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Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा, खतरे और IT अधिनियम 2000

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा, खतरे और IT अधिनियम 2000 - सूचना प्रौद्योगिकी, AI, जैव प्रौद्योगिकी और नैनो तकनीक
  • • अवलोकन: Quick Answer: Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा computer System, network, device और data को अनधिकृत पहुंच, नुकसान या साइबर हमलों से बचाने की तकनीक ...
Quick Answer: Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा computer System, network, device और data को अनधिकृत पहुंच, नुकसान या साइबर हमलों से बचाने की तकनीक है। यह CIA ट्राइड (गोपनीयता, सत्यनिष्ठा और उपलब्धता) पर आधारित है। प्रमुख खतरों में मैलवेयर, रैंसमवेयर (जैसे WannaCry), फ़िशिंग, स्पायवेयर और DDoS हमले शामिल हैं। भारत में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए IT अधिनियम 2000 (17 अक्टूबर 2000 लागू) मुख्य कानून है, जिसकी धारा 66F साइबर आतंकवाद पर आजीवन कारावास देती है, जबकि धारा 66A को सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल वाद (24 मार्च 2015) में असंवैधानिक घोषित किया था। निजी data की सुरक्षा के लिए अगस्त 2023 में DPDP अधिनियम बना, जिसके Rules नवंबर 2025 में आए।

1. साइबर सुरक्षा क्या है और CIA ट्राइड का सिद्धांत (Concept of Cyber Security & CIA Triad)

साइबर सुरक्षा (Cyber Security) का आशय computer System, network, server, मोबाइल device और data को दुर्भावनापूर्ण हमलों (Malicious Attacks), अनधिकृत पहुंच और चोरी से बचाने की समग्र व्यवस्था से है। साइबर सुरक्षा का पूरा तंत्र CIA ट्राइड (CIA Triad) के तीन मूलभूत सिद्धांतों पर टिका है:

पिलर मूल अर्थ सुरक्षा खतरा सुरक्षा उपाय
Confidentiality (गोपनीयता) data केवल अधिकृत व्यक्ति या System ही देख और पढ़ सकें। data चोरी, स्नूपिंग, स्पायवेयर, अनधिकृत लीक data एन्क्रिप्शन (AES/RSA), 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA)
Integrity (सत्यनिष्ठा/अखंडता) data का ट्रांसमिशन या भंडारण के दौरान अनधिकृत रूप से बदला या मिटाया न जाना। data में छेड़छाड़, मैन-इन-द-मिडिल हमला क्रिप्टोग्राफिक हैश (SHA-256), डिजिटल सिग्नेचर
Availability (उपलब्धता) अधिकृत users के लिए जब भी जरूरत हो, network और सेवाएं तुरंत उपलब्ध हों। DDoS हमला, रैंसमवेयर, server क्रैश रिडंडेंट server, लोड बैलेंसर, नियमित data बैकअप
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2. प्रमुख साइबर खतरे और हमलों के प्रकार (Major Cyber Threats & Attack Vectors)

साइबर अपराधी वित्तीय लाभ, जासूसी अथवा अव्यवस्था फैलाने के लिए कई प्रकार के तकनीकी हथियारों का उपयोग करते हैं:

  1. मैलवेयर (Malware): 'मैलेशियस software' का संक्षिप्त रूप। इसमें वायरस (जो खुद को एग्जीक्यूशन योग्य files से जोड़ते हैं), वर्म्स (जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के network में खुद की प्रतियां बनाते हैं) और ट्रोजन हॉर्स (हानिरहित दिखने वाले लेकिन भीतर से खतरनाक software) शामिल हैं।
  2. रैंसमवेयर (Ransomware): यह पीड़ित के computer की सभी files को जटिल एन्क्रिप्शन से लॉक कर देता है और files को अनलॉक करने के बदले क्रिप्टो-करेंसी (बिटकॉइन आदि) में फिरौती मांगता है (जैसे WannaCry, LockBit, Petya)।
  3. फ़िशिंग (Phishing): विश्वसनीय बैंक या संस्था का फर्जी ईमेल अथवा वेबसाइट बनाकर पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड विवरण ठगना। SMS के जरिए ठगी को 'Smishing' कहते हैं।
  4. डॉस और डीडीओएस (DoS & DDoS): डिनायल ऑफ सर्विस में हैकर किसी वेबसाइट के server पर बोटनेट (हजारों ज़ॉम्बी computers) के जरिए इतना फर्जी ट्रैफिक भेजते हैं कि server ठप हो जाता है और वास्तविक users के लिए सेवा बंद हो जाती है।
  5. स्पायवेयर (Spyware): जासूसी software जो user की जानकारी के बिना की-स्ट्रोक, कॉल और लोकेशन रिकॉर्ड करता है (जैसे पेगासस)।
  6. मैन-इन-द-मिडिल (MitM): दो पक्षों के बीच हो रहे संचार को बीच में ही इंटरसेप्ट करना और गोपनीय data चुराना।

3. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000)

भारत में ई-कॉमर्स और electronic records को कानूनी मान्यता देने और साइबर अपराधों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के UNCITRAL Model Law (1996) के आधार पर संसद ने IT अधिनियम 2000 बनाया (राष्ट्रपति की मंजूरी 9 जून 2000), जो 17 अक्टूबर 2000 से लागू हुआ। IT (संशोधन) अधिनियम 2008 (27 अक्टूबर 2009 से लागू) से इसमें 66A-66F, 69A, 70A, 70B जैसी कई नई धाराएं जुड़ीं। ध्यान दें: 1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS 2023 आ गया है, पर IT Act की ये धाराएं अपनी जगह लागू हैं; online ठगी में BNS की धोखाधड़ी (cheating) वाली धाराएं भी साथ लगती हैं। प्रमुख धाराएं:

धारा अपराध / विषय वस्तु निर्धारित दंड / प्रावधान
धारा 43 computer System में अनधिकृत प्रवेश, data डाउनलोड या वायरस डालना पीड़ित को मुआवजा देना (civil दायित्व, जेल नहीं)
धारा 65 computer सोर्स कोड के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ करना 3 वर्ष तक का कारावास या 2 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों
धारा 66 computer संबंधी अपराध (धारा 43 के कृत्य बेईमानी से करना) 3 वर्ष तक की जेल या 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों
धारा 66A संचार सेवाओं के जरिए आक्रामक या आपत्तिजनक message भेजना निरस्त (Struck Down): 24 मार्च 2015 को श्रेया सिंघल वाद में सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी (अनुच्छेद 19(1)(a)) के हनन के आधार पर रद्द किया।
धारा 66C पहचान की चोरी (इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या पासवर्ड चुराना) 3 वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माना
धारा 66E निजता का उल्लंघन (सहमति के बिना किसी के निजी अंगों की तस्वीर खींचना/प्रसारित करना) 3 वर्ष तक का कारावास या 2 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों
धारा 66F साइबर आतंकवाद (देश की एकता, अखंडता व सुरक्षा पर डिजिटल हमला) आजीवन कारावास तक का कठोर दंड
धारा 69A भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के हित में वेबसाइट/कंटेंट ब्लॉक करने का सरकारी अधिकार केंद्र सरकार intermediaries को content block करने का आदेश दे सकती है; आधार: संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, सुरक्षा, विदेशों से मैत्री, लोक व्यवस्था। (श्रेया सिंघल केस में यह धारा वैध मानी गई)
धारा 79 मध्यवर्ती संस्थाओं (Intermediaries) को सेफ हार्बर (सुरक्षा कवच) गूगल, एक्स आदि प्लेटफॉर्म users के डाले content के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं, बशर्ते वे IT Rules 2021 की due diligence मानें और आदेश मिलने पर content हटाएं

4. डिजिटल पर्सनल data प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP Act 2023)

के.एस. पुट्टास्वामी वाद (24 अगस्त 2017) में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने निजता को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना। इसके बाद संसद ने अगस्त 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत data संरक्षण अधिनियम 2023 पारित किया (राष्ट्रपति की मंजूरी 11 अगस्त 2023)। इसके DPDP Rules 13-14 नवंबर 2025 को notify हुए; Data Protection Board वाले प्रावधान तुरंत लागू हुए और बाकी जिम्मेदारियां चरणों में मई 2027 तक (18 महीने में) लागू होंगी।

  • data प्रिंसिपल (Data Principal): वह व्यक्ति जिससे संबंधित डिजिटल व्यक्तिगत data है।
  • data फिड्यूशरी (Data Fiduciary): वह कंपनी या संस्था जो data के उपयोग और प्रोसेसिंग का उद्देश्य तय करती है।
  • सहमति का सिद्धांत: आम तौर पर व्यक्ति का data लेने से पहले उसकी साफ और जानकारी वाली सहमति जरूरी है (कुछ 'legitimate uses' और सरकारी कामों में छूट है)।
  • data प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया: उल्लंघन की शिकायतें सुनने और जुर्माना लगाने वाला बोर्ड, जो digital तरीके से काम करेगा।
  • भारी जुर्माना: data की सुरक्षा के उचित उपाय (security safeguards) न करने पर, जिससे data breach हो, 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना (Act की अनुसूची)। इस Act ने IT Act की धारा 43A हटा दी।

Malware के प्रकार detail में Malware in Hindi, ठगी वाले emails के लिए Phishing और बचाव के तरीकों के लिए Network Security पढ़ें।

5. भारत का संस्थागत साइबर सुरक्षा स्वरूप (National Institutional Framework)

साइबर हमलों से बचाव के लिए भारत सरकार ने बहु-स्तरीय सुरक्षा स्वरूप तैयार किया है:

  • CERT-In (इंडियन computer इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम): 2004 से काम कर रही MeitY की संस्था। 2008 संशोधन से जुड़ी धारा 70B के तहत इसे साइबर घटनाओं (incident response) के लिए national agency बनाया गया (notification 27 अक्टूबर 2009)। यह चेतावनी, विश्लेषण और तुरंत कार्रवाई का काम करती है।
  • NCIIPC (राष्ट्रीय क्रिटिकल सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र): IT एक्ट की धारा 70A के तहत जनवरी 2014 में notify हुआ यह केंद्र NTRO (राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन) के अधीन है और देश के critical ढांचों (पावर, बैंकिंग, telecom, परिवहन, सरकार) को साइबर हमलों से बचाता है।
  • I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र): गृह मंत्रालय (MHA) का यह केंद्र जनवरी 2020 में शुरू हुआ। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन नंबर 1930 चलाता है; जल्दी शिकायत करने पर ठगी का पैसा बैंक में ही रोका (hold) जा सकता है।
  • साइबर स्वच्छता केंद्र (Cyber Swachhta Kendra): CERT-In का बॉटनेट सफाई और malware विश्लेषण केंद्र (2017 से), जो नागरिकों को मुफ्त सफाई tools देता है (csk.gov.in)।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (IT Act 2000) भारत में 17 अक्टूबर 2000 से लागू हुआ था।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च 2015 को ऐतिहासिक श्रेया सिंघल वाद में IT एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त किया था।
  • IT एक्ट की धारा 66F साइबर आतंकवाद के गंभीर अपराध के लिए अधिकतम आजीवन कारावास का दंड तय करती है।
  • CERT-In 2004 से MeitY के तहत काम कर रही है; कानूनी आधार धारा 70B (2008 संशोधन)। NCIIPC धारा 70A के तहत (2014, NTRO के अधीन)।
  • DPDP Act 2023 में security safeguards न करने (data breach) पर अधिकतम 250 करोड़ रुपये जुर्माना; DPDP Rules नवंबर 2025 में आए।

RAS Prelims MCQ

  1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act 2000) भारत में आधिकारिक रूप से किस तिथि से प्रभावी हुआ था?
    A) 15 अगस्त 2000
    B) 17 अक्टूबर 2000
    C) 26 जनवरी 2001
    D) 1 मई 2002
    उत्तर: B) 17 अक्टूबर 2000
    कारण: IT अधिनियम 2000 को 9 जून 2000 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह 17 अक्टूबर 2000 से लागू हुआ।
  2. 24 मार्च 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने 'श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ' वाद में IT एक्ट की किस धारा को असंवैधानिक करार दिया था?
    A) धारा 66
    B) धारा 66A
    C) धारा 66F
    D) धारा 69A
    उत्तर: B) धारा 66A
    कारण: धारा 66A को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन मानते हुए रद्द किया गया था।
  3. IT अधिनियम, 2000 की कौन सी धारा 'साइबर आतंकवाद' (Cyber Terrorism) से संबंधित है और आजीवन कारावास का प्रावधान करती है?
    A) धारा 43
    B) धारा 66C
    C) धारा 66E
    D) धारा 66F
    उत्तर: D) धारा 66F
    कारण: धारा 66F देश की एकता, अखंडता या संप्रभुता को खतरे में डालने वाले साइबर कृत्यों को साइबर आतंकवाद मानती है।
  4. साइबर सुरक्षा के 'CIA ट्राइड' में 'A' अक्षर किस मूलभूत सुरक्षा सिद्धांत को दर्शाता है?
    A) Authentication
    B) Authorization
    C) Availability (उपलब्धता)
    D) Accountability
    उत्तर: C) Availability (उपलब्धता)
    कारण: CIA ट्राइड का पूर्ण रूप Confidentiality (गोपनीयता), Integrity (सत्यनिष्ठा) और Availability (उपलब्धता) है।
  5. वह दुर्भावनापूर्ण software जो computer files को एन्क्रिप्ट करके उन्हें खोलने के बदले डिजिटल मुद्रा में फिरौती मांगता है, कहलाता है:
    A) स्पायवेयर
    B) एडवेयर
    C) रैंसमवेयर (Ransomware)
    D) रूटकिट
    उत्तर: C) रैंसमवेयर (Ransomware)
    कारण: रैंसमवेयर data को बंधक बनाकर फिरौती (Ransom) मांगता है, जैसे वानाक्राई और पेट्या।
  6. भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं पर चेतावनी जारी करने और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली राष्ट्रीय नोडल एजेंसी कौन सी है?
    A) NCIIPC
    B) CERT-In
    C) I4C
    D) CBI साइबर सेल
    उत्तर: B) CERT-In
    कारण: CERT-In IT एक्ट की धारा 70B के तहत साइबर घटनाओं के लिए national agency है; NCIIPC (धारा 70A) critical ढांचे के लिए है और I4C (MHA) साइबर अपराध पर पुलिस समन्वय के लिए।
  7. DPDP Act 2023 के तहत data की सुरक्षा के उचित उपाय (security safeguards) न करने पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है?
    A) 50 करोड़ रुपये
    B) 100 करोड़ रुपये
    C) 250 करोड़ रुपये
    D) 500 करोड़ रुपये
    उत्तर: C) 250 करोड़ रुपये
    कारण: DPDP अधिनियम 2023 की अनुसूची में security safeguards की विफलता पर अधिकतम 250 करोड़ रुपये जुर्माना है (बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारी तोड़ने और breach की सूचना न देने पर 200 करोड़ तक)।
  8. गृह मंत्रालय (I4C) की राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन, जिस पर online वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत होती है, कौन सी है?
    A) 1090
    B) 112
    C) 1930
    D) 1800
    उत्तर: C) 1930
    कारण: online वित्तीय ठगी की तुरंत शिकायत के लिए I4C की हेल्पलाइन 1930 है; 112 आपात सेवा का नंबर है और 1090 कुछ राज्यों की महिला हेल्पलाइन है।
  9. IT अधिनियम 2000 की कौन सी धारा सरकार को देश की सुरक्षा के हित में किसी वेबसाइट या internet लिंक को ब्लॉक करने का अधिकार देती है?
    A) धारा 65
    B) धारा 69A
    C) धारा 70
    D) धारा 79
    उत्तर: B) धारा 69A
    कारण: धारा 69A केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के हित में ऑनलाइन सूचना तक जनता की पहुंच ब्लॉक करने की शक्ति देती है।
  10. बड़ी संख्या में ज़ॉम्बी computers (Botnet) का उपयोग करके किसी लक्षित server को ट्रैफिक की बाढ़ से ठप कर देना कहलाता है:
    A) फ़िशिंग हमला
    B) डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) हमला
    C) स्पूफिंग हमला
    D) SQL इंजेक्शन
    उत्तर: B) डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) हमला
    कारण: DDoS हमले में कई स्रोतों से एक साथ अत्यधिक फर्जी ट्रैफिक भेजकर वैध users के लिए सेवा को बाधित कर दिया जाता है।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. साइबर सुरक्षा में CIA ट्राइड के तीन मूलभूत तत्वों का नामोल्लेख कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. Confidentiality (गोपनीयता - अनधिकृत पहुंच से बचाव), 2. Integrity (सत्यनिष्ठा - data में अवैध छेड़छाड़ की रोकथाम), 3. Availability (उपलब्धता - अधिकृत व्यक्ति को समय पर सेवा प्राप्ति)।
  2. श्रेया सिंघल वाद (2015) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुख्य सार क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने IT एक्ट की धारा 66A को अस्पष्ट और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में वर्णित वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का असंवैधानिक हनन मानते हुए रद्द किया।
  3. CERT-In के दो प्रमुख दायित्व लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: देश में साइबर सुरक्षा घटनाओं की पूर्व चेतावनी व अलर्ट जारी करना और वास्तविक हमलों के समय समन्वय व त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपलब्ध कराना।
  4. DPDP अधिनियम 2023 में 'data फिड्यूशरी' किसे कहा गया है? (20 शब्द)
    उत्तर: वह व्यक्ति, कंपनी या सार्वजनिक निकाय जो अकेले अथवा दूसरों के साथ मिलकर व्यक्तिगत data की प्रोसेसिंग के उद्देश्य और माध्यम तय करता है।
  5. रैंसमवेयर हमले से बचाव के दो मुख्य तकनीकी उपाय बताइए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. महत्वपूर्ण data का नियमित ऑफलाइन बैकअप (3-2-1 बैकअप नियम)। 2. operating System और एंटीवायरस को समय पर अपडेट रखना और संदेहास्पद ईमेल लिंक न खोलना।

Long Questions (5–10 marks)

  1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की प्रमुख धाराओं (विशेषकर 66, 66F, 69A और 79) का विवेचन करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच इसके संतुलन का परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: IT अधिनियम 2000 साइबर स्पेस को कानूनी व्यवस्था में बांधता है:
    1. धारा 66: हैकिंग और computer नुकसान पर 3 वर्ष की जेल का प्रावधान कर साइबर अपराधों को दंडनीय बनाती है।
    2. धारा 66F: साइबर आतंकवाद से देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पहुंचाने पर आजीवन कारावास तक की सजा देती है।
    3. धारा 69A: राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशों से मैत्रीपूर्ण संबंध और लोक व्यवस्था के हित में दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों को ब्लॉक करने की शक्ति देती है।
    4. धारा 79 (सेफ हार्बर): सोशल मीडिया मध्यवर्तियों को तब तक उत्तरदायित्व से छूट देती है जब तक वे दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं।
    संतुलन का परीक्षण: धारा 66A जैसी अस्पष्ट धारा से अभिव्यक्ति की आजादी दबाई गई, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में उसे रद्द किया; उसी फैसले में 69A को procedural safeguards के कारण वैध माना। यानी सुरक्षा के लिए कानून जरूरी है, पर वह साफ शब्दों वाला और जांच योग्य होना चाहिए।
  2. डिजिटल पर्सनल data प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP Act 2023) की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए और यह नागरिकों के निजता अधिकार को किस प्रकार सशक्त बनाता है? (100 शब्द)
    उत्तर: DPDP अधिनियम 2023 भारत में व्यक्तिगत data संरक्षण का ऐतिहासिक वैधानिक स्वरूप है:
    1. नागरिकों (data प्रिंसिपल) के अधिकार: data एक्सेस करने, उसमें संशोधन कराने, सहमति वापस लेने और शिकायत निवारण का स्पष्ट अधिकार।
    2. data फिड्यूशरी की जवाबदेही: data जुटाने के पीछे वाजिब उद्देश्य बताना, मजबूत सुरक्षा उपाय करना और उद्देश्य पूरा होते ही data मिटाना अनिवार्य।
    3. बच्चों के data की विशेष सुरक्षा: बच्चों के data की ट्रैकिंग या व्यवहारिक विज्ञापन पर सख्त रोक।
    4. बोर्ड और जुर्माना: Data Protection Board की स्थापना और security safeguards न करने पर 250 करोड़ रुपये तक जुर्माना। (Rules नवंबर 2025 में आए; पूरा पालन मई 2027 तक)
    इस प्रकार यह अधिनियम पुट्टास्वामी फैसले की मूल भावना के अनुरूप नागरिकों को उनके निजी data पर संप्रभु नियंत्रण देता है।

FAQs

प्रश्न: क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे फेसबुक या एक्स) users के पोस्ट के लिए सीधे उत्तरदायी हैं?
उत्तर: IT एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें 'सेफ हार्बर' मिलता है, लेकिन IT Rules 2021 की due diligence माननी होती है। फरवरी 2026 के संशोधन (20 फरवरी 2026 से) के बाद सरकारी या अदालती आदेश पर गैरकानूनी content 3 घंटे में हटाना होगा और AI से बने (synthetic) audio/video पर label लगाना होगा। ऐसा न करने पर सेफ हार्बर छिन सकता है।

प्रश्न: साइबर स्वच्छता केंद्र का उपयोग आम नागरिक कैसे कर सकते हैं?
उत्तर: नागरिक आधिकारिक पोर्टल (csk.gov.in) पर जाकर मुफ्त बॉटनेट रिमूवल टूल और सुरक्षा software डाउनलोड कर सकते हैं।

प्रश्न: फिशिंग (Phishing) और स्पूफिंग (Spoofing) में क्या फर्क है?
उत्तर: फिशिंग का उद्देश्य संवेदनशील जानकारी (पासवर्ड, OTP) चुराना होता है, जबकि स्पूफिंग में हमलावर किसी दूसरे की असली पहचान या IP का मुखौटा पहनकर धोखा देता है।

प्रश्न: क्या IT एक्ट 2000 भारत के बाहर बैठे विदेशी साइबर अपराधियों पर भी लागू होता है?
उत्तर: हां, धारा 75 के अनुसार भारत के बाहर कोई भी व्यक्ति (किसी भी देश का नागरिक) अगर भारत में स्थित computer या network से जुड़ा अपराध करता है, तो उस पर भी यह कानून लागू होता है।

प्रश्न: data फिड्यूशरी से data लीक होने पर नागरिक कहां शिकायत दर्ज करा सकते हैं?
उत्तर: नागरिक पहले संबंधित कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी और असंतुष्ट होने पर 'data प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया' में शिकायत कर सकते हैं।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • IT Act 2000: लागू 17 अक्टूबर 2000; आधार UNCITRAL Model Law; बड़ा संशोधन 2008 (2009 से लागू)।
  • धारा 66 = computer अपराध (3 साल / 5 लाख); 66C = identity theft; 66E = निजता उल्लंघन; 66F = साइबर आतंकवाद (आजीवन कारावास तक)।
  • धारा 66A: श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ, 24 मार्च 2015 को रद्द (अनुच्छेद 19(1)(a))।
  • धारा 69A = content block करने की शक्ति; धारा 79 = intermediaries को सेफ हार्बर।
  • CERT-In = धारा 70B (MeitY); NCIIPC = धारा 70A (NTRO); I4C = MHA, हेल्पलाइन 1930।
  • DPDP Act 2023 (मंजूरी 11 अगस्त 2023), Rules नवंबर 2025; अधिकतम जुर्माना 250 करोड़ रुपये।
  • पुट्टास्वामी केस (2017): निजता अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा computer System, network, device और data को अनधिकृत।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा, खतरे और IT अधिनियम 2000 एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Cyber Security in Hindi: साइबर सुरक्षा, खतरे और IT अधिनियम 2000 के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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