RAS (आरपीएससी) 7 min read

पशुधन एवं डेयरी विकास

अध्याय सार (Chapter Summary)

अर्थव्यवस्था में भूमिका: राजस्थान की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर अत्यधिक निर्भर है, विशेषकर मरुस्थलीय क्षेत्रों में जहाँ कृषि कठिन है। यह जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है।

आर्थिक आँकड़े (RAS परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण)

  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान: लगभग 9%
  • ऊन उत्पादन: भारत का लगभग 40% (प्रथम स्थान)।
  • दूध उत्पादन: भारत का लगभग 10%।
  • भेड़ जनसंख्या: भारत की कुल भेड़ों का ~25%।
  • भार वहन (Draft Power): कृषि व परिवहन की 35% शक्ति पशुओं से प्राप्त होती है।

गौ-वंश (Cattle Breeds)

नस्ल क्षेत्र / उत्पत्ति मुख्य विशेषताएँ
नागोरी सुहालक (नागौर) प्रसिद्ध भारवाहक नस्ल (Draft Breed)। इसके बैल खेती के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
कांकरेज द-प. राजस्थान (बाड़मेर, सिरोही, जालोर) द्वि-प्रयोजनीय नस्ल (दूध और भार दोनों)। बैल अच्छे भारवाहक होते हैं।
थारपारकर मालाणी (बाड़मेर) इसे 'मालाणी नस्ल' भी कहते हैं। अधिक दूध देने वाली नस्ल।
राठी उ-प. राजस्थान (गंगानगर, बीकानेर) 'राजस्थान की कामधेनु'। सर्वाधिक दूध देने वाली नस्ल। भार वहन क्षमता कम।
गिर द-पू. राजस्थान (अजमेर, चित्तौड़, कोटा) उत्पत्ति: गिर वन (गुजरात)। उपनाम: रेंडा / अजमेरा

भेड़ वंश (Sheep Breeds)

नस्ल क्षेत्र RAS परीक्षा तथ्य
चोकला शेखावाटी 'भारत की मेरीनो'। सर्वश्रेष्ठ किस्म की ऊन (Fine wool) देती है।
मारवाड़ी जोधपुर, बाड़मेर सर्वाधिक संख्या (लगभग 45%)। उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता (High Immunity)।
सोनाड़ी उदयपुर, डूंगरपुर (दक्षिण राज.) उपनाम: 'चनोथर'। चरते समय इसके लम्बे कान जमीन को छूते हैं।
नाली हनुमानगढ़, चूरू (घग्घर बेसिन) अधिक मात्रा में ऊन उत्पादन।
मगरा बीकानेर, जैसलमेर, नागौर प्रतिवर्ष औसतन 2 किग्रा ऊन। बीकानेरी चोखला भी कहलाती है।
पूगल बीकानेर (पूगल तहसील) बीकानेर क्षेत्र की विशेष नस्ल।
मालपुरी जयपुर, टोंक, मालपुरा देशी नस्ल। ऊन मोटी होती है।

प्रमुख विकास कार्यक्रम

  • गोपाल योजना (1990-91): ग्रामीण युवकों ("गोपाल") को कृत्रिम गर्भाधान और बेकार सांडों के बधियाकरण का प्रशिक्षण देना ताकि नस्ल सुधरे।
  • भेड़ प्रजनन कार्यक्रम: ऊन/मांस सुधार हेतु विदेशी नस्लों (मेरीनो/कोरिडेल) के साथ 'क्रॉस-ब्रीडिंग' (संकर प्रजनन) पर जोर।
  • RCDF (राज. सहकारी डेयरी फेडरेशन): यह 'अमूल' (आनंद, गुजरात) मॉडल पर आधारित है। उद्देश्य: बिचौलियों को हटाकर उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाना।
  • प्रमुख संस्थान:
    • CSWRI: केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानागर (मालपुरा, टोंक) में स्थित है।
    • भेड़ एवं ऊन प्रशिक्षण स्कूल: जोधपुर।

In this Chapter

पशुधन एवं डेयरी विकास
No other notes in this chapter.