RAS (आरपीएससी) 5 min read

Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: 4 बार की तारीखें, अनुच्छेद 356 और राजस्थान के राज्यपाल

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: 4 बार की तारीखें, अनुच्छेद 356 और राजस्थान के राज्यपाल - GOVERNOR
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) अब तक 4 बार लगा है: 1967, 1977, 1980 और 1992 में (राजस्था...
Quick Answer: Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) अब तक 4 बार लगा है: 1967, 1977, 1980 और 1992 में (राजस्थान विधानसभा की official website भी यही चार साल बताती है)। यह संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लगता है। सबसे छोटा पहला राष्ट्रपति शासन था (13 मार्च से 26 अप्रैल 1967, 44 दिन) और सबसे लंबा चौथा (15 दिसंबर 1992 से दिसंबर 1993, करीब 354 दिन)। भैरोंसिंह शेखावत की सरकार दो बार (1980, 1992) बर्खास्त हुई। नवंबर 2026 तक राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे हैं (31 जुलाई 2024 से)।

राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: संवैधानिक आधार और अनुच्छेद 356

संविधान के भाग 18 में आपात उपबंध (emergency provisions) हैं। जब राज्य सरकार संविधान के हिसाब से नहीं चल पाती, तब केंद्र राज्य का शासन अपने हाथ में ले लेता है। इसे 'राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता' कहा जाता है। राज्यपाल के पद, नियुक्ति और शक्तियों का पूरा हिस्सा Governor वाले note में है, यहाँ केवल राष्ट्रपति शासन और राजस्थान के राज्यपालों से जुड़े तथ्य हैं। मुख्यमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के लिए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद (राजस्थान) पढ़ें।

  • अनुच्छेद 356(1): राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट से या किसी और तरह यह लगे कि राज्य सरकार संविधान के हिसाब से नहीं चल सकती, तो वह राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
  • अनुच्छेद 365: कोई राज्य केंद्र के वैध निर्देश न माने, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि वहाँ संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है।
  • अनुच्छेद 355: केंद्र का कर्तव्य है कि वह राज्यों की बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे और देखे कि राज्य का शासन संविधान के हिसाब से चले।
Advertisement

संसदीय मंजूरी, समय सीमा और 44वां संशोधन

1. दो महीने में मंजूरी

घोषणा के 2 महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों से साधारण बहुमत से मंजूरी जरूरी है (अनुच्छेद 356(3))। अगर उस समय लोकसभा भंग हो, तो राज्यसभा की मंजूरी के बाद नई लोकसभा की पहली बैठक से 30 दिन के अंदर लोकसभा की मंजूरी लेनी होती है।

2. अवधि

मंजूरी के बाद राष्ट्रपति शासन 6 महीने चलता है। हर 6 महीने पर फिर मंजूरी लेकर इसे ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

3. 44वां संविधान संशोधन 1978

44वें संशोधन ने अनुच्छेद 356(5) को नए रूप में लिखा। अब 1 साल से आगे बढ़ाने के लिए दोनों शर्तें जरूरी हैं: (1) पूरे देश में या पूरे राज्य/उसके किसी हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लागू हो, और (2) चुनाव आयोग प्रमाणित करे कि उस राज्य में अभी चुनाव कराना संभव नहीं है।

4. सरकारिया आयोग और बोम्मई वाद

केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारिया आयोग (1983 में बना, 1988 में रिपोर्ट) ने कहा कि अनुच्छेद 356 बहुत कम और आखिरी उपाय के रूप में ही इस्तेमाल हो। RAS Pre 2013 में इसी सिफारिश पर अभिकथन-कारण वाला सवाल आया था। बाद में एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में 9 जजों की पीठ ने इस पर रोक के नियम बनाए:

  • राष्ट्रपति शासन की घोषणा न्यायिक समीक्षा (judicial review) के दायरे में है।
  • सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसका फैसला विधानसभा के पटल पर (floor test) होगा।
  • संसद की मंजूरी से पहले विधानसभा भंग नहीं होगी, केवल निलंबित रहेगी।
  • घोषणा गलत पाई जाए तो अदालत बर्खास्त सरकार और विधानसभा को बहाल कर सकती है।
  • पंथनिरपेक्षता (secularism) संविधान का बुनियादी हिस्सा (basic structure) है; इसके खिलाफ काम करने वाली सरकार पर अनुच्छेद 356 लग सकता है।

राष्ट्रपति शासन लगने पर क्या बदलता है

  • मंत्रिपरिषद हटती है: मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद बर्खास्त होते हैं। राष्ट्रपति के नाम पर राज्यपाल, सलाहकारों और मुख्य सचिव की मदद से शासन चलाते हैं।
  • विधानसभा: निलंबित (suspended) रखी जा सकती है या भंग (dissolved) की जा सकती है।
  • कानून और बजट: राज्य विधानमंडल की शक्तियां संसद के पास चली जाती हैं (अनुच्छेद 356(1)(b))। अनुच्छेद 357 के तहत संसद यह शक्ति राष्ट्रपति को सौंप सकती है।
  • हाई कोर्ट पर असर नहीं: अनुच्छेद 356(1) का परंतुक कहता है कि राष्ट्रपति हाई कोर्ट की शक्तियां अपने हाथ में नहीं ले सकता।

राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: चारों बार की तारीखें और कारण

RAS Pre 2016 में पूछा गया था कि 30 जून 2016 तक राजस्थान में कितनी बार राष्ट्रपति शासन लगा (उत्तर: 4 बार)। RAS Pre 2024 में पूछा गया कि किस मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा बार इसका सामना किया (उत्तर: भैरोंसिंह शेखावत)। नवंबर 2026 तक भी यह संख्या 4 ही है।

तारीखों पर ध्यान दें: 1967 की तारीखें सब जगह एक जैसी हैं। बाकी तीन में किताबों और स्रोतों में 1 दिन का अंतर मिलता है (जैसे 1977 के लिए 29 या 30 अप्रैल)। इसलिए नीचे दोनों तारीखें दी गई हैं। Exam में साल, क्रम, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ज्यादा पूछे जाते हैं।

1. पहला राष्ट्रपति शासन (1967): 44 दिन, सबसे छोटा

13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967 तक। चौथे आम चुनाव (1967) में 184 सीटों में कांग्रेस को 89 सीटें मिलीं, यानी बहुमत (93) से 4 कम। स्वतंत्र पार्टी (48), जनसंघ (22) और दूसरे विपक्षी दलों व निर्दलीयों ने मिलकर बहुमत का दावा किया। राज्यपाल डॉ. संपूर्णानंद ने सबसे बड़े दल के नेता मोहनलाल सुखाड़िया को बुलाया, जिस पर जयपुर में तीखा विरोध हुआ और 7 मार्च को पुलिस फायरिंग हुई। इसके बाद 13 मार्च 1967 को राष्ट्रपति शासन लगा और विधानसभा भंग नहीं की गई, केवल निलंबित रखी गई। 16 अप्रैल 1967 को सरदार हुकम सिंह नए राज्यपाल बने और 26 अप्रैल 1967 को सुखाड़िया फिर मुख्यमंत्री बने।

2. दूसरा राष्ट्रपति शासन (1977)

29/30 अप्रैल 1977 से 22 जून 1977 तक (करीब 53-54 दिन)। 1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी और कांग्रेस शासित राज्यों की विधानसभाएं भंग की गईं। हरिदेव जोशी की सरकार के पास विधानसभा में बहुमत था, फिर भी उसे हटाया गया। उस समय कार्यवाहक (acting) राज्यपाल वेदपाल त्यागी थे (15 फरवरी से 11 मई 1977)। पांचवीं विधानसभा भंग हुई। चुनाव के बाद 22 जून 1977 को भैरोंसिंह शेखावत राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। तब तक रघुकुल तिलक राज्यपाल बन चुके थे (मई 1977)।

3. तीसरा राष्ट्रपति शासन (1980)

16/17 फरवरी 1980 से 5/6 जून 1980 तक (करीब 110 दिन)। 1980 में केंद्र में कांग्रेस लौटी और शेखावत सरकार को बहुमत होते हुए भी बर्खास्त किया गया। छठी विधानसभा भंग हुई। राज्यपाल रघुकुल तिलक थे; शासन उन्हीं के समय लगा और उन्हीं के समय हटा। 6 जून 1980 को जगन्नाथ पहाड़िया मुख्यमंत्री बने, जो राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री थे।

4. चौथा राष्ट्रपति शासन (1992-93): सबसे लंबा

15 दिसंबर 1992 से 3/4 दिसंबर 1993 तक (करीब 354 दिन)। 6 दिसंबर 1992 की अयोध्या घटना के बाद उत्तर प्रदेश में उसी दिन, और 15 दिसंबर को भाजपा शासित तीन और राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश) में राष्ट्रपति शासन लगा। बोम्मई वाद (1994) में इन तीन राज्यों की बर्खास्तगी पंथनिरपेक्षता के आधार पर सही मानी गई। राजस्थान में शेखावत सरकार बर्खास्त हुई और नौवीं विधानसभा भंग हुई। शुरू में राज्यपाल डॉ. एम. चेन्ना रेड्डी थे (31 मई 1993 तक)। फिर करीब एक महीना धनिक लाल मंडल के पास additional charge रहा, और 30 जून 1993 से बलिराम भगत राज्यपाल बने। नवंबर 1993 के चुनाव के बाद 4 दिसंबर 1993 को शेखावत फिर मुख्यमंत्री बने।

Table 1: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन एक नजर में

क्रमअवधि (दिन लगभग)राज्यपाल (लगते समय / हटते समय)हटाई गई सरकारविधानसभाबाद में मुख्यमंत्री
पहला13 मार्च – 26 अप्रैल 1967 (44)डॉ. संपूर्णानंद / सरदार हुकम सिंहचुनाव के बाद नई सरकार नहीं बन पाई थीचौथी, निलंबितमोहनलाल सुखाड़िया
दूसरा29/30 अप्रैल – 22 जून 1977 (53-54)वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक) / रघुकुल तिलकहरिदेव जोशीपांचवीं, भंगभैरोंसिंह शेखावत
तीसरा16/17 फरवरी – 5/6 जून 1980 (~110)रघुकुल तिलक (दोनों समय)भैरोंसिंह शेखावतछठी, भंगजगन्नाथ पहाड़िया
चौथा15 दिसंबर 1992 – 3/4 दिसंबर 1993 (~354)एम. चेन्ना रेड्डी / बलिराम भगतभैरोंसिंह शेखावतनौवीं, भंगभैरोंसिंह शेखावत

Table 2: तीन तरह के आपातकाल की तुलना

बिंदुराष्ट्रीय आपातकाल (352)राष्ट्रपति शासन (356)वित्तीय आपातकाल (360)
आधारयुद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोहराज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलतादेश की वित्तीय साख को खतरा
मंजूरी का समय1 महीना2 महीने2 महीने
बहुमतविशेष बहुमतसाधारण बहुमतसाधारण बहुमत
अधिकतम अवधिहर 6 महीने पर मंजूरी से बिना सीमा3 सालएक बार मंजूरी के बाद बिना सीमा
राजस्थान पर1962, 1971, 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल पूरे देश के साथ4 बारभारत में कभी नहीं लगा

राजस्थान के राज्यपाल: राजप्रमुख से अब तक

1949 से 1956 तक राजस्थान में राज्य का प्रमुख राजप्रमुख होता था (सवाई मानसिंह द्वितीय, 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956)। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर 7वें संविधान संशोधन (1956) ने राजप्रमुख का पद खत्म किया और 1 नवंबर 1956 से राज्यपाल का पद आया। RAS Pre 2024 में इसी पर कथन वाला सवाल आया था। उसकी RPSC key में गुरुमुख निहाल सिंह की "1 नवंबर 1956 को नियुक्ति" वाले कथन को गलत माना गया, क्योंकि 1 नवंबर उनके पद संभालने की तारीख है, नियुक्ति उससे पहले हुई थी।

Table 3: राज्यपालों से जुड़े खास नाम

राज्यपालकार्यकालक्यों याद रखें
गुरुमुख निहाल सिंह1 नवंबर 1956 – 16 अप्रैल 1962पहले राज्यपाल
डॉ. संपूर्णानंद1962 – 16 अप्रैल 1967पहले राष्ट्रपति शासन (1967) की सिफारिश
सरदार हुकम सिंह16 अप्रैल 1967 – 30 जून 1972 (1970 में कुछ दिन जगत नारायण कार्यवाहक रहे)1967 का राष्ट्रपति शासन इनके समय हटा
वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक)15 फरवरी – 11 मई 19771977 का राष्ट्रपति शासन लगा
रघुकुल तिलकमई 1977 – 8 अगस्त 19811980 का शासन लगा भी, हटा भी
एम. चेन्ना रेड्डी5 फरवरी 1992 – 31 मई 19931992 का शासन लगा
बलिराम भगत30 जून 1993 – 1 मई 19981993 में शासन हटा
प्रतिभा पाटिल8 नवंबर 2004 – जून 2007पहली महिला राज्यपाल, बाद में राष्ट्रपति
मार्गरेट अल्वा12 मई 2012 – 7 अगस्त 2014इनके बाद कार्यवाहक राम नायक
राम नायक (additional charge)8 अगस्त – 3 सितंबर 2014UP के राज्यपाल; कल्याण सिंह से ठीक पहले (RAS Pre 2016)
कल्याण सिंह4 सितंबर 2014 – 9 सितंबर 2019-
कलराज मिश्र9 सितंबर 2019 – 31 जुलाई 2024-
हरिभाऊ किसनराव बागडे31 जुलाई 2024 से (नवंबर 2026 तक पद पर)मौजूदा राज्यपाल

जब किसी राज्यपाल का कार्यकाल बीच में खत्म हो जाए (निधन, इस्तीफा, तबादला), तब राष्ट्रपति किसी पड़ोसी राज्य के राज्यपाल को additional charge देते हैं या हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कार्यवाहक राज्यपाल बनते हैं। राजस्थान में दोनों तरह के उदाहरण हैं (वेदपाल त्यागी 1977, राम नायक 2014)।

Advertisement

राज्यपाल: विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति

  • राजस्थान के राज्यपाल राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं। यह पद राज्य के विश्वविद्यालय कानूनों से मिलता है, संविधान से नहीं।
  • केंद्रीय विश्वविद्यालयों के Visitor राष्ट्रपति होते हैं, और निजी विश्वविद्यालयों के अपने कुलाधिपति होते हैं। RAS Pre 2016 में यही पूछा गया था (सही उत्तर: केवल राज्य के सभी राज्य विश्वविद्यालय)।
  • 20 मार्च 2025 को विधानसभा ने राजस्थान विश्वविद्यालयों की विधियां (संशोधन) विधेयक 2025 पास किया। इससे हिंदी में कुलपति को "कुलगुरु" और प्रतिकुलपति को "प्रतिकुलगुरु" कहा जाने लगा। राज्यपाल का कुलाधिपति पद नहीं बदला।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • अनुच्छेद 356: राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन।
  • संसद से 2 महीने में साधारण बहुमत से मंजूरी; एक बार में 6 महीने; अधिकतम 3 साल।
  • 1 साल से आगे: राष्ट्रीय आपातकाल + चुनाव आयोग का प्रमाण पत्र (44वां संशोधन 1978)।
  • राजस्थान में 4 बार: 1967, 1977, 1980, 1992।
  • सबसे छोटा 1967 (44 दिन), सबसे लंबा 1992-93 (करीब 354 दिन)।
  • केवल 1967 में विधानसभा निलंबित रही, बाकी तीन बार भंग हुई।
  • शेखावत सरकार दो बार बर्खास्त (1980, 1992); जोशी सरकार एक बार (1977)।
  • 1977 में कार्यवाहक राज्यपाल वेदपाल त्यागी; 1980 में पूरे समय रघुकुल तिलक।
  • पहले राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह (1 नवंबर 1956); राजप्रमुख पद 7वें संशोधन से खत्म।
  • मौजूदा राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे (31 जुलाई 2024 से, नवंबर 2026 तक)।
  • राज्यपाल केवल राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शासन किस वर्ष लगा?
    A) 1962
    B) 1967
    C) 1971
    D) 1977
    उत्तर: B) 1967
    कारण: 1967 के चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला और 13 मार्च 1967 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा।
  2. राजस्थान में किस राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा भंग नहीं, केवल निलंबित रखी गई?
    A) 1967
    B) 1977
    C) 1980
    D) 1992
    उत्तर: A) 1967
    कारण: 1967 में चौथी विधानसभा निलंबित रही और बाद में सुखाड़िया ने सरकार बनाई; बाकी तीनों बार विधानसभा भंग हुई।
  3. 1977 में राजस्थान में दूसरा राष्ट्रपति शासन लगते समय कार्यवाहक राज्यपाल कौन थे?
    A) डॉ. संपूर्णानंद
    B) सरदार हुकम सिंह
    C) वेदपाल त्यागी
    D) रघुकुल तिलक
    उत्तर: C) वेदपाल त्यागी
    कारण: जोगेंद्र सिंह के बाद 15 फरवरी से 11 मई 1977 तक वेदपाल त्यागी कार्यवाहक राज्यपाल थे।
  4. राजस्थान के किस मुख्यमंत्री की सरकार राष्ट्रपति शासन लगाकर सबसे ज्यादा बार हटाई गई?
    A) मोहनलाल सुखाड़िया
    B) हरिदेव जोशी
    C) भैरोंसिंह शेखावत
    D) शिवचरण माथुर
    उत्तर: C) भैरोंसिंह शेखावत
    कारण: शेखावत सरकार 1980 और 1992 में दो बार बर्खास्त हुई; जोशी सरकार केवल 1977 में।
  5. अनुच्छेद 356 की घोषणा को संसद से कितने समय में मंजूरी लेनी होती है?
    A) 1 महीना
    B) 2 महीने
    C) 3 महीने
    D) 6 महीने
    उत्तर: B) 2 महीने
    कारण: अनुच्छेद 356(3) के अनुसार घोषणा 2 महीने में दोनों सदनों से पास न हो तो खत्म हो जाती है।
  6. 1 साल से ज्यादा राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर शर्तें किस संशोधन ने लगाईं?
    A) 42वां संशोधन 1976
    B) 44वां संशोधन 1978
    C) 52वां संशोधन 1985
    D) 91वां संशोधन 2003
    उत्तर: B) 44वां संशोधन 1978
    कारण: 44वें संशोधन ने अनुच्छेद 356(5) को नए रूप में लिखकर राष्ट्रीय आपातकाल और चुनाव आयोग के प्रमाण पत्र की शर्त रखी।
  7. कल्याण सिंह के राजस्थान का राज्यपाल बनने से ठीक पहले कार्यवाहक राज्यपाल कौन थे?
    A) ओ. पी. कोहली
    B) राम नरेश यादव
    C) राम नायक
    D) मार्गरेट अल्वा
    उत्तर: C) राम नायक
    कारण: मार्गरेट अल्वा का कार्यकाल अगस्त 2014 में खत्म हुआ; फिर UP के राज्यपाल राम नायक के पास additional charge रहा और 4 सितंबर 2014 को कल्याण सिंह आए।
  8. राजस्थान के राज्यपाल किनके कुलाधिपति होते हैं?
    A) केवल राज्य के राज्य विश्वविद्यालय
    B) राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालय
    C) राज्य और निजी विश्वविद्यालय
    D) राज्य, केंद्रीय और निजी सभी विश्वविद्यालय
    उत्तर: A) केवल राज्य के राज्य विश्वविद्यालय
    कारण: केंद्रीय विश्वविद्यालयों के Visitor राष्ट्रपति होते हैं और निजी विश्वविद्यालयों के अपने कुलाधिपति।
  9. राजस्थान में राजप्रमुख का पद किस संविधान संशोधन से खत्म हुआ?
    A) पहला संशोधन 1951
    B) 7वां संशोधन 1956
    C) 24वां संशोधन 1971
    D) 42वां संशोधन 1976
    उत्तर: B) 7वां संशोधन 1956
    कारण: राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर 7वें संशोधन ने राजप्रमुख पद खत्म किया और 1 नवंबर 1956 से राज्यपाल आए।
  10. अनुच्छेद 356 लागू होने पर किसकी शक्तियों पर असर नहीं पड़ता?
    A) राज्य मंत्रिपरिषद
    B) राज्य विधानसभा
    C) राज्य का हाई कोर्ट
    D) राज्य का बजट बनाने की शक्ति
    उत्तर: C) राज्य का हाई कोर्ट
    कारण: अनुच्छेद 356(1) का परंतुक राष्ट्रपति को हाई कोर्ट की शक्तियां लेने से रोकता है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं।

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: 1967 में राजस्थान में पहला राष्ट्रपति शासन क्यों लगा?
    उत्तर रूपरेखा: 184 सीटों में कांग्रेस को 89 सीटें मिलीं, बहुमत से 4 कम। संयुक्त विपक्ष ने दावा किया, सुखाड़िया को बुलाने पर विरोध और हिंसा हुई। 13 मार्च 1967 को राष्ट्रपति शासन लगा और विधानसभा निलंबित रही।
  2. प्रश्न: 44वें संशोधन ने राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर क्या रोक लगाई?
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 356(5): 1 साल से आगे तभी, जब राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो और चुनाव आयोग कहे कि चुनाव संभव नहीं है।
  3. प्रश्न: राजस्थान के राज्यपाल किन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं?
    उत्तर रूपरेखा: केवल राज्य विश्वविद्यालयों के, राज्य कानूनों के तहत। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के Visitor राष्ट्रपति। 2025 के संशोधन से हिंदी में कुलपति अब कुलगुरु कहलाते हैं।
  4. प्रश्न: 1992 के चौथे राष्ट्रपति शासन की दो खास बातें बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: (1) सबसे लंबा, करीब 354 दिन। (2) अयोध्या घटना के बाद शेखावत सरकार बहुमत होते हुए भी बर्खास्त; बोम्मई वाद (1994) में इसी तरह की बर्खास्तगियों पर फैसला आया।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान में अब तक लगे चारों राष्ट्रपति शासनों के कारणों और नतीजों की चर्चा कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - 1967: त्रिशंकु विधानसभा, विधानसभा निलंबित, 44 दिन बाद सुखाड़िया लौटे।
    - 1977: केंद्र में जनता पार्टी, जोशी सरकार हटी, शेखावत पहले गैर-कांग्रेसी CM।
    - 1980: केंद्र में कांग्रेस की वापसी, शेखावत सरकार हटी, पहाड़िया पहले दलित CM।
    - 1992-93: अयोध्या घटना, सबसे लंबा शासन, 1993 चुनाव के बाद शेखावत लौटे।
    - आकलन: तीन बार केंद्र की राजनीति से जुड़ा कदम; सरकारिया आयोग और बोम्मई वाद ने ऐसे इस्तेमाल पर रोक लगाई।
  2. प्रश्न: एस. आर. बोम्मई वाद (1994) ने अनुच्छेद 356 के इस्तेमाल को पर कैसे रोक लगाई? (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - 9 जजों की पीठ; न्यायिक समीक्षा मान्य।
    - बहुमत का फैसला सदन के पटल पर।
    - संसद की मंजूरी से पहले विधानसभा भंग नहीं, केवल निलंबित।
    - गलत घोषणा पर सरकार बहाल हो सकती है; पंथनिरपेक्षता basic structure का हिस्सा।

FAQs

राजस्थान में अब तक कितनी बार राष्ट्रपति शासन लगा है?

चार बार: 1967, 1977, 1980 और 1992 में। नवंबर 2026 तक इसके बाद कोई राष्ट्रपति शासन नहीं लगा।

दूसरे, तीसरे और चौथे राष्ट्रपति शासन की तारीखें अलग-अलग किताबों में अलग क्यों हैं?

कुछ स्रोत घोषणा की तारीख लेते हैं और कुछ लागू होने की, इसलिए 1 दिन का अंतर आता है (जैसे 29 या 30 अप्रैल 1977)। साल, क्रम, सबसे छोटा-सबसे लंबा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सब स्रोतों में एक जैसे हैं।

क्या राष्ट्रपति शासन में विधानसभा हमेशा भंग होती है?

नहीं। विधानसभा निलंबित भी रखी जा सकती है। राजस्थान में 1967 में ऐसा हुआ और बाद में उसी विधानसभा से सरकार बनी।

कार्यवाहक राज्यपाल कौन बनता है?

राज्यपाल का पद खाली होने पर राष्ट्रपति किसी दूसरे राज्य के राज्यपाल को additional charge देते हैं या हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक बनाते हैं, जैसे 2014 में राम नायक और 1977 में वेदपाल त्यागी।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • राजस्थान में राष्ट्रपति शासन 4 बार: 1967, 1977, 1980, 1992।
  • सबसे छोटा 1967 (44 दिन), सबसे लंबा 1992-93 (करीब 354 दिन)।
  • केवल 1967 में विधानसभा निलंबित रही, बाकी तीन बार भंग हुई।
  • भैरोंसिंह शेखावत की सरकार दो बार बर्खास्त हुई (1980, 1992)।
  • 1977 में कार्यवाहक राज्यपाल वेदपाल त्यागी; 2014 में कल्याण सिंह से पहले राम नायक।
  • पहले राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह; मौजूदा राज्यपाल हरिभाऊ बागडे (31 जुलाई 2024 से)।
  • राज्यपाल केवल राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं।
  • अनुच्छेद 356 की मंजूरी 2 महीने में साधारण बहुमत से; अधिकतम 3 साल।

RAS Pre का revision मोबाइल पर

NotesMedia app में यही RAS notes और 362 RAS flashcards हैं, जिनसे जल्दी revision कर सकते हैं।

Google Play से app लें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) अब तक 4 बार लगा है: 1967, 1977, 1980 और 1992 में (राजस्थान विधानसभा की official website भी यही चार साल बताती है)।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: 4 बार की तारीखें, अनुच्छेद 356 और राजस्थान के राज्यपाल एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: 4 बार की तारीखें, अनुच्छेद 356 और राजस्थान के राज्यपाल के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
Advertisement

In this Chapter

Rajasthan me Rashtrapati Shasan: राजस्थान में राष्ट्रपति शासन: 4 बार की तारीखें, अनुच्छेद 356 और राजस्थान के राज्यपाल