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राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय): 74वां संविधान संशोधन, संरचना, कार्य और वित्तीय स्रोत

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय): 74वां संविधान संशोधन, संरचना, कार्य और वित्तीय स्रोत - URBAN BODIES
  • • अवलोकन: Quick Answer: राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय) 74वें संविधान संशोधन 1992 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के अधीन काम करता है। राज्य की...
Quick Answer: राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय) 74वें संविधान संशोधन 1992 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के अधीन काम करता है। राज्य की पहली नगरपालिका 1864 में माउंट आबू में बनी थी। वर्तमान में त्रिस्तरीय व्यवस्था है: बड़े शहरों में नगर निगम (महापौर व Commissioner), मध्यम शहरों में नगर परिषद (सभापति व Commissioner) और कस्बों में नगर पालिका मंडल (अध्यक्ष व Executive Officer)। संविधान के भाग 9A में अनुच्छेद 243P से 243ZG तक नियम हैं और 12वीं अनुसूची में 18 विषय सौंपे गए हैं। राजस्थान के नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित हैं।

राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय): ऐतिहासिक विकास और पृष्ठभूमि

राजस्थान में आधुनिक शहरी स्वशासन की नींव ब्रिटिश काल में पड़ी थी। रियासतों में नगरों की सफाई और रोशनी प्रबंध के लिए म्युनिसिपल कमेटियां बनीं। राजस्थान में जन चेतना के इतिहास के बारे में जानने के लिए देखें: Public Awakening and Freedom Struggle in Rajasthan।

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1. राजस्थान की शुरुआती नगरपालिकाएं

  • माउंट आबू (1864): राजस्थान की पहली नगरपालिका 1864 में माउंट आबू (सिरोही) में स्थापित हुई थी। अंग्रेजों ने छावनी क्षेत्र में नागरिक प्रबंध के लिए इसे शुरू किया।
  • अन्य प्रमुख नगर: इसके बाद 1866 में अजमेर, 1867 में ब्यावर और 1869 में जयपुर में नगरपालिका बनी। बाद में दूसरी रियासतों के बड़े शहरों में भी ऐसे निकाय बने।
  • एकीकरण के बाद: आजादी के बाद राज्य में समानता के लिए राजस्थान टाउन म्युनिसिपैलिटीज एक्ट 1951 बना, जिसे 1959 में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम से बदला गया।
  • वर्तमान कानून: राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 (2009 का अधिनियम संख्या 18) को 11 सितंबर 2009 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और यह 15 सितंबर 2009 से लागू हुआ। इसने 1959 के पुराने अधिनियम की जगह ली।

74वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992: संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 243P-243ZG)

74वां संविधान संशोधन 1 जून 1993 से लागू हुआ। इसने संविधान में भाग 9A (अनुच्छेद 243P से 243ZG) और 12वीं अनुसूची जोड़कर शहरी निकायों को संवैधानिक सुरक्षा दी।

1. मुख्य अनुच्छेदों के प्रावधान

  • अनुच्छेद 243Q (निकायों का गठन): तीन तरह के निकाय: नगर पंचायत (संक्रमणशील क्षेत्र), नगर परिषद (छोटा नगरीय क्षेत्र) और नगर निगम (बड़ा नगरीय क्षेत्र)। राजस्थान में छोटे शहरों के लिए नगर पालिका मंडल बनते हैं।
  • अनुच्छेद 243R (संरचना): सभी वार्डों से सीधे चुनाव। मनोनीत सदस्यों को वोट देने का हक नहीं।
  • अनुच्छेद 243S (वार्ड समितियां): 3 लाख या अधिक आबादी वाले शहरों में कमेटियां अनिवार्य।
  • अनुच्छेद 243T (आरक्षण): SC/ST को आबादी अनुसार सीटें और महिलाओं को कम से कम 1/3 सीटें। राजस्थान ने राज्य कानून से महिलाओं को 50% आरक्षण दिया है।
  • अनुच्छेद 243U (कार्यकाल): पहली बैठक से 5 वर्ष। निकाय भंग होने पर 6 माह में चुनाव।
  • अनुच्छेद 243V (अयोग्यता): चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय है।
  • अनुच्छेद 243W (शक्तियां): 12वीं अनुसूची के 18 विषयों का प्रबंधन।
  • अनुच्छेद 243X (कर व कोष): राज्य कानून से कर, शुल्क और टोल लगाने का अधिकार और राज्य से अनुदान (grants-in-aid)।
  • अनुच्छेद 243Y (राज्य वित्त आयोग): राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष में वित्त आयोग बनाते हैं।
  • अनुच्छेद 243ZA (चुनाव): राज्य निर्वाचन आयोग निष्पक्ष चुनाव और वोटर लिस्ट बनाता है।
  • अनुच्छेद 243ZD (जिला योजना समिति): DPC में कम से कम 4/5 (80%) सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • अनुच्छेद 243ZE (महानगर योजना समिति): 10 लाख या अधिक आबादी वाले महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना का प्रारूप बनाना।
  • अनुच्छेद 243ZG (अदालती रोक): परिसीमन और चुनाव मामलों में अदालतों के दखल पर रोक।

Table 1: 74वें संविधान संशोधन के प्रमुख अनुच्छेद और संवैधानिक उपबंध

अनुच्छेद संवैधानिक विषय प्रमुख प्रावधान
अनुच्छेद 243P परिभाषाएं महानगर, नगर, वार्ड और समिति के विधिक अर्थ।
अनुच्छेद 243Q निकायों का गठन नगर पंचायत, नगर परिषद व नगर निगम का गठन।
अनुच्छेद 243R संरचना वार्डों से सीधे चुनाव; मनोनीत सदस्यों को मत हक नहीं।
अनुच्छेद 243S वार्ड समितियां 3 लाख आबादी वाले शहरों में कमेटियां अनिवार्य।
अनुच्छेद 243T सीटों का आरक्षण SC/ST को आबादी अनुसार; महिलाओं को कम से कम 1/3 (राजस्थान में 50%)।
अनुच्छेद 243U कार्यकाल प्रथम बैठक से 5 वर्ष; भंग होने पर 6 माह में चुनाव।
अनुच्छेद 243V अयोग्यताएं न्यूनतम 21 वर्ष आयु; अयोग्य व्यक्ति चुनाव से बाहर।
अनुच्छेद 243W शक्तियां व कार्य 12वीं अनुसूची के 18 विषयों का संचालन।
अनुच्छेद 243X कर लगाने का अधिकार राज्य कानून से कर, शुल्क, टोल और अनुदान।
अनुच्छेद 243Y राज्य वित्त आयोग राज्य व निकायों में शुद्ध राजस्व का बंटवारा।
अनुच्छेद 243ZA शहरी चुनाव संचालन राज्य निर्वाचन आयोग के अधीन वोटर लिस्ट व चुनाव।
अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति कम से कम 4/5 भाग सदस्य निर्वाचित; विकास योजनाओं का समेकन।
अनुच्छेद 243ZE महानगर योजना समिति 10 लाख या अधिक आबादी पर मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग समिति।
अनुच्छेद 243ZG न्यायालयों का वर्जन परिसीमन व सीट बंटवारे में अदालती दखल वर्जित; चुनाव विवाद केवल चुनाव याचिका से।

राजस्थान में नगरीय निकायों का त्रिस्तरीय संगठन

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के तहत राज्य में शहरी निकायों का गठन तीन श्रेणियों में किया गया है:

1. नगर निगम (Municipal Corporation)

  • मानक: 5 लाख या अधिक आबादी वाले बड़े संभाग मुख्यालयों और शहरों में।
  • राजनीतिक प्रमुख: महापौर (Mayor) और उप-महापौर, जिनका चुनाव पार्षदों में से होता है।
  • प्रशासनिक प्रमुख: आयुक्त (Commissioner), जो IAS या वरिष्ठ RAS अधिकारी होते हैं।
  • प्रमुख उदाहरण: जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर और भरतपुर।

2. नगर परिषद (Municipal Council)

  • मानक: 1 लाख से 5 लाख आबादी वाले मध्यम शहरों व जिला मुख्यालयों में।
  • राजनीतिक प्रमुख: सभापति (President/Chairman) और उप-सभापति, जिनका चुनाव पार्षदों से होता है।
  • प्रशासनिक प्रमुख: आयुक्त (Commissioner), जो RAS या नगरपालिका सेवा अधिकारी होते हैं।

3. नगर पालिका मंडल (Municipal Board)

  • मानक: 1 लाख से कम आबादी वाले कस्बों और संक्रमणशील क्षेत्रों में।
  • राजनीतिक प्रमुख: अध्यक्ष (Chairman/President) और उपाध्यक्ष।
  • प्रशासनिक प्रमुख: अधिशासी अधिकारी (Executive Officer - EO)।

Table 2: राजस्थान में नगरीय निकायों का त्रिस्तरीय वर्गीकरण और तुलना

निकाय का प्रकार जनसंख्या का पैमाना राजनीतिक प्रमुख प्रशासनिक प्रमुख वार्डों की स्थिति
नगर निगम (Municipal Corporation) 5 लाख से अधिक आबादी महापौर (Mayor) आयुक्त (IAS / वरिष्ठ RAS) राज्य सरकार आबादी के आधार पर तय करती है
नगर परिषद (Municipal Council) 1 लाख से 5 लाख तक सभापति (President) नगर परिषद आयुक्त राज्य सरकार आबादी के आधार पर तय करती है
नगर पालिका मंडल (Municipal Board) 1 लाख से कम अध्यक्ष (Chairman) अधिशासी अधिकारी (EO) राज्य सरकार आबादी के आधार पर तय करती है

12वीं अनुसूची के 18 विषय और कार्य

74वें संशोधन की 12वीं अनुसूची में नगरीय निकायों को 18 कार्य सौंपे गए हैं। उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता के विधिक अधिकारों के लिए देखें: Consumer Protection Act। प्रमुख कार्य नीचे दिए गए हैं:

  1. नगरीय योजना और मास्टर प्लान बनाना।
  2. भूमि उपयोग नियमन और निर्माण मंजूरी।
  3. आर्थिक व सामाजिक विकास योजनाएं।
  4. सड़कें, पुल व सार्वजनिक मार्ग।
  5. घरेलू, वाणिज्यिक व औद्योगिक जलापूर्ति।
  6. लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता व कचरा प्रबंधन।
  7. अग्निशमन सेवाएं (Fire Services)।
  8. नगरीय वानिकी व पर्यावरण संरक्षण।
  9. कमजोर वर्गों व दिव्यांगों का कल्याण।
  10. कच्ची बस्ती सुधार व उन्नयन।
  11. शहरी गरीबी निवारण प्रयास।
  12. पार्क, बगीचे व खेल मैदान।
  13. सांस्कृतिक व शैक्षणिक संवर्धन।
  14. श्मशान, कब्रिस्तान व शवदाह गृह।
  15. कांजी हाउस व पशु क्रूरता निवारण।
  16. जन्म-मृत्यु का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन।
  17. स्ट्रीट लाइट, बस स्टैंड व जन सुविधाएं।
  18. बूचड़खानों व चर्मशोधन शालाओं का नियमन।

नगरीय निकायों के वित्तीय स्रोत और आय के साधन

शहरी स्वायत्त संस्थाओं के संचालन के लिए वित्तीय साधन जरूरी हैं। इनकी आय को दो भागों में बांटा जाता है:

1. आंतरिक स्रोत (खुद का राजस्व)

  • स्थानीय कर: संपत्ति कर (House Tax), नगरीय विकास कर (UD Tax) और विज्ञापन कर।
  • यूजर चार्ज: जलापूर्ति, सफाई, सीवरेज और पार्किंग शुल्क।
  • फीस और पेनल्टी: ट्रेड लाइसेंस फीस, नक्शा पास शुल्क और जुर्माना।
  • संपत्ति से आय: दुकानों, बाजारों और जमीनों से किराया व नीलामी राशि।

2. बाह्य स्रोत (अनुदान और सहायता)

  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें: अनुच्छेद 243Y अनुसार राज्य करों में हिस्सा।
  • केंद्र से अनुदान: केंद्रीय वित्त आयोग की ग्रांट और स्वच्छ भारत मिशन जैसी केंद्रीय योजनाओं का पैसा।
  • राज्य सरकार सहायता: विकास कार्यों और चुंगी समाप्ति भरपाई अनुदान।
  • ऋण और बांड: बुनियादी प्रोजेक्ट के लिए कर्ज और म्युनिसिपल बांड।

राज्य निर्वाचन आयोग, वित्त आयोग और जिला योजना समिति (DPC)

शहरी स्वशासन के संचालन में तीन संवैधानिक संस्थाएं महत्वपूर्ण हैं:

1. राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243ZA)

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग का गठन जुलाई 1994 में हुआ। यह एक सदस्यीय संवैधानिक आयोग है जिसके मुखिया राज्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं। यह आयोग शहरी निकायों की वोटर लिस्ट तैयार करता है और चुनाव कराता है।

2. राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243Y)

राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं। यह आयोग कर राजस्व का पंचायती राज और नगरीय निकायों के बीच बंटवारा तय करता है। छठे राज्य वित्त आयोग (गठन 12 अप्रैल 2021, अवधि 2020-25) के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह थे।

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3. जिला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD)

जिले के विकास प्लान के लिए जिला योजना समिति बनती है। राजस्थान में इसमें कुल 25 सदस्य होते हैं:

  • निर्वाचित सदस्य (4/5 भाग = 20 सदस्य): जिला परिषद और नगरपालिकाओं के चुने सदस्यों में से, उन्हीं के वोट से, ग्रामीण-शहरी आबादी के अनुपात में चुने जाते हैं।
  • मनोनीत सदस्य (1/5 भाग = 5 सदस्य): राज्य सरकार मनोनीत करती है। जिला प्रमुख समिति के अध्यक्ष होते हैं (पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 121) और मुख्य आयोजना अधिकारी (Chief Planning Officer) सचिव होते हैं।
  • मुख्य काम: पंचायतों और नगरपालिकाओं की विकास योजनाओं को मिलाकर समेकित जिला प्लान तैयार करना।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • राजस्थान की पहली नगरपालिका 1864 में माउंट आबू (सिरोही) में बनी थी।
  • माउंट आबू के बाद अजमेर (1866), ब्यावर (1867) और जयपुर (1869) में निकाय बने।
  • 74वां संविधान संशोधन 1 जून 1993 से पूरे देश में लागू हुआ था।
  • संविधान में भाग 9A, अनुच्छेद 243P से 243ZG और 12वीं अनुसूची 74वें संशोधन से जुड़े।
  • 12वीं अनुसूची में नगरीय निकायों के लिए कुल 18 विषय निर्धारित हैं।
  • राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 राज्य में 15 सितंबर 2009 से लागू हुआ।
  • संविधान महिलाओं को कम से कम 1/3 सीटें देता है, पर राजस्थान के नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित हैं।
  • निकायों का कार्यकाल पहली बैठक से 5 वर्ष होता है, और भंग होने पर 6 माह में चुनाव जरूरी हैं।
  • अनुच्छेद 243ZA अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग शहरी निकायों के चुनाव कराता है।
  • अनुच्छेद 243Y तहत गठित राज्य वित्त आयोग वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
  • अनुच्छेद 243ZD में जिला योजना समिति के कम से कम 4/5 सदस्य निर्वाचित प्रतिनिधियों से चुने जाते हैं।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान में सबसे पहली नगरपालिका 1864 में कहाँ स्थापित हुई थी?
    A) माउंट आबू
    B) अजमेर
    C) जयपुर
    D) जोधपुर
    उत्तर: A) माउंट आबू
    कारण: राजस्थान की प्रथम नगरपालिका 1864 में सिरोही के माउंट आबू में बनी थी।
  2. संविधान की 12वीं अनुसूची में नगरीय निकायों के लिए कितने विषय हैं?
    A) 11
    B) 18
    C) 21
    D) 29
    उत्तर: B) 18
    कारण: 74वें संशोधन की 12वीं अनुसूची में 18 कार्यात्मक विषय दिए गए हैं।
  3. 74वां संविधान संशोधन अधिनियम भारत में किस तारीख से प्रभावी हुआ?
    A) 24 अप्रैल 1993
    B) 1 जून 1993
    C) 15 सितंबर 1993
    D) 26 जनवरी 1994
    उत्तर: B) 1 जून 1993
    कारण: 74वां संशोधन 1 जून 1993 से देश भर में प्रभावी हुआ था।
  4. संविधान के किस अनुच्छेद में जिला योजना समिति (DPC) का नियम है?
    A) अनुच्छेद 243ZD
    B) अनुच्छेद 243ZE
    C) अनुच्छेद 243ZA
    D) अनुच्छेद 243S
    उत्तर: A) अनुच्छेद 243ZD
    कारण: अनुच्छेद 243ZD जिला स्तर पर योजनाओं के समेकन का उपबंध करता है।
  5. जिला योजना समिति में कुल सदस्यों के कितने भाग सदस्य निर्वाचित होते हैं?
    A) 2/3 भाग
    B) 3/4 भाग
    C) 4/5 भाग
    D) 1/2 भाग
    उत्तर: C) 4/5 भाग
    कारण: कुल सदस्यों में से 4/5 भाग (80%) प्रतिनिधि निर्वाचित होते हैं।
  6. राजस्थान के नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण कितना है?
    A) 30%
    B) 33%
    C) 50%
    D) 25%
    उत्तर: C) 50%
    कारण: संविधान न्यूनतम 1/3 कहता है, पर राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 (धारा 6) में महिलाओं के लिए आधी सीटें आरक्षित हैं।
  7. राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 राज्य में किस तारीख से लागू हुआ?
    A) 15 सितंबर 2009
    B) 2 अक्टूबर 2009
    C) 26 जनवरी 2010
    D) 1 जनवरी 2010
    उत्तर: A) 15 सितंबर 2009
    कारण: 11 सितंबर 2009 को राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह अधिनियम 15 सितंबर 2009 से लागू हुआ।
  8. नगरीय स्थानीय निकायों के चुनाव कराने का दायित्व किसका है?
    A) भारत निर्वाचन आयोग
    B) राज्य निर्वाचन आयोग
    C) स्वायत्त शासन विभाग
    D) जिला प्रशासन
    उत्तर: B) राज्य निर्वाचन आयोग
    कारण: अनुच्छेद 243ZA अनुसार चुनाव कराने का दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग का है।
  9. नगर पालिका मंडल (Municipal Board) का प्रशासनिक प्रमुख कौन होता है?
    A) CEO
    B) Commissioner
    C) अधिशासी अधिकारी (EO)
    D) महापौर
    उत्तर: C) अधिशासी अधिकारी (EO)
    कारण: नगर पालिका मंडल का प्रशासनिक मुखिया अधिशासी अधिकारी (EO) होता है।
  10. संविधान के किस अनुच्छेद के तहत वार्ड समितियों का गठन होता है?
    A) अनुच्छेद 243Q
    B) अनुच्छेद 243R
    C) अनुच्छेद 243S
    D) अनुच्छेद 243T
    उत्तर: C) अनुच्छेद 243S
    कारण: अनुच्छेद 243S अनुसार 3 लाख या अधिक आबादी वाली नगरपालिका में वार्ड कमेटियां बनती हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. 74वें संविधान संशोधन के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1. शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा देकर नियमित चुनाव कराना। 2. 12वीं अनुसूची के 18 विषय सौंपकर अधिकार देना।
  2. राजस्थान में जिला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD) की बनावट क्या है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: कुल 25 सदस्यों में 4/5 भाग (20 सदस्य) निर्वाचित होते हैं और 5 सदस्य मनोनीत होते हैं। जिला प्रमुख इसके अध्यक्ष होते हैं।
  3. राजस्थान में नगरीय निकायों के तीन स्तर और उनके राजनीतिक प्रमुख लिखिए। (3 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1. नगर निगम - महापौर (Mayor)। 2. नगर परिषद - सभापति (President)। 3. नगर पालिका मंडल - अध्यक्ष (Chairman)।
  4. संविधान के अनुच्छेद 243Y की मुख्य भूमिका क्या है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: यह राज्य वित्त आयोग को नगरीय निकायों की वित्तीय समीक्षा करने और राज्य करों में हिस्से की राय देने का अधिकार देता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राजस्थान में शहरी निकायों के वित्तीय स्रोतों और सीमाओं का मूल्यांकन कीजिए। (5 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - आय के स्रोत: आंतरिक स्रोत (संपत्ति कर, यूडी टैक्स, यूजर चार्ज, फीस) और बाह्य स्रोत (केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग अनुदान)।
    - मुख्य सीमाएं: कमजोर कर वसूली, अनुदानों पर निर्भरता और तकनीकी स्टाफ की कमी।
    - सुधार के उपाय: संपत्ति कर का डिजिटलीकरण और म्युनिसिपल बांड जारी करना।
  2. 74वें संविधान संशोधन के उपबंधों और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के सुधारों का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - संवैधानिक आधार: भाग 9A, अनुच्छेद 243P से 243ZG, 12वीं अनुसूची के 18 विषय और 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल।
    - राजस्थान 2009 अधिनियम: 15 सितंबर 2009 से लागू; 1959 के अधिनियम की जगह ली; महिलाओं को 50% आरक्षण देकर प्रतिनिधित्व मजबूत करना।
    - चुनौतियां: वित्तीय अधिकारों का धीमा हस्तांतरण और अनियंत्रित शहरीकरण का दबाव।
    - समाधान: 74वें संशोधन अनुसार निकायों को वास्तविक वित्तीय और योजना स्वायत्तता सौंपना।

FAQs

राजस्थान की पहली नगरपालिका कब और कहाँ बनी थी?

राजस्थान की पहली नगरपालिका 1864 में सिरोही रियासत के माउंट आबू में बनी थी। इसके बाद 1866 में अजमेर और 1867 में ब्यावर में निकाय बने।

नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए कितना आरक्षण है?

संविधान के अनुच्छेद 243T में कम से कम 1/3 सीटों के आरक्षण का नियम है, लेकिन राजस्थान में राज्य कानून से नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित हैं।

जिला योजना समिति में कितने सदस्य निर्वाचित होते हैं?

अनुच्छेद 243ZD के अनुसार जिला योजना समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम 4/5 भाग (80%) सदस्य निर्वाचित प्रतिनिधियों में से चुने जाते हैं। राजस्थान में 25 में से 20 सदस्य निर्वाचित होते हैं।

नगर पालिका मंडल और नगर निगम के प्रमुखों में क्या अंतर है?

नगर पालिका मंडल कस्बों में होता है जिसके राजनीतिक प्रमुख अध्यक्ष और प्रशासनिक मुखिया Executive Officer (EO) होते हैं, जबकि नगर निगम बड़े शहरों में होता है जिसके राजनीतिक मुखिया महापौर (Mayor) और प्रशासनिक मुखिया Commissioner होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय) 74वें संविधान संशोधन 1992 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के अधीन काम करता है।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरीय निकाय): 74वां संविधान संशोधन, संरचना, कार्य और वित्तीय स्रोत एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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