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ऊर्जा संसाधन (परम्परागत एवं गैर-परम्परागत)

परिचय

ऊर्जा स्रोतों को दो भागों में विभाजित किया जाता है:

  • परम्परागत (Conventional): कोयला, खनिज तेल, जल विद्युत, परमाणु ऊर्जा।
  • गैर-परम्परागत (Non-Conventional): सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो गैस, बायोमास।
  • REDA: गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए 21 जनवरी 1985 को 'राजस्थान ऊर्जा विकास एजेंसी' (REDA) का गठन किया गया। (नोट: 2002 में RREC में विलय)।

परम्परागत ऊर्जा स्रोत

1. तापीय विद्युत (कोयला व गैस)

राजस्थान में लिग्नाइट (भूरा कोयला) पाया जाता है। प्रमुख खनन क्षेत्र: पलाना, बरसिंगसर (बीकानेर), कपूरड़ी (बाड़मेर), और मेड़ता (नागौर)।

परियोजनास्थानमुख्य तथ्य
कोटा सुपर थर्मलकोटाराज्य का पहला कोयला आधारित तापीय विद्युत गृह (1983 में प्रारंभ)।
सूरतगढ़ थर्मलगंगानगरराज्य का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट (आधुनिक राजस्थान का विकास तीर्थ)।
छबड़ा थर्मलबारांमहत्वपूर्ण विद्युत उत्पादन इकाई (सुपर क्रिटिकल तकनीक)।
अन्ता गैस परियोजनाबारांNTPC द्वारा संचालित गैस आधारित बिजलीघर।

2. खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस

  • बाड़मेर-सांचोर बेसिन: केयरन एनर्जी (Cairn Energy) द्वारा खोजे गए प्रमुख तेल क्षेत्र: मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या। 2009 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू।
  • जैसलमेर बेसिन: मनिहारी टिब्बा, तनोट और घोटारू में प्राकृतिक गैस के भंडार मिले हैं।

3. जल विद्युत

  • चम्बल घाटी परियोजना: राजस्थान और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना (50:50)। गाँधी सागर (मप्र), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा) और जवाहर सागर (कोटा) बांधों से बिजली का उत्पादन होता है।
  • माही बजाज सागर: बांसवाड़ा। विद्युत का 100% हिस्सा (140 मेगावाट) राजस्थान को मिलता है।
  • भाखड़ा नांगल और व्यास परियोजना: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त भागीदारी।

4. परमाणु ऊर्जा

  • रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): भारत का दूसरा परमाणु विद्युत गृह (तारापुर के बाद)। कनाडा के सहयोग से स्थापित। यह भारी पानी (Heavy Water) पर आधारित है।

गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत

1. पवन ऊर्जा

पश्चिमी राजस्थान में वायु की गति (20-40 किमी/घंटा) के कारण पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। मार्च 2000 में प्रथम पवन ऊर्जा नीति घोषित की गई।

  • अमरसागर (जैसलमेर): राज्य की पहली पवन ऊर्जा परियोजना।
  • देवगढ़ (प्रतापगढ़): प्रमुख पवन ऊर्जा केंद्र।
  • फलौदी (जोधपुर): पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित।

2. सौर ऊर्जा

वर्ष भर साफ आसमान के कारण राजस्थान में सौर ऊर्जा की सर्वाधिक संभावनाएं हैं। मथानिया (जोधपुर) में सौर तापीय विद्युत संयंत्र (Solar Thermal Power Plant) स्थापित है।

3. बायो-ऊर्जा

  • बायो गैस: पशुओं के गोबर पर आधारित।
  • बायोमास: कृषि अपशिष्ट (सरसों की तूड़ी, विलायती बबूल) से ऊर्जा उत्पादन। पद्मपुर (गंगानगर) और खेरली (अलवर) में संयंत्र स्थित हैं।

वर्तमान घटनाक्रम एवं अपडेट

1. भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर)

वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क। कुल क्षमता: 2245 मेगावाट। यह 4 चरणों में विकसित किया गया है।

2. एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL)

स्थान: पचपदरा (बाड़मेर)। यह HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है। यह देश की पहली रिफाइनरी है जो सीधे BS-VI मानक का ईंधन उत्पादित करेगी। क्षमता: 9 MMTPA।

3. पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM)

इस योजना (कंपोनेंट A) के तहत देश का पहला सौर ऊर्जा संयंत्र भालोजी (जयपुर) में स्थापित किया गया।

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