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Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी, क्लोनिंग और जीएम फसलें

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी, क्लोनिंग और जीएम फसलें - सूचना प्रौद्योगिकी, AI, जैव प्रौद्योगिकी और नैनो तकनीक
  • • अवलोकन: Quick Answer: Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) जैविक जीवों और उनकी जैविक पद्धतिओं का मानव कल्याण के लिए औद्योगिक व चिकित्सीय इस्...
Quick Answer: Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) जैविक जीवों और उनकी जैविक पद्धतिओं का मानव कल्याण के लिए औद्योगिक व चिकित्सीय इस्तेमाल है। आनुवंशिक इंजीनियरिंग की रीढ़ पुनर्योगज डीएनए तकनीक (rDNA) है, जिसमें रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज (आणविक कैंची) के जरिए डीएनए को काटा जाता है और लाइगेज से जोड़ा जाता है। कैरी मुलिस ने 1983 में PCR तकनीक खोजी। भारत में 2002 से व्यावसायिक खेती वाली एकमात्र GM फसल बीटी कपास (Bt Cotton) है (2026 तक), जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय ने GM सरसों (DMH-11) विकसित की, जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 1996 में वयस्क कोशिका से पहला क्लोन स्तनधारी, डॉली भेड़, बना और 6 फरवरी 2009 को NDRI करनाल ने विश्व की पहली क्लोन भैंस बछिया 'समरूपा' बनाई।

1. जैव प्रौद्योगिकी की अवधारणा और पुनर्योगज डीएनए तकनीक (Principles of Biotechnology & rDNA)

यूरोपीय जैव प्रौद्योगिकी संघ (EFB) के अनुसार, उत्पादों और सेवाओं के लिए प्राकृतिक विज्ञान और जीवों, कोशिकाओं, उनके अंगों और आणविक घटकों का समायोजन ही जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) कहलाता है। आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी का मुख्य आधार आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) या पुनर्योगज डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology - rDNA) है। इस तकनीक के तहत किसी एक जीव के डीएनए से इच्छित जीन को काटकर किसी दूसरे जीव के डीएनए में जोड़कर नया गुणसूत्र तैयार किया जाता है।

rDNA तकनीक का चरण प्रयुक्त उपकरण / एंजाइम जैविक कार्य
1. डीएनए की कटाई रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज (आणविक कैंची) विशिष्ट पैलिंड्रोमिक डीएनए अनुक्रम (जैसे 5'-GAATTC-3') पर सटीक कट लगाना।
2. जीन प्रवर्धन (Amplification) पीसीआर (PCR) व टैक पॉलिमरेज़ इच्छित जीन की लाखों-करोड़ों प्रतियां कुछ ही घंटों में तैयार करना।
3. डीएनए का जुड़ाव डीएनए लाइगेज (आणविक गोंद) प्लास्मिड वेक्टर और विजातीय डीएनए के सिरों को आपस में फॉस्फोडाइस्टर बंध से जोड़ना।
4. वाहक (Vector) प्लास्मिड (उदा. pBR322) या बैक्टीरियोफेज विजातीय जीन को पोषक कोशिका (जैसे ई. कोलाई) के भीतर सुरक्षित ले जाना।
5. बृहद स्तर पर उत्पादन बायोरिएक्टर (Bioreactor) इष्टतम तापमान, पीएच और ऑक्सीजन में संवर्धित कोशिकाओं से बड़े पैमाने पर एंजाइम/दवा बनाना।
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2. आनुवंशिक इंजीनियरिंग के मुख्य उपकरण और पीसीआर तकनीक (Key Tools & PCR)

rDNA तकनीक को व्यावहारिक बनाने में नीचे दिए गए जैविक औजारों का बड़ा योगदान है। RAS Pre 2013 में rDNA तकनीक के चरणों का सही क्रम और 'लाइगेज = आणविक सीवनकार (stitcher)' वाला जोड़ा पूछा गया था:

  • रेस्ट्रिक्शन एंजाइम (Restriction Endonucleases): इन्हें 'आणविक कैंची' (Molecular Scissors) कहा जाता है। आर्बर, नाथन्स और स्मिथ को इनकी खोज के लिए 1978 का नोबेल पुरस्कार (Medicine) मिला। सबसे पहले अलग किया गया रेस्ट्रिक्शन एंजाइम Hind II था (जीवाणु Haemophilus influenzae से)। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण EcoRI है, जो E. coli (RY13 strain) से मिलता है और GAATTC अनुक्रम पर काटता है।
  • प्लास्मिड (Plasmid): यह जीवाणुओं में मुख्य गुणसूत्र से अलग पाया जाने वाला गोलाकार, दोहरे धागे वाला स्वतः प्रतिकृतिकरण (Self-replicating) करने वाला डीएनए है, जो जीन वाहक का काम करता है।
  • पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR): वर्ष 1983 में अमेरिकी वैज्ञानिक कैरी मुलिस (Kary Mullis) ने पीसीआर तकनीक का आविष्कार किया। इसके जरिए डीएनए के एक छोटे टुकड़े की अरबों प्रतियां बहुत कम समय में तैयार की जा सकती हैं। इसमें Thermus aquaticus नामक गर्म पानी के झरने के जीवाणु से प्राप्त ऊष्मा-सहिष्णु टैक पॉलिमरेज़ (Taq Polymerase) एंजाइम इस्तेमाल होता है। पीसीआर के तीन मुख्य चरण हैं: 1. डिनेचुरेशन (94°C पर डीएनए धागे अलग होना), 2. एनीलिंग (50-60°C पर प्राइमर जुड़ना), और 3. एक्सटेंशन (72°C पर नए धागे का निर्माण)।

3. आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें: बीटी कपास, बीटी बैंगन और DMH-11 (GM Crops in India)

जिन पौधों के जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के जरिए किसी अन्य प्रजाति का लाभकारी जीन डाला जाता है, उन्हें ट्रांसजेनिक फसलें या जीएम फसलें (Genetically Modified Crops) कहते हैं:

जीएम फसल का नाम शामिल जीन और स्रोत मुख्य विशेषता और लाभ भारत में कानूनी स्थिति
बीटी कपास (Bt Cotton) मृदा जीवाणु Bacillus thuringiensis के Cry1Ac (Bollgard I, 2002) और Cry1Ac + Cry2Ab (Bollgard II, 2006) जीन बॉलवर्म कीटों (अमेरिकन बॉलवर्म / Helicoverpa, गुलाबी सुंडी / pink bollworm आदि) से सुरक्षा। ध्यान दें: गुलाबी सुंडी में अब Bt के प्रति प्रतिरोध (resistance) आ चुका है। मार्च 2002 में GEAC की मंजूरी; 2026 तक भारत में व्यावसायिक खेती वाली एकमात्र जीएम फसल।
बीटी बैंगन (Bt Brinjal) Bacillus thuringiensis का Cry1Ac जीन फल और तना छेदक (FSB) कीट से बैंगन की रक्षा करना। GEAC ने 2009 में सिफारिश की, पर पर्यावरण मंत्रालय ने फरवरी 2010 से रोक (Moratorium) लगा दी, जो 2026 तक जारी है।
जीएम सरसों (DMH-11) मृदा जीवाणु के बरनेस (Barnase) और बारस्टार (Barstar) जीन दिल्ली विश्वविद्यालय के सीजीएमसीपी (CGMCP) में विकसित स्वदेशी संकर (Hybrid) सरसों; विकसित करने वालों का दावा है कि यह लगभग 28% ज्यादा उपज देती है। अक्टूबर 2022 में GEAC ने environmental release की मंजूरी दी। जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने बंटा हुआ फैसला (split verdict) दिया और केंद्र से GM फसलों पर राष्ट्रीय नीति बनाने को कहा। मामला बड़ी बेंच के पास लंबित है, व्यावसायिक खेती शुरू नहीं हुई।
गोल्डन राइस (Golden Rice) डैफोडिल और जीवाणु से बीटा-कैरोटीन जीन चावल में प्रो-विटामिन A का निर्माण, जो रतौंधी और कुपोषण से बचाता है। फिलीपींस ने 2021 में इसकी खेती की मंजूरी दी थी, पर अप्रैल 2024 में वहां के Court of Appeals ने इस पर रोक लगा दी। भारत में अनुसंधान स्तर पर। (RAS Pre 2013 में पूछा गया: गोल्डन राइस = कैरोटीन जीन वाली ट्रांसजेनिक किस्म।)

4. जंतु क्लोनिंग और भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां (Animal Cloning: Dolly & Garima)

क्लोनिंग वह पद्धति है जिससे कायिक कोशिका के जरिए किसी जीव की शत-प्रतिशत आनुवंशिक रूप से समरूप (आइडेंटिकल) प्रतिलिपि तैयार की जाती है।

  • डॉली भेड़ (Dolly the Sheep): 5 जुलाई 1996 को स्कॉटलैंड के रोजलिन इंस्टीट्यूट में इयान विल्मुट (Ian Wilmut) और कीथ कैंपबेल ने स्तन ग्रंथि की वयस्क कायिक कोशिका (Somatic Cell) से 'डॉली' बनाई। डॉली वयस्क कायिक कोशिका से क्लोन किया गया पहला स्तनधारी है (भ्रूण कोशिका से भेड़ों का क्लोन इससे पहले बन चुका था)। इसमें सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) तकनीक का इस्तेमाल हुआ। डॉली की मृत्यु 2003 में फेफड़ों की बीमारी से हुई। (RAS Pre 2016 में डॉली के जन्म वर्ष पर प्रश्न आया था; सही वर्ष 1996 है।)
  • भारत में क्लोनिंग की सफलता: राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल (हरियाणा) ने हैंड-गाइडेड क्लोनिंग तकनीक से 6 फरवरी 2009 को विश्व की पहली क्लोन भैंस बछिया 'समरूपा' बनाई, जो कुछ ही दिनों में फेफड़ों के संक्रमण से मर गई। 6 जून 2009 को दूसरी क्लोन बछिया 'गरिमा' जन्मी। 22 अगस्त 2010 को जन्मी 'गरिमा-II' ने 25 जनवरी 2013 को NDRI करनाल में ही बछिया 'महिमा' को जन्म दिया। मार्च 2012 में SKUAST-कश्मीर (श्रीनगर) ने विश्व की पहली क्लोन पश्मीना बकरी 'नूरी' बनाई। मार्च 2023 में NDRI करनाल में भारत की पहली क्लोन गिर गाय 'गंगा' जन्मी (RAS Pre 2024 में पूछा गया)।

5. स्टेम सेल तकनीक और भारत में नियामक स्वरूप GEAC (Stem Cells & Regulatory Body)

स्टेम कोशिकाएं (Stem Cells) अविभेदित जैविक कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर की किसी भी विशिष्ट कोशिका (हृदय, यकृत, तंत्रिका) में रूपांतरित होने और अनवरत विभाजन करने की अनोखी क्षमता होती है। विभेदन क्षमता के आधार पर ये तीन मुख्य श्रेणियों में बंटी हैं:

  1. टोटीपोटेंट (Totipotent): जो पूरे भ्रूण के साथ अपरा (placenta) जैसे भ्रूण-बाहरी ऊतक भी बना सकती हैं (उदा. युग्मनज / Zygote)।
  2. प्लूरीपोटेंट (Pluripotent): जो भ्रूण के तीनों जनन स्तरों (एक्टोडर्म, मेसोडर्म, एंडोडर्म) की किसी भी कोशिका में बदल सकती हैं (भ्रूणीय स्टेम सेल - ESCs)। जापानी वैज्ञानिक शिन्या यामानाका ने वयस्क कोशिकाओं को फिर से भ्रूणीय अवस्था में बदलकर iPSCs (प्रेरित प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल) बनाई (2006 में खोज, 2012 नोबेल पुरस्कार, जॉन गर्डन के साथ)।
  3. मल्टीपोटेंट (Multipotent): जो किसी एक ऊतक-समूह तक ही बंधी रहती हैं (जैसे अस्थि मज्जा में रक्त बनाने वाली हीमेटोपोएटिक स्टेम सेल)।

GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी): पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बने 1989 के नियमों (Rules 1989) से गठित यह भारत की सर्वोच्च वैधानिक संस्था है। 2010 में इसका नाम 'Approval' से बदलकर 'Appraisal' Committee किया गया। देश में किसी भी जीएम जीव, बीज अथवा उत्पाद के अनुसंधान, आयात, फील्ड ट्रायल और व्यावसायिक विमोचन के लिए GEAC की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

फसलों और खेती की पूरी तस्वीर के लिए Agriculture (कृषि) और पशु नस्लों व डेयरी के लिए पशुधन और डेयरी विकास पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • भारत में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली पहली और एकमात्र (2026 तक) जीएम फसल बीटी कपास (Bt Cotton) है, जिसे 2002 में मंजूरी मिली।
  • विश्व का पहला वयस्क कायिक कोशिका से क्लोन किया गया स्तनधारी जंतु 'डॉली भेड़' (1996) थी, जिसे इयान विल्मुट ने बनाया।
  • NDRI करनाल ने 2009 में विश्व की पहली क्लोन भैंस बछिया 'समरूपा' (6 फरवरी) और फिर 'गरिमा' (6 जून) बनाई।
  • कैरी मुलिस को 1983 में पीसीआर (Polymerase Chain Reaction) तकनीक के आविष्कार के लिए 1993 में रसायन का नोबेल मिला।
  • GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी) पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत गठित वैधानिक निकाय है।

RAS Prelims MCQ

  1. भारत में व्यावसायिक उत्पादन के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्वीकृत एकमात्र जीएम (Genetically Modified) फसल कौन सी है?
    A) बीटी बैंगन
    B) बीटी कपास (Bt Cotton)
    C) जीएम सरसों (DMH-11)
    D) गोल्डन राइस
    उत्तर: B) बीटी कपास (Bt Cotton)
    कारण: GEAC ने 2002 में बीटी कपास को व्यावसायिक खेती की मंजूरी दी; 2026 तक यही अकेली GM फसल है जिसकी व्यावसायिक खेती होती है (DMH-11 का मामला कोर्ट में है)।
  2. आनुवंशिक इंजीनियरिंग में प्रयुक्त 'आणविक कैंची' (Molecular Scissors) किस एंजाइम को कहा जाता है?
    A) डीएनए लाइगेज
    B) रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease)
    C) डीएनए पॉलिमरेज़
    D) आरएनए प्राइमेज़
    उत्तर: B) रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease)
    कारण: रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज एंजाइम डीएनए को विशिष्ट पैलिंड्रोमिक स्थलों पर काटने का कार्य करते हैं।
  3. वयस्क कायिक कोशिका से बने विश्व के पहले क्लोन स्तनपायी 'डॉली भेड़' का निर्माण किस वैज्ञानिक के नेतृत्व में 1996 में किया गया था?
    A) एडवर्ड जेनर
    B) इयान विल्मुट (Ian Wilmut)
    C) कैरी मुलिस
    D) हरगोविंद खुराना
    उत्तर: B) इयान विल्मुट (Ian Wilmut)
    कारण: स्कॉटलैंड के रोजलिन इंस्टीट्यूट में इयान विल्मुट और कीथ कैंपबेल ने स्तन ग्रंथि कोशिका से डॉली का क्लोन तैयार किया था।
  4. पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR) तकनीक का आविष्कार 1983 में किसने किया था?
    A) फ्रांसिस क्रिक
    B) जेम्स वाटसन
    C) कैरी मुलिस (Kary Mullis)
    D) फ्रेडरिक सैंगर
    उत्तर: C) कैरी मुलिस (Kary Mullis)
    कारण: कैरी मुलिस ने पीसीआर तकनीक का आविष्कार किया था, जिसके लिए उन्हें 1993 में रसायन का नोबेल पुरस्कार मिला।
  5. भारत में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) करनाल में 2009 में विकसित विश्व की पहली क्लोन भैंस का क्या नाम था?
    A) कामधेनु
    B) समरूपा (Samrupa)
    C) गरिमा
    D) नूरी
    उत्तर: B) समरूपा (Samrupa)
    कारण: NDRI करनाल ने 6 फरवरी 2009 को हैंड-गाइडेड क्लोनिंग से 'समरूपा' नाम की दुनिया की पहली क्लोन कटड़ी बनाई; गरिमा (6 जून 2009) दूसरी थी।
  6. बीटी कपास में कीट-प्रतिरोधी गुण किस मृदा जीवाणु से प्राप्त जीन के कारण होता है?
    A) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसियंस
    B) बेसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis)
    C) राइजोबियम लेग्युमिनोसेरम
    D) क्लॉस्ट्रिडियम बोटुलिनम
    उत्तर: B) बेसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis)
    कारण: बीटी कपास में बेसिलस थुरिंजिएंसिस के Cry जीन डाले जाते हैं जो बॉलवर्म कीट के प्रति विषैला प्रोटीन बनाते हैं।
  7. भारत में जीएम फसलों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देने वाली सर्वोच्च संस्था कौन सी है?
    A) ICAR
    B) CSIR
    C) GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी)
    D) FSSAI
    उत्तर: C) GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी)
    कारण: GEAC पर्यावरण मंत्रालय के अधीन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के नियमों के तहत गठित वैधानिक निकाय है।
  8. स्वदेशी जीएम सरसों की प्रजाति 'DMH-11' का विकास किस भारतीय संस्थान ने किया है?
    A) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली
    B) दिल्ली विश्वविद्यालय का सीजीएमसीपी (CGMCP)
    C) पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना
    D) केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर
    उत्तर: B) दिल्ली विश्वविद्यालय का सीजीएमसीपी (CGMCP)
    कारण: दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP) ने दीपक पेंटल के नेतृत्व में DMH-11 विकसित की।
  9. वे स्टेम कोशिकाएं जो मानव शरीर के तीनों प्राथमिक जनन स्तरों (एक्टोडर्म, मेसोडर्म और एंडोडर्म) की किसी भी कोशिका का निर्माण कर सकती हैं, कहलाती हैं:
    A) टोटीपोटेंट
    B) प्लूरीपोटेंट (Pluripotent)
    C) मल्टीपोटेंट
    D) यूनीपोटेंट
    उत्तर: B) प्लूरीपोटेंट (Pluripotent)
    कारण: प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल (जैसे भ्रूणीय स्टेम सेल) तीनों जनन स्तरों की कोशिकाएं बना सकती हैं, पर अपरा (placenta) जैसे भ्रूण-बाहरी ऊतक नहीं। ये दोनों टोटीपोटेंट कोशिका बनाती है।
  10. पीसीआर (PCR) चक्र में उच्च तापमान (94°C) पर डीएनए के दोनों धागों के अलग होने की पद्धति को क्या कहते हैं?
    A) एनीलिंग (Annealing)
    B) एक्सटेंशन (Extension)
    C) डिनेचुरेशन (Denaturation)
    D) लाइगेशन (Ligation)
    उत्तर: C) डिनेचुरेशन (Denaturation)
    कारण: डिनेचुरेशन चरण में हाइड्रोजन बंध टूटने से डीएनए का दोहरा धागा दो एकल धागों में विभक्त हो जाता है।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. पुनर्योगज डीएनए (rDNA) तकनीक में 'प्लास्मिड' का क्या कार्य है? (20 शब्द)
    उत्तर: प्लास्मिड जीवाणुओं में मुख्य गुणसूत्र से अलग पाया जाने वाला गोलाकार डीएनए है, जो वांछित विदेशी जीन को मेजबान कोशिका में स्थानांतरित करने वाले वाहक (Vector) का कार्य करता है।
  2. बीटी कपास में 'Cry जीन' किस प्रकार कीटों से रक्षा करता है? (20 शब्द)
    उत्तर: क्राई जीन से निर्मित निष्क्रिय एंडोटॉक्सिन कीट के क्षारीय आमाशय में सक्रिय होकर उसकी आंत की दीवारों में छेद कर देता है, जिससे कीट की मृत्यु हो जाती है।
  3. SCNT (सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर) तकनीक क्या है? (20 शब्द)
    उत्तर: इस क्लोनिंग तकनीक में केंद्रकविहीन अंड कोशिका में किसी वयस्क कायिक कोशिका का केंद्रक डालकर भ्रूण तैयार किया जाता है, जैसा डॉली भेड़ में किया गया।
  4. टैक पॉलिमरेज़ (Taq Polymerase) एंजाइम की क्या विशेषता है? (20 शब्द)
    उत्तर: यह थर्मस एक्वाटिकस जीवाणु से प्राप्त ऊष्मा-रोधी डीएनए पॉलिमरेज़ है, जो पीसीआर के 94°C के अत्यधिक उच्च तापमान पर भी निष्क्रिय नहीं होता।
  5. GEAC की प्रशासनिक structure क्या है? (20 शब्द)
    उत्तर: यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत बने 1989 के नियमों से गठित सांविधिक अप्रेजल समिति है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. पुनर्योगज डीएनए तकनीक (rDNA Technology) के प्रमुख चरणों का आरेखीय अथवा क्रमिक विवरण दीजिए और चिकित्सा क्षेत्र में इसके महत्व को रेखांकित कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: rDNA तकनीक के मुख्य क्रमिक चरण:
    1. डीएनए विलगन और विखंडन: विशिष्ट जीन को रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज एंजाइम की सहायता से काटना।
    2. पीसीआर प्रवर्धन: इच्छित जीन खंड की टैक पॉलिमरेज़ की मदद से लाखों प्रतियां तैयार करना।
    3. लाइगेशन: डीएनए लाइगेज एंजाइम के जरिए वांछित जीन को प्लास्मिड वाहक के साथ जोड़ना।
    4. रूपांतरण: पुनर्योगज वेक्टर को पोषक जीवाणु (ई. कोलाई) में प्रविष्ट कराना।
    5. बायोरिएक्टर संवर्धन: बड़े पैमाने पर संवर्धन कर अभीष्ट उत्पाद को पृथक व शुद्ध करना।
    चिकित्सा में महत्व: मधुमेह रोगियों के लिए कृत्रिम इंसुलिन (ह्युमुलिन) का निर्माण, हेपेटाइटिस-बी टीका, इंटरफेरॉन, जीन थेरेपी और दुर्लभ आनुवंशिक रोगों की सटीक आणविक जांच।
  2. भारत में जीएम फसलों (Genetically Modified Crops) की स्वीकार्यता से जुड़े लाभों और पर्यावरणीय-स्वास्थ्य चिंताओं का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: भारत में जीएम फसलों का मूल्यांकन:
    प्रमुख लाभ:
    1. उत्पादकता में वृद्धि: बीटी कपास आने के बाद भारत में कपास उत्पादन तेजी से बढ़ा और भारत कपास का बड़ा निर्यातक बना।
    2. कीटनाशकों पर निर्भरता में कमी: लक्षित कीटों के प्रति आंतरिक प्रतिरोध होने से रसायनों का छिड़काव घटा, जिससे किसानों की लागत बची।
    3. जलवायु सहनशीलता: सूखा, लवणता और पाला रोधी फसलों का विकास खाद्य सुरक्षा को मजबूती देता है।
    पर्यावरणीय व स्वास्थ्य चिंताएं:
    1. सुपर-वीड और प्रतिरोधकता: लंबे समय में कीटों में प्रतिरोध क्षमता विकसित होने (जैसे गुलाबी सुंडी) और जंगली पौधों में जीन प्रवाह का भय।
    2. जैव विविधता पर संकट: परागण करने वाली मधुमक्खियों और गैर-लक्षित सूक्ष्मजीवों पर अज्ञात दुष्प्रभाव।
    3. बीज संप्रभुता: बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर बीज के लिए किसानों की निर्भरता। इसलिए कठोर जैव-सुरक्षा मूल्यांकन के बाद ही व्यावसायिक अनुमति दी जानी चाहिए।

FAQs

प्रश्न: क्या भारत में किसान बीटी बैंगन की खेती कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं। GEAC ने 2009 में सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए फरवरी 2010 से इस पर रोक लगा रखी है (2026 तक जारी)।

प्रश्न: डॉली भेड़ और समरूपा में क्या तकनीकी अंतर था?
उत्तर: डॉली भेड़ को पारंपरिक माइक्रोमैनिपुलेटर विधि से विकसित किया गया था, जबकि भारत की समरूपा भैंस को स्वदेशी कम खर्चीली हैंड-गाइडेड क्लोनिंग तकनीक से तैयार किया गया।

प्रश्न: क्या डीएनए लाइगेज और रेस्ट्रिक्शन एंजाइम एक दूसरे के पूरक हैं?
उत्तर: हां, रेस्ट्रिक्शन एंजाइम डीएनए को विशिष्ट स्थानों से काटने (कैंची) का काम करता है, जबकि डीएनए लाइगेज कटे हुए डीएनए सिरों को जोड़ने (गोंद) का काम करता है।

प्रश्न: ह्युमुलिन (Humulin) क्या है?
उत्तर: ह्युमुलिन rDNA तकनीक से ई. कोलाई बैक्टीरिया में बनाया गया पहला मानव इंसुलिन है, जिसे अमेरिकी कंपनी Eli Lilly ने बनाया और 1982 में अमेरिका (FDA) से मंजूरी मिली।

प्रश्न: इंड्यूस्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल (iPSC) का क्या लाभ है?
उत्तर: iPSC वयस्क त्वचा कोशिकाओं को फिर से भ्रूणीय अवस्था में बदलकर बनाई जाती हैं, इसलिए इसमें भ्रूण नष्ट नहीं करना पड़ता और भ्रूणीय स्टेम सेल वाला नैतिक विवाद काफी हद तक टल जाता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • आणविक कैंची = रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज; आणविक गोंद/सीवनकार = DNA लाइगेज।
  • पहला अलग किया गया रेस्ट्रिक्शन एंजाइम Hind II; EcoRI, E. coli से मिलता है।
  • PCR: कैरी मुलिस (1983), Taq पॉलिमरेज़, चरण: डिनेचुरेशन → एनीलिंग → एक्सटेंशन।
  • Bt कपास: 2002 से, Cry जीन, Bacillus thuringiensis; Bt बैंगन पर 2010 से रोक।
  • DMH-11: दिल्ली विश्वविद्यालय (CGMCP), barnase-barstar, GEAC मंजूरी 2022, मामला सुप्रीम कोर्ट में।
  • डॉली: 5 जुलाई 1996, रोजलिन इंस्टीट्यूट, SCNT तकनीक।
  • समरूपा (फरवरी 2009), गरिमा (जून 2009), नूरी पश्मीना बकरी (2012), गंगा गिर गाय (2023)।
  • GEAC: MoEFCC के अधीन, EPA 1986 के Rules 1989 के तहत।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) जैविक जीवों और उनकी जैविक पद्धतिओं का मानव कल्याण के लिए औद्योगिक व चिकित्सीय इस्तेमाल है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में Biotechnology in Hindi: जैव प्रौद्योगिकी, क्लोनिंग और जीएम फसलें एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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