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Acceptance Testing in Hindi | Acceptance Testing क्या है?

Acceptance Testing in Software Engineering in Hindi |  Software Engineering में  Acceptance Testing हिंदी में :


Acceptance Testing क्या है?

  • Acceptance Testing सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। 
  • इसे अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों द्वारा किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सॉफ़्टवेयर उनके व्यवसायिक आवश्यकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार काम कर रहा है। 
  • यह परीक्षण यह निर्धारित करता है कि सॉफ़्टवेयर उपयोग के लिए तैयार है या नहीं।
मुख्य उद्देश्य:

  • सॉफ़्टवेयर की कार्यक्षमता और आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करना।
  • ग्राहकों द्वारा सॉफ़्टवेयर को स्वीकृति देने से पहले त्रुटियों और कमियों का पता लगाना।
  • वास्तविक उपयोगकर्ताओं की संतुष्टि सुनिश्चित करना।
Types of Acceptance Testing in Hindi | Acceptance Testing के प्रकार :

1. User Acceptance Testing (UAT)

  • इसे End-User Testing भी कहा जाता है।
  • अंतिम उपयोगकर्ता यह सुनिश्चित करते हैं कि सॉफ़्टवेयर उनकी वास्तविक जरूरतों को पूरा करता है।
  • इसमें उपयोगकर्ता द्वारा वास्तविक परिस्थितियों में सॉफ़्टवेयर का परीक्षण किया जाता है।
  • उदाहरण: एक बैंक का ग्राहक चेक डिपॉजिट प्रक्रिया को परखता है।
2. Business Acceptance Testing (BAT)

  • यह परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सॉफ़्टवेयर व्यावसायिक आवश्यकताओं और लक्ष्यों को पूरा करता है।
  • व्यापारिक प्रक्रियाओं और नीतियों के अनुसार सॉफ़्टवेयर का आकलन किया जाता है।
3. Contract Acceptance Testing

  • सॉफ़्टवेयर का परीक्षण अनुबंध (contract) में निर्दिष्ट सभी मानदंडों और शर्तों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
  • ग्राहक और विक्रेता के बीच किए गए समझौते के अनुसार सॉफ़्टवेयर की जांच की जाती है।
4. Alpha Testing

  • यह परीक्षण सॉफ़्टवेयर डेवलपर के अंतर्गत किया जाता है।
  • वास्तविक उपयोगकर्ताओं को आमंत्रित करके सॉफ़्टवेयर की शुरुआती समस्याओं और बग्स को ठीक किया जाता है।
5. Beta Testing

  • यह परीक्षण वास्तविक उपयोगकर्ताओं द्वारा उनके वातावरण में किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य अधिक से अधिक त्रुटियों का पता लगाना और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाना है।

Acceptance Testing के लाभ

  • उपयोगकर्ता संतुष्टि: यह सुनिश्चित करता है कि सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ता की अपेक्षाओं को पूरा करता है।
  • त्रुटि पहचान: अंतिम चरण में संभावित बग्स और त्रुटियों का पता चलता है।
  • विश्वास निर्माण: ग्राहकों को सॉफ़्टवेयर के प्रदर्शन पर भरोसा होता है।
  • वास्तविक परिदृश्य परीक्षण: सॉफ़्टवेयर का परीक्षण उपयोगकर्ताओं की वास्तविक परिस्थितियों में किया जाता है।