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Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प: ब्लू पॉटरी, मोलेला, थेवा, उस्ता कला, बंधेज, छपाई और GI टैग

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प: ब्लू पॉटरी, मोलेला, थेवा, उस्ता कला, बंधेज, छपाई और GI टैग - लघु उद्योग और हस्तशिल्प
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प (Rajasthan Ke Hastshilp) में जयपुर की ब्लू पॉटरी और मीनाकारी, मोलेला (राजसमंद) का टेराकोटा, ...
Quick Answer: Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प (Rajasthan Ke Hastshilp) में जयपुर की ब्लू पॉटरी और मीनाकारी, मोलेला (राजसमंद) का टेराकोटा, प्रतापगढ़ की थेवा कला, बीकानेर की उस्ता कला, कोटा डोरिया, सांगानेरी-बगरू छपाई, बालोतरा की अजरख छपाई और जोधपुर का बंधेज सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं। GI टैग की शुरुआत कोटा डोरिया (2004-05) से हुई; 2023-24 में उस्ता कला, कोफ्तगारी, बंधेज, कशीदाकारी और पिछवाई को GI मिला। राज्य की पहली हस्तशिल्प नीति 17 सितंबर 2022 को जारी हुई थी।

राजस्थान के हस्तशिल्प: परिचय और परीक्षा में क्या पूछा जाता है

राजस्थान के ज्यादातर शिल्प रियासतों के संरक्षण में पनपे। आमेर-जयपुर के कछवाहा शासक लाहौर से मीनाकार लाए, बीकानेर के शासक उस्ता कारीगर लाए और कोटा में झाला जालिम सिंह ने बुनकर बुलाए। RAS में इस topic से "शिल्प और उसका केंद्र" वाले सीधे सवाल आते हैं। RAS Pre 2013 (Q145) में पूछा गया था कि टेराकोटा के लिए कौन सी जगह प्रसिद्ध है, और जवाब मोलेला था।

इस note में शिल्प, केंद्र, कलाकार और GI टैग की detail है। लघु और कुटीर उद्योगों का छोटा overview लघु उद्योग और हस्तशिल्प में है, और चित्रकला शैलियों (पिछवाई से जुड़ी नाथद्वारा शैली) के लिए राजस्थान की चित्रकला देखें। जिलों के नाम 28 दिसंबर 2024 के बाद वाले 41 जिलों के हिसाब से लिखे गए हैं।

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मिट्टी के शिल्प: ब्लू पॉटरी, मोलेला टेराकोटा और पोकरण पॉटरी

जयपुर की ब्लू पॉटरी

ब्लू पॉटरी में आम चिकनी मिट्टी नहीं लगती। इसे क्वार्ट्ज पाउडर, कांच का चूरा, मुल्तानी मिट्टी, गोंद और साजी मिलाकर बनाते हैं। नीला रंग कोबाल्ट ऑक्साइड से और फिरोजी रंग कॉपर ऑक्साइड से आता है। जयपुर में इसकी शुरुआत सवाई रामसिंह द्वितीय (1835-1880) के समय मानी जाती है। बीसवीं सदी में मऊ (सीकर) के कृपाल सिंह शेखावत ने इसे फिर से जिंदा किया और नए रंग जोड़े; उन्हें 1974 में पद्मश्री मिला। GI टैग: 2008-09।

मोलेला टेराकोटा (राजसमंद)

मोलेला गांव (नाथद्वारा के पास, राजसमंद जिला) के कुम्हार स्थानीय मिट्टी में गधे की लीद मिलाकर लोक देवताओं के उभरे हुए फलक (plaques) बनाते हैं। इनमें देवनारायण जी, भैरव जी, नागराज और माताजी के फलक मुख्य हैं। मूर्तियां सांचे से नहीं, हाथ से बनती हैं। मोहनलाल कुम्हार को 2012 में पद्मश्री मिला (उनका निधन जुलाई 2023 में हुआ)। GI टैग: मोलेला क्ले वर्क, 2008-09।

दूसरी पॉटरी

पोकरण (जैसलमेर) की लाल मिट्टी की पॉटरी को 2017-18 में GI टैग मिला। अलवर की कागजी पॉटरी (बहुत पतली दीवार वाले बर्तन) और बीकानेर की सुनहरी (चित्रित) पॉटरी भी प्रसिद्ध हैं।

वस्त्र शिल्प: बंधेज, छपाई, दाबू, अजरख और कोटा डोरिया

बंधेज, लहरिया और मोठड़ा

कपड़े को जगह-जगह बांधकर रंगने की कला बंधेज (बांधनी) है। जोधपुर और जयपुर इसके बड़े केंद्र हैं। लहरिया में धारियां एक ही दिशा में तिरछी चलती हैं, जबकि मोठड़ा में दो दिशाओं की धारियां एक-दूसरे को काटती हैं। जोधपुर बंधेज क्राफ्ट को 2023-24 में GI टैग मिला।

सांगानेरी और बगरू छपाई (जयपुर)

सांगानेर की hand block छपाई सफेद या हल्के आधार पर बारीक बूटियों के लिए जानी जाती है; GI टैग 2009-10। बगरू में छीपा समुदाय गहरे आधार पर प्राकृतिक लाल-काले रंगों से छपाई करता है और यहां गेहूं के बींधण (भूसे) का दाबू काम आता है; GI टैग 2011-12 (कई किताबें 2012 लिखती हैं)। बगरू के रामकिशोर छीपा को 2009 में पद्मश्री मिला।

दाबू (resist) छपाई

दाबू एक लेप है जो कपड़े के कुछ हिस्सों पर रंग चढ़ने से रोकता है। मिट्टी का दाबू बालोतरा में, मिट्टी और ग्वार वाला दाबू छीपों का अकोला (चित्तौड़गढ़) में, मोम का दाबू सवाई माधोपुर में और गेहूं के बींधण का दाबू बगरू में काम आता है। अकोला जाजम (फर्श पर बिछाने वाली छपी दरी) के लिए भी प्रसिद्ध है।

अजरख और मलीर छपाई (बालोतरा)

अजरख छपाई कपड़े के दोनों तरफ होती है, जिसमें नीले और लाल रंग के ज्यामितीय डिजाइन बनते हैं। मलीर छपाई काले और कत्थई रंगों में होती है। दोनों का मुख्य केंद्र बालोतरा है, जो अगस्त 2023 में बाड़मेर से अलग होकर जिला बना और दिसंबर 2024 के बाद भी जिला बना हुआ है।

कोटा डोरिया और कशीदाकारी

कैथून (कोटा) और मांगरोल (बारां) में सूत और रेशम के ताने-बाने से कोटा डोरिया बुना जाता है। इसके चौकोर चेक को 'खत' (Khat) कहते हैं। किताबों के अनुसार कोटा के दीवान झाला जालिम सिंह ने मैसूर से बुनकर महमूद मसूरिया को बुलाया, इसलिए इसे 'मसूरिया' भी कहते हैं (कुछ स्रोत नाम अहमद मसूरिया लिखते हैं)। कोटा डोरिया राजस्थान का पहला GI उत्पाद है (2004-05; logo 2010-11)। बीकानेर कशीदाकारी (सुई-धागे की कढ़ाई) को 2023-24 में GI टैग मिला।

धातु, कांच और चमड़े के शिल्प: मीनाकारी, थेवा, उस्ता कला, कोफ्तगारी

मीनाकारी (जयपुर)

सोने-चांदी के गहनों पर रंगीन मीना चढ़ाने की कला मीनाकारी है। कछवाहा शासक मानसिंह प्रथम लाहौर से मीनाकार लाए थे। जयपुर इसका मुख्य केंद्र है; प्रतापगढ़ और नाथद्वारा में भी काम होता है। कुदरत सिंह को 1988 में पद्मश्री मिला।

थेवा कला (प्रतापगढ़)

थेवा में रंगीन कांच (ज्यादातर हरा) पर सोने की बहुत बारीक पत्ती को काटकर जालीदार डिजाइन जमाया जाता है। किताबों में इसकी शुरुआत नाथूजी सोनी से मानी जाती है; वर्ष को लेकर स्रोतों में मतभेद है (कई किताबें 1707 ई. लिखती हैं)। यह कला प्रतापगढ़ के राजसोनी परिवार में पीढ़ियों से चल रही है। महेश राज सोनी को 2015 में पद्मश्री मिला। GI टैग: 2013-14 में दर्ज (कई किताबें 2014 लिखती हैं)। ODOP नीति 2024 में प्रतापगढ़ का उत्पाद भी 'थेवा ज्वेलरी' है।

उस्ता कला (बीकानेर)

ऊंट की खाल से बने कुप्पों, दीवारों और छतों पर सोने की उभरी नक्काशी और चित्रकारी उस्ता कला है। इसे सुनहरी नक्काशी या मनोती (Gold Manauti) काम भी कहते हैं। बीकानेर के शासक लाहौर से उस्ता कारीगर लाए; किताबें इसमें महाराजा अनूप सिंह का नाम खास तौर पर लेती हैं। हिसामुद्दीन उस्ता को 1986 में पद्मश्री मिला। GI टैग: बीकानेर उस्ता कला क्राफ्ट, 2023-24।

कोफ्तगारी और दूसरे शिल्प

लोहे-फौलाद के हथियारों (तलवार, ढाल, कटार) पर सोने-चांदी के बारीक तार जड़ने की कला कोफ्तगारी है। उदयपुर, जयपुर और अलवर इसके केंद्र हैं; उदयपुर कोफ्तगारी मेटल क्राफ्ट को 2023-24 में GI टैग मिला। नाथद्वारा में चांदी के बारीक तारों से तारकशी के गहने बनते हैं। खंडेला (सीकर) गोटा-किनारी के लिए और जयपुर संगमरमर की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है (मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति को 2010 में पद्मश्री)।

राजस्थान के प्रमुख हस्तशिल्प: केंद्र, सामग्री और कलाकार (Table)

हस्तशिल्पप्रमुख केंद्र (जिला)मुख्य सामग्री / पहचानसंरक्षण / शुरुआतप्रसिद्ध कलाकार
ब्लू पॉटरीजयपुरक्वार्ट्ज, कांच चूरा, मुल्तानी मिट्टी (आम मिट्टी नहीं)सवाई रामसिंह द्वितीयकृपाल सिंह शेखावत (पद्मश्री 1974)
मोलेला टेराकोटामोलेला (राजसमंद)मिट्टी + गधे की लीद, लोक देवताओं के फलकलोक परंपरामोहनलाल कुम्हार (पद्मश्री 2012)
थेवा कलाप्रतापगढ़रंगीन कांच पर सोने की बारीक जालीनाथूजी सोनी (वर्ष पर मतभेद)महेश राज सोनी (पद्मश्री 2015)
उस्ता कलाबीकानेरऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशीबीकानेर रियासत (अनूप सिंह)हिसामुद्दीन उस्ता (पद्मश्री 1986)
मीनाकारीजयपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारासोने-चांदी पर रंगीन मीनामानसिंह प्रथम (लाहौर से मीनाकार)कुदरत सिंह (पद्मश्री 1988)
कोटा डोरियाकैथून (कोटा), मांगरोल (बारां)सूत-रेशम, चौकोर 'खत'झाला जालिम सिंहमहमूद मसूरिया (किताबों के अनुसार)
बगरू छपाईबगरू (जयपुर)गेहूं के बींधण का दाबू, लाल-काले रंगछीपा समुदायरामकिशोर छीपा (पद्मश्री 2009)
सांगानेरी छपाईसांगानेर (जयपुर)सफेद आधार पर बारीक बूटियांछीपा समुदाय-
दाबू / जाजमअकोला (चित्तौड़गढ़), बालोतरा, सवाई माधोपुरमिट्टी-ग्वार, मिट्टी, मोम का दाबूछीपा समुदाय-
अजरख / मलीरबालोतराअजरख: दोनों तरफ नीला-लाल; मलीर: काला-कत्थईसिंध-थार परंपरा-
कोफ्तगारीउदयपुर, जयपुर, अलवरलोहे पर सोने-चांदी के तारराजदरबार के शस्त्रागार-
तारकशीनाथद्वारा (राजसमंद)चांदी के बारीक तारों के गहने--

राजस्थान के GI टैग वाले हस्तशिल्प (वर्ष के साथ)

GI (Geographical Indication) टैग चेन्नई की GI Registry देती है। नीचे का वर्ष registry के रिकॉर्ड वाला financial year है (Wikipedia की GI सूची के अनुसार); कोचिंग किताबें कई बार अगला calendar year लिखती हैं, इसलिए दोनों याद रखें।

क्र.GI उत्पादकेंद्र / जिलावर्षपहचान
1कोटा डोरिया (Kota Doria)कैथून (कोटा)2004-05 (logo 2010-11)राजस्थान का पहला GI, सूत-रेशम का खत वाला कपड़ा
2ब्लू पॉटरी ऑफ जयपुरजयपुर2008-09 (logo 2016-17)बिना आम मिट्टी की नीली पॉटरी
3मोलेला क्ले वर्कमोलेला (राजसमंद)2008-09 (logo 2016-17)लोक देवताओं के टेराकोटा फलक
4कठपुतली (Kathputlis of Rajasthan)राजस्थान2008-09 (logo 2016-17)लकड़ी और कपड़े की कठपुतलियां
5सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंगसांगानेर (जयपुर)2009-10सफेद आधार पर बारीक बूटियां
6बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंटबगरू (जयपुर)2011-12प्राकृतिक लाल-काले रंग, दाबू
7थेवा आर्ट वर्कप्रतापगढ़2013-14कांच पर सोने की जाली
8पोकरण पॉटरीपोकरण (जैसलमेर)2017-18लाल मिट्टी के बर्तन
9नाथद्वारा पिछवाई पेंटिंगनाथद्वारा (राजसमंद)2023-24श्रीनाथजी के पीछे लगने वाले कपड़े पर कृष्ण लीला
10उदयपुर कोफ्तगारी मेटल क्राफ्टउदयपुर2023-24हथियारों पर सोने-चांदी के तार
11बीकानेर कशीदाकारी क्राफ्टबीकानेर2023-24सुई-धागे की कढ़ाई
12जोधपुर बंधेज क्राफ्टजोधपुर2023-24बांधकर रंगाई
13बीकानेर उस्ता कला क्राफ्टबीकानेर2023-24ऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशी

हस्तशिल्प के अलावा राजस्थान के दूसरे GI: बीकानेरी भुजिया (2010-11), मकराना मार्बल (2014-15) और सोजत मेहंदी (2021-22)। बजट 2026-27 में GI उत्पादों के प्रचार के लिए 'Raj GIFT Mission' की घोषणा हुई।

राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 और 2026 तक की स्थिति

राज्य कैबिनेट ने 27 अगस्त 2022 को राज्य की पहली हस्तशिल्प नीति को मंजूरी दी। उद्योग मंत्री शकुंतला रावत ने 17 सितंबर 2022 को इसे MSME नीति 2022 के साथ जारी किया। मुख्य प्रावधान:

  • शिल्पकारों के 3 लाख रुपये तक के loan पर 100% ब्याज राज्य सरकार देगी।
  • राजस्थान हाट (जयपुर) में हस्तशिल्प design bank और राज्य स्तरीय हस्तशिल्प museum; जोधपुर के हस्तशिल्प design centre को Centre of Excellence बनाना।
  • सरकारी विभाग registered शिल्पकारों से e-bazaar के रास्ते 10 लाख रुपये तक का सामान बिना tender खरीद सकते हैं।
  • हर साल दिसंबर में राष्ट्रीय स्तर का हस्तशिल्प सप्ताह, जिसमें शिल्पकारों का सम्मान होगा; RIICO हस्तशिल्प पार्क विकसित करेगा।

2026 की स्थिति: यह नीति 31 मार्च 2026 तक के लिए थी (EPCH)। नवंबर 2026 तक कोई नई अलग हस्तशिल्प नीति आने की खबर नहीं मिली। अभी शिल्प से जुड़ी मदद मुख्य रूप से ODOP नीति 2024 (कोटा: कोटा डोरिया, प्रतापगढ़: थेवा ज्वेलरी, बाड़मेर: कशीदाकारी), Integrated Cluster Development Scheme (8 दिसंबर 2024 से) और विश्वकर्मा योजनाओं के रास्ते मिलती है (आर्थिक समीक्षा 2025-26)। इन नीतियों की detail राजस्थान उद्योग नीति note में है। जोधपुर के बोरानाडा विस्तार औद्योगिक क्षेत्र में RIICO ने Handicrafts and Furniture Park विकसित किया है।

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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • टेराकोटा के लिए मोलेला (राजसमंद) प्रसिद्ध है; RAS Pre 2013 Q145 में यही पूछा गया।
  • मोलेला: मिट्टी + गधे की लीद, देवनारायण जी आदि के फलक; मोहनलाल कुम्हार पद्मश्री 2012।
  • ब्लू पॉटरी: आम मिट्टी नहीं, क्वार्ट्ज-कांच; सवाई रामसिंह द्वितीय; कृपाल सिंह शेखावत पद्मश्री 1974।
  • थेवा: प्रतापगढ़, कांच पर सोना, राजसोनी परिवार; महेश राज सोनी पद्मश्री 2015; GI 2013-14।
  • उस्ता कला: बीकानेर, ऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशी; हिसामुद्दीन उस्ता पद्मश्री 1986; GI 2023-24।
  • कोटा डोरिया: कैथून, चौकोर 'खत', राजस्थान का पहला GI (2004-05)।
  • दाबू: अकोला (मिट्टी-ग्वार), बालोतरा (मिट्टी), सवाई माधोपुर (मोम), बगरू (गेहूं का बींधण)।
  • अजरख (दोनों तरफ, नीला-लाल) और मलीर (काला-कत्थई): बालोतरा।
  • 2023-24 में GI: पिछवाई, कोफ्तगारी, कशीदाकारी, बंधेज, उस्ता कला। पोकरण पॉटरी: 2017-18।
  • हस्तशिल्प नीति 2022: कैबिनेट मंजूरी 27 अगस्त, जारी 17 सितंबर 2022; 3 लाख तक loan पर 100% ब्याज।
  • लहरिया: एक दिशा में तिरछी धारियां; मोठड़ा: एक-दूसरे को काटती धारियां।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान की पहली हस्तशिल्प नीति किस तिथि को जारी की गई?
    A) 24 जून 2022 B) 17 सितंबर 2022 C) 7 अक्टूबर 2022 D) 8 दिसंबर 2024

    सही उत्तर: B) 17 सितंबर 2022

    कारण: कैबिनेट ने 27 अगस्त 2022 को मंजूरी दी और 17 सितंबर 2022 को यह MSME नीति 2022 के साथ जारी हुई।

  2. हस्तशिल्प नीति 2022 के अनुसार शिल्पकारों के कितने रुपये तक के loan पर पूरा ब्याज राज्य सरकार देगी?
    A) 1 लाख B) 2 लाख C) 3 लाख D) 5 लाख

    सही उत्तर: C) 3 लाख

    कारण: नीति में 3 लाख रुपये तक के loan पर 100% ब्याज अनुदान का प्रावधान है।

  3. जयपुर की ब्लू पॉटरी बनाने में किसका उपयोग नहीं होता?
    A) क्वार्ट्ज पाउडर B) कांच का चूरा C) सामान्य चिकनी मिट्टी D) मुल्तानी मिट्टी

    सही उत्तर: C) सामान्य चिकनी मिट्टी

    कारण: ब्लू पॉटरी आम कुम्हारी मिट्टी के बिना क्वार्ट्ज, कांच चूरा, मुल्तानी मिट्टी, गोंद और साजी से बनती है।

  4. ब्लू पॉटरी को बीसवीं सदी में फिर से जिंदा करने वाले पद्मश्री (1974) कलाकार कौन थे?
    A) मोहनलाल कुम्हार B) कृपाल सिंह शेखावत C) हिसामुद्दीन उस्ता D) कुदरत सिंह

    सही उत्तर: B) कृपाल सिंह शेखावत

    कारण: मऊ (सीकर) के कृपाल सिंह शेखावत को ब्लू पॉटरी के लिए 1974 में पद्मश्री मिला।

  5. नीचे दिए गए GI उत्पादों में से किसे सबसे पहले GI टैग मिला?
    A) थेवा आर्ट वर्क B) बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट C) कोटा डोरिया D) पोकरण पॉटरी

    सही उत्तर: C) कोटा डोरिया

    कारण: कोटा डोरिया 2004-05 में दर्ज हुआ; बगरू 2011-12, थेवा 2013-14 और पोकरण पॉटरी 2017-18 में।

  6. इनमें से किस शिल्प को 2023-24 में GI टैग नहीं मिला?
    A) उदयपुर कोफ्तगारी B) जोधपुर बंधेज C) बीकानेर उस्ता कला D) पोकरण पॉटरी

    सही उत्तर: D) पोकरण पॉटरी

    कारण: पोकरण पॉटरी को 2017-18 में GI मिला था; बाकी तीनों 2023-24 वाले समूह में हैं।

  7. ऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशी (उस्ता कला) के लिए 1986 में पद्मश्री किसे मिला?
    A) हिसामुद्दीन उस्ता B) महेश राज सोनी C) अर्जुन प्रजापति D) रामकिशोर छीपा

    सही उत्तर: A) हिसामुद्दीन उस्ता

    कारण: बीकानेर के हिसामुद्दीन उस्ता को 1986 में पद्मश्री मिला; बाकी तीनों दूसरे शिल्पों के कलाकार हैं।

  8. कोटा डोरिया के कपड़े में दिखने वाले चौकोर चेक को क्या कहते हैं?
    A) बूटी B) खत C) दाबू D) जाजम

    सही उत्तर: B) खत

    कारण: सूत और रेशम के ताने-बाने से बने चौकोर खानों को 'खत' कहा जाता है।

  9. वस्त्र छपाई में मोम का दाबू मुख्य रूप से कहां काम में लिया जाता है?
    A) छीपों का अकोला B) सवाई माधोपुर C) बगरू D) बालोतरा

    सही उत्तर: B) सवाई माधोपुर

    कारण: सवाई माधोपुर में मोम का, अकोला में मिट्टी-ग्वार का, बालोतरा में मिट्टी का और बगरू में गेहूं के बींधण का दाबू लगता है।

  10. कपड़े के दोनों तरफ नीले और लाल रंग की ज्यामितीय छपाई किसकी पहचान है?
    A) बगरू छपाई B) सांगानेरी छपाई C) अजरख छपाई D) मलीर छपाई

    सही उत्तर: C) अजरख छपाई

    कारण: बालोतरा की अजरख छपाई दोनों तरफ होती है; मलीर में काला-कत्थई रंग होता है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. मोलेला टेराकोटा क्या है?
    उत्तर: राजसमंद के मोलेला गांव में मिट्टी और गधे की लीद से हाथ से बने लोक देवताओं (देवनारायण जी, भैरव जी) के फलक; GI 2008-09; मोहनलाल कुम्हार पद्मश्री 2012।
  2. थेवा कला की पहचान बताइए।
    उत्तर: प्रतापगढ़ के राजसोनी परिवार की कला, जिसमें रंगीन कांच पर सोने की बारीक जाली जमाई जाती है; GI 2013-14, ODOP उत्पाद भी।
  3. दाबू छपाई क्या है और इसके केंद्र कौन से हैं?
    उत्तर: लेप लगाकर कुछ हिस्सों को रंग से बचाने वाली resist छपाई; अकोला, बालोतरा, सवाई माधोपुर, बगरू।
  4. हस्तशिल्प नीति 2022 के दो प्रावधान लिखिए।
    उत्तर: 3 लाख तक loan पर 100% ब्याज अनुदान; राजस्थान हाट में design bank और हस्तशिल्प museum।
  5. 2023-24 में GI पाने वाले राजस्थान के शिल्प बताइए।
    उत्तर: नाथद्वारा पिछवाई, उदयपुर कोफ्तगारी, बीकानेर कशीदाकारी, जोधपुर बंधेज, बीकानेर उस्ता कला।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राजस्थान के प्रमुख हस्तशिल्पों में GI टैग की भूमिका की समीक्षा कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: GI से नकली माल पर रोक और ब्रांड पहचान; कोटा डोरिया (2004-05) से 2023-24 के पांच शिल्पों तक का सफर; ODOP 2024 और Raj GIFT Mission से जुड़ाव; चुनौतियां: मशीन से बने सस्ते नकली उत्पाद, नई पीढ़ी का शिल्प छोड़ना, GI logo का कम इस्तेमाल।
  2. राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 के प्रावधान और आज की स्थिति पर टिप्पणी कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 17 सितंबर 2022, करीब 6 लाख शिल्पकारों के लिए; ब्याज अनुदान, design bank, museum, e-bazaar खरीद, हस्तशिल्प सप्ताह; अवधि 31 मार्च 2026 तक; अब ODOP 2024, Integrated Cluster Development Scheme और RIICO के हस्तशिल्प पार्क से मदद।

FAQs

राजस्थान का पहला GI टैग किस उत्पाद को मिला?

कोटा डोरिया को, जो GI Registry में 2004-05 में दर्ज हुआ। कई किताबें इसे 2005-06 लिखती हैं।

टेराकोटा के लिए राजस्थान की कौन सी जगह प्रसिद्ध है?

राजसमंद जिले का मोलेला गांव। RAS Pre 2013 में इसी पर सवाल आया था।

अजरख छपाई अब किस जिले में है?

इसका मुख्य केंद्र बालोतरा है, जो 2023 में बाड़मेर से अलग होकर नया जिला बना। पुरानी किताबों में इसे बाड़मेर लिखा मिलता है।

क्या 2026 में राजस्थान की कोई नई हस्तशिल्प नीति है?

नवंबर 2026 तक कोई नई अलग हस्तशिल्प नीति नहीं आई है। 2022 की नीति 31 मार्च 2026 तक के लिए थी; अभी ODOP नीति 2024 और cluster योजनाओं से मदद मिलती है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • मोलेला (राजसमंद): टेराकोटा फलक, मोहनलाल कुम्हार पद्मश्री 2012, GI 2008-09।
  • ब्लू पॉटरी (जयपुर): आम मिट्टी नहीं, कृपाल सिंह शेखावत पद्मश्री 1974, GI 2008-09।
  • थेवा (प्रतापगढ़): कांच पर सोना, महेश राज सोनी पद्मश्री 2015, GI 2013-14।
  • उस्ता कला (बीकानेर): ऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशी, हिसामुद्दीन उस्ता पद्मश्री 1986, GI 2023-24।
  • कोटा डोरिया: कैथून, 'खत', राजस्थान का पहला GI (2004-05)।
  • दाबू: अकोला मिट्टी-ग्वार, बालोतरा मिट्टी, सवाई माधोपुर मोम, बगरू गेहूं का बींधण।
  • 2023-24 GI: पिछवाई, कोफ्तगारी, कशीदाकारी, बंधेज, उस्ता कला; पोकरण पॉटरी 2017-18।
  • हस्तशिल्प नीति 2022: जारी 17 सितंबर 2022, अवधि 31 मार्च 2026 तक।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प (Rajasthan Ke Hastshilp) में जयपुर की ब्लू पॉटरी और मीनाकारी, मोलेला (राजसमंद) का टेराकोटा, प्रतापगढ़ की थेवा कला, बीकानेर की उस्ता कला, कोटा डोरिया, सांगानेरी-बगरू छपाई, बालोतरा की अजरख छपाई और जोधपुर का बंधेज सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प: ब्लू पॉटरी, मोलेला, थेवा, उस्ता कला, बंधेज, छपाई और GI टैग एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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Rajasthan ke Hastshilp: राजस्थान के हस्तशिल्प: ब्लू पॉटरी, मोलेला, थेवा, उस्ता कला, बंधेज, छपाई और GI टैग
लघु उद्योग, हस्तशिल्प एवं खादी