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ISRO Launch Vehicles in Hindi: इसरो (ISRO): प्रक्षेपण यान (PSLV, GSLV, LVM3) और उपग्रह प्रणालियां

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: ISRO Launch Vehicles in Hindi: इसरो (ISRO): प्रक्षेपण यान (PSLV, GSLV, LVM3) और उपग्रह प्रणालियां - अंतरिक्ष, रक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी
  • • अवलोकन: Quick Answer: ISRO Launch Vehicles in Hindi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को ...
Quick Answer: ISRO Launch Vehicles in Hindi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में हुई थी। इसरो का मुख्य प्रक्षेपण केंद्र सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) में स्थित है। इसरो ने उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है, जिसमें 4-चरणीय PSLV (इसरो का वर्कहॉर्स), भारी उपग्रहों के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन युक्त LVM3 (बाहुबली) और छोटे उपग्रहों के लिए SSLV शामिल हैं। इसके अलावा भारत ने अपना स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC (नाविक) भी विकसित किया है।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का इतिहास और इसरो का उद्भव

भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की नींव डॉ. विक्रम साराभाई ने रखी, जिन्हें 'भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक' कहा जाता है। इस note में रॉकेट (launch vehicle) और उपग्रह व्यवस्था पर ध्यान है; चंद्रयान, आदित्य-L1 और गगनयान जैसे मिशन अलग note में हैं।

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1. ऐतिहासिक मील के पत्थर

  • 1962: परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत 'भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति' (INCOSPAR) का गठन हुआ।
  • 21 नवंबर 1963: तिरुवनंतपुरम के निकट थुम्बा (TERLS) से भारत का पहला साउंडिंग रॉकेट 'नाइक-अपाचे' (Nike-Apache) छोड़ा गया।
  • 15 अगस्त 1969: INCOSPAR का पुनर्गठन कर 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' (ISRO) की स्थापना हुई। मुख्यालय बेंगलुरु में है।
  • 1972: अंतरिक्ष आयोग (Space Commission) और अंतरिक्ष विभाग (Department of Space - DOS) की स्थापना हुई। अंतरिक्ष विभाग सीधे प्रधानमंत्री के अधीन है और सितंबर 1972 में ISRO को इसी विभाग के तहत लाया गया।
  • 19 अप्रैल 1975: भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह 'आर्यभट्ट' सोवियत संघ के कॉसमॉस-3M रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया।

इसरो के प्रमुख प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles)

इसरो ने उपग्रहों को विभिन्न कक्षाओं में स्थापित करने के लिए कई पीढ़ियों के प्रक्षेपण यान विकसित किए हैं:

1. SLV-3 और ASLV (प्रारंभिक चरण)

  • SLV-3 (उपग्रह प्रक्षेपण यान-3): भारत का पहला प्रयोगात्मक प्रक्षेपण यान। यह 4 चरणों वाला ठोस प्रणोदक रॉकेट था। 18 जुलाई 1980 को इसके जरिए 35 किग्रा के 'रोहिणी उपग्रह' (RS-1) को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर भारत रॉकेट तकनीक वाले चुनिंदा देशों में शामिल हुआ। इसके प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम थे।
  • ASLV (संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान): 5 चरणों वाला ठोस रॉकेट, जिसने 150 किग्रा पेलोड को 400 किमी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित करने की तकनीक विकसित की।

2. PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) - इसरो का वर्कहॉर्स

PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद और सफल प्रक्षेपण यान है। इसकी मुख्य विशेषताएं:

  • 4 चरणीय प्रणोदन: यह ठोस और तरल प्रणोदकों का एकांतर (वैकल्पिक) उपयोग करता है:
    • पहला चरण (PS1): ठोस रॉकेट मोटर (HTPB आधारित ठोस ईंधन) और स्ट्रैप-ऑन बूस्टर।
    • दूसरा चरण (PS2): स्वदेशी 'विकास इंजन' (Vikas Engine), जो तरल ईंधन (UDMH और N2O4) का उपयोग करता है।
    • तीसरा चरण (PS3): ठोस रॉकेट मोटर।
    • चौथा चरण (PS4): दो तरल इंजन (MMH और MON-3)।
  • पेलोड क्षमता: 1,750 किग्रा को सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO - 600 किमी) में और 1,425 किग्रा को sub-GTO (भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा से नीची कक्षा) में ले जा सकता है।
  • ऐतिहासिक उड़ानें: चंद्रयान-1 (2008 में PSLV-C11), मंगलयान (2013 में PSLV-C25), एक ही उड़ान में 104 उपग्रहों का विश्व रिकॉर्ड (2017 में PSLV-C37), और आदित्य-L1 (2023 में PSLV-C57)।
  • हाल की असफलताएं (2026 तक): PSLV-C61 (18 मई 2025, EOS-09) और PSLV-C62 (12 जनवरी 2026, EOS-N1 और साथी उपग्रह) दोनों तीसरे चरण (PS3) की खराबी से असफल रहे। इसके बावजूद PSLV का कुल record ISRO के सबसे भरोसेमंद रॉकेट का ही है।

3. GSLV Mk-II (भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान)

  • यह 3 चरणों वाला रॉकेट है, जो भारी संचार उपग्रहों को 36,000 किमी ऊंची भू-स्थैतिक कक्षा में भेजने के लिए बना है।
  • पहला चरण ठोस (S139 मोटर, साथ में 4 तरल strap-on बूस्टर), दूसरा चरण तरल (विकास इंजन), और तीसरा चरण 'स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज' (CUS) है।
  • क्रायोजेनिक चरण में तरल हाइड्रोजन (-253 डिग्री सेल्सियस) ईंधन के रूप में और तरल ऑक्सीजन (-183 डिग्री सेल्सियस) ऑक्सीडाइजर के रूप में जलते हैं।
  • पेलोड क्षमता: 2,250 किग्रा GTO में।

4. LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3 / बाहुबली)

  • इसरो का सबसे शक्तिशाली और भारी लिफ्ट रॉकेट।
  • बनावट: 3 चरण — दो विशाल ठोस बूस्टर (S200), एक मुख्य तरल कोर चरण (L110 जिसमें दो विकास इंजन हैं), और शीर्ष पर शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण (C25) जिसमें CE-20 क्रायोजेनिक इंजन लगा है।
  • क्षमता: 4,000 किग्रा तक के भारी उपग्रहों को GTO में और 8,000 किग्रा तक के उपग्रहों को LEO में ले जाने में सक्षम।
  • प्रमुख मिशन: चंद्रयान-2 (2019), चंद्रयान-3 (LVM3-M4 मिशन, 14 जुलाई 2023), और भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए इसे मानव-रेटेड (HLVM3) बनाया गया है।
  • नए record (2025): 2 नवंबर 2025 को LVM3-M5 ने CMS-03 (करीब 4,410 किग्रा) को GTO में पहुंचाया, जो भारत की धरती से GTO में भेजा गया सबसे भारी संचार उपग्रह है। 24 दिसंबर 2025 को LVM3-M6 ने अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile का BlueBird Block-2 (करीब 6,100 किग्रा) LEO में भेजा, जो LVM3 का अब तक का सबसे भारी payload है।

5. SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल)

यह 3 ठोस चरणों और 1 तरल वेग ट्रिमिंग मॉड्यूल (VTM) वाला किफायती रॉकेट है, जो 500 किग्रा तक के छोटे उपग्रहों को 500 किमी की निचली कक्षा में तेजी से भेजने के लिए तैयार किया गया है। इसकी पहली उड़ान SSLV-D1 (अगस्त 2022) असफल रही, फिर SSLV-D2 (फरवरी 2023) और SSLV-D3 (अगस्त 2024, EOS-08) सफल रहीं। जून 2025 में IN-SPACe के जरिए SSLV की technology हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को देने का फैसला हुआ (करीब ₹511 करोड़)।

Table 1: इसरो के प्रक्षेपण यानों का तुलनात्मक विवरण

प्रक्षेपण यान चरणों की संख्या प्रणोदक प्रकार पेलोड क्षमता मुख्य ऐतिहासिक मिशन
SLV-3 4 चरण सभी ठोस 40 किग्रा (LEO) रोहिणी उपग्रह (1980)
PSLV 4 चरण ठोस - तरल - ठोस - तरल 1,750 किग्रा (ध्रुवीय SSPO) चंद्रयान-1, मंगलयान, आदित्य-L1
GSLV Mk-II 3 चरण ठोस - तरल - क्रायोजेनिक (CUS) 2,250 किग्रा (GTO) GSAT संचार उपग्रह
LVM3 3 चरण ठोस (S200) - तरल (L110) - क्रायोजेनिक (C25) 4,000 किग्रा (GTO) / 8,000 किग्रा (LEO) चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, CMS-03 (2025); गगनयान के लिए HLVM3
SSLV 3 ठोस + 1 तरल VTM ठोस और तरल 500 किग्रा (LEO) EOS उपग्रह, वाणिज्यिक नैनो उपग्रह

भारत की उपग्रह प्रणालियां और NavIC नेविगेशन

इसरो ने विभिन्न क्षेत्रों में सेवा के लिए उपग्रहों की व्यापक श्रृंखला स्थापित की है:

1. इनसैट (INSAT) और जीसैट (GSAT) श्रृंखला

भू-स्थैतिक कक्षा (Geostationary Orbit - 36,000 किमी) में स्थापित दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण, मौसम विज्ञान और आपदा चेतावनी के उपग्रह।

2. सुदूर संवेदन (IRS / Cartosat / RISAT)

ध्रुवीय सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह। कृषि पैदावार अनुमान, वन सर्वेक्षण, भू-जल खोज और सीमा सुरक्षा में उपयोगी। RISAT उपग्रह बादलों के पार भी दिन-रात तस्वीरें ले सकने वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) से लैस हैं। सूखे की निगरानी में भी इन उपग्रहों का data काम आता है (देखें: राजस्थान में सूखा और अकाल)।

3. नाविक (NavIC - Navigation with Indian Constellation)

  • भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह व्यवस्था (पुराना नाम: IRNSS)।
  • उपग्रहों की संख्या (design): 7 उपग्रहों का समूह (3 भू-स्थैतिक और 4 झुकी हुई भू-तुल्यकालिक कक्षाओं में)।
  • 2026 की स्थिति: कई पुराने उपग्रहों की atomic clock खराब होने से जुलाई 2026 में सरकार ने संसद में बताया कि केवल 3 उपग्रह (IRNSS-1B, IRNSS-1I, NVS-01) positioning सेवा दे रहे हैं, जबकि अकेले काम करने के लिए कम से कम 4 चाहिए। NVS-02 (जनवरी 2025) गलत कक्षा में अटक गया। news reports के अनुसार NVS-03 को 30 अक्टूबर 2026 को GSLV से launch किया गया; commissioning के बाद ही यह सेवा देगा।
  • कवरेज क्षेत्र: संपूर्ण भारत और भारत की सीमाओं से बाहर 1,500 किमी तक का इलाका।
  • दो प्रकार की सेवाएं:
    1. मानक स्थिति निर्धारण सेवा (SPS): आम नागरिकों के लिए 20 मीटर से बेहतर सटीकता।
    2. प्रतिबंधित सेवा (Restricted Service - RS): सेना और सुरक्षा बलों जैसे अधिकृत users के लिए encrypted सेवा।
  • गगन (GAGAN): इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ओर से नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए विकसित GPS समर्थित भू-संवर्धित नेविगेशन सिस्टम।

Table 2: इसरो के प्रमुख अनुसंधान केंद्र और उनकी भूमिका

केंद्र का नाम स्थान मुख्य कार्य क्षेत्र
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) तिरुवनंतपुरम (केरल) प्रक्षेपण यान (रॉकेट) अनुसंधान और डिजाइन
यू. आर. राव उपग्रह केंद्र (URSC) बेंगलुरु (कर्नाटक) सभी प्रकार के उपग्रहों का निर्माण व परीक्षण
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) भारत का मुख्य रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र (स्पेसपोर्ट)
द्रव प्रणोदन व्यवस्था केंद्र (LPSC) वलियमला (तिरुवनंतपुरम) और बेंगलुरु तरल और क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन (विकास, CE-20)
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC) अहमदाबाद (गुजरात) उपग्रहों के पेलोड, कैमरे और सेंसर निर्माण
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) हैदराबाद (तेलंगाना) उपग्रह से प्राप्त डाटा का प्रसंस्करण और वितरण
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • 2017 में PSLV-C37 के जरिए एक साथ 104 उपग्रह छोड़कर इसरो ने तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
  • क्रायोजेनिक तकनीक में बहुत कम तापमान पर गैसों को द्रवीकृत करके प्रयुक्त किया जाता है (LOX और LH2)।
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) इसरो की वाणिज्यिक शाखा है जो भारतीय उद्योगों के साथ रॉकेट उत्पादन को बढ़ावा देती है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जून 2020 में 'IN-SPACe' (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) का गठन किया गया।
  • 2026 तक ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन हैं (जनवरी 2025 से)।
  • RAS Pre 2016 (Q86) में रॉकेट और उनसे भेजे गए उपग्रहों का मिलान पूछा गया था: SLV-3 → रोहिणी, ASLV → SROSS-C, PSLV → चंद्रयान-1, GSLV → EDUSAT। RAS Pre 2013 (Q78) में GSAT उपग्रहों की असफल launch पर प्रश्न था।

RAS Prelims MCQ

  1. भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक किसे कहा जाता है?
    A) डॉ. होमी जहांगीर भाभा
    B) डॉ. विक्रम साराभाई
    C) डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
    D) सतीश धवन
    उत्तर: B) डॉ. विक्रम साराभाई
    कारण: डॉ. विक्रम साराभाई ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की नींव रखी।
  2. PSLV प्रक्षेपण यान में कितने चरण होते हैं और उनका क्रम क्या है?
    A) 3 चरण: ठोस, तरल, क्रायोजेनिक
    B) 4 चरण: ठोस, तरल, ठोस, तरल
    C) 4 चरण: सभी ठोस
    D) 2 चरण: ठोस और क्रायोजेनिक
    उत्तर: B) 4 चरण: ठोस, तरल, ठोस, तरल
    कारण: PSLV में एकांतर क्रम में चार चरण (ठोस-तरल-ठोस-तरल) होते हैं।
  3. LVM3 (GSLV Mk-III) के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में कौन सा स्वदेशी इंजन लगा है?
    A) विकास इंजन
    B) CE-20 इंजन
    C) नाइक इंजन
    D) कावेरी इंजन
    उत्तर: B) CE-20 इंजन
    कारण: LVM3 के C25 क्रायोजेनिक चरण में भारत का सबसे शक्तिशाली CE-20 इंजन लगता है।
  4. भारत का स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम NavIC कितने उपग्रहों के समूह पर आधारित है?
    A) 4 उपग्रह
    B) 7 उपग्रह
    C) 12 उपग्रह
    D) 24 उपग्रह
    उत्तर: B) 7 उपग्रह
    कारण: NavIC की design 7 उपग्रहों (3 भू-स्थैतिक और 4 भू-तुल्यकालिक) की है। (2026 में clock खराबी के कारण इनमें से केवल कुछ ही सेवा दे रहे हैं।)
  5. NavIC की कवरेज सीमा भारत की सीमा से बाहर कितनी दूरी तक है?
    A) 500 किमी
    B) 1,000 किमी
    C) 1,500 किमी
    D) 3,000 किमी
    उत्तर: C) 1,500 किमी
    कारण: NavIC संपूर्ण भारत और इसकी सीमाओं से 1,500 किमी बाहर तक संकेत देता है।
  6. भारत का रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र (स्पेसपोर्ट) कहाँ स्थित है?
    A) थुम्बा (केरल)
    B) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)
    C) चांदीपुर (ओडिशा)
    D) पोखरण (राजस्थान)
    उत्तर: B) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)
    कारण: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) श्रीहरिकोटा में स्थित है।
  7. भारत का प्रथम उपग्रह 'आर्यभट्ट' किस वर्ष प्रक्षेपित किया गया था?
    A) 1969
    B) 1972
    C) 1975
    D) 1980
    उत्तर: C) 1975
    कारण: 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ की सहायता से आर्यभट्ट प्रक्षेपित हुआ था।
  8. PSLV के दूसरे चरण में कौन सा स्वदेशी तरल इंजन प्रयोग किया जाता है?
    A) विकास इंजन
    B) चेतन इंजन
    C) गगन इंजन
    D) क्रायो इंजन
    उत्तर: A) विकास इंजन
    कारण: दूसरे चरण में तरल ईंधन चालित विकास इंजन (Vikas Engine) काम करता है।
  9. नागरिक उड्डयन क्षेत्र में GPS की सटीकता बढ़ाने के लिए भारत ने कौन सा सिस्टम बनाया है?
    A) NavIC
    B) GAGAN
    C) RISAT
    D) CARTOSAT
    उत्तर: B) GAGAN
    कारण: गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) विमानन क्षेत्र का नेविगेशन सिस्टम है।
  10. छोटे उपग्रहों को 500 किमी LEO में तेजी से भेजने के लिए इसरो ने कौन सा नया रॉकेट बनाया है?
    A) ASLV
    B) SSLV
    C) RLV
    D) Sounding Rocket
    उत्तर: B) SSLV
    कारण: स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) 500 किग्रा तक के उपग्रहों के लिए किफायती रॉकेट है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन क्या होता है?
    उत्तर: अत्यधिक कम तापमान पर द्रवीकृत गैसों (तरल हाइड्रोजन -253°C और तरल ऑक्सीजन -183°C) को प्रणोदक के रूप में जलाने वाला रॉकेट इंजन क्रायोजेनिक इंजन कहलाता है, जो उच्च थ्रस्ट उपलब्ध करता है।
  2. NavIC और GPS में मुख्य अंतर क्या है?
    उत्तर: GPS अमेरिका का वैश्विक नेविगेशन सिस्टम (Global) है जिसमें करीब 31 सक्रिय उपग्रह हैं, जबकि NavIC भारत का क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम (Regional) है जिसकी design 7 उपग्रहों की है और यह भारत और आसपास 1,500 किमी तक सेवा देता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. PSLV को 'इसरो का वर्कहॉर्स' क्यों कहा जाता है? इसकी चार चरणीय बनावट समझाइए।
    उत्तर: PSLV ने 1994 से लगातार दर्जनों घरेलू और विदेशी उपग्रहों, चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है। इसकी बनावट:
    1. प्रथम चरण (PS1): HTPB आधारित ठोस ईंधन और स्ट्रैप-ऑन बूस्टर।
    2. द्वितीय चरण (PS2): विकास तरल इंजन (UDMH और N2O4 ईंधन)।
    3. तृतीय चरण (PS3): ठोस रॉकेट मोटर।
    4. चतुर्थ चरण (PS4): दो तरल इंजन (MMH और MON-3)। यह लचीलापन और विश्वसनीयता इसे वर्कहॉर्स बनाती है।
  2. भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - कृषि और संसाधन: फसल उत्पादन पूर्वानुमान, सूखा आकलन, भूमि उपयोग मानचित्रण, भू-जल स्रोतों की पहचान।
    - आपदा प्रबंधन: चक्रवात (जैसे हुदहुद, मोचा) की सटीक पूर्व चेतावनी, बाढ़ निगरानी और राहत समन्वय।
    - संचार और शिक्षा: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-एजुकेशन (EDUSAT), टेली-मेडिसिन और डिजिटल कनेक्टिविटी।
    - रणनीतिक सुरक्षा: सीमाओं की 24x7 निगरानी (RISAT उपग्रह), सुरक्षित सैन्य संचार, और NavIC के जरिए सटीक मार्गदर्शन।

FAQs

Q1: क्या भारत के पास अपना निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण पैड है?
हां, श्रीहरिकोटा (SDSC-SHAR) में निजी कंपनी अग्निकुल कॉसमॉस का अपना launchpad बना है। निजी रॉकेटों को मंजूरी IN-SPACe देता है।

Q2: सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSPO) क्या होती है?
यह ध्रुवीय कक्षा होती है जिसमें उपग्रह पृथ्वी के हर हिस्से के ऊपर से एक ही स्थानीय सौर समय पर गुजरता है, जिससे छाया की स्थिति समान रहने के कारण तस्वीरें लेना आसान होता है।

Q3: क्या NavIC आम लोगों के काम आता है?
हां, कई smartphones और vehicle tracking devices में NavIC support आता है, और सरकार इसका इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है। लेकिन 2026 में कम उपग्रह सक्रिय होने से अकेले NavIC से सटीक location मिलना मुश्किल था; नए NVS उपग्रह इसी कमी को दूर करने के लिए भेजे जा रहे हैं।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • ISRO की स्थापना: 15 अगस्त 1969; INCOSPAR: 1962; अंतरिक्ष विभाग: 1972।
  • पहला साउंडिंग रॉकेट: 21 नवंबर 1963, थुम्बा; पहला उपग्रह आर्यभट्ट: 19 अप्रैल 1975।
  • SLV-3 से रोहिणी (RS-1) 18 जुलाई 1980 को कक्षा में; project director: ए. पी. जे. अब्दुल कलाम।
  • PSLV: 4 चरण (ठोस-तरल-ठोस-तरल); PSLV-C37 से एक साथ 104 उपग्रह (2017)।
  • LVM3: S200 + L110 + C25 (CE-20 इंजन); CMS-03 (करीब 4,410 किग्रा, नवंबर 2025) भारत से GTO में सबसे भारी।
  • NavIC (पहले IRNSS): 7 उपग्रहों की design, भारत के बाहर 1,500 किमी तक; 2026 में केवल 3 उपग्रह सेवा में थे।
  • GAGAN: ISRO और AAI का विमानन navigation system।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: ISRO Launch Vehicles in Hindi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में ISRO Launch Vehicles in Hindi: इसरो (ISRO): प्रक्षेपण यान (PSLV, GSLV, LVM3) और उपग्रह प्रणालियां एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको ISRO Launch Vehicles in Hindi: इसरो (ISRO): प्रक्षेपण यान (PSLV, GSLV, LVM3) और उपग्रह प्रणालियां के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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