देवी जमवारामगढ़ और आमेर (जयपुर)
करौली (जादौन/यदुवंशी) कैला देवी - त्रिकूट पर्वत (करौली)
जैसलमेर (भाटी) स्वांगिया माता (आवड़ माता) - जैसलमेर
सांभर-अजमेर के चौहान शाकंभरी माता - सांभर (जयपुर)
नाडोल-जालौर के चौहान आशापुरा माता - नाडोल (पाली)

6. अन्य महत्वपूर्ण लोक देवियां और उनके आस्था केंद्र

राजस्थान के बाकी जिलों में ये देवियां खास आस्था से पूजी जाती हैं:

  • नागणेची माता (नागाणा, कल्याणपुर; अब बालोतरा जिला): राठौड़ों की कुलदेवी; परंपरा के अनुसार राव धूहड़ कर्नाटक से 18 भुजी प्रतिमा लाए।
  • दधिमती माता (गोठ-मांगलोद, नागौर): दाधीच ब्राह्मणों की कुलदेवी; राज्य के पुराने मंदिरों में गिना जाता है।
  • सुगाली माता (आउवा, पाली): आउवा ठाकुर खुशाल सिंह की कुलदेवी (10 सिर, 54 हाथ); 1857 क्रांति की आराध्य।
  • जमुवाय माता (जमवारामगढ़, जयपुर): कछवाहा वंश के संस्थापक दूल्हेराय ने स्थापित की कुलदेवी।
  • उपचार केंद्र: आवरी माता (चित्तौड़गढ़ - लकवा), बड़ली माता (चित्तौड़गढ़ - बाल रोग), भदाना माता (कोटा - मूठ निवारण)।

नीचे दी गई table में प्रमुख लोक देवियों और उनकी विशेषताओं का विवरण है:

लोक देवी का नाम मुख्य मंदिर वर्तमान जिला प्रमुख पहचान व विशेषता
करणी माता देशनोक बीकानेर काबा (चूहे), सफेद चील प्रतीक, मेहरानगढ़ की नींव (परंपरा)
जीण माता रेवासा सीकर सबसे लंबा माना जाने वाला गीत (चिरजा), भौंरों वाली कथा, औरंगजेब का छत्र (परंपरा)
कैला देवी त्रिकूट पर्वत करौली चैत्र नवरात्र में लक्खी मेला, लांगुरिया गीत व नृत्य
शीला देवी आमेर दुर्ग जयपुर मानसिंह प्रथम 1604 में जसोर (बंगाल) से लाए, ढाई प्याला मदिरा भोग (परंपरा)
शीतला माता शील की डूंगरी (चाकसू) जयपुर खंडित प्रतिमा की पूजा, गधा वाहन, कुम्हार पुजारी, बास्योड़ा
आई माता बिलाड़ा जोधपुर अखंड दीपक की लौ से केसर टपकना, सीरवी जाति की कुलदेवी
त्रिपुरा सुंदरी तलवाड़ा (उमराई) बांसवाड़ा अठारह भुजी प्रतिमा, तुरताई माता, पांचाल जाति की कुलदेवी
तनोट माता तनोट जैसलमेर थार की वैष्णो देवी, सैनिकों की देवी, बीएसएफ के जवान पुजारी
सुगाली माता आउवा पाली 1857 की क्रांति की देवी, 10 सिर और 54 हाथ वाली प्रतिमा
शाकंभरी माता सांभर जयपुर चौहानों की आदि कुलदेवी, सांभर झील क्षेत्र (RAS Pre 2013)

महत्वपूर्ण तथ्य: राजस्थान की लोक देवियां (Quick Revision)

Revision के लिए मुख्य बातें:

  • करणी माता (देशनोक, बीकानेर): चूहों को काबा कहते हैं, परंपरा में मेहरानगढ़ की नींव से जुड़ीं।
  • जीण माता (रेवासा, सीकर): इनका गीत सबसे लंबा माना जाता है, कनफटे जोगी गाते हैं।
  • कैला देवी (करौली): त्रिकूट पर्वत, कालीसिल नदी, लांगुरिया गीत।
  • शीला देवी (आमेर): मानसिंह प्रथम जसोर से लाए, कछवाहा इष्टदेवी।
  • शीतला माता (चाकसू): पूज्य खंडित प्रतिमा, गधा वाहन, बास्योड़ा पर्व।
  • आई माता (बिलाड़ा): दीपक से केसर टपकती है, सीरवी कुलदेवी।
  • त्रिपुरा सुंदरी (बांसवाड़ा): 18 भुजी प्रतिमा, पांचाल कुलदेवी।
  • तनोट माता (जैसलमेर): थार की वैष्णो देवी, बीएसएफ करती है सेवा।
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RAS Prelims MCQ

  1. किस लोक देवी के मंदिर में दीपक की लौ से केसर टपकती है?
    A) करणी माता
    B) आई माता
    C) जीण माता
    D) शीला देवी
    उत्तर: B) आई माता
    कारण: बिलाड़ा (जोधपुर) में आई माता मंदिर (बडेर) की अखंड ज्योति से केसर टपकती है।
  2. आमेर के राजा मानसिंह प्रथम शीला देवी की प्रतिमा किस स्थान से लाए थे?
    A) काबुल
    B) कालिंजर
    C) जसोर (पूर्वी बंगाल)
    D) मांडू
    उत्तर: C) जसोर (पूर्वी बंगाल)
    कारण: मानसिंह प्रथम 1604 ई. में बंगाल अभियान के समय जसोर से यह प्रतिमा आमेर लाए।
  3. करौली की प्रसिद्ध कैला देवी के संबंध में कौन सा कथन असत्य है?
    A) कैला देवी का मंदिर त्रिकूट पर्वत पर है
    B) यह जादौन राजवंश की कुलदेवी हैं
    C) इनके मेले में लांगुरिया गीत गाए जाते हैं
    D) इनके मंदिर में दीपक से केसर टपकती है
    उत्तर: D) इनके मंदिर में दीपक से केसर टपकती है
    कारण: दीपक से केसर टपकना आई माता (बिलाड़ा) की विशेषता है।
  4. राजस्थान में किस देवी की खंडित प्रतिमा की पूजा की जाती है?
    A) शीतला माता
    B) बाण माता
    C) सकराय माता
    D) आवरी माता
    उत्तर: A) शीतला माता
    कारण: चाकसू में शील की डूंगरी पर शीतला माता की खंडित प्रतिमा पूजी जाती है।
  5. मुगल शासक औरंगजेब ने किस लोक देवी के मंदिर के लिए तेल भेजने का आदेश दिया था?
    A) करणी माता
    B) जीण माता
    C) कैला देवी
    D) तनोट माता
    उत्तर: B) जीण माता
    कारण: परंपरा के अनुसार भौंरों के हमले के बाद औरंगजेब ने जीण माता को छत्र चढ़ाया और दीपक के लिए तेल भिजवाया।
  6. 1857 के संग्राम की देवी के रूप में पूज्य 10 सिर और 54 हाथ वाली सुगाली माता किस ठिकाने से जुड़ी थीं?
    A) सलूंबर
    B) कोठारिया
    C) आउवा (पाली)
    D) नीमराना
    उत्तर: C) आउवा (पाली)
    कारण: सुगाली माता (10 सिर, 54 हाथ) आउवा ठाकुर खुशाल सिंह व 1857 क्रांति की आराध्य थीं।
  7. राजस्थानी लोक साहित्य में किस लोक देवी का गीत सबसे लंबा माना जाता है?
    A) करणी माता
    B) कैला देवी
    C) जीण माता
    D) शीतला माता
    उत्तर: C) जीण माता
    कारण: जीण माता का गीत सबसे लंबा माना जाता है, जिसे कनफटे जोगी डमरू-सारंगी पर गाते हैं।
  8. बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी और इष्टदेवी का सही क्रम कौन सा है?
    A) कुलदेवी: करणी माता, इष्टदेवी: नागणेची माता
    B) कुलदेवी: नागणेची माता, इष्टदेवी: करणी माता
    C) कुलदेवी: बाण माता, इष्टदेवी: जीण माता
    D) कुलदेवी: जमुवाय माता, इष्टदेवी: शीला देवी
    उत्तर: B) कुलदेवी: नागणेची माता, इष्टदेवी: करणी माता
    कारण: राठौड़ कुलदेवी नागणेची माता और बीकानेर शाखा की इष्टदेवी करणी माता हैं।
  9. बांसवाड़ा के तलवाड़ा में स्थित अठारह भुजी त्रिपुरा सुंदरी किस समाज की कुलदेवी हैं?
    A) सीरवी समाज
    B) ओसवाल समाज
    C) पांचाल समाज
    D) दाधीच समाज
    उत्तर: C) पांचाल समाज
    कारण: तलवाड़ा (बांसवाड़ा) में 18 भुजी त्रिपुरा सुंदरी पांचाल समाज की कुलदेवी हैं।
  10. 'थार की वैष्णो देवी' और 'सैनिकों की देवी' तनोट माता मंदिर का प्रबंधन कौन संभालता है?
    A) राजस्थान पुलिस
    B) सीमा सुरक्षा बल (BSF)
    C) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल
    D) भारत तिब्बत सीमा पुलिस
    उत्तर: B) सीमा सुरक्षा बल (BSF)
    कारण: 1965 युद्ध के बाद से तनोट माता मंदिर की सेवा बीएसएफ करती है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. 'कुलदेवी' और 'इष्टदेवी' में क्या अंतर है? (20 शब्द)
    उत्तर: कुलदेवी वंश की पारंपरिक रक्षक देवी होती हैं जिनकी पूजा अनिवार्य है; इष्टदेवी व्यक्तिगत श्रद्धा की पूज्य देवी होती हैं।
  2. शीतला माता की पूजा की दो मुख्य बातें बताइए। (20 शब्द)
    उत्तर: खंडित प्रतिमा की पूजा, गधा वाहन, कुम्हार पुजारी और बास्योड़ा (ठंडा भोजन) का नैवेद्य।
  3. कैला देवी के लक्खी मेले की दो प्रमुख बातें लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: त्रिकूट पर्वत (करौली) पर चैत्र नवरात्र में मेला भरता है; लांगुरिया गीत व नृत्य मुख्य आकर्षण हैं।
  4. तनोट माता को 'सैनिकों की देवी' क्यों कहते हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: मान्यता है कि 1965 युद्ध में मंदिर परिसर में गिरे पाकिस्तानी बम नहीं फटे; सीमा सुरक्षा बल (BSF) मंदिर प्रबंधन संभालता है।
  5. सुगाली माता का 1857 की क्रांति में क्या महत्व था? (20 शब्द)
    उत्तर: आउवा ठाकुर खुशाल सिंह की कुलदेवी सुगाली माता (10 सिर, 54 हाथ) क्रांतिकारियों की मुख्य प्रेरणास्रोत थीं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. करणी माता और जीण माता के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व की तुलना कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: दोनों देवियां राजस्थान के धार्मिक इतिहास में खास स्थान रखती हैं:
    1. करणी माता (देशनोक): चारण कुल में जन्मीं रिद्धू बाई मां हिंगलाज की अवतार मानी जाती हैं। परंपरा के अनुसार 1459 में मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव इनके हाथों रखवाई गई। मंदिर के चूहों को 'काबा' कहते हैं और सफेद काबा दर्शन शुभ माना जाता है।
    2. जीण माता (रेवासा): काजल शिखर पर तपस्या करने वाली जीण माता का लोकगीत 'चिरजा' सबसे लंबा है। परंपरा के अनुसार औरंगजेब की सेना पर भौंरों के हमले के बाद मुगल दरबार से छत्र और तेल भेजा गया था।
  2. राजस्थान के प्रमुख राजपूत राजवंशों और उनकी कुलदेवियों का विवरण दीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: प्रमुख राजपूत राजवंश और उनकी कुलदेवियां:
    1. राठौड़ वंश: मूल कुलदेवी नागणेची माता (नगाणा) हैं; बीकानेर शाखा करणी माता को इष्टदेवी मानती है।
    2. कछवाहा वंश: कुलदेवी जमुवाय माता (जमवारामगढ़) हैं और आमेर में पूज्य शीला देवी इष्टदेवी हैं।
    3. सिसोदिया वंश: मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया वंश की कुलदेवी बाण माता (चित्तौड़गढ़) हैं।
    4. भाटी व जादौन वंश: जैसलमेर भाटी वंश की स्वांगिया माता और करौली जादौन वंश की कुलदेवी कैला देवी हैं।

FAQs

प्रश्न: किस देवी के मंदिर को 'चूहों का मंदिर' कहते हैं?
उत्तर: बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता के मंदिर को चूहों का मंदिर कहते हैं, जहां चूहों को 'काबा' कहा जाता है।

प्रश्न: लांगुरिया गीत किस देवी के मेले में गाए जाते हैं?
उत्तर: करौली में भरने वाले कैला देवी के लक्खी मेले में श्रद्धालु लांगुरिया गीत गाते हैं और लांगुरिया नृत्य करते हैं।

प्रश्न: किस देवी के दीपक से केसर टपकती है?
उत्तर: जोधपुर के बिलाड़ा में स्थित आई माता के मंदिर (बडेर) की अखंड दीपक की लौ से केसर टपकती है।

प्रश्न: राजस्थान में खंडित प्रतिमा के रूप में किसकी पूजा होती है?
उत्तर: चाकसू (जयपुर) में शील की डूंगरी पर शीतला माता की खंडित प्रतिमा पूजी जाती है, जिनका वाहन गधा है।

प्रश्न: 1857 की क्रांति की देवी किन्हें कहा जाता है?
उत्तर: आउवा (पाली) की 10 सिर और 54 हाथ वाली सुगाली माता को 1857 की क्रांति की देवी माना जाता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • सांभर झील क्षेत्र में शाकंभरी माता का मंदिर है; ये चौहानों की आदि कुलदेवी हैं (RAS Pre 2013)।
  • करणी माता: देशनोक (बीकानेर), चूहे = काबा, बीकानेर राठौड़ों की इष्टदेवी।
  • जीण माता: रेवासा (सीकर), इनका गीत सबसे लंबा माना जाता है।
  • कैला देवी: त्रिकूट पर्वत (करौली), जादौन कुलदेवी, लांगुरिया गीत।
  • शीला देवी: आमेर, मानसिंह प्रथम 1604 में जसोर से लाए; कछवाहा कुलदेवी जमुवाय माता।
  • आई माता: बिलाड़ा (जोधपुर), सीरवी कुलदेवी, दीपक से केसर (परंपरा)।
  • तनोट माता (जैसलमेर): थार की वैष्णो देवी, BSF सेवा करती है।
  • नागणेची: राठौड़ कुलदेवी, नागाणा (अब बालोतरा जिला); बाण माता: सिसोदिया कुलदेवी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां (rajasthan ki lok deviyan) प्रदेश के धार्मिक जीवन और संस्कृति का मुख्य आधार हैं।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ki Lok Deviyan: राजस्थान की लोक देवियां: करणी माता, जीण माता, कैला देवी और प्रमुख मंदिर एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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