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Distributed Data Design in Hindi

What is Distributed Data Design in RDBMS in Hindi | RDBMS में डिस्ट्रीब्यूट डाटा डिजाईन क्या है :


Distributed Data Design (वितरित डेटा डिज़ाइन) एक डेटाबेस डिज़ाइन अवधारणा है जिसमें डेटा को विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर स्थित विभिन्न डेटाबेस सिस्टम्स में वितरित किया जाता है। 
इसका उद्देश्य डेटा को भौगोलिक रूप से वितरित करना, प्रदर्शन को बढ़ाना, और विश्वसनीयता और डेटा उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। 

Objective of Distributed Data Design in RDBMS in Hindi  | RDBMS में Distributed Data Design के  उद्देश्य :

1. Scalability (विस्तारशीलता) :
    वितरित डेटा डिज़ाइन बड़े डेटाबेस सिस्टम्स को स्केल (विस्तार) करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे डेटाबेस को कई सर्वरों या साइट्स पर वितरित किया जा सकता है।

2. Availability (उपलब्धता) :
   वितरित सिस्टम्स डेटा की उच्च उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। अगर एक साइट पर समस्या होती है, तो अन्य साइट्स पर डेटा उपलब्ध रहता है।

3. Reliability (विश्वसनीयता) : 
    डेटा को विभिन्न स्थानों पर स्टोर करने से सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ जाती है, क्योंकि एक साइट की विफलता अन्य साइट्स पर डेटा की उपलब्धता को प्रभावित नहीं करती।

4. Performance (प्रदर्शन) :
    वितरित डेटा डिज़ाइन डेटा को उपयोगकर्ताओं के भौगोलिक स्थान के निकट स्टोर करता है, जिससे डेटा एक्सेस की गति बढ़ जाती है और नेटवर्क ट्रैफिक कम होता है।

 Component of  Distributed Data Design in RDBMS in Hindi | RDBMS में Distributed Data Design के  घटक :

1. Data Distribution (डेटा वितरण) :
   Fragmentation (टुकड़ों में विभाजन) : डेटा को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित किया जाता है जिन्हें डेटाबेस के विभिन्न हिस्सों में स्टोर किया जाता है। फ्रैगमेंटेशन दो प्रकार का हो सकता है:
     Horizontal Fragmentation : टेबल की पंक्तियों को विभाजित किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक टेबल की पंक्तियाँ अलग-अलग साइट्स पर स्टोर की जाती हैं।
     Vertical Fragmentation : टेबल की कॉलम्स को विभाजित किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक टेबल की कॉलम्स को अलग-अलग साइट्स पर स्टोर किया जाता है।
   
   Replication (प्रतिकृति) : डेटा को एकाधिक साइट्स पर डुप्लिकेट किया जाता है ताकि डेटा की उपलब्धता बढ़े और विफलता के मामले में डेटा उपलब्ध रहे। 

2. Data Access (डेटा एक्सेस) :
   Distributed Query Processing (वितरित क्वेरी प्रोसेसिंग) : क्वेरी को विभिन्न साइट्स पर निष्पादित किया जाता है और परिणाम को संकलित किया जाता है। यह उपयोगकर्ताओं के लिए डेटा तक पहुंच को आसान बनाता है।

   Transaction Management (लेन-देन प्रबंधन) : वितरित लेन-देन को प्रबंधित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि डेटा विभिन्न स्थानों पर हो सकता है। इसके लिए Two-Phase Commit Protocol (2PC) जैसे प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है।

3. Consistency and Integrity (संगतता और अखंडता) :
    Consistency (संगतता) :  डेटा की संगतता बनाए रखने के लिए प्रोटोकॉल और तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी साइट्स पर डेटा समान हो।
   
   Integrity Constraints (अखंडता बाधाएँ) : वितरित सिस्टम्स में डेटा की अखंडता बनाए रखने के लिए बाधाएँ और नियम लागू किए जाते हैं।

(Example) उदाहरण :

मान लीजिए कि एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के पास कई शाखाएँ हैं, जैसे न्यूयॉर्क, लंदन, और टोक्यो। प्रत्येक शाखा अपने स्थानीय डेटा को स्थानीय सर्वर पर स्टोर करती है, लेकिन कंपनी की आवश्यकता के अनुसार डेटा को एक केंद्रीय डेटाबेस सर्वर पर भी स्टोर करना पड़ सकता है। 

Horizontal Fragmentation : न्यूयॉर्क शाखा केवल ग्राहकों के अमेरिकी डेटा को स्टोर करती है, जबकि लंदन शाखा यूरोपीय ग्राहकों के डेटा को स्टोर करती है।
  
Vertical Fragmentation : एक टेबल जिसमें ग्राहक की पूरी जानकारी है, को विभाजित किया जा सकता है; न्यूयॉर्क शाखा नाम और संपर्क जानकारी को स्टोर करती है, जबकि लंदन शाखा केवल खरीदी की जानकारी को स्टोर करती है।

Replication : ग्राहक डेटा को सभी शाखाओं पर डुप्लिकेट किया जाता है ताकि प्रत्येक शाखा के पास स्थानीय डेटा की एक प्रतिलिपि हो, जिससे डेटा की उपलब्धता और रिकवरी की प्रक्रिया में सुधार होता है।

Distributed Query Processing : एक ग्राहक रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए, एक क्वेरी न्यूयॉर्क, लंदन, और टोक्यो शाखाओं पर भेजी जाती है, और प्रत्येक शाखा अपने हिस्से का डेटा लौटाती है, जिसे अंततः संयोजित किया जाता है।

Distributed Data Design का उद्देश्य डेटा की उपलब्धता, प्रदर्शन, और विश्वसनीयता को बढ़ाना है, विशेष रूप से उन परिदृश्यों में जहाँ डेटा को कई भौगोलिक स्थानों पर वितरित किया जाता है। यह बड़े, जटिल सिस्टम्स में डेटा को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण होता है और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेष तकनीकें और प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।

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