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लघु उद्योग, हस्तशिल्प एवं खादी

अध्याय सार

लघु एवं कुटीर उद्योग राजस्थान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कुटीर उद्योग मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों द्वारा घर पर चलाए जाते हैं। ये कम पूंजी में अधिक रोजगार प्रदान करते हैं, विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं।

प्रमुख हस्तशिल्प (Handicrafts)

हस्तशिल्पप्रमुख केंद्रविशेष तथ्य
गोटा-किनारीखंडेला (सीकर), जयपुर, अजमेरकपड़ों पर सोने-चांदी के तारों का काम। खंडेला इसके लिए विशेष प्रसिद्ध है।
छपाई (Printing)सांगानेर, बगरू, बाड़मेरसांगानेरी और बगरू प्रिंट: जयपुर।
अजरक प्रिंट: बाड़मेर।
जाजम छपाई: चित्तौड़गढ़।
बंधेज (Tie & Dye)जयपुर, जोधपुरकपड़े को बांधकर रंगने की कला।
मीनाकारीजयपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वाराधातु पर रंग चढ़ाने की कला। जयपुर इसका मुख्य केंद्र है।
काष्ठ कला (Wood Carving)बस्सी (चित्तौड़गढ़)बस्सी लकड़ी के खिलौने, कावड़ और गणगौर निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
नमदे और गलीचेटोंक, जयपुर, बीकानेरटोंक नमदों के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर और बीकानेर में ऊनी गलीचे बनते हैं।
चर्म उद्योगजोधपुर, जयपुरकलात्मक मोजड़ी और जूतियों के लिए प्रसिद्ध। बीकानेर में ऊंट की खाल पर कलात्मक कार्य होता है।
हाथी दांतजयपुर, जोधपुरजयपुर में हाथी दांत के खिलौने और जोधपुर में चूड़ियाँ बनती हैं।

लघु उद्योगों का वर्गीकरण

  • कृषि आधारित: तेल घाणी (भरतपुर, कोटा), गुड़-खांडसारी (गंगानगर, बूंदी)।
  • वन आधारित:
    • बीड़ी उद्योग: तेंदू के पत्ते से बीड़ी बनाई जाती है। मयूर बीड़ी फैक्ट्री (टोंक) प्रसिद्ध है।
    • कागज: सांगानेर और गोसुंडा।
    • दियासलाई: अजमेर, पाली, अलवर।
  • खनिज आधारित: संगमरमर (मकराना, किशनगढ़), ग्रेनाइट (जालोर)।

संस्थागत सहयोग

  • सिडबी (SIDBI): भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना 2 अप्रैल 1990 को हुई।
  • जिला उद्योग केंद्र (DIC): उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य में 34 जिला उद्योग केंद्र और 7 उप-केंद्र कार्यरत हैं (पाठानुसार)।
  • खादी एवं ग्रामोद्योग: महात्मा गांधी द्वारा प्रेरित। वर्तमान में 'फैशन फॉर डवलपमेंट' कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

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