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Operations & Applications of Memory Allocations in Hindi

Applications of Memory Allocation in Data Structure in  Hindi | मेमोरी एलोकेशन के अनुप्रयोग :


Introduction to Memory Allocation in Data Structure in Hindi |  मेमोरी एलोकेशन का परिचय :

मेमोरी एलोकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (RAM) में आवश्यकतानुसार डेटा और प्रोग्राम्स के लिए स्थान (स्पेस) आवंटित किया जाता है। जब कोई प्रोग्राम चलाया जाता है, तो उसे प्रोसेस के लिए कुछ मेमोरी की आवश्यकता होती है, और मेमोरी एलोकेशन के माध्यम से यह आवश्यक स्थान प्रदान किया जाता है। यह मुख्य रूप से दो प्रकारों में विभाजित होता है: स्टैटिक मेमोरी एलोकेशन और डायनामिक मेमोरी एलोकेशन।

मेमोरी एलोकेशन का सही और कुशल तरीके से प्रबंधन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सिस्टम के प्रदर्शन और संसाधनों के सही उपयोग पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आइए हम इसके कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों और प्रकारों पर विस्तृत चर्चा करें।


Applications of Memory Allocation in Data Structure in  Hindi | मेमोरी एलोकेशन के अनुप्रयोग :

मेमोरी एलोकेशन के विभिन्न अनुप्रयोग होते हैं जो कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और सिस्टम डिज़ाइन के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:

1. प्रोसेस मेमोरी प्रबंधन (Process Memory Management):

जब कोई प्रोग्राम या प्रोसेस निष्पादित होता है, तो उसे CPU के साथ काम करने के लिए मुख्य मेमोरी की आवश्यकता होती है। मेमोरी एलोकेशन के बिना, प्रोसेस को आवश्यक संसाधन प्रदान नहीं किया जा सकता। डायनामिक मेमोरी एलोकेशन का उपयोग करके प्रोसेस को आवश्यकतानुसार मेमोरी दी जाती है।

2. डाटा स्ट्रक्चर एलोकेशन (Data Structure Allocation):

प्रोग्रामिंग में कई बार हमें जटिल डेटा संरचनाओं जैसे कि लिंक्ड लिस्ट, ट्री, ग्राफ आदि को मेमोरी में स्टोर करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए डायनामिक मेमोरी एलोकेशन का उपयोग होता है, जिससे रनटाइम पर इन डेटा संरचनाओं के लिए मेमोरी आवंटित की जाती है।

3. पेजिंग और स्वैपिंग (Paging and Swapping):

वर्चुअल मेमोरी मैनेजमेंट में पेजिंग और स्वैपिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इसमें, प्रोग्राम के हिस्सों को मेमोरी से डिस्क पर और डिस्क से मेमोरी में लाने के लिए डायनामिक मेमोरी एलोकेशन का उपयोग होता है। इससे सीमित RAM के साथ भी बड़े प्रोग्राम्स को रन किया जा सकता है।

4. हिप मैनेजमेंट (Heap Management):

डायनामिक मेमोरी एलोकेशन का मुख्य अनुप्रयोग हिप के प्रबंधन में होता है। हिप मेमोरी का वह हिस्सा होता है जहाँ प्रोग्राम रनटाइम पर मेमोरी का आवंटन और मुक्त (free) कर सकता है। यह मुख्य रूप से प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे कि C और C++ में malloc(), calloc(), realloc() और free() जैसी फंक्शन कॉल्स के माध्यम से किया जाता है।

5. स्टैक मेमोरी एलोकेशन (Stack Memory Allocation):

प्रोग्रामिंग में फ़ंक्शन कॉल्स के लिए स्टैक का उपयोग किया जाता है, जहाँ मेमोरी स्वचालित रूप से आवंटित और मुक्त होती है। इसमें हर फ़ंक्शन कॉल पर एक ब्लॉक मेमोरी आवंटित होता है और फ़ंक्शन के समाप्त होने पर वह स्वतः मुक्त हो जाता है। स्टैक आधारित मेमोरी एलोकेशन तेजी से होती है।

6. कैश मेमोरी प्रबंधन (Cache Memory Management):

कैश मेमोरी एक तेज़ मेमोरी होती है जिसे सीपीयू के पास रखा जाता है ताकि अक्सर उपयोग होने वाले डेटा को तेज़ी से एक्सेस किया जा सके। इसमें डायनामिक मेमोरी एलोकेशन का उपयोग किया जाता है ताकि बार-बार उपयोग होने वाले डेटा को जल्दी से कैश में लोड किया जा सके।

Operations of Memory Allocation in Data Structure in Hindi | मेमोरी एलोकेशन के ऑपरेशंस हिंदी में  :


  • मेमोरी एलोकेशन कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी प्रोग्राम या प्रोसेस को चलाने के लिए आवश्यक मेमोरी उपलब्ध हो। इस प्रक्रिया में विभिन्न ऑपरेशंस शामिल होते हैं, जो मेमोरी के प्रबंधन और आवंटन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  •  ये ऑपरेशंस मुख्य रूप से प्रोग्राम के प्रदर्शन और संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए आवश्यक होते हैं।
  • मेमोरी एलोकेशन और इसके विभिन्न ऑपरेशंस किसी भी कंप्यूटर सिस्टम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इन ऑपरेशंस के माध्यम से प्रोग्राम्स को आवश्यकतानुसार मेमोरी आवंटित की जाती है, और 
  • जब मेमोरी की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, तो उसे वापस सिस्टम को दिया जाता है।  सही तरीके से मेमोरी का प्रबंधन करना सिस्टम के प्रदर्शन को बढ़ाता है और मेमोरी के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करता है।

मेमोरी एलोकेशन के ऑपरेशंस को समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि मेमोरी का दो मुख्य प्रकार होता है: स्टैटिक मेमोरी एलोकेशन और डायनामिक मेमोरी एलोकेशन।

  • स्टैटिक मेमोरी एलोकेशन में प्रोग्राम के प्रारंभिक चरण में ही मेमोरी आवंटित की जाती है।
  • डायनामिक मेमोरी एलोकेशन में रनटाइम के दौरान मेमोरी आवंटित की जाती है, जब भी किसी प्रोसेस को अतिरिक्त मेमोरी की आवश्यकता होती है।
आइए मेमोरी एलोकेशन के मुख्य ऑपरेशंस को विस्तार से समझते हैं।

Memory Allocation Operations in Data Structure in Hindi  | मेमोरी एलोकेशन ऑपरेशन हिंदी में  :

मेमोरी एलोकेशन (Memory Allocation) :

मेमोरी एलोकेशन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रोग्राम या डेटा को RAM में स्थान दिया जाता है। यह ऑपरेशन तब होता है जब किसी प्रोग्राम को रनटाइम पर या स्टार्टअप के समय मेमोरी की आवश्यकता होती है। इसमें विभिन्न प्रकार की मेमोरी एलोकेशन होती है:

स्टैटिक एलोकेशन (Static Allocation): इसमें मेमोरी का आवंटन प्रोग्राम के कंपाइल होने के समय ही हो जाता है। यह आमतौर पर वैश्विक और स्थिर वेरिएबल्स के लिए किया जाता है। इस प्रकार की मेमोरी एलोकेशन में रनटाइम के दौरान मेमोरी को परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

डायनामिक एलोकेशन (Dynamic Allocation): यह एलोकेशन रनटाइम के दौरान की जाती है, जब प्रोग्राम को मेमोरी की आवश्यकता होती है। प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे C, C++ में malloc(), calloc(), realloc() और free() जैसी फंक्शंस का उपयोग डायनामिक मेमोरी एलोकेशन के लिए किया जाता है।

 मेमोरी फ्री करना (Memory Deallocation)
जब कोई प्रोग्राम अपने काम के लिए आवंटित मेमोरी का उपयोग कर लेता है, तो उस मेमोरी को वापस सिस्टम को मुक्त कर दिया जाता है, जिससे उसे भविष्य में अन्य प्रोसेस द्वारा उपयोग किया जा सके।

फ्री ऑपरेशन (Free Operation): डायनामिक मेमोरी एलोकेशन में, जब किसी प्रोग्राम को मेमोरी की आवश्यकता नहीं होती है, तो उस मेमोरी को free() फंक्शन का उपयोग करके मुक्त किया जाता है। यह प्रक्रिया सिस्टम में मेमोरी की बर्बादी को रोकने के लिए आवश्यक होती है।

 पुनः आवंटन (Reallocation)

पुनः आवंटन वह प्रक्रिया है जिसमें पहले से आवंटित मेमोरी ब्लॉक को बढ़ाया या घटाया जाता है। जब किसी प्रोग्राम को पहले से आवंटित मेमोरी से अधिक की आवश्यकता होती है या पहले आवंटित मेमोरी से कम की आवश्यकता होती है, तब realloc() फंक्शन का उपयोग किया जाता है।

realloc() का उपयोग तब किया जाता है जब किसी मौजूदा मेमोरी ब्लॉक को बदलने की जरूरत हो। यह मेमोरी ब्लॉक को बड़ा या छोटा करने में मदद करता है।

 मेमोरी कम्पेक्शन (Memory Compaction)

मेमोरी कम्पेक्शन वह प्रक्रिया है जिसके तहत सिस्टम में मेमोरी के छोटे-छोटे ब्लॉक्स को एक साथ मिलाकर बड़ा ब्लॉक बनाया जाता है। यह प्रक्रिया सिस्टम में फ़्रैग्मेंटेशन (मेमोरी के छोटे-छोटे हिस्से) को कम करने के लिए की जाती है, जिससे मेमोरी का कुशल उपयोग हो सके।


गैरेबेज कलेक्शन (Garbage Collection)

गैरेबेज कलेक्शन एक स्वचालित प्रक्रिया है जो उपयोग में न आने वाली मेमोरी को स्वतः ही वापस मुक्त कर देती है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे कि Java और Python में उपयोग की जाती है। गैरेबेज कलेक्शन मेमोरी लीकेज से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

Fragmentation in Memory Allocation in Data Structure in Hindi | मेमोरी एलोकेशन में फ़्रैग्मेंटेशन हिंदी में :

आंतरिक फ़्रैग्मेंटेशन (Internal Fragmentation)

जब मेमोरी के आवंटित ब्लॉक में से कुछ हिस्सा उपयोग नहीं होता है, तो इसे आंतरिक फ़्रैग्मेंटेशन कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी प्रोग्राम को 30 KB मेमोरी की आवश्यकता होती है, और सिस्टम 40 KB का ब्लॉक आवंटित करता है, तो 10 KB का हिस्सा अनावश्यक रूप से उपयोग नहीं होता है। इसे आंतरिक फ़्रैग्मेंटेशन कहा जाता है।

 बाहरी फ़्रैग्मेंटेशन (External Fragmentation)

जब मेमोरी में कई छोटे-छोटे खाली ब्लॉक होते हैं जो किसी प्रोसेस को आवंटित नहीं किए जा सकते, तो इसे बाहरी फ़्रैग्मेंटेशन कहा जाता है। यह मुख्यतः तब होता है जब कई प्रोसेसेस मेमोरी में जगह ले लेते हैं और बीच-बीच में छोटे-छोटे हिस्से खाली रह जाते हैं।

 Key Memory Allocation Operations in Data Structure  in Hindi | मेमोरी एलोकेशन के प्रमुख ऑपरेशंस  हिंदी में :


 पेजिंग (Paging)

पेजिंग एक मेमोरी एलोकेशन तकनीक है जिसमें मुख्य मेमोरी को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पेज कहा जाता है। पेजिंग में, लॉजिकल मेमोरी को पेज और फिजिकल मेमोरी को फ्रेम्स में विभाजित किया जाता है, और प्रत्येक पेज को एक फ्रेम में मैप किया जाता है। पेजिंग का उद्देश्य बाहरी फ्रैग्मेंटेशन को कम करना है।

 सेगमेंटेशन (Segmentation)

सेगमेंटेशन में प्रोग्राम को विभिन्न लॉजिकल सेगमेंट्स में विभाजित किया जाता है, जैसे कि डेटा सेगमेंट, कोड सेगमेंट, और स्टैक सेगमेंट। प्रत्येक सेगमेंट का आकार अलग हो सकता है। यह तकनीक प्रोग्राम को उसके लॉजिकल डिविज़न के आधार पर मेमोरी में स्थान प्रदान करती है।

 स्वैपिंग (Swapping)

स्वैपिंग वह प्रक्रिया है जिसमें प्रोसेस को मेमोरी से हटाकर डिस्क पर भेजा जाता है और जब उसे पुनः आवश्यकता होती है, तो उसे मेमोरी में वापस लाया जाता है। यह तकनीक मुख्यतः तब उपयोग होती है जब मुख्य मेमोरी में जगह नहीं होती और नए प्रोसेस को लोड करना हो।

 बडी सिस्टम (Buddy System)

बडी सिस्टम एक मेमोरी एलोकेशन और डीएलोकेशन तकनीक है जिसमें मेमोरी को कुछ निश्चित आकारों के ब्लॉक्स में विभाजित किया जाता है। जब मेमोरी की आवश्यकता होती है, तो सबसे छोटे आवश्यक ब्लॉक को आवंटित किया जाता है, और जब इसे फ्री किया जाता है, तो दो बडी ब्लॉक्स को एक साथ जोड़ा जाता है।