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Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां और नौसैनिक पनडुब्बियां: S-400, पिनाका और Project 75

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां और नौसैनिक पनडुब्बियां: S-400, पिनाका और Project 75 - अंतरिक्ष, रक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी
  • • अवलोकन: Quick Answer: Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां कई परतों (multi-layer) में काम करती हैं: सबसे लंबी दूरी पर रूसी S-400 ट्रायम्फ ...
Quick Answer: Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां कई परतों (multi-layer) में काम करती हैं: सबसे लंबी दूरी पर रूसी S-400 ट्रायम्फ (400 किमी, वायुसेना में 'सुदर्शन चक्र' नाम से जाना जाता है), उसके बाद MRSAM (बराक-8, करीब 70 किमी), आकाश, QRSAM और VSHORADS; DRDO का स्वदेशी Project कुशा (LR-SAM) अभी परीक्षण में है। DRDO का पिनाका रॉकेट लॉन्चर (करीब 38 से 75+ किमी) थलसेना का हथियार है। समुद्र में Project 75 के तहत मझगांव डॉक में 6 स्कॉर्पीन डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (कलवरी से वागशीर, 2017-2025) बनीं, और परमाणु पनडुब्बियां INS अरिहंत (2016), INS अरिघात (अगस्त 2024) और INS अरिधमन (अप्रैल 2026, रिपोर्ट के अनुसार) भारत की परमाणु त्रिमूर्ति (Nuclear Triad) का समुद्री हिस्सा हैं।
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भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा ढाल (Multi-Tiered Air Defence)

आधुनिक युद्ध में हवाई हमलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों से महत्वपूर्ण सैन्य और आर्थिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए बहु-स्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

1. S-400 ट्रायम्फ (S-400 Triumf) - सुदर्शन चक्र

भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ 5 स्क्वाड्रन S-400 एयर डिफेंस मिसाइल System खरीदने का समझौता (करीब 5.43 अरब डॉलर) किया था। 3 स्क्वाड्रन 2021-23 में आ गईं, चौथी मई-जून 2026 में आई और पांचवीं 2026 के अंत या 2027 तक आनी है (2026 तक की news reports)। भारतीय वायुसेना में इसे 'सुदर्शन चक्र' नाम से जाना जाता है (मई 2025 के Operation Sindoor में इसका इस्तेमाल हुआ)। ध्यान दें: अगस्त 2025 में घोषित 'मिशन सुदर्शन चक्र' एक अलग राष्ट्रीय सुरक्षा कवच योजना है:

  • ट्रैकिंग और मारक दूरी: इसका रडार करीब 600 किमी तक लक्ष्यों को track कर सकता है और यह 400 किमी तक की दूरी और करीब 30 किमी ऊंचाई तक के लक्ष्यों को मार सकता है।
  • बहु-मिसाइल क्षमता: इसमें अलग-अलग दूरी की 4 तरह की मिसाइलें इस्तेमाल होती हैं (रेंज लगभग):
    1. 40N6E: अत्यधिक लंबी दूरी (400 किमी)।
    2. 48N6: लंबी दूरी (250 किमी)।
    3. 9M96E2: मध्यम दूरी (120 किमी)।
    4. 9M96E: कम दूरी (40 किमी)।
  • लक्ष्य: यह स्टील्थ फाइटर जेट्स, बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू ड्रोनों को हवा में ही भेदने में सक्षम है।

2. Project कुशा (Project Kusha) - स्वदेशी लंबी दूरी की रक्षा व्यवस्था

  • DRDO की बनाई जा रही स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल व्यवस्था (LR-SAM / ERADS)।
  • इसे 'भारत का अपना S-400' माना जा रहा है।
  • इसमें तीन interceptor होंगे: M1 (करीब 150 किमी), M2 (करीब 250 किमी) और M3 (करीब 350 किमी)। ये दुश्मन के AWACS विमान, लड़ाकू विमान और मिसाइलें गिराने के लिए हैं।
  • स्थिति (2026 तक): M1 का पहला flight test 23 जुलाई 2026 को ओडिशा तट (APJ अब्दुल कलाम द्वीप) से हुआ (news reports)। M2, M3 के test बाकी हैं; सेना में शामिल होना 2028-30 के आसपास अपेक्षित है।

3. मध्यम और कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियां

  • MRSAM (बराक-8): DRDO और इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने मिलकर बनाई; उत्पादन BDL करती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार रेंज करीब 70 किमी, गति करीब Mach 2। थलसेना और वायुसेना के पास इसका जमीनी रूप है, और नौसेना के युद्धपोतों पर इसका naval रूप (बराक-8) लगा है।
  • आकाश (Akash): करीब 25-30 किमी रेंज वाली स्वदेशी सतह से हवा की मिसाइल (IGMDP की मिसाइल; राजेंद्र radar)। नई पीढ़ी के आकाश-NG की रेंज user trials में करीब 30 किमी रही है; DRDO इसे और बढ़ाने पर काम कर रहा है।
  • QRSAM (त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइल): करीब 30 किमी रेंज वाली canister मिसाइल, जो चलते हुए सेना के काफिलों को हवाई हमलों से तुरंत सुरक्षा देती है। 2025 में इसे 'अनंत शस्त्र' नाम दिया गया।
  • VSHORADS: DRDO (RCI, हैदराबाद) की कंधे से दागी जाने वाली (MANPADS) बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल (रेंज करीब 6 किमी)।
  • समर (SAMAR): भारतीय वायुसेना (Maintenance Command) का खुद बनाया कम दूरी का एयर डिफेंस System, जिसमें पुरानी हवा से हवा मिसाइलों (R-73, R-27) को जमीन से दागने लायक बनाया गया है।

पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Pinaka MBRL)

पिनाका भारतीय थलसेना का प्रमुख आर्टिलरी रॉकेट System है, जिसे डीआरडीओ की पुणे स्थित प्रयोगशाला 'आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट' (ARDE) ने तैयार किया है:

  • नामकरण: भगवान शिव के पौराणिक धनुष 'पिनाका' के नाम पर।
  • मारक क्षमता और गति: एक पिनाका लॉन्चर करीब 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है। इसकी एक बैटरी (6 लॉन्चर, 72 रॉकेट) लगभग 1000 मीटर x 800 मीटर का इलाका तबाह कर सकती है।
  • पिनाका के संस्करण:
    • पिनाका Mk-I: करीब 38-40 किमी रेंज (Mk-I Enhanced करीब 45 किमी)। कारगिल युद्ध (1999) में इसका इस्तेमाल पहाड़ी चौकियों पर हुआ था।
    • पिनाका Mk-II: करीब 60 किमी रेंज।
    • गाइडेड पिनाका: navigation और guidance system (NavIC/IRNSS की मदद) से लैस, रेंज करीब 75 किमी और निशाना काफी सटीक।
  • अंतरराष्ट्रीय निर्यात: सितंबर 2022 में आर्मेनिया पिनाका का पहला विदेशी खरीदार बना।

भारतीय नौसेना का पनडुब्बी बेड़ा और Project 75

भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा 8 दिसंबर 1967 को शुरू हुई, जब रीगा (तब सोवियत संघ, अब लातविया) में पहली पनडुब्बी INS कलवरी (Foxtrot class) को नौसेना में कमीशन किया गया। हर साल 8 दिसंबर को 'सबमरीन डे' (Submarine Day) मनाया जाता है।

1. Project 75 (Project 75 - कलवरी श्रेणी)

फ्रांस के नेवल ग्रुप (Naval Group) के साथ मिलकर मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में 'मेक इन इंडिया' के तहत 6 अत्याधुनिक स्कॉर्पीन (Scorpene) श्रेणी की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण किया गया है:

  1. आईएनएस कलवरी (INS Kalvari - S21): कमीशन - दिसंबर 2017।
  2. आईएनएस खंडेरी (INS Khanderi - S22): कमीशन - सितंबर 2019। छत्रपति शिवाजी के समुद्री किले खंडेरी के नाम पर।
  3. आईएनएस करंज (INS Karanj - S23): कमीशन - मार्च 2021।
  4. आईएनएस वेला (INS Vela - S24): कमीशन - नवंबर 2021।
  5. आईएनएस वागीर (INS Vagir - S25): कमीशन - जनवरी 2023।
  6. आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer - S26): कमीशन - 15 जनवरी 2025 (मुंबई में, INS सूरत और INS नीलगिरि के साथ)। नाम हिंद महासागर की शिकारी मछली सैंडफिश पर है।

विशेषताएं: इनमें स्टील्थ (रडार और सोनार से बचने की तकनीक), वायर-गाइडेड टॉरपीडो और पानी के भीतर से सतह पर जहाज-रोधी मिसाइल (SM39 Exocet) दागने की अचूक क्षमता है।

2. Project 75I (Project 75 India) और AIP तकनीक

  • यह भारतीय नौसेना का अगला बड़ा Project है जिसके तहत AIP वाली 6 नई पारंपरिक पनडुब्बियां बनेंगी। मझगांव डॉक (MDL) और जर्मनी की TKMS की जोड़ी अकेली बोलीदाता है; 2026 तक contract पर बातचीत अंतिम चरण में बताई गई है।
  • एआईपी तकनीक (Air Independent Propulsion - AIP): पारंपरिक डीजल पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए कुछ दिनों में सतह के पास (snorkel) आना पड़ता है, जिससे उनके पकड़े जाने का खतरा बढ़ता है। AIP तकनीक से पनडुब्बी करीब 2 सप्ताह तक बिना ऊपर आए पानी के भीतर रह सकती है। DRDO की NMRL lab ने phosphoric acid fuel cell वाला स्वदेशी AIP बनाया है, जिसे कलवरी श्रेणी की INS खंडेरी में refit के समय लगाने की योजना है (2026-27, news reports)।

सामरिक परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बियां (SSBN) - परमाणु त्रिमूर्ति

परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां (SSBN) भारत की दूसरी परमाणु जवाबी हमला क्षमता (Second-Strike Capability) की रीढ़ हैं:

1. आईएनएस अरिहंत (INS Arihant)

  • भारत की पहली स्वदेशी परमाणु शक्ति चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी। इसे विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में 'उन्नत प्रौद्योगिकी पोत' (ATV) कार्यक्रम के तहत बनाया गया।
  • कमीशन: अगस्त 2016 (चुपचाप, बिना सार्वजनिक समारोह)। नवंबर 2018 में इसने अपनी पहली deterrence patrol पूरी की।
  • परमाणु रिएक्टर: यह करीब 83 मेगावाट के दाबित हल्के जल रिएक्टर (Pressurised Water Reactor) से चलती है, जिसमें संवर्धित यूरेनियम ईंधन है। इसे ईंधन के लिए महीनों तक सतह पर आने की जरूरत नहीं होती।
  • मिसाइल क्षमता: यह K-15 सागरिका (करीब 750 किमी रेंज) सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है।

2. आईएनएस अरिघात (INS Arighaat)

  • अरिहंत श्रेणी की दूसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी।
  • कमीशन: 29 अगस्त 2024 को विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल।
  • नवंबर 2024 में इससे K-4 मिसाइल (करीब 3,500 किमी रेंज) का पहला test किया गया (news reports)।

3. आईएनएस अरिधमन (INS Aridhaman)

  • अरिहंत श्रेणी की तीसरी और बड़ी SSBN (करीब 7,000 टन, 8 launch tubes; पहली दो में 4)।
  • 3 अप्रैल 2026 को विशाखापट्टनम में नौसेना में शामिल हुई (news reports; सरकार ने औपचारिक press release नहीं दी)। अब भारत के पास 3 SSBN हैं।

Table 1: भारत की प्रमुख वायु रक्षा प्रणालियों का तुलनात्मक विवरण

वायु रक्षा व्यवस्था उत्पादक देश / संस्था मारक सीमा (रेंज) गति / विशेषता
S-400 ट्रायम्फ (सुदर्शन चक्र) रूस (भारत ने खरीदी) 400 किमी (ट्रैकिंग 600 किमी) स्टील्थ फाइटर, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का संहारक
Project कुशा (LR-SAM) भारत (डीआरडीओ) करीब 150, 250 और 350 किमी (परीक्षण में) स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस शील्ड
MRSAM (बराक-8) भारत (DRDO) और इस्राइल (IAI) करीब 70 किमी करीब Mach 2 गति, तीनों सेनाओं के पास
आकाश (Akash-1S / NG) भारत (डीआरडीओ) करीब 25-30 किमी राजेंद्र radar, IGMDP की मिसाइल
पिनाका MBRL भारत (ARDE, DRDO) करीब 38 से 75 किमी (गाइडेड) एक लॉन्चर 44 सेकंड में 12 रॉकेट
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Table 2: Project 75 (स्कॉर्पीन) की सभी 6 पनडुब्बियां

पनडुब्बी का नाम पेनेंट नंबर कमीशन निर्माण स्थल
INS कलवरी (Kalvari) S21 दिसंबर 2017 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई
INS खंडेरी (Khanderi) S22 सितंबर 2019 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई
INS करंज (Karanj) S23 मार्च 2021 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई
INS वेला (Vela) S24 नवंबर 2021 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई
INS वागीर (Vagir) S25 जनवरी 2023 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई
INS वागशीर (Vagsheer) S26 जनवरी 2025 मझगांव डॉक (MDL), मुंबई

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • भारतीय नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है (1971 के कराची बंदरगाह पर ऑपरेशन ट्राइडेंट की याद में)।
  • आईएनएस अरिहंत के शामिल होने से भारत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के बाद परमाणु पनडुब्बी बनाने वाला दुनिया का छठा देश बना।
  • पिनाका के launcher टाटा और L&T बनाती हैं, गाड़ियां (Tatra truck) BEML देती है, और रॉकेट Munitions India और Solar Industries (EEL) बनाती हैं।
  • DRDO का VSHORADS कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल है (करीब 6 किमी), जो ड्रोन, हेलीकॉप्टर और नीचे उड़ते विमानों के लिए है।
  • Project 75 की आखिरी पनडुब्बी INS वागशीर 15 जनवरी 2025 को कमीशन हुई।
  • भारत की तीसरी SSBN INS अरिधमन अप्रैल 2026 में शामिल हुई (news reports)।

RAS Prelims MCQ

  1. भारतीय वायुसेना में S-400 वायु रक्षा व्यवस्था किस नाम से जानी जाती है?
    A) गरुड़ कवच
    B) सुदर्शन चक्र
    C) वज्र प्रहार
    D) त्रिशूल शील्ड
    उत्तर: B) सुदर्शन चक्र
    कारण: वायुसेना में S-400 स्क्वाड्रनों को 'सुदर्शन चक्र' नाम से जाना जाता है।
  2. S-400 व्यवस्था की अधिकतम मारक सीमा कितनी है?
    A) 150 किमी
    B) 250 किमी
    C) 400 किमी
    D) 600 किमी
    उत्तर: C) 400 किमी
    कारण: S-400 की अधिकतम मिसाइल मारक सीमा 400 किमी (ट्रैकिंग 600 किमी) है।
  3. DRDO के स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस System के कार्यक्रम का नाम क्या है?
    A) Project कुशा
    B) Project वरदान
    C) Project 75
    D) Project वायु
    उत्तर: A) Project कुशा
    कारण: Project कुशा के तहत DRDO करीब 150-350 किमी रेंज के तीन interceptor (M1, M2, M3) बना रहा है।
  4. पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट System किसने विकसित किया है?
    A) इसरो (ISRO)
    B) एआरडीई (ARDE, DRDO, पुणे)
    C) एचएएल (HAL)
    D) मझगांव डॉक
    उत्तर: B) एआरडीई (ARDE, DRDO, पुणे)
    कारण: पिनाका रॉकेट System डीआरडीओ की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने बनाया।
  5. Project 75 के तहत कुल कितनी पारंपरिक स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बनाई गई हैं?
    A) 4 पनडुब्बियां
    B) 6 पनडुब्बियां
    C) 8 पनडुब्बियां
    D) 10 पनडुब्बियां
    उत्तर: B) 6 पनडुब्बियां
    कारण: Project 75 के तहत मझगांव डॉक में कुल 6 कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां बनी हैं।
  6. Project 75 की पहली कमीशन की गई पनडुब्बी कौन सी थी?
    A) INS खंडेरी
    B) INS करंज
    C) INS कलवरी
    D) INS वागशीर
    उत्तर: C) INS कलवरी
    कारण: दिसंबर 2017 में INS कलवरी को सबसे पहले नौसेना में कमीशन किया गया था।
  7. भारत की पहली स्वदेशी परमाणु शक्ति चालित बैलिस्टिक पनडुब्बी (SSBN) कौन सी है?
    A) INS कलवरी
    B) INS अरिहंत
    C) INS विक्रमादित्य
    D) INS सिंधुघोष
    उत्तर: B) INS अरिहंत
    कारण: INS अरिहंत भारत की पहली परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक पनडुब्बी है।
  8. 29 अगस्त 2024 को नौसेना में शामिल की गई अरिहंत श्रेणी की दूसरी परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी कौन सी है?
    A) INS अरिघात
    B) INS चक्र
    C) INS वागीर
    D) INS विक्रांत
    उत्तर: A) INS अरिघात
    कारण: INS अरिघात (SSBN 81) को 29 अगस्त 2024 को विशाखापट्टनम में कमीशन किया गया।
  9. पारंपरिक पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक का क्या मुख्य लाभ है?
    A) पनडुब्बी की गति दोगुनी हो जाती है
    B) पनडुब्बी बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी में डूबी रह सकती है
    C) पनडुब्बी हवाई हमला कर सकती है
    D) इसमें परमाणु रिएक्टर की जरूरत नहीं पड़ती
    उत्तर: B) पनडुब्बी बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी में डूबी रह सकती है
    कारण: AIP व्यवस्था से बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आने की जरूरत नहीं पड़ती।
  10. भारतीय नौसेना 'पनडुब्बी दिवस' (Submarine Day) किस तिथि को मनाती है?
    A) 15 जनवरी
    B) 4 दिसंबर
    C) 8 दिसंबर
    D) 15 अगस्त
    उत्तर: C) 8 दिसंबर
    कारण: 8 दिसंबर 1967 को पहली पनडुब्बी INS कलवरी के कमीशन होने की याद में सबमरीन डे मनाते हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक क्या है?
    उत्तर: यह बिना परमाणु रिएक्टर वाली propulsion तकनीक है, जिससे डीजल पनडुब्बी बाहर की हवा के बिना बिजली बना लेती है और करीब 2 सप्ताह तक बिना ऊपर आए पानी में छिपी रह सकती है।
  2. पिनाका रॉकेट व्यवस्था के 'गाइडेड पिनाका' संस्करण की क्या विशेषताएं हैं?
    उत्तर: इसमें navigation, control और guidance system (NavIC की मदद से) लगा है, रेंज करीब 75 किमी है और यह निशाने पर पुराने रॉकेट से कहीं ज्यादा सटीक वार करता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. भारत की सुरक्षा में S-400 ट्रायम्फ और Project कुशा के महत्व का तुलनात्मक परीक्षण कीजिए।
    उत्तर: दोनों प्रणालियों का महत्व:
    1. S-400 (सुदर्शन चक्र) 400 किमी तक के लड़ाकू विमान, मिसाइल और ड्रोन को मारने की क्षमता आज ही देता है (2026 तक 4 स्क्वाड्रन आ चुकीं)।
    2. Project कुशा स्वदेशी LR-SAM कार्यक्रम है (M1 का पहला test जुलाई 2026), जो आगे चलकर विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा।
    3. दोनों मिलकर उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दो मोर्चों की स्थिति में हवाई सुरक्षा मजबूत करते हैं।
  2. भारत की परमाणु त्रिमूर्ति (Nuclear Triad) में परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बियों (SSBN) की निर्णायक भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - परमाणु त्रिमूर्ति की बनावट: जमीन (अग्नि), हवा (राफेल/मिराज) और समुद्र (अरिहंत श्रेणी)।
    - 'नो फर्स्ट यूज' और दूसरी मारक क्षमता: दुश्मन के पहले हमले में जमीन और हवाई ठिकाने नष्ट हो सकते हैं, लेकिन गहरे समुद्र में छिपी परमाणु पनडुब्बियों का पता लगाना लगभग असंभव है।
    - अरिहंत, अरिघात और अरिधमन: पानी के नीचे से दागी जाने वाली K-15 और K-4 मिसाइलों के साथ ये तीन SSBN (2026 तक) जवाबी हमले की क्षमता को भरोसेमंद बनाती हैं।

FAQs

Q1: क्या S-400 पाकिस्तान और चीन दोनों सीमाओं पर तैनात है?
सरकार तैनाती की जगहें आधिकारिक रूप से नहीं बताती। news reports के अनुसार S-400 स्क्वाड्रन उत्तरी (चीन) और पश्चिमी (पाकिस्तान) दोनों मोर्चों को ध्यान में रखकर तैनात हैं।

Q2: क्या कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां परमाणु संपन्न हैं?
नहीं, Project 75 की सभी 6 कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक हैं, जबकि अरिहंत, अरिघात और अरिधमन परमाणु शक्ति से चलती हैं।

Q3: क्या पिनाका का उपयोग रात में भी किया जा सकता है?
हां, पिनाका computer वाली fire control व्यवस्था से लैस है और दिन-रात चलाया जा सकता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • S-400 सौदा: अक्टूबर 2018, 5 स्क्वाड्रन; 2026 तक 4 मिल चुकीं; वायुसेना में नाम 'सुदर्शन चक्र'।
  • Project कुशा (LR-SAM): DRDO, M1/M2/M3 करीब 150/250/350 किमी; M1 का पहला test 23 जुलाई 2026।
  • पिनाका: ARDE पुणे, एक लॉन्चर 44 सेकंड में 12 रॉकेट; पहला निर्यात आर्मेनिया (2022)।
  • Project 75: MDL मुंबई + फ्रांस का Naval Group, 6 स्कॉर्पीन; पहली INS कलवरी (दिसंबर 2017), आखिरी INS वागशीर (15 जनवरी 2025)।
  • पनडुब्बी दिवस 8 दिसंबर (1967, पहली INS कलवरी); नौसेना दिवस 4 दिसंबर।
  • INS अरिहंत: पहली स्वदेशी SSBN, कमीशन अगस्त 2016, K-15 (करीब 750 किमी)।
  • INS अरिघात: 29 अगस्त 2024; नवंबर 2024 में K-4 (करीब 3,500 किमी) test। INS अरिधमन: तीसरी SSBN, अप्रैल 2026।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Air Defence System in Hindi: भारत।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां और नौसैनिक पनडुब्बियां: S-400, पिनाका और Project 75 एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Air Defence System in Hindi: भारत की वायु रक्षा प्रणालियां और नौसैनिक पनडुब्बियां: S-400, पिनाका और Project 75 के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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