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Agile Process in Hindi | एजाइल प्रोसेस क्या है?

Agile Process in Hindi | एजाइल प्रोसेस क्या है?


  • एजाइल प्रक्रिया (Agile Process) सॉफ्टवेयर विकास की एक कार्यप्रणाली है जो लचीलापन, पारदर्शिता, और सहयोग को बढ़ावा देती है। यह प्रक्रिया पारंपरिक वॉटरफॉल मॉडल से काफी अलग होती है, जिसमें प्रोजेक्ट्स को विभिन्न चरणों में विभाजित किया जाता है 
  • और लगातार परिवर्तन की संभावना होती है। इसका उद्देश्य यह है कि टीम जल्दी और प्रभावी ढंग से काम कर सके और ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक परिवर्तन समय-समय पर कर सके।
  • एजाइल प्रक्रिया सॉफ्टवेयर विकास के लिए एक आधुनिक और प्रभावी दृष्टिकोण है। यह ग्राहक और टीम के बीच बेहतर संचार, उच्च गुणवत्ता और अधिक संतोषजनक परिणामों की ओर ले जाता है।
  • एजाइल प्रक्रिया के विभिन्न प्रकार टीमों को अपने उद्देश्य, संसाधनों, और आवश्यकताओं के आधार पर अपनी कार्यप्रणाली चुनने का अवसर देते हैं। स्क्रम, कानबान, एक्सट्रीम प्रोग्रामिंग, लीन, क्रिस्टल और DSDM जैसी प्रक्रियाएँ प्रोजेक्ट को समय पर, अधिक कुशलता से 
  • और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने में मदद करती हैं। हर प्रकार का फ्रेमवर्क अपनी विशेषताओं और कार्यप्रणाली के आधार पर अनुकूलित है, जो टीमों को अधिकतम आउटपुट प्राप्त करने में मदद करते हैं।
Introduction of Agile Process in Hindi | एजाइल प्रक्रिया का परिचय :

एजाइल प्रक्रिया का उद्देश्य है कि सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया को अधिक लचीला और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाया जा सके। यह मॉडल 2001 में "एजाइल मेनिफेस्टो" के माध्यम से लोकप्रिय हुआ, जिसमें सॉफ्टवेयर विकास के लिए चार मुख्य सिद्धांत दिए गए:

  • व्यक्ति और उनके बीच की बातचीत को प्राथमिकता देना
  • कार्यशील सॉफ्टवेयर को महत्वपूर्ण मानना
  • ग्राहक के साथ निरंतर सहयोग
  • परिवर्तन के लिए तैयार रहना

Main Features of Agile Process in Hindi | एजाइल प्रक्रिया के मुख्य घटक :

एजाइल प्रक्रिया में मुख्यतः निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:

  • स्प्रिंट्स (Sprints): एजाइल विकास में एक स्प्रिंट एक छोटी अवधि होती है, जिसमें टीम एक निर्धारित कार्य पूरा करती है। हर स्प्रिंट के बाद, एक कार्यशील सॉफ्टवेयर डिलीवर किया जाता है, जिसे ग्राहक द्वारा देखा जा सकता है और प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

  • स्टोरीज (User Stories): यूजर स्टोरीज ग्राहक की आवश्यकताओं को छोटी और सरल कहानियों के रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक स्टोरी एक कार्य को परिभाषित करती है जिसे टीम स्प्रिंट के दौरान पूरा करने का प्रयास करती है।

  • डेली स्टैंडअप्स (Daily Stand-ups): टीम रोजाना एक छोटा मीटिंग करती है, जिसमें प्रत्येक सदस्य अपने कार्यों की स्थिति बताता है। यह प्रक्रिया टीम को एक-दूसरे की प्रगति को समझने में मदद करती है और आवश्यकतानुसार किसी भी मुद्दे को सुलझाने का अवसर देती है।

  • रिव्यू और रेट्रोस्पेक्टिव्स (Reviews and Retrospectives): हर स्प्रिंट के अंत में, टीम अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है। रिव्यू मीटिंग में किए गए कार्य को ग्राहक के साथ देखा जाता है, और रेट्रोस्पेक्टिव्स में टीम सुधार के तरीकों पर चर्चा करती है।

Advantages of Agile Process in Hindi | एजाइल प्रक्रिया के लाभ

  • लचीलापन और अनुकूलनशीलता: एजाइल में किसी भी समय परिवर्तन किए जा सकते हैं, जिससे उत्पाद ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित हो सकता है।
  • जल्दी डिलीवरी: चूंकि कार्य छोटे-छोटे स्प्रिंट्स में होता है, तो टीम जल्दी-जल्दी कार्यशील उत्पाद प्रदान कर सकती है। इससे ग्राहक को जल्दी रिजल्ट मिलते हैं।
  • सुधार की गुंजाइश: रिव्यू और रेट्रोस्पेक्टिव्स के माध्यम से टीम लगातार सुधार कर सकती है, जिससे उनके काम की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • ग्राहक संतुष्टि: एजाइल में ग्राहक को नियमित रूप से उत्पाद का पूर्वावलोकन मिलता है और उनके फीडबैक के आधार पर परिवर्तन किए जा सकते हैं।
Types of Agile Processes in Hindi | एजाइल प्रक्रिया के प्रकार :

एजाइल प्रक्रिया के प्रकार (Types of Agile Processes) सॉफ्टवेयर विकास और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में विभिन्न आवश्यकताओं और टीम संरचनाओं के अनुसार विकसित किए गए हैं। हर प्रकार का एजाइल फ्रेमवर्क अपने खास नियमों और 
संरचनाओं के आधार पर प्रोजेक्ट को पूर्ण करने का तरीका प्रदान करता है। ये प्रकार उस उद्देश्य, संसाधनों, और टीम की प्राथमिकताओं के अनुसार चुने जाते हैं।

1. स्क्रम (Scrum)

स्क्रम एजाइल प्रक्रिया का सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला फ्रेमवर्क है। इसे छोटे और मंझोले प्रोजेक्ट्स के लिए आदर्श माना जाता है। स्क्रम में कार्य को स्प्रिंट्स में विभाजित किया जाता है, जो 2 से 4 हफ्ते के होते हैं। 
हर स्प्रिंट के अंत में कार्यशील सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा डिलीवर किया जाता है।

मुख्य भूमिकाएँ: इसमें तीन मुख्य भूमिकाएँ होती हैं:

  • प्रोडक्ट ओनर: यह व्यक्ति ग्राहक की आवश्यकताओं को समझता है और उत्पाद में उनके अनुसार प्राथमिकताएँ तय करता है।
  • स्क्रम मास्टर: यह टीम को मार्गदर्शन देता है और उन्हें किसी भी अवरोध को हटाने में मदद करता है।
  • डिवेलपमेंट टीम: यह टीम असल में उत्पाद विकसित करती है और कार्य पूरा करती है।
  • मुख्य घटक: स्क्रम में डेली स्टैंड-अप मीटिंग्स, स्प्रिंट रिव्यू, और रेट्रोस्पेक्टिव्स शामिल होती हैं, जो टीम के कार्यों का निरीक्षण और सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

2. कानबान (Kanban)

कानबान का शाब्दिक अर्थ है "विजुअल कार्ड"। यह एजाइल प्रक्रिया का एक सरल और दृश्यात्मक प्रकार है, जिसमें कार्य को एक कानबान बोर्ड पर व्यवस्थित किया जाता है। कार्य को "To Do", "In Progress", और "Done" जैसी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, 
जिससे टीम का हर सदस्य कार्य की स्थिति को आसानी से देख सकता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • विजुअल बोर्ड: सभी कार्यों को कार्ड्स के रूप में दर्शाया जाता है।
  • विजुअलाइजेशन: टीम को पता रहता है कि कौन सा कार्य किस स्थिति में है और अगले कार्य को कब शुरू करना है।
  • विप लिमिट्स (Work in Progress Limits): यह नियम कार्यों की संख्या को सीमित करता है, ताकि टीम पर अधिक भार न पड़े।
  • उपयोग: कानबान विशेषकर तब उपयोगी है जब कार्यों में लगातार परिवर्तन और अद्यतन की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया लचीलापन और निरंतर सुधार को बढ़ावा देती है।

3. एक्सट्रीम प्रोग्रामिंग (Extreme Programming - XP)

एक्सट्रीम प्रोग्रामिंग एक ऐसा फ्रेमवर्क है जिसमें सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता और ग्राहक संतुष्टि पर विशेष जोर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि उच्च गुणवत्ता वाले सॉफ़्टवेयर का विकास किया जाए जो तेजी से बदलावों को समायोजित कर सके।

मुख्य सिद्धांत:

  • पेयर्ड प्रोग्रामिंग: इसमें दो प्रोग्रामर एक ही कार्य पर साथ काम करते हैं। इससे गुणवत्ता और कोड की त्रुटियाँ कम होती हैं।
  • टेस्ट-ड्रिवेन डेवलपमेंट (TDD): कोड लिखने से पहले उसकी टेस्टिंग स्क्रिप्ट तैयार की जाती है।
  • फीडबैक लूप्स: इसमें छोटे-छोटे चक्रों में ग्राहक से फीडबैक लिया जाता है, जिससे कार्य की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • उपयोग: XP प्रक्रिया तब उपयोगी होती है जब टीम लगातार उच्च गुणवत्ता वाली डिलीवरी और बदलाव की मांग वाली प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही होती है।

4. लीन (Lean)

लीन प्रक्रिया एक जापानी मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस से प्रेरित है। यह फ्रेमवर्क प्रोजेक्ट के दौरान किसी भी प्रकार के वेस्ट को कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे अधिकतम उपयोगी आउटपुट मिल सके। लीन का उद्देश्य केवल उन कार्यों पर ध्यान देना है जो उत्पाद को वैल्यू प्रदान करते हैं।

मुख्य सिद्धांत:

  • वेस्ट को कम करना: यह अनावश्यक कार्यों को हटाने का प्रयास करता है।
  • निरंतर सुधार: इसमें लगातार टीम की दक्षता को बढ़ाने के लिए सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
  • मजबूत टीम वर्क: लीन प्रक्रिया टीम के बीच सहयोग और काम की गुणवत्ता को बढ़ावा देती है।
  • उपयोग: लीन प्रक्रिया तब उपयोगी होती है जब संसाधनों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण होता है और अधिकतम आउटपुट प्राप्त करना होता है।

5. क्रिस्टल (Crystal)

क्रिस्टल फ्रेमवर्क टीम के आकार, प्रोजेक्ट की प्राथमिकताओं, और प्रोजेक्ट की जटिलता के आधार पर कई प्रकार के सबफ्रेमवर्क प्रदान करता है। यह फ्रेमवर्क मानता है कि हर प्रोजेक्ट की आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए इसे टीम की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • टीम संरचना और जरूरतों के अनुसार अनुकूलन: क्रिस्टल टीम के लिए आवश्यक परिवर्तन और ढील की गुंजाइश प्रदान करता है।
  • सामाजिक इंटरैक्शन पर ध्यान: यह टीम में अच्छे संचार और सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • कम्युनिकेशन और फीडबैक: टीम के बीच खुले संवाद और फीडबैक को बढ़ावा देता है।
  • उपयोग: क्रिस्टल प्रक्रिया प्रोजेक्ट के स्केल और जटिलता के आधार पर एक लचीली दृष्टि प्रदान करती है, जो छोटे से बड़े, सरल से जटिल प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त होती है।

6. डीएसडीएम (Dynamic Systems Development Method - DSDM)

DSDM एक ऐसी एजाइल प्रक्रिया है जो हर प्रकार की बिजनेस आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तेज़ और सटीक प्रोजेक्ट डिलीवरी में मदद करती है। यह प्रक्रिया समय और बजट को लेकर सख्त होती है और कार्य को प्राथमिकता देने में मदद करती है।

मुख्य सिद्धांत:

  • सही समय पर सही उत्पाद: DSDM समय पर कार्य करने और आवश्यक संसाधनों के अनुसार कार्य को प्राथमिकता देने का दृष्टिकोण अपनाता है।
  • प्रगति पर ध्यान: टीम की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाती है।
  • सहयोगात्मक दृष्टिकोण: DSDM टीम के सहयोग को बढ़ावा देती है और व्यवसाय और तकनीकी टीम को एक साथ लाने पर जोर देती है।
  • उपयोग: यह फ्रेमवर्क तब उपयोगी है जब समय और बजट एक महत्वपूर्ण कारक हो और सटीकता के साथ काम को पूर्ण करना हो।