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Nuclear Energy in India in Hindi: भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: 3-चरणीय कार्यक्रम, प्रमुख परमाणु केंद्र और सुरक्षा

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Nuclear Energy in India in Hindi: भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: 3-चरणीय कार्यक्रम, प्रमुख परमाणु केंद्र और सुरक्षा - अंतरिक्ष, रक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी
  • • अवलोकन: Quick Answer: Nuclear Energy in India in Hindi: भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नींव डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने रखी थी। भारत में यूरेनियम के कम भंडार और...
Quick Answer: Nuclear Energy in India in Hindi: भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नींव डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने रखी थी। भारत में यूरेनियम के कम भंडार और थोरियम के बड़े भंडार (दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक, तटीय मोनाजाइट रेत में) को देखते हुए भाभा ने एक अनूठा 'त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम' (Three-Stage Nuclear Programme) तैयार किया: चरण-1 में प्राकृतिक यूरेनियम चालित दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR), चरण-2 में प्लूटोनियम चालित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR - कल्पक्कम PFBR), और चरण-3 में थोरियम आधारित उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR)। राजस्थान के रावतभाटा में देश का दूसरा परमाणु बिजली घर है, जहां भारत का पहला PHWR (भारी जल रिएक्टर) लगा, और पोखरण (जैसलमेर) 1974 और 1998 के ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों का साक्षी रहा है।
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भारतीय परमाणु कार्यक्रम का इतिहास और वैचारिक नींव

भारत में परमाणु ऊर्जा का विकास ऊर्जा आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों की दृष्टि से ऐतिहासिक रहा है। राजस्थान में बिजली के बाकी स्रोतों (कोयला, सौर, पवन) के लिए पढ़ें: ऊर्जा संसाधन (पारंपरिक और गैर-पारंपरिक)।

1. प्रमुख संस्थागत मील के पत्थर

  • अगस्त 1948: डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में 'परमाणु ऊर्जा आयोग' (AEC) का गठन हुआ।
  • अगस्त 1954: परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्थापना सीधे प्रधानमंत्री के अधीन की गई।
  • 1956: ट्रॉम्बे (मुंबई) में एशिया के पहले परमाणु अनुसंधान रिएक्टर 'अप्सरा' (Apsara) ने काम करना शुरू किया।
  • 1967: परमाणु ऊर्जा संस्थान, ट्रॉम्बे का नाम बदलकर इसके संस्थापक की स्मृति में 'भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र' (BARC) कर दिया गया।

डॉ. होमी भाभा का त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

भारत में प्राकृतिक यूरेनियम की कमी है, लेकिन केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की तटीय रेत (मोनाजाइट) में 'थोरियम' (Thorium-232) का बड़ा भंडार है। इसे ऊर्जा में बदलने के लिए भाभा ने तीन चरणों का एक क्रमबद्ध खाका तैयार किया:

चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR - Pressurised Heavy Water Reactors)

  • ईंधन: प्राकृतिक यूरेनियम (Natural Uranium), जिसमें लगभग 0.7% विखंडनीय U-235 और 99.3% गैर-विखंडनीय U-238 होता है। इसे संवर्धित करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • मंदक और शीतलक: भारी जल (Heavy Water - D2O)। न्यूट्रॉन की गति धीमी करने के लिए मंदक और गर्मी निकालने के लिए शीतलक दोनों का काम भारी जल करता है।
  • उप-उत्पाद: जब गैर-विखंडनीय U-238 न्यूट्रॉन को सोखता है, तो वह प्लूटोनियम-239 (Pu-239) में बदल जाता है। यह प्लूटोनियम दूसरे चरण का मुख्य ईंधन बनता है।
  • वर्तमान स्थिति: भारत ने 220 MWe, 540 MWe और हाल ही में 700 MWe क्षमता के पूरी तरह स्वदेशी PHWR विकसित कर लिए हैं (काकरापार, गुजरात की तीसरी यूनिट KAPP-3 भारत का पहला 700 MWe स्वदेशी PHWR है)।

चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR - Fast Breeder Reactors)

  • ईंधन: पहले चरण से निकला प्लूटोनियम-239 और यूरेनियम-238 का मिश्रित ऑक्साइड ईंधन (MOX Fuel)।
  • शीतलक: तरल सोडियम (Liquid Sodium)। इसमें न्यूट्रॉनों की गति धीमी करने के लिए कोई मंदक प्रयोग नहीं किया जाता (यह तीव्र न्यूट्रॉनों पर काम करता है)।
  • ब्रीडिंग (प्रजनन): यह रिएक्टर जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक विखंडनीय ईंधन पैदा (Breed) करता है। यदि इसके चारों ओर थोरियम-232 का आवरण (Blanket) रखा जाए, तो थोरियम न्यूट्रॉन सोखकर विखंडनीय यूरेनियम-233 (U-233) में बदल जाता है।
  • पीएफबीआर (PFBR 500 MWe): कल्पक्कम (तमिलनाडु) में भारत का पहला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बना है। इसकी core loading मार्च 2024 में शुरू हुई और 6 अप्रैल 2026 को यह पहली बार critical हुआ (यानी श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हुई)। इसे BHAVINI चलाता है; बिजली उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।

चरण 3: थोरियम आधारित उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR)

  • ईंधन: थोरियम-232 और दूसरे चरण से प्राप्त यूरेनियम-233।
  • भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा: थोरियम स्वतः विखंडनीय नहीं होता, लेकिन तीसरे चरण में U-233 की मदद से थोरियम लगातार ऊर्जा देता रहता है। यह चरण भारत को अगले कई सौ वर्षों तक सस्ती और स्वच्छ बिजली देने में सक्षम होगा।

Table 1: भारत के त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का तुलनात्मक विवरण

चरण रिएक्टर प्रकार प्रयुक्त ईंधन मंदक व शीतलक निर्मित मुख्य ईंधन
चरण 1 दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) प्राकृतिक यूरेनियम (Natural U) भारी जल (D2O) मंदक व शीतलक प्लूटोनियम-239 (Pu-239)
चरण 2 फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) Pu-239 + U-238 (MOX ईंधन) कोई मंदक नहीं; तरल सोडियम शीतलक यूरेनियम-233 (U-233) और ज्यादा Pu
चरण 3 उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR) थोरियम-232 + यूरेनियम-233 भारी जल मंदक / हल्का जल शीतलक थोरियम आधारित दीर्घकालिक ऊर्जा

भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plants)

वर्तमान में भारत में कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र व्यावसायिक रूप से संचालित हो रहे हैं:

1. तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (TAPS), महाराष्ट्र

भारत का पहला परमाणु बिजली घर, जो 1969 में अमेरिकी सहायता से स्थापित हुआ था। यहां बॉयलिंग वाटर रिएक्टर (BWR) और स्वदेशी PHWR दोनों कार्यरत हैं।

2. राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (RAPS), रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), राजस्थान

  • भारत का दूसरा परमाणु बिजली घर और भारत का पहला दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) केंद्र।
  • इसकी स्थापना 1973 में कनाडा के सहयोग (CANDU मॉडल) से हुई थी। इसे शीतलन के लिए राणा प्रताप सागर बांध से जल मिलता है।
  • रावतभाटा में 'भारी जल संयंत्र' (Heavy Water Plant) भी है।
  • नई 700 MWe इकाइयां: RAPP-7 ने 15 अप्रैल 2025 से व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू किया; RAPP-8 में सितंबर 2026 में fuel loading शुरू हुई।
  • माही बांसवाड़ा परमाणु परियोजना: बांसवाड़ा जिले में 4 x 700 MWe स्वदेशी PHWR की इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री ने 25 सितंबर 2025 को रखी। इसे NPCIL (51%) और NTPC (49%) की संयुक्त कंपनी ASHVINI बना रही है; लागत करीब ₹42,000 करोड़।

3. अन्य प्रमुख केंद्र

  • मद्रास परमाणु बिजली घर (MAPS), कल्पक्कम (तमिलनाडु): भारत का पहला पूर्ण रूप से स्वदेशी निर्मित PHWR केंद्र।
  • नरोरा (NAPS), बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश): भूकंपीय क्षेत्र में विशेष सुरक्षा मानकों से निर्मित PHWR।
  • काकरापार (KAPS), सूरत (गुजरात): 700 MWe के स्वदेशी PHWR (KAPS-3 व 4) की सफल शुरुआत।
  • कैगा (KGS), उत्तर कन्नड़ (कर्नाटक): कैगा की यूनिट-1 ने लगातार 962 दिन (13 मई 2016 से 31 दिसंबर 2018) बिना रुके चलकर विश्व कीर्तिमान बनाया।
  • कुडानकुलम (KKNPP), तिरुनेलवेली (तमिलनाडु): रूसी सहयोग से निर्मित भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र, जहां 1,000 MWe के आधुनिक VVER लाइट वाटर रिएक्टर कार्यरत हैं।

Table 2: भारत के प्रमुख चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र

संयंत्र का नाम राज्य रिएक्टर का प्रकार विशेष उपलब्धि / बिंदु
तारापुर (TAPS) महाराष्ट्र BWR और PHWR भारत का पहला परमाणु बिजली घर (1969)
रावतभाटा (RAPS) राजस्थान (चित्तौड़गढ़) PHWR (कैंडु आधारित) राजस्थान का एकमात्र चालू परमाणु संयंत्र (माही बांसवाड़ा निर्माणाधीन), भारी जल संयंत्र
कल्पक्कम (MAPS) तमिलनाडु स्वदेशी PHWR व PFBR पहला पूर्ण स्वदेशी रिएक्टर; फास्ट ब्रीडर केंद्र
नरोरा (NAPS) उत्तर प्रदेश PHWR गंगा नदी तट पर उत्तरी भारत का प्रमुख केंद्र
काकरापार (KAPS) गुजरात PHWR (700 MWe) भारत का पहला 700 MWe का स्वदेशी मेगा रिएक्टर
कैगा (KGS) कर्नाटक PHWR 962 दिन लगातार चलने का विश्व रिकॉर्ड
कुडानकुलम (KKNPP) तमिलनाडु VVER-1000 (LWR) रूसी तकनीक से निर्मित देश का सबसे बड़ा केंद्र

पोखरण परमाणु परीक्षण: भारत की सामरिक शक्ति का उदय

राजस्थान का जैसलमेर जिला भारत के दोनों ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों की भूमि रहा है:

पोखरण-I (18 मई 1974) - ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा

  • प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 18 मई 1974 को थार मरुस्थल में पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारत ने अपना पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
  • कूट नाम 'स्माइलिंग बुद्धा' (बुद्ध पूर्णिमा के दिन) रखा गया। वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व डॉ. राजा रमन्ना ने किया। भारत ने इसे 'शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट' (PNE) बताया।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों (P-5) के अलावा परमाणु क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बना।

पोखरण-II (11 और 13 मई 1998) - ऑपरेशन शक्ति

  • प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय, DRDO प्रमुख डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष डॉ. आर. चिदंबरम की देखरेख में पोखरण में कुल 5 भूमिगत परीक्षण हुए: 11 मई को 3 (एक थर्मोन्यूक्लियर, एक विखंडन और एक सब-किलोटन device) और 13 मई को 2 (दोनों सब-किलोटन)।
  • कूट नाम 'ऑपरेशन शक्ति' था। इसके बाद भारत ने स्वयं को पूर्ण परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र घोषित किया।
  • 11 मई को परीक्षण की स्मृति में पूरे देश में प्रतिवर्ष 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' (National Technology Day) मनाया जाता है।
  • परमाणु सिद्धांत: भारत ने 'पहले इस्तेमाल नहीं' (No First Use - NFU) और 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध' (Credible Minimum Deterrence) की आधिकारिक नीति अपनाई।

परमाणु सुरक्षा और नियामक स्वरूप: AERB

परमाणु विकिरण से नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र स्थापित है:

  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB): इसका गठन 15 नवंबर 1983 को परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के तहत किया गया। मुख्यालय मुंबई में है। दिसंबर 2025 में बने SHANTI Act से AERB को कानूनी (statutory) दर्जा मिला। यह देश में सभी परमाणु संयंत्रों, अस्पतालों में एक्स-रे मशीनों और रेडियोधर्मी स्रोतों के लिए सुरक्षा नियम तय और लागू करता है।
  • यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (UCIL): झारखंड के जादूगोड़ा और आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ले में यूरेनियम खनन और शोधन का कार्य।
  • नाभिकीय ईंधन परिसर (NFC), हैदराबाद: परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन बंडलों का निर्माण।
  • भारी जल बोर्ड (HWB), मुंबई: कोटा (रावतभाटा), मनुगुरु, थल और हजीरा जैसे संयंत्रों में भारी जल का उत्पादन।
  • SHANTI Act 2025: दिसंबर 2025 में संसद से पास इस कानून (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear energy for Transforming India) ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम 2010 की जगह ली। इससे बिजली उत्पादन में निजी कंपनियों के आने का रास्ता खुला, पर यूरेनियम संवर्धन और ईंधन reprocessing केंद्र सरकार के पास ही रहे।
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • भारी जल (Heavy Water - D2O) का अणुभार 20 होता है (सामान्य जल का 18)।
  • कच्चा थोरियम 'मोनाजाइट' अयस्क से प्राप्त होता है, जो केरल और ओडिशा के तटीय इलाकों में प्रचुर मात्रा में मिलता है।
  • 2008 में अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु समझौता (123 समझौता), IAEA के साथ safeguards समझौता और NSG से छूट मिलने के बाद भारत वैश्विक परमाणु ईंधन व्यापार में शामिल हुआ।
  • 2025 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की परमाणु बिजली क्षमता करीब 8,780 MW (24 रिएक्टर) थी; लक्ष्य 2047 तक 100 GW है।
  • Budget 2025-26 में ₹20,000 करोड़ का Nuclear Energy Mission घोषित हुआ, जिसका लक्ष्य 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी Small Modular Reactors (SMR) चालू करना है।
  • RAS Pre 2024 (Q4) में परमाणु संयंत्र और राज्य का मिलान पूछा गया था (ध्यान दें: कैगा कर्नाटक में है, तमिलनाडु में नहीं)। RAS Pre 2013 (Q141) में डॉ. राजा रमन्ना पर प्रश्न था।

RAS Prelims MCQ

  1. भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रूपरेखा किसने तैयार की थी?
    A) डॉ. विक्रम साराभाई
    B) डॉ. होमी जहांगीर भाभा
    C) डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
    D) शांति स्वरूप भटनागर
    उत्तर: B) डॉ. होमी जहांगीर भाभा
    कारण: डॉ. होमी भाभा ने भारत के थोरियम भंडारों के उपयोग के लिए 3-चरणीय कार्यक्रम बनाया।
  2. भारत के प्रथम चरण के परमाणु रिएक्टरों (PHWR) में मंदक और शीतलक के रूप में क्या उपयोग होता है?
    A) साधारण जल
    B) भारी जल (D2O)
    C) तरल सोडियम
    D) ग्रेफाइट
    उत्तर: B) भारी जल (D2O)
    कारण: PHWR रिएक्टरों में भारी जल (Deuterium Oxide) ही मंदक और शीतलक का काम करता है।
  3. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) में शीतलक के रूप में किसका उपयोग किया जाता है?
    A) भारी जल
    B) तरल सोडियम
    C) तरल नाइट्रोजन
    D) कार्बन डाइऑक्साइड
    उत्तर: B) तरल सोडियम
    कारण: फास्ट ब्रीडर में न्यूट्रॉन धीमे नहीं किए जाते, इसलिए तरल सोडियम शीतलक बनता है।
  4. राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (RAPS) राज्य के किस जिले में स्थित है?
    A) कोटा
    B) चित्तौड़गढ़
    C) बांसवाड़ा
    D) झालावाड़
    उत्तर: B) चित्तौड़गढ़
    कारण: रावतभाटा परमाणु संयंत्र चित्तौड़गढ़ जिले में राणा प्रताप सागर बांध के पास है।
  5. पोखरण में प्रथम परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा) किस तारीख को किया गया था?
    A) 18 मई 1974
    B) 11 मई 1998
    C) 15 अगस्त 1947
    D) 26 जनवरी 1950
    उत्तर: A) 18 मई 1974
    कारण: 18 मई 1974 को इंदिरा गांधी के समय पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण हुआ था।
  6. 11 मई को प्रतिवर्ष 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' किस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाते हैं?
    A) आर्यभट्ट उपग्रह प्रक्षेपण
    B) पोखरण-II परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति)
    C) चंद्रयान-3 की लैंडिंग
    D) प्रथम सुपर कंप्यूटर निर्माण
    उत्तर: B) पोखरण-II परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति)
    कारण: 11 मई 1998 को पोखरण-II परीक्षणों की सफलता पर यह दिवस मनाया जाता है।
  7. भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र 'कुडानकुलम' किस देश के सहयोग से बना है?
    A) अमेरिका
    B) फ्रांस
    C) रूस
    D) कनाडा
    उत्तर: C) रूस
    कारण: तमिलनाडु का कुडानकुलम संयंत्र रूसी VVER-1000 तकनीक पर आधारित है।
  8. थोरियम मुख्य रूप से किस खनिज अयस्क से प्राप्त किया जाता है?
    A) पिचब्लेंड
    B) मोनाजाइट
    C) बॉक्साइट
    D) हेमेटाइट
    उत्तर: B) मोनाजाइट
    कारण: थोरियम का मुख्य स्रोत तटीय क्षेत्रों में मिलने वाली मोनाजाइट रेत है।
  9. परमाणु सुरक्षा और विकिरण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार भारतीय नियामक संस्था कौन सी है?
    A) BARC
    B) ISRO
    C) AERB
    D) DRDO
    उत्तर: C) AERB
    कारण: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (Atomic Energy Regulatory Board) सुरक्षा नियम लागू करता है।
  10. बिना रुके लगातार 962 दिनों तक बिजली बनाकर विश्व रिकॉर्ड किस भारतीय संयंत्र ने बनाया?
    A) तारापुर
    B) कैगा (कर्नाटक)
    C) रावतभाटा
    D) कल्पक्कम
    उत्तर: B) कैगा (कर्नाटक)
    कारण: कर्नाटक के कैगा परमाणु ऊर्जा स्टेशन की यूनिट-1 ने यह विश्व कीर्तिमान बनाया।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) को 'ब्रीडर' क्यों कहा जाता है?
    उत्तर: यह रिएक्टर ऊर्जा उत्पादन के दौरान जितना विखंडनीय ईंधन (Pu-239) जलाता है, गैर-विखंडनीय पदार्थों (U-238 या थोरियम) से उससे अधिक नया विखंडनीय ईंधन पैदा (Breed) कर देता है।
  2. परमाणु ऊर्जा में मंदक (Moderator) और शीतलक (Coolant) में क्या अंतर है?
    उत्तर: मंदक तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करता है ताकि श्रृंखला अभिक्रिया नियंत्रित रहे (जैसे भारी जल), जबकि शीतलक विखंडन से पैदा हुई प्रचंड ऊष्मा को सोखकर टरबाइन तक भाप बनाने ले जाता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. डॉ. भाभा के त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के तीनों चरणों और थोरियम की महत्ता का परीक्षण कीजिए।
    उत्तर: तीन चरण इस प्रकार हैं:
    1. चरण 1: PHWR में प्राकृतिक यूरेनियम से ऊर्जा और उप-उत्पाद के रूप में प्लूटोनियम-239 का निर्माण।
    2. चरण 2: FBR में प्लूटोनियम से तेज ऊर्जा और थोरियम आवरण से यूरेनियम-233 का उत्पादन।
    3. चरण 3: AHWR में थोरियम-232 और यूरेनियम-233 से अनवरत ऊर्जा उत्पादन।
    महत्ता: भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, इसलिए यह मॉडल लंबे समय में आयातित यूरेनियम पर निर्भरता घटा सकता है।
  2. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में राजस्थान के योगदान और सामरिक महत्व की विवेचना कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): देश का दूसरा परमाणु बिजली घर और पहला PHWR, भारी जल संयंत्र, नई 700 MWe इकाइयां (RAPP-7 2025 से चालू)।
    - माही बांसवाड़ा: 4 x 700 MWe की नई परियोजना (आधारशिला 25 सितंबर 2025)।
    - पोखरण (जैसलमेर): 1974 (स्माइलिंग बुद्धा) और 1998 (ऑपरेशन शक्ति) के दोनों ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों का साक्षी, जिसने भारत को वैश्विक परमाणु शक्ति का दर्जा दिलाया।
    - यूरेनियम अन्वेषण: सीकर जिले के रोहिल (खंडेला क्षेत्र) में यूरेनियम भंडार मिले हैं, जिससे राज्य का महत्व बढ़ा है।

FAQs

Q1: क्या रावतभाटा परमाणु संयंत्र सुरक्षित है?
रावतभाटा में अपने-आप reactor बंद करने (shutdown) और आपात शीतलन जैसी कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाएं हैं, और AERB इनकी नियमित जांच करता है।

Q2: संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) क्या होता है?
प्राकृतिक यूरेनियम में विखंडनीय U-235 केवल 0.7% होता है; जब विशेष तकनीकों से इसकी मात्रा 3% से 5% तक बढ़ा दी जाती है, तो उसे संवर्धित यूरेनियम कहते हैं।

Q3: भारत की परमाणु त्रिमूर्ति (Nuclear Triad) क्या है?
जमीन से (अग्नि मिसाइलें), हवा से (लड़ाकू विमान), और समुद्र से (अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियां) परमाणु हथियार दागने की त्रि-आयामी क्षमता को न्यूक्लियर ट्रायड कहते हैं।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • परमाणु ऊर्जा आयोग: अगस्त 1948; परमाणु ऊर्जा विभाग: अगस्त 1954; जनक: डॉ. होमी जहांगीर भाभा।
  • 3 चरण: PHWR (प्राकृतिक यूरेनियम) → FBR (प्लूटोनियम, सोडियम शीतलक) → थोरियम आधारित रिएक्टर (U-233)।
  • PFBR (500 MWe, कल्पक्कम) 6 अप्रैल 2026 को पहली बार critical हुआ।
  • रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): 1973 में कनाडा के सहयोग से, भारत का पहला PHWR; RAPP-7 (700 MWe) अप्रैल 2025 से चालू।
  • तारापुर (महाराष्ट्र, 1969) पहला परमाणु बिजली घर; कुडनकुलम (तमिलनाडु, रूस) सबसे बड़ा।
  • पोखरण-I: 18 मई 1974 'स्माइलिंग बुद्धा'; पोखरण-II: 11 और 13 मई 1998 'ऑपरेशन शक्ति' (5 परीक्षण)।
  • 11 मई: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस; AERB: 15 नवंबर 1983, मुंबई।
  • माही बांसवाड़ा (4 x 700 MWe) की आधारशिला: 25 सितंबर 2025।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Nuclear Energy in India in Hindi: भारत।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में Nuclear Energy in India in Hindi: भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: 3-चरणीय कार्यक्रम, प्रमुख परमाणु केंद्र और सुरक्षा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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