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राजस्थान की अर्थव्यवस्था

परिचय

राजस्थान की अर्थव्यवस्था मूल रूप से कृषि प्रधान है, जहाँ एक बड़ी जनसंख्या कृषि और संबद्ध कार्यों पर निर्भर है। हालाँकि, संरचनात्मक रूप से यह सेवा क्षेत्र (Service Sector) की ओर अग्रसर है।

अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

  • क्षेत्रीय योगदान में बदलाव: अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान से सेवा प्रधान की ओर बढ़ रही है।
  • संसाधन संपन्न: राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य (10.41%) है। इसे "खनिजों का अजायबघर" कहा जाता है। अधात्विक खनिजों के उत्पादन मूल्य में राज्य का देश में प्रथम स्थान है।
  • बीमारू (BIMARU) स्थिति: 1 अप्रैल 1951 से शुरू हुए योजनाबद्ध विकास के कारण राज्य अब "बीमारू" श्रेणी से बाहर निकलकर विकासशील राज्य बन गया है।

जनसांख्यिकी (जनगणना 2011 - अंतिम आंकड़े)

नोट: अनंतिम आंकड़ों को अंतिम आंकड़ों से अपडेट किया गया है।

सूचकआंकड़े (2011)मुख्य तथ्य
जनसंख्या6.85 करोड़भारत की कुल जनसंख्या का 5.66%। (दशकीय वृद्धि: 21.3%)
जनसंख्या घनत्व200 व्यक्ति/वर्ग किमीसर्वाधिक: जयपुर (595)। न्यूनतम: जैसलमेर (17)।
लिंगानुपात928सर्वाधिक: डूंगरपुर (994)। न्यूनतम: धौलपुर (846)।
साक्षरता66.11%पुरुष: 79.19%, महिला: 52.12%। सर्वाधिक: कोटा (76.6%)। न्यूनतम: जालौर (54.9%)।
शहरीकरण24.9%शहरी जनसंख्या: 1.70 करोड़। ग्रामीण: 5.15 करोड़।

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य (नवीनतम रुझान)

1. GSDP क्षेत्रीय योगदान (अनुमानित)

  • सेवा क्षेत्र: सर्वाधिक योगदान (~43-44%)।
  • कृषि क्षेत्र: दूसरा स्थान (~28-29%)। अच्छे मानसून के वर्षों में इसका महत्व बढ़ जाता है।
  • उद्योग क्षेत्र: ~27-28%।

2. प्रति व्यक्ति आय

इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है और हालिया अनुमानों में यह (प्रचलित मूल्यों पर) ₹1.5 लाख को पार कर गई है।

3. प्रमुख आर्थिक संकेतक

  • WPI आधार वर्ष: 1999-2000 = 100।
  • CPI आधार वर्ष: 2016 = 100 (औद्योगिक श्रमिकों के लिए)।

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