RAS (आरपीएससी) 5 min read

Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 - LEGAL RIGHTS
  • • अवलोकन: Quick Answer: Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 (Rajasthan Guaranteed Delivery of Public Services Act, Act No. 23...
Quick Answer: Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 (Rajasthan Guaranteed Delivery of Public Services Act, Act No. 23 of 2011) 14 नवंबर 2011 से लागू हुआ। इसमें नागरिक को अधिसूचित सेवाएं तय समय में पाने का कानूनी अधिकार मिला। शुरुआत में 15 विभागों की 108 सेवाएं शामिल थीं। बिना ठोस कारण सेवा न देने पर ₹500 से ₹5,000 और देरी पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000) की शास्ति (Penalty) लगती है, जो अधिकारी के वेतन से वसूल होती है। इसका साथी कानून राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 है, जो 1 अगस्त 2012 से लागू हुआ।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011: पृष्ठभूमि और उद्देश्य

इस तरह का कानून सबसे पहले मध्य प्रदेश ने 2010 में बनाया था, इसलिए राजस्थान इस कानून में पहला राज्य नहीं है। राजस्थान का अधिनियम 21 सितंबर 2011 को बना (Act No. 23 of 2011)। राज्य सरकार ने इसे 14 नवंबर 2011 (पंडित नेहरू की जयंती) से लागू किया। बिल उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेश किया था।

बिल के उद्देश्य-कथन में साफ लिखा है कि नागरिक को तय सेवाएं तय समय में पाने का कानूनी अधिकार मिले, और समय पर सेवा न देने वाले अधिकारी पर शास्ति लगे। मुख्य उद्देश्य:

  • समयबद्ध सेवा: हर अधिसूचित सेवा के लिए निश्चित समय सीमा (Stipulated Time Limit) तय करना।
  • व्यक्तिगत जवाबदेही: देरी करने वाले अधिकारी की निजी जिम्मेदारी तय करना और उसके वेतन से शास्ति वसूलना।
  • शिकायत का कानूनी रास्ता: सेवा न मिलने पर दो स्तर की अपील का अधिकार देना।

नागरिक अधिकार पत्र (Citizen's Charter) केवल वादा करता है, जबकि यह कानून उस वादे को कानूनी अधिकार बना देता है। Citizen's Charter के लिए पढ़ें: Citizen's Charter।

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अधिनियम की धाराएं (2011 का मूल रूप: कुल 11 धाराएं)

धाराविषयमुख्य बात
1नाम, विस्तार, प्रारंभपूरे राजस्थान में लागू; प्रारंभ की तारीख सरकार अधिसूचना से तय करे (14 नवंबर 2011)।
2परिभाषाएंपदाभिहित अधिकारी (Designated Officer), प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपील प्राधिकारी, नियत समय सीमा आदि।
3अधिसूचनासरकार सेवाएं, अधिकारी, अपील अधिकारी और समय सीमा अधिसूचित करती है।
4सेवा पाने का अधिकारपदाभिहित अधिकारी तय समय में सेवा देगा।
5समय सीमा में सेवासमय सीमा आवेदन जमा होने की तारीख से गिनी जाती है; आवेदन की रसीद (Acknowledgement) देनी होती है; सेवा दें या लिखित कारण के साथ खारिज करें।
6अपीलप्रथम अपील 30 दिन में, द्वितीय अपील 60 दिन में; अपील अधिकारियों को कुछ मामलों में सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां।
7शास्ति₹500 से ₹5,000 एकमुश्त, या ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000); वेतन से वसूली; अपीलार्थी को हर्जाना।
8पुनरीक्षण (Revision)शास्ति के आदेश के 60 दिन में पुनरीक्षण का आवेदन।
9सद्भावना से किए काम का संरक्षणनेकनीयती से किए काम पर मुकदमा नहीं।
10नियम बनाने की शक्तिनियम विधानसभा के सामने कम से कम 14 दिन रखे जाते हैं।
11कठिनाइयां दूर करनाप्रारंभ से 2 साल तक ही ऐसा आदेश।

ध्यान दें: सिविल कोर्ट पर रोक (Bar of jurisdiction) वाली धारा इस 2011 के कानून में नहीं है। यह धारा सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 (धारा 10) में है। दोनों कानूनों को मिलाकर गलत जवाब न दें।

2013 का संशोधन

2013 के संशोधन (Act No. 36 of 2013) से धारा 8 बदली गई। अब द्वितीय अपील प्राधिकारी के आदेश से नाराज कोई भी व्यक्ति 60 दिन में Commission for Guaranteed Delivery of Public Services (गारंटी आयोग) के सामने पुनरीक्षण का आवेदन कर सकता है। आयोग बनाने के लिए नई धारा 8-A जोड़ी गई, जिसमें एक मुख्य आयुक्त और आयुक्तों का प्रावधान है।

अपील व्यवस्था और समय सीमा

स्तरकिसके पासकब तकक्या कर सकता है
मूल आवेदनपदाभिहित अधिकारीसेवा के अनुसार अधिसूचित समय (कुछ घंटों से 45 दिन तक)रसीद देना; सेवा देना या लिखित कारण से खारिज करना
प्रथम अपील (धारा 6(1))प्रथम अपील अधिकारीआवेदन खारिज होने या समय सीमा बीतने के 30 दिन मेंतय समय में सेवा देने का आदेश या अपील खारिज
द्वितीय अपील (धारा 6(3))द्वितीय अपील प्राधिकारीप्रथम अपील के फैसले के 60 दिन मेंसेवा देने का आदेश और धारा 7 के तहत शास्ति
पुनरीक्षण (धारा 8)2011 में सरकार का नामित अधिकारी; 2013 संशोधन के बाद आयोगआदेश के 60 दिन मेंशास्ति के आदेश की दोबारा जांच
  • देरी का ठोस कारण हो तो अपील अधिकारी 30 या 60 दिन के बाद भी अपील ले सकता है।
  • प्रथम अपील के फैसले का समय कानून में नहीं लिखा, यह सेवा की अधिसूचना में तय होता है।
  • अगर अधिकारी आवेदन की रसीद न दे (धारा 5(1) का पालन न करे), तो नागरिक सीधे प्रथम अपील अधिकारी को आवेदन दे सकता है (धारा 6(5))।
  • अपील और पुनरीक्षण के लिए कोई फीस नहीं लगती।

शास्ति (Penalty) के नियम: धारा 7

गलतीशास्तिकिस पर
बिना ठोस कारण सेवा न देना₹500 से ₹5,000 एकमुश्तपदाभिहित अधिकारी
बिना ठोस कारण देरी₹250 प्रतिदिन, कुल अधिकतम ₹5,000पदाभिहित अधिकारी
बिना कारण समय पर अपील तय न करना₹500 से ₹5,000प्रथम अपील अधिकारी
  • शास्ति केवल द्वितीय अपील प्राधिकारी लगाता है, और लगाने से पहले अधिकारी को सुनवाई का मौका देना जरूरी है।
  • शास्ति अधिकारी के वेतन से वसूल होती है।
  • शास्ति की रकम में से अपीलार्थी को हर्जाना (Compensation) दिलाया जा सकता है, पर हर्जाना शास्ति से ज्यादा नहीं हो सकता।
  • ड्यूटी में लापरवाही पर सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी हो सकती है।

सेवाओं की संख्या: 108 से 300 से ज्यादा

समयसेवाएं / विभाग
14 नवंबर 2011 (शुरुआत)15 विभागों की 108 सेवाएं
2012 के आसपास18 विभागों की 153 सेवाएं
जनवरी 2023 (राज्य सरकार का बयान)308 अधिसूचित सेवाएं

RAS Pre 2013 में इस कानून के तहत गारंटी वाली सेवाओं की संख्या पूछी गई थी, लेकिन RPSC ने वह प्रश्न final key में हटा (delete) दिया था, क्योंकि उस समय तक संख्या बदल चुकी थी। इसलिए "शुरुआत में 108" लिखकर याद रखें।

राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012

राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम (Rajasthan Right to Hearing Act, Act No. 22 of 2012) को 21 मई 2012 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और यह 1 अगस्त 2012 से लागू हुआ। जन शिकायतों की तय समय में सुनवाई का कानून लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। RAS Pre 2016 में यही पूछा गया था कि जन समस्याओं के निवारण का कौन सा कानून लागू करने में राजस्थान पहला राज्य है, और RPSC key में उत्तर "सुनवाई का अधिकार अधिनियम" था (लोक सेवा गारंटी नहीं)।

मुख्य प्रावधान

  • लोक सुनवाई अधिकारी (Public Hearing Officer): शिकायत पर तय समय में सुनवाई करता है और फैसला बताता है। ये अधिकारी ग्राम पंचायत, तहसील, उपखंड और जिला स्तर पर नियुक्त हैं।
  • समय सीमा: शिकायत का निपटारा 15 दिन में (अधिसूचना में तय); खारिज करने पर लिखित कारण। हर लोक सुनवाई अधिकारी हफ्ते में कम से कम 2 दिन सुनवाई के लिए तय करता है।
  • प्रथम अपील (धारा 6(1)): 30 दिन में प्रथम अपील प्राधिकारी को; इसका निपटारा 21 दिन में।
  • द्वितीय अपील (धारा 6(4)): प्रथम अपील के फैसले के 30 दिन में द्वितीय अपील प्राधिकारी को।
  • शास्ति (धारा 7): बिना ठोस कारण सुनवाई न करने पर लोक सुनवाई अधिकारी पर ₹500 से ₹5,000, जो वेतन से वसूल होगी। यह शास्ति द्वितीय अपील प्राधिकारी लगाता है।
  • पुनरीक्षण (धारा 8): शास्ति के आदेश के 60 दिन में सरकार के नामित अधिकारी के पास।
  • सिविल कोर्ट पर रोक (धारा 10): इस कानून के मामलों को सिविल कोर्ट नहीं सुनेगा।
  • सूचना और सुविधा केंद्र (धारा 5): शिकायत लेने के लिए call centre, help desk जैसे केंद्र। कुल 13 धाराएं।

किन शिकायतों पर यह कानून लागू नहीं

सरकारी कर्मचारी के सेवा मामले (नौकरी, पेंशन), कोर्ट या Tribunal में चल रहे मामले, RTI Act 2005 के मामले और लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में अधिसूचित सेवाएं इसके दायरे से बाहर हैं। यानी दोनों कानून एक-दूसरे को ढकते नहीं, बल्कि पूरक हैं। RTI और सूचना आयोग के लिए पढ़ें: State Information Commission।

राजस्थान संपर्क और 181 हेल्पलाइन

शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने के लिए राजस्थान संपर्क portal (sampark.rajasthan.gov.in) और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 चलती है। हर शिकायत को एक registration number मिलता है, जिससे उसका status देखा जा सकता है।

दोनों कानूनों की तुलना

बिंदुलोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012
Act नंबर23 of 201122 of 2012
लागू14 नवंबर 20111 अगस्त 2012
विषयअधिसूचित सेवाएं तय समय में देनाशिकायत पर तय समय में सुनवाई
पहला अधिकारीपदाभिहित अधिकारीलोक सुनवाई अधिकारी
प्रथम अपील30 दिन में30 दिन में
द्वितीय अपील60 दिन में30 दिन में
शास्ति₹500–₹5,000 या ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000)₹500–₹5,000
सिविल कोर्ट पर रोककोई धारा नहींधारा 10
कुल धाराएं (मूल)1113
पहला राज्य?नहीं (मध्य प्रदेश 2010)हां, राजस्थान पहला

असर और कमियां

  • असर: देरी पर अधिकारी की निजी जिम्मेदारी तय हुई, और नागरिक को रसीद के रूप में लिखित सबूत मिला।
  • कमियां: कानून के तहत बहुत कम अपीलें दर्ज होती हैं, निगरानी (monitoring) कमजोर रही है, और गांवों में लोगों को इस कानून की जानकारी कम है।
  • सुधार: अपील को online करना, हर दफ्तर में सेवाओं और समय सीमा का board लगाना, और लोगों को जानकारी देना। नीति बनाने और लागू करने की बुनियादी बातों के लिए पढ़ें: लोक नीति (Public Policy)।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • लोक सेवा गारंटी अधिनियम: Act No. 23 of 2011, बना 21 सितंबर 2011, लागू 14 नवंबर 2011।
  • शुरुआत में 15 विभागों की 108 सेवाएं; जनवरी 2023 तक 308 सेवाएं (सरकार के अनुसार)।
  • पहला ऐसा कानून मध्य प्रदेश का (2010), राजस्थान का नहीं।
  • मूल अधिनियम में 11 धाराएं; धारा 5 में रसीद, धारा 6 में अपील, धारा 7 में शास्ति।
  • प्रथम अपील 30 दिन में, द्वितीय अपील 60 दिन में।
  • शास्ति ₹500 से ₹5,000, या देरी पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000); वेतन से वसूली।
  • शास्ति केवल द्वितीय अपील प्राधिकारी लगाता है।
  • 2013 संशोधन: पुनरीक्षण आयोग के पास (धारा 8), आयोग की धारा 8-A।
  • सुनवाई का अधिकार अधिनियम: Act No. 22 of 2012, मंजूरी 21 मई 2012, लागू 1 अगस्त 2012।
  • सुनवाई का अधिकार कानून बनाने वाला पहला राज्य राजस्थान है।
  • सुनवाई कानून में द्वितीय अपील 30 दिन में, शास्ति ₹500 से ₹5,000, सिविल कोर्ट पर रोक धारा 10।
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RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 किस तारीख से लागू हुआ?
    A) 21 सितंबर 2011
    B) 2 अक्टूबर 2011
    C) 14 नवंबर 2011
    D) 1 अगस्त 2012
    उत्तर: C) 14 नवंबर 2011
    कारण: 21 सितंबर 2011 को अधिनियम बना, पर सरकार ने इसे 14 नवंबर 2011 से लागू किया। 1 अगस्त 2012 सुनवाई के अधिकार कानून की तारीख है।
  2. लागू होते समय इस अधिनियम में कितने विभागों की कितनी सेवाएं थीं?
    A) 12 विभागों की 85 सेवाएं
    B) 15 विभागों की 108 सेवाएं
    C) 18 विभागों की 153 सेवाएं
    D) 25 विभागों की 221 सेवाएं
    उत्तर: B) 15 विभागों की 108 सेवाएं
    कारण: शुरुआत में 15 विभागों की 108 सेवाएं थीं; 153 सेवाएं (18 विभाग) बाद में जुड़ीं।
  3. बिना ठोस कारण सेवा न देने पर पदाभिहित अधिकारी पर एकमुश्त शास्ति कितनी लग सकती है?
    A) ₹100 से ₹1,000
    B) ₹250 से ₹2,500
    C) ₹500 से ₹5,000
    D) ₹1,000 से ₹10,000
    उत्तर: C) ₹500 से ₹5,000
    कारण: धारा 7(1)(a) में न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹5,000 की शास्ति है; ₹250 देरी की प्रतिदिन दर है।
  4. सेवा देने में देरी पर अधिनियम में शास्ति की दर क्या है?
    A) ₹100 प्रतिदिन, अधिकतम ₹2,500
    B) ₹200 प्रतिदिन, अधिकतम ₹3,000
    C) ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5,000
    D) ₹500 प्रतिदिन, अधिकतम ₹10,000
    उत्तर: C) ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5,000
    कारण: धारा 7(1)(b) के अनुसार देरी पर ₹250 प्रतिदिन, कुल ₹5,000 तक।
  5. लोक सेवा गारंटी अधिनियम में द्वितीय अपील प्रथम अपील के फैसले के कितने दिन में की जाती है?
    A) 15 दिन
    B) 30 दिन
    C) 45 दिन
    D) 60 दिन
    उत्तर: D) 60 दिन
    कारण: धारा 6(3) में द्वितीय अपील की सीमा 60 दिन है; प्रथम अपील की सीमा 30 दिन है।
  6. लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शास्ति कौन लगाता है?
    A) पदाभिहित अधिकारी
    B) प्रथम अपील अधिकारी
    C) द्वितीय अपील प्राधिकारी
    D) जिला न्यायालय
    उत्तर: C) द्वितीय अपील प्राधिकारी
    कारण: धारा 7 के तहत शास्ति लगाने की शक्ति केवल द्वितीय अपील प्राधिकारी को है।
  7. जन शिकायतों के निवारण के लिए किस कानून को लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है?
    A) लोक प्रापण में पारदर्शिता अधिनियम
    B) लोक सेवा गारंटी अधिनियम
    C) सुशासन अधिनियम
    D) सुनवाई का अधिकार अधिनियम
    उत्तर: D) सुनवाई का अधिकार अधिनियम
    कारण: सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 राजस्थान ने सबसे पहले बनाया; लोक सेवा गारंटी कानून पहले मध्य प्रदेश (2010) ने बनाया था।
  8. राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम किस तारीख से लागू हुआ?
    A) 14 नवंबर 2011
    B) 21 मई 2012
    C) 1 अगस्त 2012
    D) 2 अक्टूबर 2012
    उत्तर: C) 1 अगस्त 2012
    कारण: 21 मई 2012 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और 1 अगस्त 2012 से यह लागू हुआ।
  9. सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 में लोक सुनवाई अधिकारी पर अधिकतम कितनी शास्ति लग सकती है?
    A) ₹1,000
    B) ₹2,500
    C) ₹5,000
    D) ₹10,000
    उत्तर: C) ₹5,000
    कारण: धारा 7(1) में शास्ति ₹500 से कम नहीं और ₹5,000 से ज्यादा नहीं हो सकती।
  10. नीचे दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
    A) लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में सिविल कोर्ट पर रोक की धारा है
    B) सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 में सिविल कोर्ट पर रोक की धारा है
    C) सुनवाई का अधिकार अधिनियम में RTI के मामले भी आते हैं
    D) सुनवाई का अधिकार अधिनियम में द्वितीय अपील 60 दिन में होती है
    उत्तर: B) सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 में सिविल कोर्ट पर रोक की धारा है
    कारण: धारा 10 (2012 का कानून) सिविल कोर्ट को रोकती है; 2011 के कानून में ऐसी धारा नहीं, RTI मामले बाहर हैं, और द्वितीय अपील 30 दिन में होती है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में आवेदन की रसीद का क्या महत्व है?
    उत्तर रूपरेखा: धारा 5(1) के अनुसार समय सीमा आवेदन जमा होने की तारीख से गिनी जाती है और रसीद देना जरूरी है। रसीद ही अपील का सबूत बनती है। रसीद न मिलने पर नागरिक सीधे प्रथम अपील अधिकारी को आवेदन दे सकता है (धारा 6(5))।
  2. प्रश्न: अधिनियम की धारा 7 के शास्ति नियम बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: सेवा न देने पर ₹500–₹5,000, देरी पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000), अपील तय न करने पर प्रथम अपील अधिकारी पर ₹500–₹5,000। वसूली वेतन से, अपीलार्थी को हर्जाना संभव।
  3. प्रश्न: सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: सरकारी योजनाओं और विभागों से जुड़ी शिकायत पर तय समय (15 दिन) में सुनवाई और फैसले की सूचना का कानूनी अधिकार। राजस्थान ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य।
  4. प्रश्न: सुनवाई का अधिकार अधिनियम किन मामलों पर लागू नहीं होता?
    उत्तर रूपरेखा: सरकारी कर्मचारी के सेवा मामले, कोर्ट या Tribunal के मामले, RTI Act 2005 के मामले और लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में अधिसूचित सेवाएं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 की अपील और शास्ति व्यवस्था का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - पृष्ठभूमि: 14 नवंबर 2011 से लागू; 15 विभागों की 108 सेवाओं से शुरुआत।
    - अपील: खारिज होने या समय बीतने के 30 दिन में प्रथम अपील; फैसले के 60 दिन में द्वितीय अपील; 60 दिन में पुनरीक्षण (2013 के बाद आयोग)।
    - शास्ति: ₹500–₹5,000 या ₹250 प्रतिदिन, वेतन से वसूली, हर्जाना।
    - कमियां: कम अपीलें, जानकारी की कमी, कमजोर निगरानी।
    - सुझाव: online अपील, दफ्तरों में सेवा सूची, जागरूकता।
  2. प्रश्न: लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 की तुलना कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - विषय: पहला सेवाओं की समय पर डिलीवरी, दूसरा शिकायतों की समय पर सुनवाई।
    - अधिकारी: पदाभिहित अधिकारी बनाम लोक सुनवाई अधिकारी।
    - अपील: दोनों में दो स्तर; द्वितीय अपील 60 दिन बनाम 30 दिन।
    - शास्ति: पहले में प्रतिदिन की दर भी, दूसरे में केवल ₹500–₹5,000।
    - दायरा: दोनों एक-दूसरे के पूरक; अधिसूचित सेवाएं सुनवाई कानून से बाहर।
    - राजस्थान सुनवाई कानून में पहला राज्य, सेवा गारंटी में मध्य प्रदेश पहला।

FAQs

1. क्या लोक सेवा गारंटी कानून में सभी सरकारी सेवाएं आती हैं?

नहीं। केवल वही सेवाएं आती हैं जिन्हें सरकार ने धारा 3 के तहत अधिसूचित किया है। शुरुआत में 108 सेवाएं थीं, जनवरी 2023 तक सरकार के अनुसार 308 सेवाएं अधिसूचित थीं।

2. अधिकारी रसीद न दे तो क्या करें?

धारा 6(5) के तहत आप सीधे प्रथम अपील अधिकारी को आवेदन दे सकते हैं। उसका निपटारा प्रथम अपील की तरह होगा।

3. क्या अपील के लिए फीस लगती है?

नहीं। दोनों कानूनों में शिकायत, प्रथम अपील, द्वितीय अपील और पुनरीक्षण के लिए कोई फीस नहीं है।

4. क्या लोक सेवा गारंटी कानून बनाने वाला राजस्थान पहला राज्य है?

नहीं, पहला मध्य प्रदेश (2010) है। राजस्थान सुनवाई का अधिकार कानून (2012) बनाने वाला पहला राज्य है। यह फर्क RAS Pre 2016 में पूछा जा चुका है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • लोक सेवा गारंटी अधिनियम 14 नवंबर 2011 से लागू, शुरुआत 15 विभागों की 108 सेवाओं से।
  • सेवा न देने पर ₹500–₹5,000, देरी पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹5,000), वसूली वेतन से।
  • प्रथम अपील 30 दिन में, द्वितीय अपील 60 दिन में (2011 का कानून)।
  • 2011 के मूल कानून में 11 धाराएं; सिविल कोर्ट पर रोक की धारा नहीं।
  • सेवा गारंटी कानून में पहला राज्य मध्य प्रदेश (2010)।
  • सुनवाई का अधिकार अधिनियम 1 अगस्त 2012 से लागू; राजस्थान पहला राज्य।
  • सुनवाई कानून: 15 दिन में निपटारा, द्वितीय अपील 30 दिन में, शास्ति ₹500–₹5,000, धारा 10 सिविल कोर्ट पर रोक।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 (Rajasthan Guaranteed Delivery of Public Services Act, Act No.
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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Lok Seva Guarantee Adhiniyam 2011: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 और सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012