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Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन, सौर, पवन, तापीय और परमाणु ऊर्जा

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन, सौर, पवन, तापीय और परमाणु ऊर्जा - ऊर्जा संसाधन (पारंपरिक और गैर-पारंपरिक)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन (rajasthan me urja sansadhan) दो तरह के हैं: पारंपरिक (कोयला और लिग्नाइट के थर्मल प...
Quick Answer: Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन (rajasthan me urja sansadhan) दो तरह के हैं: पारंपरिक (कोयला और लिग्नाइट के थर्मल प्लांट जैसे सूरतगढ़, छबड़ा, कोटा, कालीसिंध; चंबल और माही की पनबिजली; रावतभाटा का परमाणु बिजली घर) और गैर-पारंपरिक (भड़ला, नोख जैसे सोलर पार्क; जैसलमेर की पवन ऊर्जा; बायोमास)। MNRE के अनुसार 31 मार्च 2026 को राजस्थान की स्थापित सौर क्षमता 41,013 MW थी, जो देश में सबसे ज्यादा है। अक्षय ऊर्जा की नोडल एजेंसी RRECL है।

राजस्थान में ऊर्जा संसाधन (Rajasthan me Urja Sansadhan): पारंपरिक और गैर-पारंपरिक

बड़ा क्षेत्रफल, बंजर जमीन और तेज धूप राजस्थान को देश का सबसे बड़ा सौर राज्य बनाते हैं। राज्य के दूसरे संसाधनों के लिए पढ़ें प्राकृतिक संसाधन: वन, मिट्टी और खनिज और ऊर्जा की बुनियादी रूपरेखा के लिए देखें ऊर्जा संसाधन (पारंपरिक और गैर-पारंपरिक)।

PYQ trend: RAS Pre 2013 (Q66) में सबसे बड़ी supercritical क्षमता वाले थर्मल प्लांट पर, RAS Pre 2016 में जालीपा-कपूरड़ी प्लांट (Q72), अक्षय ऊर्जा transmission program के लिए पैसा देने वाली संस्था (Q73) और गैर-पारंपरिक ऊर्जा की नोडल एजेंसी (Q78) पर सवाल आए।

  • पारंपरिक ऊर्जा संसाधन (Conventional Energy): जिनका इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है और जिनके भंडार एक दिन खत्म हो सकते हैं। उदाहरण: कोयला, लिग्नाइट, गैस। पनबिजली और परमाणु ऊर्जा को भी परंपरागत रूप से इसी श्रेणी में पढ़ा जाता है।
  • गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधन (Non-Conventional / Renewable Energy): जो प्रकृति में लगातार मिलते रहते हैं। उदाहरण: सौर, पवन, बायोमास और बायो-गैस।
ऊर्जा श्रेणी प्रमुख स्रोत राजस्थान में मुख्य केंद्र महत्वपूर्ण बिंदु
तापीय (Thermal) कोयला, लिग्नाइट, गैस सूरतगढ़, छबड़ा, कोटा, कालीसिंध, गिरल, अंता बेस-लोड बिजली का आधार
जल विद्युत (Hydro) नदियों पर बने बांध राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, माही बजाज सागर राज्य में स्थित large hydro 412.5 MW (MNRE, 31.03.2026)
परमाणु (Nuclear) प्राकृतिक यूरेनियम, भारी जल रावतभाटा (RAPS), माही बांसवाड़ा (निर्माणाधीन) PHWR तकनीक
सौर ऊर्जा (Solar) सूर्य की किरणें भड़ला (फलोदी), नोख (जैसलमेर), पूगल (बीकानेर) स्थापित 41,013 MW (31.03.2026), देश में पहला
पवन ऊर्जा (Wind) हवा की गतिज ऊर्जा अमर सागर, बड़ा बाग (जैसलमेर), देवगढ़ (प्रतापगढ़) स्थापित 5,349 MW (31.03.2026)
बायोमास (Biomass) सरसों की तूड़ी, विलायती बबूल पदमपुर (श्रीगंगानगर) बायो-पावर 222 MW (31.03.2026)
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पारंपरिक तापीय ऊर्जा: कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली घर

राज्य के सरकारी थर्मल बिजली घर RVUNL चलाता है। पत्थर कोयला दूसरे राज्यों से आता है, जबकि बाड़मेर और बीकानेर का लिग्नाइट स्थानीय बिजली घरों में जलता है।

1. प्रमुख कोयला आधारित थर्मल प्लांट

  • सूरतगढ़ सुपर थर्मल (श्रीगंगानगर): राज्य का पहला सुपर थर्मल बिजली घर, जिसे 'विकास तीर्थ' कहते हैं। कुल 2,820 MW: 250 MW की 6 units और 660 MW की 2 supercritical units (unit 7 और 8)।
  • छबड़ा (मोतीपुरा, बारां): कुल 2,320 MW: 250 MW की 4 units और 660 MW की 2 supercritical units (unit 5 और 6)।
  • कोटा थर्मल: चंबल किनारे राज्य का पहला बड़ा कोयला बिजली घर, क्षमता 1,240 MW।
  • कालीसिंध (झालावाड़): 600 MW की 2 units, कुल 1,200 MW। पहली unit 2014 में चालू हुई।

2. लिग्नाइट और गैस आधारित बिजली घर

  • गिरल (थुंबली, बाड़मेर): RVUNL का 125 MW की 2 units वाला लिग्नाइट बिजली घर (कुल 250 MW)।
  • बरसिंगसर (बीकानेर): NLC India Ltd का 250 MW का pit-head लिग्नाइट बिजली घर।
  • जालीपा-कपूरड़ी (बाड़मेर): निजी क्षेत्र (JSW की Raj WestPower) का 135 MW की 8 units वाला 1,080 MW लिग्नाइट बिजली घर। RAS Pre 2016 (Q72) में पूछा गया कि यह लिग्नाइट आधारित है और निजी developer ने लगाया है; दोनों कथन सही थे।
  • गैस बिजली घर: रामगढ़ (जैसलमेर) राज्य का पहला गैस बिजली घर, अंता (बारां) में NTPC का 419 MW और धौलपुर में 330 MW का combined cycle बिजली घर।

पनबिजली और अंतरराज्यीय भागीदारी

अंतरराज्यीय नदी घाटी समझौतों से राजस्थान को पनबिजली मिलती है:

1. चंबल घाटी परियोजना

राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 साझेदारी में कुल 386 MW पनबिजली बनती है (राजस्थान का हिस्सा 193 MW)। बिजली घर: गांधी सागर (115 MW, मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर (172 MW, राज्य का सबसे बड़ा पनबिजली घर) और जवाहर सागर (99 MW)। कोटा बैराज केवल सिंचाई के काम आता है।

2. माही बजाज सागर और दूसरी परियोजनाएं

  • माही बजाज सागर (बांसवाड़ा): राजस्थान-गुजरात की संयुक्त परियोजना में पानी 45:55 में बंटता है, लेकिन यहां बनने वाली पूरी 140 MW बिजली राजस्थान को मिलती है।
  • भाखड़ा नांगल और व्यास: भाखड़ा नांगल में राजस्थान का हिस्सा 15.22% है। व्यास परियोजना (देहर और पोंग) से भी राज्य को बिजली मिलती है।
  • राहूघाट: करौली जिले में चंबल नदी पर प्रस्तावित पनबिजली project।

राजस्थान परमाणु बिजली घर: रावतभाटा और माही बांसवाड़ा

चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में चंबल किनारे बना राजस्थान परमाणु बिजली घर (RAPS) तारापुर के बाद भारत का दूसरा परमाणु बिजली घर है।

  • तकनीक: यह भारत का पहला प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) था, जिसे कनाडा के सहयोग से CANDU design पर बनाया गया। पहली unit 1973 में व्यावसायिक रूप से चालू हुई।
  • ईंधन और भारी जल: प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन और भारी जल (D2O) मंदक। रावतभाटा में भारी जल संयंत्र भी है।
  • RAPP-7 और RAPP-8: 700 MW की स्वदेशी unit 7 ने 15 अप्रैल 2025 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया और 10 फरवरी 2026 को पहली बार पूरी 700 MW क्षमता पर चली। Unit 8 (700 MW) में 19 सितंबर 2026 को ईंधन भरना (fuel loading) शुरू हुआ; इसका व्यावसायिक उत्पादन 2026-27 में होना है।
  • माही बांसवाड़ा परियोजना (MBRAPP): प्रधानमंत्री ने 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा के नापला (माही बांध के पास) में इसकी नींव रखी। इसमें 700 MW के 4 स्वदेशी PHWR (कुल 2,800 MW) बनेंगे। इसे ASHVINI (Anushakti Vidyut Nigam Ltd, NPCIL और NTPC का joint venture) बना रहा है; लागत करीब ₹42,000 करोड़।

गैर-पारंपरिक ऊर्जा: सौर ऊर्जा में राजस्थान पहले नंबर पर

राज्य में साल में 300 से ज्यादा दिन तेज धूप रहती है और सौर विकिरण भी देश में सबसे ज्यादा वालों में है। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के आकलन में राजस्थान की सौर क्षमता करीब 142 GW है। MNRE के 31 मार्च 2026 के आंकड़ों में राज्य की स्थापित सौर क्षमता 41,012.62 MW थी (ground mounted 36,126 MW, rooftop 2,090 MW, hybrid का सौर हिस्सा 1,980 MW, off-grid/KUSUM-B 816 MW), जो देश में सबसे ज्यादा है।

ध्यान दें: कुल अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन, बायो, hydro मिलाकर) में 31 मार्च 2026 को गुजरात (47,178 MW) राजस्थान (47,021 MW) से थोड़ा आगे निकल गया। यानी "सौर में पहला" सही है, पर "कुल RE में पहला" 2026 में सही नहीं है।

1. प्रमुख सोलर पार्क

  • भड़ला सोलर पार्क (फलोदी): फलोदी जिले की बाप तहसील में 2,245 MW का यह पार्क दुनिया के सबसे बड़े सोलर पार्कों में गिना जाता है।
  • नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): 925 MW क्षमता का सोलर पार्क।
  • फतेहगढ़ और पूगल: जैसलमेर के फतेहगढ़ में बड़े solar projects हैं और बीकानेर के पूगल में मेगा सोलर पार्क विकसित हो रहा है।
  • नीतियां: सौर ऊर्जा नीति 2019 और नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2023 के बाद अब Integrated Clean Energy Policy 2024 लागू है, जिसका लक्ष्य 2029-30 तक 125 GW अक्षय ऊर्जा (90 GW सौर) है।

पवन ऊर्जा: जैसलमेर

NIWE के आकलन में 120 मीटर ऊंचाई पर राज्य की पवन क्षमता करीब 128 GW है। MNRE के अनुसार 31 मार्च 2026 को स्थापित पवन क्षमता 5,349 MW थी।

  • जैसलमेर: राज्य का पहला पवन ऊर्जा project 1999 में अमर सागर (जैसलमेर) में लगा। बाद में बड़ा बाग और सोढा बंधन में बड़े पवन फार्म बने।
  • दूसरे केंद्र: देवगढ़ (प्रतापगढ़) और सीकर का हर्ष पर्वत।

बायोमास ऊर्जा

  • कच्चा माल: सरसों की तूड़ी (mustard husk), विलायती बबूल (Prosopis juliflora) और फसल का बचा हुआ हिस्सा।
  • पहला बिजली घर: राज्य का पहला बायोमास बिजली घर पदमपुर (श्रीगंगानगर) में सरसों की तूड़ी पर आधारित था।

संस्थाएं: RRECL और बिजली कंपनियां

अगस्त 2002 में राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA) को खत्म करके उसकी संपत्ति Rajasthan State Power Corporation Ltd (RSPCL) को दी गई, और RSPCL का नाम बदलकर राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) रखा गया। RRECL सौर, पवन और बायोमास की राज्य नोडल एजेंसी है (RAS Pre 2016 Q78)।

19 जुलाई 2000 को राजस्थान राज्य विद्युत मंडल (RSEB) को 5 कंपनियों में बांटा गया: उत्पादन (RVUNL), transmission (RVPNL) और 3 डिस्कॉम (जयपुर, अजमेर, जोधपुर)। अक्षय ऊर्जा की बिजली को ग्रिड तक लाने वाले Rajasthan Renewable Energy Transmission Investment Program को एशियन विकास बैंक (ADB) से कर्ज मिला (RAS Pre 2016 Q73)।

पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM in Rajasthan)

  • कंपोनेंट-A: किसानों की बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर 0.5 से 2 MW के सौर plant। देश का पहला कंपोनेंट-A plant (1 MW) कोटपूतली-बहरोड़ जिले के भालोजी गांव में चालू हुआ।
  • कंपोनेंट-B: बिना ग्रिड वाले इलाकों में standalone सोलर पंप।
  • कंपोनेंट-C: ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों और कृषि feeders को सौर ऊर्जा से चलाना।
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राजस्थान के प्रमुख ऊर्जा केंद्र: एक table में

ऊर्जा केंद्र स्रोत जिला क्षमता और मुख्य तथ्य
सूरतगढ़ सुपर थर्मल कोयला श्रीगंगानगर 2,820 MW, पहला सुपर थर्मल, 2 x 660 MW supercritical
छबड़ा थर्मल कोयला बारां 2,320 MW, 2 x 660 MW supercritical
कोटा थर्मल कोयला कोटा 1,240 MW, चंबल किनारे
कालीसिंध थर्मल कोयला झालावाड़ 1,200 MW (2 x 600 MW)
जालीपा-कपूरड़ी लिग्नाइट बाड़मेर 1,080 MW, निजी क्षेत्र
बरसिंगसर लिग्नाइट बीकानेर 250 MW, NLC India का pit-head
रावतभाटा (RAPS) परमाणु चित्तौड़गढ़ भारत का दूसरा परमाणु बिजली घर, RAPP-7 चालू (2025)
राणा प्रताप सागर जल चित्तौड़गढ़ 172 MW, सबसे बड़ा पनबिजली घर
भड़ला सोलर पार्क सौर फलोदी 2,245 MW
अमर सागर पवन जैसलमेर पहला पवन ऊर्जा project (1999)

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • सौर में पहला: 41,013 MW स्थापित सौर क्षमता (MNRE, 31.03.2026), देश में सबसे ज्यादा।
  • कुल RE: 47,021 MW (31.03.2026), गुजरात के बाद दूसरा स्थान।
  • विकास तीर्थ: सूरतगढ़ सुपर थर्मल को कहते हैं।
  • Supercritical units: सूरतगढ़ (unit 7, 8) और छबड़ा (unit 5, 6), हर एक 660 MW।
  • 100% पनबिजली: माही बजाज सागर की पूरी 140 MW बिजली राजस्थान को।
  • RRECL: अगस्त 2002 में REDA के विलय और RSPCL का नाम बदलकर बना।
  • कुसुम-A: देश का पहला plant भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़) में।
  • माही बांसवाड़ा: 4 x 700 MW, नींव 25 सितंबर 2025, ASHVINI (NPCIL-NTPC)।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान का पहला सुपर थर्मल बिजली घर कौन सा है?
    A) कोटा थर्मल
    B) सूरतगढ़ सुपर थर्मल
    C) छबड़ा थर्मल
    D) कालीसिंध थर्मल
    उत्तर: B) सूरतगढ़ सुपर थर्मल
    कारण: श्रीगंगानगर का सूरतगढ़ प्लांट राज्य का पहला सुपर थर्मल बिजली घर है (अब 2,820 MW)।
  2. जालीपा-कपूरड़ी बिजली घर के बारे में कौन सा कथन सही है?
    A) यह कोयला आधारित सरकारी प्लांट है
    B) यह लिग्नाइट आधारित निजी प्लांट है
    C) यह गैस आधारित NTPC का प्लांट है
    D) यह बीकानेर में स्थित है
    उत्तर: B) यह लिग्नाइट आधारित निजी प्लांट है
    कारण: बाड़मेर का 1,080 MW का यह प्लांट लिग्नाइट पर चलता है और JSW की Raj WestPower का है।
  3. भड़ला सोलर पार्क राजस्थान के किस जिले में है?
    A) जोधपुर
    B) जैसलमेर
    C) फलोदी
    D) बीकानेर
    उत्तर: C) फलोदी
    कारण: 2,245 MW का भड़ला पार्क अब फलोदी जिले की बाप तहसील में है।
  4. चंबल घाटी परियोजना में राजस्थान की बिजली हिस्सेदारी कितनी है?
    A) 25 प्रतिशत
    B) 50 प्रतिशत
    C) 75 प्रतिशत
    D) 100 प्रतिशत
    उत्तर: B) 50 प्रतिशत
    कारण: चंबल परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 साझेदारी है।
  5. माही बजाज सागर परियोजना की बिजली में राजस्थान का हिस्सा कितना है?
    A) 45 प्रतिशत
    B) 50 प्रतिशत
    C) 55 प्रतिशत
    D) 100 प्रतिशत
    उत्तर: D) 100 प्रतिशत
    कारण: पानी 45:55 में बंटता है, लेकिन पूरी 140 MW बिजली राजस्थान को मिलती है।
  6. MNRE के 31 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कौन सा कथन सही है?
    A) राजस्थान कुल अक्षय ऊर्जा और सौर, दोनों में पहले स्थान पर है
    B) राजस्थान सौर में पहले, पर कुल अक्षय ऊर्जा में दूसरे स्थान पर है
    C) राजस्थान पवन ऊर्जा में पहले स्थान पर है
    D) राजस्थान सौर में दूसरे स्थान पर है
    उत्तर: B) राजस्थान सौर में पहले, पर कुल अक्षय ऊर्जा में दूसरे स्थान पर है
    कारण: सौर 41,013 MW (पहला); कुल RE में गुजरात 47,178 MW और राजस्थान 47,021 MW। पवन में तमिलनाडु और गुजरात आगे हैं।
  7. राजस्थान का पहला पवन ऊर्जा project किस स्थान पर लगा?
    A) देवगढ़
    B) अमर सागर
    C) बड़ा बाग
    D) हर्ष पर्वत
    उत्तर: B) अमर सागर
    कारण: पहला पवन ऊर्जा project 1999 में जैसलमेर के अमर सागर में लगा।
  8. राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RRECL) किस वर्ष बना?
    A) 1985
    B) 1995
    C) 2000
    D) 2002
    उत्तर: D) 2002
    कारण: अगस्त 2002 में REDA का विलय हुआ और RSPCL का नाम RRECL रखा गया।
  9. पीएम-कुसुम कंपोनेंट-A का देश का पहला सौर plant कहां लगा?
    A) भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़)
    B) नोख (जैसलमेर)
    C) पूगल (बीकानेर)
    D) मथानिया (जोधपुर)
    उत्तर: A) भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़)
    कारण: देश का पहला 1 MW कुसुम-A plant भालोजी गांव में चालू हुआ।
  10. माही बांसवाड़ा परमाणु परियोजना के बारे में कौन सा कथन गलत है?
    A) इसमें 700 MW के 4 PHWR बनेंगे
    B) इसे NPCIL और NTPC का joint venture ASHVINI बना रहा है
    C) इसकी नींव 25 सितंबर 2025 को रखी गई
    D) यह रूस की VVER तकनीक पर आधारित है
    उत्तर: D) यह रूस की VVER तकनीक पर आधारित है
    कारण: यह स्वदेशी 700 MW PHWR design पर है; VVER रिएक्टर कुडनकुलम (तमिलनाडु) में हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. सूरतगढ़ सुपर थर्मल बिजली घर के बारे में लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: श्रीगंगानगर में राज्य का पहला सुपर थर्मल बिजली घर ('विकास तीर्थ'); 6 x 250 MW और 2 x 660 MW supercritical, कुल 2,820 MW।
  2. माही बजाज सागर परियोजना में बिजली बंटवारे की व्यवस्था क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: पानी राजस्थान और गुजरात में 45:55 में बंटता है, लेकिन 140 MW पनबिजली पूरी राजस्थान को मिलती है।
  3. RRECL के मुख्य काम क्या हैं?
    उत्तर रूपरेखा: सौर, पवन और बायोमास की राज्य नोडल एजेंसी; projects के लिए जमीन और मंजूरी में मदद, सोलर पार्क, ऊर्जा संरक्षण और केंद्र की योजनाएं (जैसे PM-KUSUM) लागू करना।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राजस्थान में सौर ऊर्जा विकास की अनुकूल परिस्थितियों और प्रमुख सोलर पार्कों की समीक्षा कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - अनुकूलता: 300 से ज्यादा धूप वाले दिन, ऊंचा सौर विकिरण, बंजर जमीन (NISE आकलन करीब 142 GW)।
    - स्थिति: 41,013 MW स्थापित (31.03.2026), देश में पहला; लक्ष्य 2029-30 तक 90 GW सौर।
    - प्रमुख पार्क: भड़ला (फलोदी, 2,245 MW), नोख (जैसलमेर, 925 MW), फतेहगढ़, पूगल।
    - चुनौतियां: transmission line की कमी, गोडावण (Great Indian Bustard) के इलाकों में overhead line को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, पानी से panel की सफाई।
  2. राजस्थान में बिजली आत्मनिर्भरता के लिए पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों का मेल क्यों जरूरी है?
    उत्तर रूपरेखा:
    - पारंपरिक स्रोत: थर्मल और परमाणु बिजली (RAPP-7, 8 और माही बांसवाड़ा) चौबीसों घंटे बेस-लोड देती है।
    - गैर-पारंपरिक स्रोत: सौर और पवन सस्ती और साफ हैं, पर सिर्फ दिन या मौसम पर निर्भर।
    - समाधान: hybrid plant, battery storage और pumped storage (Clean Energy Policy 2024 में 10 GW का लक्ष्य)।

FAQs

राजस्थान स्थापित सौर क्षमता में देश में किस स्थान पर है?

पहले स्थान पर। MNRE के अनुसार 31 मार्च 2026 को राज्य में 41,013 MW सौर क्षमता थी। कुल अक्षय ऊर्जा में गुजरात थोड़ा आगे है।

राजस्थान का पहला बायोमास बिजली घर कहां लगा था?

श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर में, जो सरसों की तूड़ी पर आधारित था।

राजस्थान का दूसरा परमाणु बिजली घर कहां बन रहा है?

बांसवाड़ा जिले में माही बांध के पास नापला में। यहां 700 MW के 4 स्वदेशी PHWR बनेंगे; नींव 25 सितंबर 2025 को रखी गई।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • सौर क्षमता 41,013 MW (MNRE, 31.03.2026): देश में पहला; कुल RE में दूसरा।
  • सूरतगढ़: 2,820 MW, पहला सुपर थर्मल, 'विकास तीर्थ' (श्रीगंगानगर)।
  • Supercritical 660 MW units: सूरतगढ़ (7, 8) और छबड़ा (5, 6)।
  • जालीपा-कपूरड़ी: 1,080 MW, लिग्नाइट, निजी क्षेत्र (बाड़मेर)।
  • रावतभाटा: भारत का दूसरा परमाणु बिजली घर; RAPP-7 व्यावसायिक 15 अप्रैल 2025।
  • माही बजाज सागर: 140 MW, पूरी बिजली राजस्थान को।
  • भड़ला सोलर पार्क: 2,245 MW (फलोदी)।
  • RRECL: अगस्त 2002, गैर-पारंपरिक ऊर्जा की नोडल एजेंसी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन (rajasthan me urja sansadhan) दो तरह के हैं: पारंपरिक (कोयला और लिग्नाइट के थर्मल प्लांट जैसे सूरतगढ़, छबड़ा, कोटा, कालीसिंध; चंबल और माही की पनबिजली; रावतभाटा का परमाणु बिजली घर) और गैर-पारंपरिक (भड़ला, नोख जैसे सोलर पार्क; जैसलमेर की पवन ऊर्जा; बायोमास)।
राजस्थान का भूगोल के पाठ्यक्रम में Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन, सौर, पवन, तापीय और परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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In this Chapter

Rajasthan me Urja Sansadhan: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन, सौर, पवन, तापीय और परमाणु ऊर्जा
ऊर्जा संसाधन (परम्परागत एवं गैर-परम्परागत)