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राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य

अध्याय सार

राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण किया जाता है। राज्य में कई राष्ट्रीय उद्यान, बाघ परियोजनाएँ और अभयारण्य स्थित हैं। यहाँ काले हिरण, गोडावण और बाघों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ परियोजनाएँ

  • रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर): राज्य की पहली बाघ परियोजना। यह बाघ और मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध है।
  • केवलादेव घना पक्षी विहार (भरतपुर): पक्षियों का स्वर्ग। यहाँ सर्दियों में साइबेरियन क्रेन और 113 विदेशी प्रजातियों के पक्षी आते हैं।
  • मुकुन्दरा हिल्स (दर्रा): कोटा और चित्तौड़गढ़ में स्थित। इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त है।
  • राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर/बाड़मेर): 1981 में स्थापित। यह गोडावण (Great Indian Bustard) और जीवाश्म उद्यान (आकल वुड फॉसिल पार्क) के लिए प्रसिद्ध है।
  • सरिस्का (अलवर): यह बाघ परियोजना है और हरे कबूतरों के लिए भी जाना जाता है।

प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य

अभयारण्यजिलाविशेषता/मुख्य जीव
तालछापरचूरूकाले हिरण (कृष्ण मृग) के लिए प्रसिद्ध।
सीतामाताप्रतापगढ़सागवान के वन और उड़न गिलहरी के लिए प्रसिद्ध।
माउंट आबूसिरोहीराज्य का एकमात्र पर्वतीय अभयारण्य; जंगली मुर्गों के लिए प्रसिद्ध।
चम्बल घड़ियालकोटा/बूंदी/स.माधोपुरघड़ियालों और गांगेय डॉल्फिन का संरक्षण।
कुम्भलगढ़उदयपुर/राजसमन्द/पालीभेड़ियों की प्रजनन स्थली।
सुंधा माताजालोर/सिरोहीराज्य का पहला भालू अभयारण्य (2010 में घोषित)।
रामगढ़ विषधारीबूंदीइसे रणथम्भौर के बाघों का जच्चा घर कहा जाता है।
शेरगढ़बारांसांपों की शरणस्थली।

आखेट निषिद्ध क्षेत्र

राजस्थान में कुल 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र हैं। सर्वाधिक जोधपुर (7) में हैं, उसके बाद बीकानेर (5) में हैं।

मृगवन (Deer Parks)

  • अशोक विहार: जयपुर
  • माचिया सफारी पार्क: जोधपुर (मरु वनस्पति और काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध)
  • सज्जनगढ़: उदयपुर
  • पुष्कर: अजमेर (पंचकुंड के पास)

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