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लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन - PUBLIC POLICY
  • • अवलोकन: Quick Answer: लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रिया‌न्वयन और मूल्यांकन सरकार के वे नीतिगत फैसले और कार्ययोजनाएं हैं जिनसे जनसमस्याओं का...
Quick Answer: लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रिया‌न्वयन और मूल्यांकन सरकार के वे नीतिगत फैसले और कार्ययोजनाएं हैं जिनसे जनसमस्याओं का समाधान होता है। थॉमस डाई के अनुसार सरकार जो कुछ करने या न करने का फैसला लेती है, वही लोक नीति है। इसके निर्माण में समस्या पहचान से लेकर नीति को धरातल पर लागू करना और उसका मूल्यांकन शामिल है। राजस्थान ने नीति को जन-जवाबदेह बनाने के लिए 14 नवंबर 2011 को 'राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011' (Rajasthan Guaranteed Delivery of Public Services Act) लागू किया और 13 सितंबर 2019 को RTI धारा 4(2) के तहत पारदर्शी 'जन सूचना पोर्टल' शुरू किया।

लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रिया‌न्वयन और मूल्यांकन

लोक नीति (Public Policy) सरकार का वह बुनियादी दर्शन है जिससे राज्य नागरिकों के विकास के लक्ष्य हासिल करता है। जब जनता किसी समस्या या अभाव का सामना करती है, तब सरकार कानून, बजट और योजनाओं से समाधान सामने लाती है। जन अधिकारों की रक्षा की ऐतिहासिक चेतना को आप Public Awakening & Freedom Struggle in Rajasthan में समझ सकते हैं, जहाँ से जवाबदेह शासन की मजबूत नींव तैयार हुई।

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प्रमुख विचारकों के दृष्टिकोण

  • थॉमस डाई (Thomas Dye): "सरकार जो कुछ भी करने या न करने का चयन करती है, वही लोक नीति है।" (Whatever governments choose to do or not to do). सरकार का कोई काम न करना भी नीतिगत फैसला है।
  • डेविड ईस्टन (David Easton): "लोक नीति समाज के लिए मूल्यों का आधिकारिक वितरण (authoritative allocation of values) है।" राज्य के पास प्राथमिकताओं को तय करने की शक्ति होती है।
  • हेरोल्ड लासवेल (Harold Lasswell): इनके अनुसार नीति का सार है: "किसे क्या मिलता है, कब मिलता है और कैसे मिलता है" (Who gets what, when, and how).

लोक नीति के मुख्य तत्व

लोक नीति के तीन मूल तत्व हैं: जनहित, संवैधानिक मूल्य और स्पष्ट लक्ष्य। उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए बना कानून आप Consumer Protection Act (COPRA) में देख सकते हैं, जो लोक नीति का विनियामक रूप है।

लोक नीति के प्रकार: थियोडोर लोवी का वर्गीकरण

अमेरिकी राजनीति विज्ञानी थियोडोर लोवी (Theodore Lowi) ने 1964 में लोक नीतियों को तीन वर्गों (वितरणात्मक, विनियामक, पुनर्वितरणात्मक) में बांटा और 1972 में चौथा वर्ग संघटक (Constituent) जोड़ा:

  • 1. वितरणात्मक नीतियां (Distributive): किसी खास वर्ग को लाभ देने वाली नीतियां, जैसे छात्राओं को स्कूटी, खाद अनुदान, छात्रवृत्ति और पेंशन।
  • 2. पुनर्वितरणात्मक नीतियां (Redistributive): असमानता घटाने के लिए संपन्न वर्ग से संसाधन लेकर वंचितों को देना, जैसे भूमि सुधार कानून, प्रगतिशील कर और मनरेगा।
  • 3. विनियामक नीतियां (Regulatory): व्यापार और जन आचरण नियंत्रित करने वाले नियम, जैसे खाद्य मानक कानून, पर्यावरण नियम, सेबी और RERA नियम।
  • 4. संघटक नीतियां (Constituent): शासन के आंतरिक प्रबंध और संस्थाओं का गठन, जैसे राज्य निर्वाचन आयोग और नए जिलों की स्थापना।

Table 1: लोक नीति के प्रकार और उनके व्यावहारिक उदाहरण

नीति का प्रकार मूल उद्देश्य सरकारी हस्तक्षेप की प्रकृति राजस्थान और भारत में उदाहरण
वितरणात्मक विशिष्ट वर्गों को लाभ पहुंचाना बजट से सीधे अनुदान व सेवाएं देना पालनहार योजना, किसान सम्मान निधि, छात्रवृत्ति
पुनर्वितरणात्मक सामाजिक असमानता घटाना संसाधनों का पुनर्संतुलन और पुनर्बंटवारा भूमि सुधार कानून, प्रगतिशील कर, मनरेगा
विनियामक व्यापार व जन आचरण नियंत्रण कानूनी बंदिशें, मानक तय करना व दंड पर्यावरण नियम, सेबी नियम, RERA नियम
संघटक प्रशासनिक संरचना बनाना शासन के आंतरिक नियम व नए विभाग प्रशासनिक सुधार आयोग, नए जिलों का गठन

लोक नीति चक्र: निर्माण से लेकर मूल्यांकन तक के चरण

लोक नीति एक सुव्यवस्थित चक्र के रूप में काम करती है। इसमें नीचे दिए गए पांच प्रमुख चरण शामिल हैं:

  • 1. समस्या पहचान और एजेंडा निर्धारण: नागरिक संगठन और जनप्रतिनिधि जनसमस्याओं को शासन की प्राथमिकताओं में लाते हैं।
  • 2. नीति का प्रारूप (Formulation): विशेषज्ञ लागत, सामाजिक लाभ और कानूनी पहलू परखकर नीति का मसौदा बनाते हैं।
  • 3. नीति स्वीकृति (Adoption): मंत्रिमंडल या विधानसभा से औपचारिक मंजूरी और बजट स्वीकृति मिलती है।
  • 4. नीति को लागू करना (Implementation): प्रशासनिक मशीनरी और जिला प्रशासन के जरिए नियम, बजट और कर्मियों से लाभ जनता तक पहुंचाया जाता है।
  • 5. नीति मूल्यांकन (Evaluation): स्वतंत्र संस्थाओं, सीएजी (CAG) और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) से समीक्षा कर सुधार किए जाते हैं।

नागरिक अधिकार पत्र (Citizen's Charter): अवधारणा और विकास

नागरिक अधिकार पत्र (Citizen's Charter) सरकारी विभागों और नागरिकों के बीच का लिखित दस्तावेज है। इसमें विभाग यह घोषणा करता है कि वह नागरिकों को कौन सी सेवाएं, किस गुणवत्ता के साथ और कितने समय में उपलब्ध कराएगा।

वैश्विक शुरुआत और 6 मूल सिद्धांत

इसकी शुरुआत ब्रिटेन (UK) में जुलाई 1991 में प्रधानमंत्री जॉन मेजर (John Major) की सरकार ने की थी। भारत में मई 1997 में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इसे अपनाया गया। केंद्र में DARPG नोडल विभाग है। इसके 6 सिद्धांत हैं: 1. गुणवत्ता (Quality), 2. विकल्प (Choice), 3. मानक (Standards), 4. मूल्य (Value for money), 5. जवाबदेही (Accountability) और 6. पारदर्शिता (Transparency)।

नागरिक अधिकार पत्र की सीमाएं

प्रारंभ में यह अधिकार पत्र अदालत में वाद योग्य (Justiciable) नहीं था। सेवा में देरी पर अधिकारी पर दंड या नागरिक को मुआवजे की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए राज्यों ने सेवा गारंटी कानून बनाए।

राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011: समयबद्ध सेवा का अधिकार

मध्य प्रदेश (2010) के बाद राजस्थान उन शुरुआती राज्यों में रहा जिन्होंने नागरिकों को समयबद्ध लोक सेवा की कानूनी गारंटी दी और लापरवाही बरतने वाले लोक सेवकों पर आर्थिक जुर्माने का नियम बनाया। यह कानून 14 नवंबर 2011 को लागू हुआ।

अधिनियम के मुख्य प्रावधान

  • अधिसूचित सेवाएं: प्रारंभ में 15 विभागों की 108 सेवाएं अधिसूचित हुईं, बाद में इनकी संख्या बढ़ाई गई। इसमें जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और बिजली-पानी कनेक्शन शामिल हैं।
  • पदाभिहित अधिकारी: हर सेवा के लिए जिम्मेदार अधिकारी तय है, जिसे तय समय में सेवा देनी होती है। आवेदन पर पावती रसीद मिलती है।
  • जुर्माना (Penalty): बिना उचित कारण सेवा न देने पर द्वितीय अपील अधिकारी दोषी अधिकारी पर ₹500 से ₹5,000 तक का जुर्माना, या देरी पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000) जुर्माना लगा सकता है।
  • अपील व्यवस्था: सेवा न मिलने पर 30 दिन में प्रथम अपीलीय अधिकारी को, और फैसले के 60 दिन में द्वितीय अपीलीय अधिकारी को अपील हो सकती है।

राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 और जन सूचना पोर्टल

नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए राजस्थान ने दो और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012

यह कानून 1 अगस्त 2012 से लागू हुआ। नागरिकों को सुनवाई का कानूनी हक देने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है:

  • लोक सुनवाई अधिकारी: ग्राम पंचायत, तहसील, उपखंड और जिला स्तर पर राज्य सरकार के अधिसूचित अधिकारी लोक सुनवाई अधिकारी होते हैं।
  • समयबद्ध निस्तारण: शिकायत पर पावती मिलती है। 15 दिनों में सुनवाई का अवसर देकर निस्तारण करना अनिवार्य है और फैसला लिखित में बताना होता है। असंतोष पर प्रथम और द्वितीय अपील का प्रावधान है। बिना उचित कारण सुनवाई न करने पर ₹500 से ₹5,000 तक जुर्माना लग सकता है।

जन सूचना पोर्टल 2019: सूचना का अधिकार धारा 4(2)

13 सितंबर 2019 को राजस्थान सरकार ने ऐतिहासिक 'जन सूचना पोर्टल' (jansoochna.rajasthan.gov.in) शुरू किया:

  • वैधानिक आधार: यह पोर्टल RTI Act 2005 की धारा 4(2) के तहत बना है, जो स्वतः संज्ञान लेकर जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देती है। इस विषय की संस्थागत व्यवस्था आप State Information Commission में देख सकते हैं।
  • मूल विचार: "बिना मांगे सूचना पाना नागरिक का हक है।" बिना कोई RTI आवेदन लगाए कोई भी नागरिक राशन, नरेगा, पेंशन, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य बीमा की जानकारी सीधे ऑनलाइन देख सकता है।
  • पारदर्शिता: DoIT&C के बनाए इस पोर्टल पर कई विभागों की योजनाओं की पंचायत स्तर तक की जानकारी उपलब्ध है। मनरेगा धारा 17 के तहत सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) भी SSAAT सोसायटी से कराया जाता है।

Table 2: राजस्थान में जन-अधिकार और जवाबदेही के प्रमुख कानून

अधिनियम या पोर्टल लागू होने की तारीख नोडल विभाग मुख्य कानूनी प्रावधान और अधिकार
राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 14 नवंबर 2011 प्रशासनिक सुधार विभाग समयबद्ध सेवा गारंटी, दोषी पर ₹500-₹5,000 (या ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5,000) जुर्माना
राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 1 अगस्त 2012 प्रशासनिक सुधार विभाग 15 दिन में शिकायत सुनवाई, पावती रसीद अनिवार्य, त्रिस्तरीय मंच
राजस्थान जन सूचना पोर्टल 13 सितंबर 2019 DoIT&C RTI धारा 4(2) के तहत बिना आवेदन योजनाओं की खुली जानकारी
राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) 181 हेल्पलाइन फरवरी 2018 से DoIT&C व प्रशासनिक सुधार ऑनलाइन शिकायत दर्ज व समाधान का मंच
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • लोक नीति की समझ: थॉमस डाई के अनुसार सरकार जो कुछ करने या न करने का फैसला करती है, वही लोक नीति है।
  • डेविड ईस्टन का सिद्धांत: लोक नीति समाज के लिए मूल्यों का आधिकारिक वितरण (Authoritative Allocation of Values) है।
  • थियोडोर लोवी का वर्गीकरण: लोक नीतियां 4 प्रकार की हैं - वितरणात्मक, पुनर्वितरणात्मक, विनियामक और संघटक।
  • लोक नीति चक्र के चरण: समस्या पहचान, एजेंडा निर्धारण, प्रारूप निर्माण, स्वीकृति, लागू करना और मूल्यांकन।
  • नागरिक अधिकार पत्र का जनक: ब्रिटेन में जुलाई 1991 में प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने शुरू किया।
  • भारत में नागरिक अधिकार पत्र: मई 1997 में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में अपनाया गया, नोडल एजेंसी DARPG है।
  • नागरिक अधिकार पत्र के 6 आधार: गुणवत्ता, विकल्प, मानक, मूल्य, जवाबदेही और पारदर्शिता।
  • राजस्थान लोक सेवा गारंटी कानून: 14 नवंबर 2011 को लागू; ऐसा पहला कानून मध्य प्रदेश ने 2010 में बनाया था।
  • सेवा गारंटी में जुर्माना: पदाभिहित अधिकारी पर ₹500 से ₹5,000 तक, या ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000) जुर्माना।
  • राजस्थान सुनवाई कानून: 1 अगस्त 2012 को लागू, 15 दिन में सुनवाई अनिवार्य।
  • जन सूचना पोर्टल: 13 सितंबर 2019 को जयपुर से शुरू, स्वतः सूचना प्रकटीकरण (pro-active disclosure) का पोर्टल।
  • जन सूचना पोर्टल का आधार: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4(2)।

RAS Prelims MCQ

  1. "लोक नीति वह सब कुछ है जो सरकार करने या न करने का चयन करती है" - यह कथन किसका है?
    A) डेविड ईस्टन
    B) थॉमस डाई
    C) हेरोल्ड लासवेल
    D) वुड्रो विल्सन
    उत्तर: B) थॉमस डाई
    कारण: थॉमस डाई ने यह परिभाषा दी।
  2. थियोडोर लोवी के अनुसार भूमि सुधार और प्रगतिशील कर किस श्रेणी में आते हैं?
    A) वितरणात्मक नीति
    B) विनियामक नीति
    C) पुनर्वितरणात्मक नीति
    D) संघटक नीति
    उत्तर: C) पुनर्वितरणात्मक नीति
    कारण: यह पुनर्वितरणात्मक नीति है।
  3. विश्व में सबसे पहले नागरिक अधिकार पत्र किस देश में शुरू हुआ?
    A) अमेरिका
    B) यूनाइटेड किंगडम (1991)
    C) फ्रांस
    D) भारत
    उत्तर: B) यूनाइटेड किंगडम (1991)
    कारण: जुलाई 1991 में ब्रिटेन के जॉन मेजर ने शुरू किया।
  4. भारत में नागरिक अधिकार पत्र लागू करने का संकल्प कब लिया गया?
    A) मई 1991
    B) मई 1997
    C) अगस्त 2002
    D) अक्टूबर 2005
    उत्तर: B) मई 1997
    कारण: मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इसे अंगीकार किया गया।
  5. राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम किस तारीख से लागू हुआ?
    A) 15 अगस्त 2011
    B) 2 अक्टूबर 2011
    C) 14 नवंबर 2011
    D) 1 जनवरी 2012
    उत्तर: C) 14 नवंबर 2011
    कारण: 14 नवंबर 2011 को यह लागू हुआ।
  6. राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में विलम्ब पर अधिकतम कितना जुर्माना लग सकता है?
    A) ₹1,000
    B) ₹2,500
    C) ₹5,000
    D) ₹10,000
    उत्तर: C) ₹5,000
    कारण: ₹500-₹5,000 का जुर्माना या ₹250 प्रतिदिन, दोनों में अधिकतम सीमा ₹5,000 है।
  7. राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम किस तारीख से प्रभावी हुआ?
    A) 14 नवंबर 2011
    B) 1 अगस्त 2012
    C) 2 अक्टूबर 2012
    D) 13 सितंबर 2019
    उत्तर: B) 1 अगस्त 2012
    कारण: यह कानून 1 अगस्त 2012 से लागू हुआ।
  8. राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 के तहत कितने दिनों में सुनवाई अनिवार्य है?
    A) 7 दिन
    B) 15 दिन
    C) 30 दिन
    D) 45 दिन
    उत्तर: B) 15 दिन
    कारण: 15 दिन में निस्तारण अनिवार्य है।
  9. राजस्थान का जन सूचना पोर्टल किस तारीख को शुरू किया गया?
    A) 1 अगस्त 2012
    B) 14 नवंबर 2015
    C) 13 सितंबर 2019
    D) 26 जनवरी 2020
    उत्तर: C) 13 सितंबर 2019
    कारण: 13 सितंबर 2019 को पोर्टल शुरू हुआ।
  10. राजस्थान जन सूचना पोर्टल RTI Act 2005 की किस धारा पर आधारित है?
    A) धारा 4(1)
    B) धारा 4(2)
    C) धारा 6(1)
    D) धारा 19(3)
    उत्तर: B) धारा 4(2)
    कारण: धारा 4(2) में स्वतः प्रकटीकरण अनिवार्य है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. लोक नीति के संदर्भ में डेविड ईस्टन का विचार स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: डेविड ईस्टन के अनुसार लोक नीति समाज के लिए मूल्यों का आधिकारिक वितरण (Authoritative Allocation of Values) है। राज्य के पास प्राथमिकताओं को तय करने की शक्ति होती है।
  2. नागरिक अधिकार पत्र के किन्हीं चार मूल सिद्धांतों के नाम लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: 1. गुणवत्ता (Quality), 2. मानक (Standards), 3. जवाबदेही (Accountability) और 4. पारदर्शिता (Transparency)।
  3. राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में अपील की समय-सीमा क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: सेवा न मिलने पर 30 दिन में प्रथम अपीलीय अधिकारी को, और फैसले के 60 दिन में द्वितीय अपीलीय अधिकारी को अपील हो सकती है।
  4. जन सूचना पोर्टल 2019 पारंपरिक आरटीआई (RTI) से किस तरह अलग है?
    उत्तर रूपरेखा: पारंपरिक RTI में आवेदन और फीस देकर 30 दिन इंतजार करना पड़ता था, जबकि जन सूचना पोर्टल पर बिना आवेदन लगाए जानकारी तुरंत ऑनलाइन मिलती है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. लोक नीति चक्र के प्रमुख चरणों का विश्लेषण करते हुए नीति लागू करने की चुनौतियां बताइए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - परिचय: लोक नीति का अर्थ व अवधारणा।
    - चरण: समस्या पहचान, एजेंडा, प्रारूप, स्वीकृति, लागू करना, मूल्यांकन।
    - चुनौतियां: प्रशासनिक सुस्ती, वित्तीय कमी, तालमेल का अभाव।
    - समाधान: तकनीक, नागरिक निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण।
  2. नागरिक अधिकार पत्र की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। राजस्थान के सेवा गारंटी और सुनवाई कानून ने इसे कैसे मजबूत बनाया? (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - पृष्ठभूमि: ब्रिटेन 1991, भारत 1997 और 6 मूल सिद्धांत।
    - सीमा: कानूनी बाध्यता न होने से नैतिक घोषणापत्र था।
    - सेवा गारंटी 2011: समय-सीमा तय और ₹500-₹5000 (या ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5000) जुर्माना।
    - सुनवाई कानून 2012: 15 दिन में सुनवाई का हक व पावती।
    - प्रभाव: कानूनी अधिकार में बदलाव से जवाबदेही स्थापित।

FAQs

लोक नीति और साधारण सरकारी कानून में क्या अंतर है?

सरकारी कानून विशिष्ट वैधानिक नियम होता है, जबकि लोक नीति सरकार का व्यापक दृष्टिकोण होती है। नीतिगत लक्ष्यों को पाने के लिए कई कानून, बजट और प्रशासनिक योजनाएं बनाई जाती हैं।

नागरिक अधिकार पत्र अदालत में वाद योग्य क्यों नहीं माना जाता?

यह एक प्रशासनिक घोषणापत्र है जिसमें सेवाएं सुधारने का नैतिक संकल्प होता है। जब तक अलग से सेवा गारंटी कानून न बने, नागरिक उल्लंघन पर अदालत में दावा नहीं कर सकता।

राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत जुर्माना कौन लगा सकता है?

जुर्माना लगाने की शक्ति केवल द्वितीय अपीलीय अधिकारी के पास होती है। प्रथम अपीलीय अधिकारी के समय पर अपील न निपटाने पर भी वह जुर्माना लगा सकता है।

जन सूचना पोर्टल पर कौन-कौन सी जानकारियां देखी जा सकती हैं?

इस पोर्टल पर राशन, मनरेगा भुगतान, सामाजिक पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और छात्रवृत्ति जैसी दर्जनों योजनाओं की पंचायत स्तर की जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: लोक नीति (Public Policy) क्या है?।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में लोक नीति (Public Policy) क्या है? निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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