RAS (आरपीएससी) 5 min read

Rajasthan ke Khanij: राजस्थान के खनिज संसाधन: धात्विक, अधात्विक, लिग्नाइट, जिप्सम और खनिज नीति 2024

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का भूगोल (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Khanij: राजस्थान के खनिज संसाधन: धात्विक, अधात्विक, लिग्नाइट, जिप्सम और खनिज नीति 2024 - प्राकृतिक संसाधन (वन, मिट्टी, खनिज)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Khanij: राजस्थान के खनिज (Rajasthan Ke Khanij) की बात करें तो Indian Bureau of Mines (IBM) के अनुसार राजस्थान खनिजों की उपलब्...
Quick Answer: Rajasthan ke Khanij: राजस्थान के खनिज (Rajasthan Ke Khanij) की बात करें तो Indian Bureau of Mines (IBM) के अनुसार राजस्थान खनिजों की उपलब्धता और विविधता में देश का सबसे धनी राज्य है, इसलिए इसे 'खनिजों का अजायबघर' कहते हैं। सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलैस्टोनाइट का देश में अकेला उत्पादक राजस्थान है, और देश की लगभग पूरी चांदी भी यहीं से आती है। लिग्नाइट (बीकानेर, बाड़मेर, नागौर), जिप्सम (बीकानेर, नागौर) और बाड़मेर बेसिन का कच्चा तेल इसकी बड़ी पहचान हैं। राजस्थान खनिज नीति 2024 का लक्ष्य GSDP में खनन का हिस्सा 3.4% (2023-24) से बढ़ाकर 2029-30 तक 5% और 2046-47 तक 8% करना है।

राजस्थान के खनिज: परिचय और देश में स्थान

राजस्थान की भूगर्भीय बनावट अरावली की बहुत पुरानी चट्टानों और थार मरुस्थल की अवसादी (sedimentary) परतों से बनी है। अरावली क्षेत्र धात्विक खनिजों में धनी है, जबकि पश्चिमी मरुस्थल में जिप्सम, लिग्नाइट, तेल और गैस मिलते हैं। प्राकृतिक संसाधनों का पूरा परिचय आप प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज) में पढ़ सकते हैं।

राजस्थान खनिज नीति 2024 के अनुसार राज्य में 58 खनिजों का खनन हो रहा है (22 प्रधान और 36 अप्रधान खनिज), और नीति का लक्ष्य 2047 तक यह संख्या 70 करना है। जिलों के नाम इस note में 2026 के नक्शे के अनुसार हैं: राजस्थान में 28 दिसंबर 2024 से 41 जिले और 7 संभाग हैं। IBM (Indian Minerals Yearbook 2022, राजस्थान state review) के मुख्य तथ्य:

  • अकेला उत्पादक (sole producer): सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलैस्टोनाइट।
  • लगभग पूरा उत्पादन: देश की लगभग पूरी चांदी राजस्थान से आती है (जस्ता शोधन का सह-उत्पाद)।
  • बड़ा उत्पादक: तांबा अयस्क, चूना पत्थर, गेरू (ochre), रॉक फॉस्फेट और टाल्क/सेलखड़ी। जिप्सम में भी राजस्थान सबसे आगे है।
  • भंडार (resources) में हिस्सा (1.4.2020 तक): पोटाश 94%, सीसा-जस्ता 89%, वोलैस्टोनाइट 88%, चांदी 88%, जिप्सम 82%, फेल्सपार 66%, संगमरमर 63%, एस्बेस्टस 61%, तांबा 54%, रॉक फॉस्फेट 31%, टंगस्टन 27%।
  • इमारती पत्थर: मकराना का सफेद संगमरमर, जालोर का ग्रेनाइट और करौली-धौलपुर का लाल-गुलाबी बलुआ पत्थर (sandstone)।

ध्यान दें: "भंडार में हिस्सा" और "उत्पादन में हिस्सा" अलग बातें हैं। जैसे रॉक फॉस्फेट के भंडार में राजस्थान का हिस्सा 31% है, पर उत्पादन में राज्य बड़ा उत्पादक है।

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राजस्थान के प्रमुख धात्विक खनिज: सीसा-जस्ता, तांबा और लौह अयस्क

धात्विक खनिजों से धातुएं निकलती हैं। ये ज्यादातर अरावली पट्टी (उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, झुंझुनू, अलवर) में मिलते हैं। RAS Pre 2016 में अरावली के धात्विक खनिजों में धनी होने पर कथन वाला सवाल आया था, और RAS Pre 2013 में लौह अयस्क क्षेत्रों की पहचान पूछी गई थी।

1. सीसा-जस्ता और चांदी (Lead-Zinc और Silver)

सीसा और जस्ता मुख्य रूप से गैलेना और स्फेलेराइट अयस्क से मिलते हैं। शोधन में चांदी और कैडमियम सह-उत्पाद निकलते हैं। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) के स्मेल्टर देबारी (उदयपुर), चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) और दरीबा (राजसमंद) में हैं।

  • रामपुरा-आगूचा (भीलवाड़ा): दुनिया की सबसे बड़ी जस्ता खानों में गिनी जाती है।
  • राजपुरा-दरीबा और सिंदेसर खुर्द (राजसमंद): सिंदेसर खुर्द चांदी और जस्ते की बड़ी भूमिगत खान है। बामनिया कलां (राजसमंद) भी सीसा-जस्ता क्षेत्र है।
  • जावर (उदयपुर): मोचिया मगरा, बलारिया, बरोई और जावरमाला खानें। यहाँ बहुत पुराने समय से जस्ता गलाने के प्रमाण मिलते हैं। परंपरा के अनुसार महाराणा लाखा के समय जावर में चांदी की खान मिली थी।
  • चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर): सीसा-जस्ता का पुराना क्षेत्र।

2. तांबा (Copper)

तांबा मुख्य रूप से चाल्कोपाइराइट अयस्क से मिलता है। IBM के अनुसार देश के कुल तांबा भंडार (resources) का 54% राजस्थान में है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) का खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स झुंझुनू जिले में है।

  • खेतड़ी-सिंघाना पट्टी (झुंझुनू): खेतड़ी, कोलिहान और चांदमारी मुख्य तांबा खानें हैं।
  • खो-दरीबा और भगोनी (अलवर): अलवर की प्रमुख तांबा खानें।
  • भीलवाड़ा, उदयपुर, सीकर, अजमेर आदि जिलों में भी तांबे के निक्षेप मिले हैं।

3. लौह अयस्क (Iron Ore)

राजस्थान में हेमेटाइट और मैग्नेटाइट लोहा मिलता है। IBM के अनुसार हेमेटाइट जयपुर, दौसा, झुंझुनू, सीकर, अलवर और उदयपुर में, और मैग्नेटाइट भीलवाड़ा, झुंझुनू और सीकर में है। RAS Pre 2013 में मोरीजा, डाबला, नीमला और तलवाड़ा में से "लौह क्षेत्र नहीं" वाला नाम पूछा गया था।

  • मोरीजा-बानोल (जयपुर): हेमेटाइट का प्रमुख क्षेत्र।
  • नीमला-रायसेला (दौसा): हेमेटाइट क्षेत्र।
  • डाबला-सिंघाना (झुंझुनू): शेखावाटी का लौह क्षेत्र।
  • नाथरा की पाल और थूर-हुंडेर (उदयपुर): लौह अयस्क के भंडार।
  • तलवाड़ा (बांसवाड़ा): यह मैंगनीज के लिए जाना जाता है, लोहे के लिए नहीं।

4. अन्य धात्विक खनिज: टंगस्टन, मैंगनीज और सोना

  • टंगस्टन: वुल्फ्रेमाइट अयस्क से मिलता है। IBM के अनुसार नागौर और सिरोही जिलों में है। नागौर जिले के डेगाना की रेवत पहाड़ी देश की प्रसिद्ध टंगस्टन खान रही है। सिरोही का बाल्दा भी टंगस्टन क्षेत्र है।
  • मैंगनीज: पाइरोलुसाइट अयस्क से। बांसवाड़ा के लीलवानी, तलवाड़ा और कालाखूंटा प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • सोना: बांसवाड़ा का आनंदपुर-भूकिया और जगपुरा क्षेत्र सबसे प्रसिद्ध है। IBM के अनुसार दौसा, भीलवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में भी सोने के निक्षेप हैं।

Table 1: राजस्थान के प्रमुख धात्विक खनिज, अयस्क और जिले

खनिज प्रमुख अयस्क प्रमुख जिले प्रसिद्ध खनन क्षेत्र और तथ्य
सीसा-जस्ता गैलेना, स्फेलेराइट भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर रामपुरा-आगूचा, राजपुरा-दरीबा, जावर; राजस्थान अकेला उत्पादक
चांदी जस्ता शोधन का सह-उत्पाद राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा सिंदेसर खुर्द, जावर; देश की लगभग पूरी चांदी
तांबा चाल्कोपाइराइट झुंझुनू, अलवर खेतड़ी, कोलिहान, चांदमारी (झुंझुनू), खो-दरीबा (अलवर); भंडार 54%
लौह अयस्क हेमेटाइट, मैग्नेटाइट जयपुर, दौसा, झुंझुनू, उदयपुर मोरीजा-बानोल (जयपुर), नीमला-रायसेला (दौसा), डाबला (झुंझुनू)
टंगस्टन वुल्फ्रेमाइट नागौर, सिरोही रेवत पहाड़ी (डेगाना), बाल्दा
मैंगनीज पाइरोलुसाइट बांसवाड़ा लीलवानी, तलवाड़ा, कालाखूंटा
सोना स्वर्णयुक्त चट्टानें बांसवाड़ा, दौसा आनंदपुर-भूकिया, जगपुरा (बांसवाड़ा)

राजस्थान के प्रमुख अधात्विक और औद्योगिक खनिज

अधात्विक खनिज सीमेंट, खाद (fertilizer), सिरेमिक और निर्माण उद्योग को कच्चा माल देते हैं।

1. जिप्सम (Gypsum)

जिप्सम को स्थानीय भाषा में 'खड़िया मिट्टी' या 'हरसौंठ' भी कहते हैं। इसका पारदर्शी रूप 'सेलेनाइट' कहलाता है, जिसका अकेला उत्पादक राजस्थान है। देश का ज्यादातर जिप्सम राजस्थान से निकलता है, और IBM के अनुसार देश के जिप्सम भंडार का 82% यहीं है।

उपयोग: क्षारीय (alkaline) जमीन सुधारना, सीमेंट और Plaster of Paris बनाना।

IBM के अनुसार जिप्सम बीकानेर, नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जालोर और पाली में मिलता है। RAS Pre 2013 में गोट-मांगलोद का खनिज पूछा गया था, और RAS Pre 2016 में "जिप्सम - पलाना" को गलत युग्म के रूप में पहचानना था (पलाना लिग्नाइट के लिए है)।

  • नागौर: गोट-मांगलोद, भदवासी।
  • बीकानेर: जामसर (RSMML की बड़ी जिप्सम खान), लूणकरणसर।
  • जैसलमेर और बाड़मेर: मोहनगढ़ (जैसलमेर), कवास और उत्तरलाई (बाड़मेर)।

2. रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate)

फॉस्फेट वाली खाद बनाने में रॉक फॉस्फेट काम आता है। IBM के अनुसार राजस्थान इसका बड़ा उत्पादक है, और यह उदयपुर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, जयपुर और अलवर में मिलता है।

  • झामरकोटड़ा (उदयपुर): RSMML की सबसे प्रमुख रॉक फॉस्फेट खान।
  • बिरमानिया (जैसलमेर): पश्चिमी राजस्थान का रॉक फॉस्फेट क्षेत्र।

3. अन्य औद्योगिक खनिज और इमारती पत्थर

  • एस्बेस्टस: IBM के अनुसार उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और पाली में। ऋषभदेव और खेरवाड़ा (उदयपुर) पुराने केंद्र हैं। RAS Pre 2024 में एस्बेस्टस खानों के स्थान पूछे गए थे; RPSC की final key ने "अर्जुनपुरा और पीपरदा" को सही माना।
  • तामड़ा (गारनेट): इसे 'रक्तमणि' भी कहते हैं। टोंक का राजमहल और कल्याणपुरा, अजमेर का सरवाड़ और जनकपुरा प्रसिद्ध हैं। RAS Pre 2016 में दो सवाल आए थे: जनकपुरा-सरवाड़ का खनिज, और "तामड़ा - राजमहल" युग्म।
  • फेल्सपार: सिरेमिक और कांच उद्योग में काम आता है। अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, टोंक और पाली क्षेत्र में मिलता है।
  • वोलैस्टोनाइट: राजस्थान अकेला उत्पादक है। IBM के अनुसार सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, पाली और अजमेर में मिलता है; सिरोही का बेलका पहाड़ प्रसिद्ध है।
  • संगमरमर (मार्बल): मकराना (डीडवाना-कुचामन जिला) का सफेद, राजनगर (राजसमंद), ऋषभदेव (उदयपुर) का हरा, भैंसलाना (कोटपूतली क्षेत्र) का काला और जैसलमेर का पीला मार्बल। उदयपुर का बाबरमाल गुलाबी मार्बल के लिए जाना जाता है (RAS Pre 2016)।
  • ग्रेनाइट: जालोर को 'ग्रेनाइट सिटी' कहते हैं। सिवाना और मोकलसर (अब बालोतरा जिला) में भी ग्रेनाइट की खानें हैं।

Table 2: राजस्थान के अधात्विक खनिज, पहचान और प्रमुख खानें

खनिज पहचान / खास तथ्य प्रमुख जिले प्रमुख खानें और उपयोग
जिप्सम खड़िया मिट्टी; पारदर्शी रूप सेलेनाइट बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर जामसर, गोट-मांगलोद, भदवासी; जमीन सुधार और सीमेंट
रॉक फॉस्फेट फॉस्फोराइट उदयपुर, जैसलमेर झामरकोटड़ा (RSMML), बिरमानिया; खाद
तामड़ा (गारनेट) रक्तमणि टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा राजमहल (टोंक), सरवाड़ और जनकपुरा (अजमेर); रत्न और अपघर्षक
एस्बेस्टस रेशेदार खनिज उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर ऋषभदेव, खेरवाड़ा; सीमेंट चादर, आग-रोधी सामान
फेल्सपार सिरेमिक का कच्चा माल अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा सिरेमिक और कांच उद्योग
वोलैस्टोनाइट कैल्शियम सिलिकेट; अकेला उत्पादक राजस्थान सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर बेलका पहाड़ (सिरोही); सिरेमिक, पेंट
संगमरमर मकराना का सफेद मार्बल डीडवाना-कुचामन, राजसमंद, उदयपुर मकराना (सफेद), राजनगर, ऋषभदेव (हरा), बाबरमाल (गुलाबी)

ऊर्जा खनिज: लिग्नाइट, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

ऊर्जा के सभी साधनों (सौर, पवन, ताप) के लिए आप ऊर्जा संसाधन (पारंपरिक और गैर-पारंपरिक) पढ़ सकते हैं। यहाँ सिर्फ खनिज ईंधन की बात है।

1. लिग्नाइट कोयला (Lignite)

राजस्थान का कोयला टर्शियरी काल की अवसादी चट्टानों में मिलने वाला भूरा लिग्नाइट है। RAS Pre 2013 में राजस्थान के कोयले की किस्म (लिग्नाइट) पूछी गई थी। IBM के अनुसार लिग्नाइट बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जालोर, नागौर और पाली में मिलता है।

  • बीकानेर: पलाना, बरसिंगसर, गुढ़ा, बीठनोक, केसरदेसर।
  • बाड़मेर: कपूरड़ी, जालिपा और गिरल। कपूरड़ी-जालिपा का लिग्नाइट भादरेस के राज वेस्ट पावर प्लांट (JSW, निजी कंपनी) में जलता है; गिरल में RVUNL का लिग्नाइट thermal plant है।
  • नागौर: मेड़ता रोड, कसनऊ-इग्यार और मातासुख।

PYQ में यह हिस्सा बार-बार आया है: RAS Pre 2013 में केसरदेसर, कपूरड़ी, मातासुख और तनोट का जिलों से मिलान; RAS Pre 2016 में जालिपा-कपूरड़ी plant के लिग्नाइट आधारित और निजी होने पर कथन; RAS Pre 2024 में लिग्नाइट के सबसे जरूरी संसाधन (कपूरड़ी, मेड़ता, कसनऊ)।

2. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में तेल-गैस वाले 4 बेसिन माने जाते हैं:

  1. बाड़मेर-सांचौर बेसिन: सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र। मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या प्रमुख तेल क्षेत्र हैं, और रागेश्वरी गैस क्षेत्र है। 29 अगस्त 2009 को मंगला से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ (तब Cairn India, अब Vedanta)।
  2. जैसलमेर बेसिन: प्राकृतिक गैस का मुख्य क्षेत्र। तनोट, डांडेवाला, साधेवाला और घोटारू प्रमुख गैस क्षेत्र हैं।
  3. बीकानेर-नागौर बेसिन: भारी कच्चे तेल (heavy oil) के भंडार।
  4. विंध्यन बेसिन: कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा की ओर फैला क्षेत्र।
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3. पचपदरा रिफाइनरी (HPCL Rajasthan Refinery Ltd - HRRL)

पचपदरा (अब बालोतरा जिला) में 9 MMTPA क्षमता की refinery-cum-petrochemical complex बनी है। इसमें HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। अप्रैल 2026 में crude unit में आग लगने से शुरुआत टली; HRRL ने 22 जून 2026 को commercial operation की तारीख घोषित की। Petrochemical units 2026 के आखिर तक चालू होने की योजना है।

संस्थाएं और राजस्थान खनिज नीति 2024

  • खान और भूविज्ञान विभाग (DMG): मुख्यालय उदयपुर। खनिज सर्वे, खोज, पट्टे और नीलामी का काम देखता है।
  • राजस्थान स्टेट माइन्स एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML): मुख्यालय उदयपुर। कंपनी की शुरुआत बीकानेर की जिप्सम कंपनी के रूप में हुई थी; 1974 में राज्य सरकार ने इसे लेकर RSMML नाम दिया। यह झामरकोटड़ा में रॉक फॉस्फेट, बीकानेर-नागौर में जिप्सम और लिग्नाइट का खनन करती है।

राजस्थान खनिज नीति 2024 के मुख्य लक्ष्य

RAS Pre 2024 में खनिज नीति 2024 के लक्ष्यों पर तीन कथन पूछे गए थे, और RPSC key के अनुसार तीनों सही थे। नीति के मुख्य बिंदु:

  • GSDP में हिस्सा: खनन का योगदान 2023-24 के 3.4% से बढ़ाकर 2029-30 तक 5% और 2046-47 तक 8%।
  • रोजगार: 2029-30 तक 50 लाख और 2046-47 तक 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार।
  • खनिजों की संख्या: खनन वाले खनिज 58 से बढ़ाकर 2047 तक 70।
  • अवैध खनन पर रोक: ड्रोन से खनन क्षेत्रों की निगरानी और असली खनन का रिकॉर्ड से मिलान।
  • तेज शुरुआत: नीलामी से पहले ही clearance लेकर block देना, ताकि जीतने वाला जल्दी खनन शुरू कर सके।
  • रणनीतिक खनिज: कीमती, रणनीतिक और critical खनिजों (जैसे पोटाश, दुर्लभ मृदा तत्व) की खोज और नीलामी पर जोर।

एम-सैंड नीति 2024

M-Sand (manufactured sand) नीति 2024 का मकसद नदी की बजरी की जगह पत्थर से बनी रेत को बढ़ावा देना है, ताकि नदियों में बजरी खनन का दबाव कम हो। RAS Pre 2024 में पूछा गया था कि यह नीति कब तक लागू रहेगी: 31 मार्च 2029 तक या नई नीति आने तक।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • IBM: राजस्थान खनिजों की उपलब्धता और विविधता में देश का सबसे धनी राज्य ('खनिजों का अजायबघर')।
  • अकेला उत्पादक: सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट, वोलैस्टोनाइट; देश की लगभग पूरी चांदी भी राजस्थान से।
  • भंडार में हिस्सा (IBM, 1.4.2020): पोटाश 94%, सीसा-जस्ता 89%, जिप्सम 82%, तांबा 54%।
  • रामपुरा-आगूचा (भीलवाड़ा), राजपुरा-दरीबा और सिंदेसर खुर्द (राजसमंद), जावर (उदयपुर): सीसा-जस्ता-चांदी।
  • तांबा: खेतड़ी, कोलिहान (झुंझुनू), खो-दरीबा (अलवर)।
  • लौह अयस्क: मोरीजा (जयपुर), नीमला (दौसा), डाबला (झुंझुनू); तलवाड़ा (बांसवाड़ा) मैंगनीज है।
  • टंगस्टन: डेगाना की रेवत पहाड़ी (नागौर), बाल्दा (सिरोही)।
  • जिप्सम: गोट-मांगलोद, भदवासी (नागौर), जामसर (बीकानेर)।
  • तामड़ा: राजमहल (टोंक), सरवाड़ और जनकपुरा (अजमेर)।
  • मकराना अब डीडवाना-कुचामन जिले में; सिवाना-मोकलसर और पचपदरा अब बालोतरा जिले में।
  • लिग्नाइट: पलाना, बरसिंगसर (बीकानेर), कपूरड़ी, जालिपा, गिरल (बाड़मेर), मेड़ता रोड, कसनऊ, मातासुख (नागौर)।
  • मंगला (बाड़मेर) से व्यावसायिक तेल उत्पादन: 29 अगस्त 2009।
  • HRRL पचपदरा: 9 MMTPA, HPCL 74 : राज्य 26; commercial operation 22 जून 2026 से।
  • खनिज नीति 2024: GSDP हिस्सा 3.4% → 5% (2029-30) → 8% (2046-47); खनिज 58 → 70।
  • एम-सैंड नीति 2024: 31 मार्च 2029 तक या नई नीति आने तक लागू।

RAS Prelims MCQ

  1. IBM के अनुसार राजस्थान इनमें से किस खनिज का देश में अकेला उत्पादक है?
    A) रॉक फॉस्फेट B) वोलैस्टोनाइट C) लौह अयस्क D) तांबा

    सही उत्तर: B) वोलैस्टोनाइट

    कारण: IBM के अनुसार सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलैस्टोनाइट का अकेला उत्पादक राजस्थान है; बाकी तीन दूसरे राज्यों में भी निकलते हैं।

  2. रामपुरा-आगूचा सीसा-जस्ता खान किस जिले में है?
    A) राजसमंद B) उदयपुर C) भीलवाड़ा D) सवाई माधोपुर

    सही उत्तर: C) भीलवाड़ा

    कारण: रामपुरा-आगूचा भीलवाड़ा जिले में है; राजपुरा-दरीबा राजसमंद में और जावर उदयपुर में है।

  3. इनमें से कौन सा लौह अयस्क क्षेत्र नहीं है?
    A) मोरीजा B) डाबला C) नीमला D) तलवाड़ा

    सही उत्तर: D) तलवाड़ा

    कारण: तलवाड़ा (बांसवाड़ा) मैंगनीज के लिए जाना जाता है; मोरीजा, डाबला और नीमला लौह क्षेत्र हैं।

  4. गोट-मांगलोद क्षेत्र किस खनिज से जुड़ा है?
    A) रॉक फॉस्फेट B) टंगस्टन C) मैंगनीज D) जिप्सम

    सही उत्तर: D) जिप्सम

    कारण: गोट-मांगलोद नागौर का जिप्सम क्षेत्र है।

  5. सरवाड़ और राजमहल की खानें किस खनिज के लिए जानी जाती हैं?
    A) पन्ना B) तामड़ा (गारनेट) C) पाइराइट D) बेराइट्स

    सही उत्तर: B) तामड़ा (गारनेट)

    कारण: सरवाड़ (अजमेर) और राजमहल (टोंक) तामड़ा के प्रसिद्ध क्षेत्र हैं।

  6. उदयपुर का झामरकोटड़ा किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
    A) रॉक फॉस्फेट B) तांबा C) टंगस्टन D) फेल्सपार

    सही उत्तर: A) रॉक फॉस्फेट

    कारण: झामरकोटड़ा RSMML की प्रमुख रॉक फॉस्फेट खान है।

  7. डेगाना की रेवत पहाड़ी किस खनिज के लिए जानी जाती है?
    A) मैंगनीज B) टंगस्टन C) फ्लोराइट D) यूरेनियम

    सही उत्तर: B) टंगस्टन

    कारण: रेवत पहाड़ी (डेगाना, नागौर) में वुल्फ्रेमाइट से टंगस्टन निकलता है।

  8. इनमें से कौन सा समूह पूरी तरह लिग्नाइट क्षेत्रों का है?
    A) पलाना, आगूचा, मेड़ता B) पलाना, कसनऊ, जगपुरा C) कपूरड़ी, मेड़ता, कसनऊ D) कपूरड़ी, पलाना, जगपुरा

    सही उत्तर: C) कपूरड़ी, मेड़ता, कसनऊ

    कारण: आगूचा सीसा-जस्ता का और जगपुरा सोने का क्षेत्र है; कपूरड़ी (बाड़मेर), मेड़ता और कसनऊ (नागौर) तीनों लिग्नाइट के हैं।

  9. पचपदरा रिफाइनरी (HRRL) में HPCL और राजस्थान सरकार की हिस्सेदारी कितनी है?
    A) 50:50 B) 70:30 C) 74:26 D) 80:20

    सही उत्तर: C) 74:26

    कारण: HRRL में HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है।

  10. राजस्थान खनिज नीति 2024 के अनुसार 2046-47 तक GSDP में खनिज क्षेत्र का हिस्सा कितना करने का लक्ष्य है?
    A) 5% B) 6% C) 8% D) 10%

    सही उत्तर: C) 8%

    कारण: नीति का लक्ष्य 3.4% (2023-24) से 2029-30 तक 5% और 2046-47 तक 8% है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. राजस्थान को 'खनिजों का अजायबघर' क्यों कहा जाता है?
    उत्तर रूपरेखा: IBM के अनुसार खनिजों की उपलब्धता और विविधता में सबसे धनी राज्य; सीसा-जस्ता, सेलेनाइट, वोलैस्टोनाइट का अकेला उत्पादक; लगभग पूरी चांदी; खनिज नीति 2024 के अनुसार 58 खनिजों का खनन।
  2. जिप्सम का खेती और उद्योग में क्या महत्व है? दो उत्पादक क्षेत्र लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: खेती में क्षारीय जमीन सुधारने में; उद्योग में सीमेंट और Plaster of Paris में। क्षेत्र: जामसर (बीकानेर), गोट-मांगलोद (नागौर)।
  3. राजस्थान के चार प्रमुख लिग्नाइट क्षेत्र लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: पलाना और बरसिंगसर (बीकानेर), कपूरड़ी-जालिपा (बाड़मेर), मेड़ता रोड-कसनऊ (नागौर)।
  4. राजस्थान के चार तेल-गैस बेसिन कौन से हैं?
    उत्तर रूपरेखा: बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर और विंध्यन बेसिन।
  5. एम-सैंड नीति 2024 का मकसद क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: नदी की बजरी का विकल्प देना, नदियों को बचाना, खानों के पत्थर से निर्माण के लिए रेत बनाना; 31 मार्च 2029 तक लागू।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राजस्थान के प्रमुख धात्विक खनिजों के वितरण और महत्व की चर्चा कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: अरावली पट्टी में केंद्रित। सीसा-जस्ता-चांदी: रामपुरा-आगूचा, राजपुरा-दरीबा, सिंदेसर खुर्द, जावर (HZL)। तांबा: खेतड़ी-कोलिहान, खो-दरीबा (HCL; भंडार 54%)। लोहा: मोरीजा, नीमला, डाबला। टंगस्टन: डेगाना, बाल्दा। मैंगनीज और सोना: बांसवाड़ा। महत्व: धातु उद्योग, रोजगार, राजस्व।
  2. राजस्थान खनिज नीति 2024 के लक्ष्यों का विश्लेषण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: GSDP हिस्सा 3.4% से 5% (2029-30) और 8% (2046-47); 50 लाख और 1 करोड़ रोजगार; खनिज 58 से 70; ड्रोन से निगरानी; नीलामी से पहले clearance; critical खनिजों की खोज; एम-सैंड नीति से नदी संरक्षण। चुनौतियां: पर्यावरण, अवैध खनन, खनन क्षेत्रों में सिलिकोसिस।

FAQs

राजस्थान किन खनिजों का देश में अकेला उत्पादक है?

IBM (Indian Minerals Yearbook 2022) के अनुसार राजस्थान सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलैस्टोनाइट का अकेला उत्पादक है। देश की लगभग पूरी चांदी भी यहीं से आती है।

गोट-मांगलोद और जामसर किस खनिज के लिए प्रसिद्ध हैं?

दोनों जिप्सम के लिए प्रसिद्ध हैं। गोट-मांगलोद नागौर जिले में और जामसर बीकानेर जिले में है।

पचपदरा रिफाइनरी किस जिले में है?

पचपदरा अब बालोतरा जिले में है (पहले बाड़मेर)। यह HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) की 9 MMTPA की refinery है, जिसने 22 जून 2026 से commercial operation शुरू किया।

मकराना मार्बल अब किस जिले में आता है?

मकराना 2023 में बने डीडवाना-कुचामन जिले में है, और दिसंबर 2024 में यह जिला बना रहा। पुरानी किताबों में इसे नागौर जिले में लिखा मिलता है।

RSMML का मुख्यालय कहाँ है और यह क्या करता है?

RSMML का मुख्यालय उदयपुर में है। यह झामरकोटड़ा में रॉक फॉस्फेट, और बीकानेर-नागौर क्षेत्र में जिप्सम और लिग्नाइट का खनन करता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • अकेला उत्पादक: सीसा-जस्ता, सेलेनाइट, वोलैस्टोनाइट (IBM)।
  • तलवाड़ा मैंगनीज है, लोहा नहीं; पलाना लिग्नाइट है, जिप्सम नहीं।
  • तामड़ा: राजमहल (टोंक), सरवाड़-जनकपुरा (अजमेर)।
  • लिग्नाइट: कपूरड़ी, जालिपा (बाड़मेर), मेड़ता, कसनऊ, मातासुख (नागौर), पलाना (बीकानेर)।
  • मंगला तेल उत्पादन 29 अगस्त 2009; HRRL पचपदरा (बालोतरा) 74:26, 9 MMTPA।
  • खनिज नीति 2024: 5% (2029-30), 8% (2046-47); 58 से 70 खनिज; 1 करोड़ रोजगार।
  • एम-सैंड नीति 2024: 31 मार्च 2029 तक।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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Rajasthan ke Khanij: राजस्थान के खनिज संसाधन: धात्विक, अधात्विक, लिग्नाइट, जिप्सम और खनिज नीति 2024
प्राकृतिक संसाधन (वन, मृदा, खनिज)