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राजस्थान में महिला सशक्तिकरण

अध्याय सार

राजस्थान में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में साक्षरता और सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है। महिला साक्षरता दर जो 1991 में 20.44% थी, 2011 में बढ़कर 52.66% हो गई। सरकार का दृष्टिकोण अब 'कल्याण' से हटकर 'अधिकार आधारित सशक्तिकरण' पर केंद्रित है।

प्रमुख संस्थाएं एवं अधिनियम (RAS तथ्य)

  • महिला विकास कार्यक्रम (WDP): शुरुआत 1984 में 7 जिलों (जयपुर, अजमेर, जोधपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर, बांसवाड़ा, कोटा) से हुई। मुख्य मानदेयकर्मी: साथिन
  • राज्य महिला आयोग: गठन 15 मई 1999 को हुआ (विधेयक 23 अप्रैल 1999)। संरचना: 1 अध्यक्ष + 3 सदस्य। कार्यकाल: 3 वर्ष।
  • घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005: 26 अक्टूबर 2006 से प्रभावी। इसमें 'साझा घर' (Shared Household) की परिभाषा दी गई है।
  • महिला अधिकारिता निदेशालय: गठन 18 जून 2007 को किया गया।

प्रमुख योजनाएं

योजना उद्देश्य / लाभ
जननी सुरक्षा योजना संस्थागत प्रसव को बढ़ावा। ग्रामीण क्षेत्र में प्रसूता को 1400 रु. व शहरी क्षेत्र में 1000 रु. की राशि।
मुख्यमंत्री बालिका संबल योजना नसबंदी करवाने वाले दंपत्ति (जिनके केवल 1 या 2 पुत्रियां हों) को 10,000 रु. का बॉन्ड दिया जाता है।
स्वयं सहायता समूह (SHG) आर्थिक सशक्तिकरण हेतु 1997-98 में शुरू। श्रेष्ठ कार्य के लिए 2010 से अमृता पुरस्कार (SHG को 50 हजार, NGO को 20 हजार) शुरू किए गए।
किशोरी शक्ति योजना 11-18 वर्ष की बालिकाओं के पोषण और कौशल विकास हेतु।
मुख्यमंत्री का सात सूत्रीय कार्यक्रम घोषणा 2009-10 बजट में। सूत्र: सुरक्षित मातृत्व, शिशु मृत्यु दर में कमी, जनसंख्या स्थिरीकरण, बाल विवाह रोक, स्कूल में ठहराव (कक्षा 10), सुरक्षा और स्वरोजगार।
सामूहिक विवाह अनुदान प्रति जोड़ा 6000 रु. अनुदान। (विभाजन: 75% वधू को, 25% आयोजक संस्था को)।

राजनैतिक सशक्तिकरण

73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण (33% से बढ़ाकर 50% प्रस्तावित) दिया गया है।

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