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Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर (लिफ्ट नहरें), चंबल, माही बजाज सागर और जवाई बांध

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर (लिफ्ट नहरें), चंबल, माही बजाज सागर और जवाई बांध - पारंपरिक जल प्रबंधन (बावड़ी, खड़ीन, टांका)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएं (Rajasthan Ki Sinchai Pariyojana) सूखे और रेगिस्तानी राज्य की जीवनरेखा हैं।...
Quick Answer: Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएं (Rajasthan Ki Sinchai Pariyojana) सूखे और रेगिस्तानी राज्य की जीवनरेखा हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) पंजाब के हरिके बैराज (सतलुज-ब्यास संगम) से निकलती है: 204 किमी राजस्थान फीडर और 445 किमी मुख्य नहर, यानी कुल 649 किमी। इसके दक्षिणी किनारे पर 7 लिफ्ट नहरें हैं, जिनमें चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट सबसे लंबी और वीर तेजाजी लिफ्ट सबसे छोटी है। चंबल घाटी परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 साझेदारी है (तीन बिजलीघर, कुल 386 मेगावाट)। माही बजाज सागर (बांसवाड़ा) की 140 मेगावाट बिजली पूरी राजस्थान को मिलती है। पाली का जवाई बांध 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहलाता है। पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए PKC-ERCP को जनवरी 2025 से 'राम जल सेतु लिंक परियोजना' कहा जाता है।

RAS Pre में सिंचाई से लगातार सवाल आते हैं: Pre 2013 में नक्शे पर IGNP की लिफ्ट नहरों का क्रम पहचानना (Q29), मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का जिलों से मिलान (गागरीन, पीपलाद, गरडाडा, तकली; Q64) और जवाई परियोजना से लाभ न पाने वाला जिला (Q37, जिसे RPSC ने बाद में delete किया), और Pre 2016 में चौधरी कुंभाराम लिफ्ट नहर से लाभ पाने वाले जिलों की जोड़ी (हनुमानगढ़-झुंझुनूं; Q28)। जल संसाधनों की पृष्ठभूमि के लिए प्राकृतिक संसाधन, और पानी बचाने के तरीकों के लिए पारंपरिक जल प्रबंधन व जल संरक्षण देखें।

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राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएं: वर्गीकरण और पानी की स्थिति

राजस्थान के पास देश का करीब 10.4% क्षेत्रफल है, पर देश के सतही जल का सिर्फ करीब 1.16% हिस्सा यहां है। पश्चिमी रेगिस्तान में बारिश बहुत कम और अनिश्चित होती है, इसलिए खेती और पीने के पानी का बड़ा आधार नहरें और बांध हैं। 28 दिसंबर 2024 के फैसले के बाद राज्य में 41 जिले और 7 संभाग हैं। नीचे लाभ पाने वाले जिले इसी नक्शे से लिखे हैं (जैसे फलोदी और बालोतरा अलग जिले हैं, जबकि अनूपगढ़ फिर से श्रीगंगानगर-बीकानेर में और सांचौर फिर से जालोर में है)।

कृषि योग्य कमान क्षेत्र (CCA) के हिसाब से सिंचाई परियोजनाएं तीन तरह की हैं:

  • वृहद (बड़ी) सिंचाई परियोजना: 10,000 हेक्टेयर से ज्यादा CCA (IGNP, चंबल, माही बजाज सागर, नर्मदा नहर)।
  • मध्यम सिंचाई परियोजना: 2,000 से 10,000 हेक्टेयर CCA। RAS Pre 2013 में पूछी गई: गागरीन और पीपलाद (दोनों झालावाड़), गरडाडा (बूंदी), तकली (कोटा)।
  • लघु (छोटी) सिंचाई परियोजना: 2,000 हेक्टेयर से कम CCA (एनीकट, छोटे तालाब, कुएं, नलकूप)।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP): मरुगंगा

इंदिरा गांधी नहर को राजस्थान की 'मरुगंगा' और थार की जीवनरेखा कहते हैं।

1. शुरुआत और मुख्य तारीखें

बीकानेर रियासत के इंजीनियर कंवर सेन ने 1948 में 'बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता' नाम की रिपोर्ट में इस नहर का खाका रखा। केंद्रीय गृह मंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को इसकी नींव रखी। 11 अक्टूबर 1961 को उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने नौरंगदेसर वितरिका (हनुमानगढ़) में पहली बार पानी छोड़ा। पहले इसका नाम 'राजस्थान नहर' था, 2 नवंबर 1984 को इसे 'इंदिरा गांधी नहर परियोजना' नाम दिया गया।

2. उद्गम, लंबाई और दो चरण

  • राजस्थान फीडर: हरिके बैराज (फिरोजपुर, पंजाब) से मसीतावाली हेड (हनुमानगढ़) तक 204 किमी। इसका ज्यादातर भाग पंजाब में है और थोड़ा हिस्सा हरियाणा से होकर गुजरता है। फीडर से सीधी सिंचाई नहीं होती।
  • मुख्य नहर: मसीतावाली हेड से मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक 445 किमी। फीडर + मुख्य नहर = 649 किमी।
  • आगे का विस्तार: मोहनगढ़ से सागरमल गोपा शाखा और फिर बाबा रामदेव उपशाखा (पुराना नाम गडरा रोड उपशाखा) बाड़मेर में गडरा रोड की ओर जाती है।
  • दो चरण: पहले चरण में 204 किमी फीडर और मुख्य नहर का 189 किमी हिस्सा (पूगल तक) बना। दूसरे चरण में पूगल से मोहनगढ़ तक 256 किमी मुख्य नहर और वितरिकाएं बनीं (189 + 256 = 445 किमी)।
  • कमान क्षेत्र: NCERT (कक्षा 12, भारत: लोग और अर्थव्यवस्था) के अनुसार पहले चरण का CCA करीब 5.53 लाख हेक्टेयर और दूसरे चरण का करीब 14.10 लाख हेक्टेयर है (कुल करीब 19.6 लाख हेक्टेयर)।
  • लाभ पाने वाले जिले: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, जोधपुर, फलोदी, जैसलमेर और बाड़मेर (नहर और लिफ्ट नहरों से सिंचाई या पीने का पानी)।

3. शाखाएं और लिफ्ट नहरें

बहाव (gravity) शाखाएं: उत्तरी/दाएं किनारे पर सूरतगढ़, अनूपगढ़, पूगल, दातौर, बीरसलपुर, चारणवाला और शहीद बीरबल शाखाएं हैं, और आगे सागरमल गोपा शाखा। दक्षिणी/बाएं किनारे पर बहाव से चलने वाली अकेली शाखा रावतसर शाखा है।

लिफ्ट नहरें: नहर के दक्षिणी (बाएं) किनारे की जमीन ऊंची है, इसलिए वहां पानी पंप से ऊपर उठाकर (lift करके) 7 लिफ्ट नहरों से पहुंचाया जाता है। इन सबको बाद में महापुरुषों के नाम दिए गए (नीचे तालिका 1)। RAS Pre 2013 के नक्शे वाले सवाल में पश्चिम से पूर्व का क्रम था: जयनारायण व्यास, डॉ. करणी सिंह, कंवर सेन, चौधरी कुंभाराम।

सेम (waterlogging) की समस्या: नहर के रिसाव और जमीन के नीचे जिप्सम की सख्त परत के कारण हनुमानगढ़ के बड़ोपल जैसे इलाकों में सेम और लवणता बढ़ी। इसके लिए सफेदा (यूकेलिप्टस) जैसे पेड़ों से जैविक जल निकास (bio-drainage) और पानी के संतुलित उपयोग की सलाह दी जाती है।

चंबल घाटी बहुउद्देशीय परियोजना

चंबल परियोजना में राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 हिस्सेदारी है। तीन बिजलीघरों की कुल क्षमता 386 मेगावाट है, जिसमें आधी (193 मेगावाट) राजस्थान की है। तीन चरणों में चार बांध बने:

  • गांधी सागर बांध (पहला चरण, 1960): मंदसौर (मध्य प्रदेश)। बिजली 115 मेगावाट (23 MW की 5 इकाइयां)।
  • कोटा बैराज (पहला चरण, 1960): कोटा। सिर्फ सिंचाई के लिए, बिजलीघर नहीं। इसकी बाईं नहर कोटा-बूंदी क्षेत्र को और दाईं नहर कोटा-बारां और मध्य प्रदेश को पानी देती है।
  • राणा प्रताप सागर बांध (दूसरा चरण, 1970): रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), चूलिया जलप्रपात के पास। बिजली 172 मेगावाट (43 MW की 4 इकाइयां)। पानी भरने की क्षमता में राज्य का सबसे बड़ा बांध माना जाता है। रावतभाटा परमाणु बिजलीघर इसी जलाशय का पानी लेता है।
  • जवाहर सागर बांध (तीसरा चरण, 1972): कोटा जिले में बोरावास के पास पिकअप बांध। बिजली 99 मेगावाट (33 MW की 3 इकाइयां)।

चंबल कमान क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां) में भी सेम और लवणता की समस्या आई। इसके लिए 1990 के दशक में कनाडा (CIDA) की मदद से राजाड (RAJAD: Rajasthan Agricultural Drainage Research Project) चला, जिसमें करीब 25,000 हेक्टेयर में जमीन के नीचे पाइप वाली drainage लगाई गई।

माही बजाज सागर और दक्षिणी राजस्थान की परियोजनाएं

1. माही बजाज सागर परियोजना

यह राजस्थान और गुजरात की संयुक्त परियोजना है (1966 का समझौता)। किताबों के अनुसार खर्च में राजस्थान का हिस्सा 45% और गुजरात का 55% है, जबकि इसकी 140 मेगावाट बिजली (25 MW की 2 और 45 MW की 2 इकाइयां) पूरी राजस्थान को मिलती है। बांध का नाम स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज पर है।

  • माही बजाज सागर बांध: बोरखेड़ा (बांसवाड़ा), करीब 3 किमी लंबा (Incredible India के अनुसार 3,019 मीटर; कई किताबों में 3,109 मीटर), 1983 में पूरा। इसे राज्य का सबसे लंबा बांध माना जाता है।
  • कागदी पिकअप वियर: बांसवाड़ा में, जहां से नहरें बांसवाड़ा क्षेत्र को सींचती हैं।
  • कडाणा बांध: गुजरात के महीसागर जिले में, माही पर बना। इसका पानी गुजरात को मिलता है।

2. जाखम बांध और सोम-कमला-अंबा

  • जाखम बांध: प्रतापगढ़ जिले के अनूपपुरा गांव के पास जाखम नदी पर, 1986 में बना (सिंचाई का काम मार्च 2000 तक पूरा)। इसे राज्य का सबसे ऊंचा बांध कहा जाता है (किताबों में 81 मीटर; India-WRIS की सूची में 87 मीटर)। यह प्रतापगढ़ के धरियावद क्षेत्र के जनजाति (TSP) गांवों को सिंचाई देता है।
  • सोम-कमला-अंबा: डूंगरपुर जिले में सोम नदी पर बनी सिंचाई परियोजना।

जवाई, बीसलपुर, नर्मदा, राम जल सेतु (PKC-ERCP) और यमुना जल

1. जवाई बांध: मारवाड़ का अमृत सरोवर

पाली जिले में सुमेरपुर के पास लूनी की सहायक जवाई नदी पर बना बांध 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहलाता है। जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह ने 13 मई 1946 को इसका काम शुरू कराया और यह 1957 में पूरा हुआ। यह पाली और जालोर को सिंचाई और पीने का पानी देता है। इसमें पानी बढ़ाने के लिए उदयपुर की कोटड़ा तहसील के सेई बांध से करीब 6.8 किमी लंबी सुरंग से पानी लाया जाता है।

2. बीसलपुर परियोजना

टोंक जिले में टोडारायसिंह के पास बनास नदी पर बना कंक्रीट बांध राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में है। यह जयपुर, अजमेर और टोंक शहरों को पीने का पानी और टोंक में सिंचाई देता है। राम जल सेतु लिंक से इसमें और पानी लाने की योजना है।

3. नर्मदा नहर परियोजना

गुजरात के सरदार सरोवर बांध से निकली नर्मदा नहर गुजरात में करीब 458 किमी चलकर जालोर जिले की सांचौर तहसील के सीलू गांव के पास राजस्थान में आती है। राजस्थान में मुख्य नहर 74 किमी लंबी है। इसका लाभ जालोर और बाड़मेर को है। CAG की 2017 की audit report के अनुसार पूरे कमान क्षेत्र में सिर्फ फव्वारा (sprinkler) और ड्रिप सिंचाई अनिवार्य की गई है, ताकि सेम न हो। इसी के साथ CCA 1.35 लाख से बढ़ाकर 2.46 लाख हेक्टेयर किया गया।

4. राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित PKC-ERCP)

इसमें मध्य प्रदेश-राजस्थान की पार्वती, कालीसिंध और चंबल (PKC) नदियों का बरसात का बचा हुआ (surplus) पानी पूर्वी राजस्थान के बांधों (जैसे बीसलपुर, ईसरदा) तक पहुंचाना है। मुख्य घटनाएं:

  • 5 दिसंबर 2024: केंद्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच समझौता ज्ञापन (MoA)।
  • 17 दिसंबर 2024: प्रधानमंत्री ने जयपुर में परियोजना का शिलान्यास किया।
  • 22 जनवरी 2025: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसका नाम 'राम जल सेतु लिंक परियोजना' रखने की घोषणा की।
  • लाभ: 41 जिलों वाले नक्शे के 17 जिले: झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, अजमेर और ब्यावर। राजस्थान को कुल करीब 4,102.6 MCM पानी मिलना तय है।
  • सिंचाई: करीब 2.8 लाख हेक्टेयर (करीब 2.02 लाख हेक्टेयर नया CCA और 80,000 हेक्टेयर में सिंचाई को स्थिर करना)।
  • 2026 तक स्थिति: काम चल रहा है। चंबल पर कोटा-बूंदी के बीच करीब 2.3 किमी लंबा aqueduct मई 2025 से बन रहा है, जिसका लक्ष्य जून 2028 है।

5. यमुना जल (शेखावाटी के लिए)

17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा ने हथिनीकुंड बैराज से यमुना का पानी पाइपलाइन से लाने की संयुक्त DPR बनाने का MoU किया। फिर 29 जून 2026 को नई दिल्ली में दोनों राज्यों ने परियोजना बनाने और चलाने का समझौता किया। इसमें मानसून (जुलाई-अक्टूबर) में करीब 577-580 MCM पानी भूमिगत पाइपलाइन से चूरू, सीकर और झुंझुनूं को देने की बात है। नवंबर 2026 तक पाइपलाइन बनना बाकी है।

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प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं का तुलनात्मक विवरण

परीक्षा के लिए लिफ्ट नहरें और बांध नीचे तालिकाओं में हैं:

तालिका 1: इंदिरा गांधी नहर की 7 लिफ्ट नहरें (मुख्य नहर पर शुरू से आखिर की ओर)

क्रम नया नाम पुराना नाम मुख्य लाभ वाले जिले परीक्षा तथ्य
1 चौधरी कुंभाराम आर्य गंधेली-साहवा हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं (कुछ किताबों में बीकानेर भी) सबसे लंबी; RAS Pre 2016: हनुमानगढ़-झुंझुनूं
2 कंवर सेन बीकानेर-लूणकरणसर बीकानेर, श्रीगंगानगर IGNP के जनक के नाम पर
3 पन्नालाल बारूपाल गजनेर बीकानेर, नागौर नागौर तक पानी
4 वीर तेजाजी बांगड़सर बीकानेर (दक्षिणी भाग) सबसे छोटी लिफ्ट नहर
5 डॉ. करणी सिंह कोलायत बीकानेर, जोधपुर, फलोदी कोलायत क्षेत्र
6 गुरु जंभेश्वर फलोदी फलोदी (पहले जोधपुर) दूसरे चरण की लिफ्ट
7 जयनारायण व्यास पोकरण जैसलमेर, जोधपुर/फलोदी सबसे पश्चिमी लिफ्ट नहर

तालिका 2: राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय और दूसरी सिंचाई परियोजनाएं

परियोजना नदी / स्रोत भागीदारी बिजली लाभ वाले जिले
इंदिरा गांधी नहर सतलुज-ब्यास (हरिके) राजस्थान नहीं हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, जोधपुर, फलोदी, जैसलमेर, बाड़मेर
चंबल परियोजना चंबल नदी राजस्थान-मध्य प्रदेश (50:50) 386 MW (राज. 193 MW) कोटा, बूंदी, बारां (कमान क्षेत्र)
माही बजाज सागर माही नदी राजस्थान 45%, गुजरात 55% (खर्च) 140 MW (पूरी राजस्थान को) बांसवाड़ा
जवाई बांध जवाई नदी (+ सेई सुरंग) राजस्थान नहीं पाली, जालोर
बीसलपुर बांध बनास नदी राजस्थान नहीं जयपुर, अजमेर, टोंक (पेयजल)
जाखम बांध जाखम नदी राजस्थान नहीं प्रतापगढ़ (धरियावद क्षेत्र)
नर्मदा नहर नर्मदा (सरदार सरोवर) गुजरात से पानी नहीं जालोर, बाड़मेर (सिर्फ sprinkler/drip)
राम जल सेतु (PKC-ERCP) पार्वती-कालीसिंध-चंबल केंद्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश नहीं पूर्वी राजस्थान के 17 जिले (निर्माण जारी, 2026)

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

परीक्षा के लिए याद रखें

  • IGNP: हरिके बैराज से; फीडर 204 किमी + मुख्य नहर 445 किमी = 649 किमी; नींव 31 मार्च 1958, पहला पानी 11 अक्टूबर 1961।
  • IGNP की रावतसर शाखा दक्षिणी (बाएं) किनारे की अकेली बहाव शाखा है; उसी किनारे पर 7 लिफ्ट नहरें हैं।
  • चौधरी कुंभाराम आर्य (गंधेली-साहवा) सबसे लंबी लिफ्ट नहर है: हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं (RAS Pre 2016)।
  • मध्यम परियोजनाएं (RAS Pre 2013): गागरीन-झालावाड़, पीपलाद-झालावाड़, गरडाडा-बूंदी, तकली-कोटा।
  • चंबल: राजस्थान-मध्य प्रदेश 50:50; 115 + 172 + 99 = 386 MW; कोटा बैराज पर बिजलीघर नहीं।
  • माही बजाज सागर (बोरखेड़ा, बांसवाड़ा) की 140 MW बिजली पूरी राजस्थान को।
  • जवाई बांध (सुमेरपुर, पाली) 'मारवाड़ का अमृत सरोवर', 1946-1957, सेई बांध से सुरंग।
  • PKC-ERCP का नया नाम (जनवरी 2025) राम जल सेतु लिंक परियोजना: 17 जिले, शिलान्यास 17 दिसंबर 2024।

RAS Prelims MCQ

  1. इंदिरा गांधी नहर का खाका 1948 की रिपोर्ट में किसने रखा?
    A) महाराजा गंगा सिंह
    B) कंवर सेन
    C) गोविंद वल्लभ पंत
    D) सर्वपल्ली राधाकृष्णन
    उत्तर: B) कंवर सेन
    कारण: बीकानेर रियासत के इंजीनियर कंवर सेन ने 1948 में रिपोर्ट दी; पंत ने 1958 में नींव रखी।
  2. इंदिरा गांधी नहर की कौन सी शाखा मुख्य नहर के दक्षिणी (बाएं) किनारे से बहाव से निकलती है?
    A) अनूपगढ़
    B) पूगल
    C) रावतसर
    D) चारणवाला
    उत्तर: C) रावतसर
    कारण: बाकी सभी बहाव शाखाएं उत्तरी (दाएं) किनारे पर हैं।
  3. चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट नहर से लाभ पाने वाले जिलों की सही जोड़ी कौन सी है?
    A) पाली-जालोर
    B) हनुमानगढ़-झुंझुनूं
    C) कोटा-बूंदी
    D) जैसलमेर-फलोदी
    उत्तर: B) हनुमानगढ़-झुंझुनूं
    कारण: यह लिफ्ट हनुमानगढ़, चूरू और झुंझुनूं को पानी देती है (RAS Pre 2016 में इसी तरह का सवाल)।
  4. सही मिलान चुनिए (मध्यम सिंचाई परियोजना - जिला):
    A) गागरीन - कोटा
    B) पीपलाद - बारां
    C) गरडाडा - बूंदी
    D) तकली - झालावाड़
    उत्तर: C) गरडाडा - बूंदी
    कारण: गागरीन और पीपलाद झालावाड़ में हैं और तकली कोटा में।
  5. चंबल पर बना कौन सा बांध/बैराज सिर्फ सिंचाई के लिए है, जिस पर बिजलीघर नहीं है?
    A) गांधी सागर
    B) राणा प्रताप सागर
    C) जवाहर सागर
    D) कोटा बैराज
    उत्तर: D) कोटा बैराज
    कारण: बाकी तीनों पर 115, 172 और 99 MW के बिजलीघर हैं।
  6. माही बजाज सागर परियोजना की 140 मेगावाट बिजली में राजस्थान का हिस्सा कितना है?
    A) 45%
    B) 55%
    C) 100%
    D) 50%
    उत्तर: C) 100%
    कारण: खर्च 45:55 बंटता है, पर पूरी बिजली राजस्थान को मिलती है।
  7. राजस्थान का सबसे ऊंचा बांध कौन सा कहा जाता है?
    A) माही बजाज सागर
    B) जाखम बांध
    C) जवाई बांध
    D) बीसलपुर बांध
    उत्तर: B) जाखम बांध
    कारण: प्रतापगढ़ के अनूपपुरा में बना जाखम बांध सबसे ऊंचा है; माही बजाज सागर सबसे लंबा है।
  8. 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' किस बांध को कहते हैं?
    A) हेमावास बांध
    B) जवाई बांध
    C) सरदार समंद
    D) बांकली बांध
    उत्तर: B) जवाई बांध
    कारण: पाली के सुमेरपुर के पास जवाई नदी पर बना यह बांध मारवाड़ का सबसे बड़ा जलाशय है।
  9. संशोधित PKC-ERCP को 2025 में क्या नया नाम दिया गया?
    A) राम सेतु नहर
    B) राम जल सेतु लिंक परियोजना
    C) भागीरथ लिंक परियोजना
    D) चंबल-बनास लिंक
    उत्तर: B) राम जल सेतु लिंक परियोजना
    कारण: मुख्यमंत्री ने 22 जनवरी 2025 को यह नाम घोषित किया।
  10. राजस्थान की किस परियोजना में पूरे कमान क्षेत्र में सिर्फ फव्वारा/ड्रिप सिंचाई अनिवार्य है?
    A) IGNP
    B) नर्मदा नहर
    C) गंग नहर
    D) बीसलपुर
    उत्तर: B) नर्मदा नहर
    कारण: जालोर-बाड़मेर में सेम रोकने के लिए यह नियम बना (CAG audit 2017 में भी दर्ज)।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. इंदिरा गांधी नहर की राजस्थान फीडर और मुख्य नहर की लंबाई बताइए। (20 शब्द)
    उत्तर: राजस्थान फीडर हरिके बैराज से मसीतावाली हेड तक 204 किमी और मुख्य नहर मसीतावाली से मोहनगढ़ तक 445 किमी, कुल 649 किमी।
  2. चंबल घाटी परियोजना के चारों बांधों के नाम लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: गांधी सागर (मंदसौर, मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़), जवाहर सागर (कोटा) और कोटा बैराज (कोटा)।
  3. IGNP में लिफ्ट नहरों की जरूरत क्यों पड़ी? (20 शब्द)
    उत्तर: नहर के दक्षिणी किनारे की जमीन नहर के तल से ऊंची है, इसलिए वहां पानी पंप से उठाकर 7 लिफ्ट नहरों से पहुंचाया जाता है।
  4. जवाई बांध को 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' क्यों कहते हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: यह पाली और जालोर की सिंचाई और पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत है; सेई बांध की सुरंग से इसमें पानी बढ़ाया जाता है।
  5. राम जल सेतु लिंक परियोजना क्या है? (20 शब्द)
    उत्तर: पार्वती-कालीसिंध-चंबल का बरसात का बचा हुआ (surplus) पानी पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों तक लाने वाली संशोधित PKC-ERCP; शिलान्यास 17 दिसंबर 2024।

Long Questions (5–10 marks)

  1. पश्चिमी राजस्थान पर इंदिरा गांधी नहर के प्रभावों का परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: इंदिरा गांधी नहर ने थार की अर्थव्यवस्था बदल दी। अच्छे प्रभाव: बंजर जमीन पर गेहूं, कपास, सरसों, चना और किन्नू की खेती, पीने का पानी, पशुपालन और वृक्षारोपण, और रेगिस्तान के फैलाव पर रोक। बुरे प्रभाव: ज्यादा सिंचाई और रिसाव से बड़ोपल जैसे इलाकों में सेम और लवणता, चारागाह घटना और मलेरिया जैसे रोग। समाधान: पानी का संतुलित उपयोग, sprinkler/drip सिंचाई, bio-drainage और फसल चक्र।
  2. पूर्वी राजस्थान में राम जल सेतु लिंक परियोजना (PKC-ERCP) की जरूरत और लाभ बताइए। (100 शब्द)
    उत्तर: पूर्वी राजस्थान में भूजल का अधिक दोहन है और राज्य के ज्यादातर ब्लॉक "dark zone" में हैं। परियोजना में पार्वती, कालीसिंध और चंबल का बरसात का बचा हुआ (surplus) पानी बीसलपुर, ईसरदा जैसे बांधों तक पहुंचेगा। 5 दिसंबर 2024 को केंद्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने MoA किया और 17 दिसंबर 2024 को शिलान्यास हुआ। राजस्थान को करीब 4,102.6 MCM पानी मिलेगा, जिससे 17 जिलों को पीने का पानी, उद्योग को पानी और करीब 2.8 लाख हेक्टेयर में सिंचाई मिलेगी। 2026 तक निर्माण जारी है।

FAQs

प्रश्न: इंदिरा गांधी नहर की नींव कब और किसने रखी?
उत्तर: 31 मार्च 1958 को केंद्रीय गृह मंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने।

प्रश्न: राजस्थान का सबसे लंबा और सबसे ऊंचा बांध कौन सा है?
उत्तर: सबसे लंबा माही बजाज सागर (बांसवाड़ा, करीब 3 किमी) और सबसे ऊंचा जाखम बांध (प्रतापगढ़) माना जाता है।

प्रश्न: चंबल परियोजना में राजस्थान का बिजली हिस्सा कितना है?
उत्तर: कुल 386 मेगावाट का आधा, यानी 193 मेगावाट।

प्रश्न: सेई सुरंग किस बांध से जुड़ी है?
उत्तर: उदयपुर के सेई बांध का पानी करीब 6.8 किमी लंबी सुरंग से पाली के जवाई बांध में आता है।

प्रश्न: नर्मदा नहर राजस्थान में कहां प्रवेश करती है?
उत्तर: जालोर जिले की सांचौर तहसील के सीलू गांव के पास। सांचौर अब अलग जिला नहीं है (28 दिसंबर 2024 से फिर जालोर में)।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएं (Rajasthan Ki Sinchai Pariyojana) सूखे और रेगिस्तानी राज्य की जीवनरेखा हैं।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर (लिफ्ट नहरें), चंबल, माही बजाज सागर और जवाई बांध एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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Rajasthan ki Sinchai Pariyojana: राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर (लिफ्ट नहरें), चंबल, माही बजाज सागर और जवाई बांध
परम्परागत जल प्रबन्धन